- प्रिंस जायसवाल की शिकायत जांच योग्य नही:जांचकर्ता पुलिस अधिकारी
- आरटीआई से मिली जानकारी में जांच पत्र आया सामने
- प्रदेश में एकमात्र काबिल डीपीएम…खबर लगने पर फड़फड़ाने क्यों लगे प्रभारी डीपीएम प्रिंस साहब?
- क्या बार-बार एक डीपीएम को मंच पर पुरस्कृत करने से धूमिल नहीं होती हुई किसी संस्था की छवि?
- खुद पर लगा है एक साल में 3 डिग्री लेने का आरोप,उसे दबाने अब नया हथकंडा अपना रहा प्रिंस?
- कोरिया से लेकर सूरजपुर और संभाग भर में होती है क्यों प्रिंस की चर्चा?
- कोई भी स्वास्थ्य अधिकारी अब प्रिंस को अपने जिले में नहीं रखना चाहता…सूत्रों का दावा
- पैसा दो ईनाम पाओ…यह है प्रिंस की असली कहानी



-जिला प्रतिनिधि-
सूरजपुर/कोरिया,03 जनवरी 2025 (घटती-घटना)। क्या विष्णु के सुशासन में एक भद्दे दाग की तरह है ये प्रभारी डीपीएम? यह सवाल अब काफी गंभीर सवाल हो चुका है वह भी वर्तमान सरकार के लिए क्योंकि जिस तरीके से एक प्रभारी डीपीएम के लिए सारे नियम शिथिल हो गए हैं, इसे लेकर यह सवाल तो अब खड़ा होने लगा है, आखिर क्या वजह है कि इस दागी के ऊपर कार्यवाही को लेकर स्थितियां असामान्य देखी जा रही है, जबकि स्थितियां सामान्य है नहीं। सिर्फ एक बार विधिवत जांच की जरूरत है जो जांच विष्णु का सुशासन ही कर सकता है, क्योंकि इन्हीं से अब उम्मीद भी है अब देखना यह है की उम्मीद कब पूरी होती है?
आपको बता दें कि कोरिया जिले के तत्कालीन प्रभारी डीपीएम प्रिंस जायसवाल की फर्जी डिग्री मामले में उसी की शिकायत पर जांच हो चुकी है, जिसमे साबरमती यूनिवर्सिटी अहमदाबाद से आए पत्र में साफ डिग्री को फ्रॉड बताया है और उंसमे यह भी लिखा है कि ऐसा कोई कोर्स उनके यहां नही होता और न ही प्रिंस जायसवाल उनका स्टूडेंट है। पुलिस ने प्रिंस जायसवाल की शिकायत जिसमे उसने अज्ञात लोगों,पत्रकार और संजय जायसवाल पर यह आरोप लगाते शिकायत की थी कि ये लोग उसकी छवि धूमिल कर रहे है, इसकी जांच रिपोर्ट आप पढि़ए,जिसमें उसकी शिकायत को जांच योग्य ही नही पाया गया है, जब इसके खिलाफ खबर लगती है तो ये पत्रकारों को धमकाने के लिए नोटिस भेजता है या शिकायत करता है।
डाक से क्यों…ईमेल से क्यों नही?
प्रिंस द्वारा पुलिस में प्रस्तुत पत्र मार्च 2024 का है जबकि साबरमती यूनिवर्सिटी अहमदाबाद के जुलाई 2024 का पत्र है,आप को बता दे कि कोरिया जिले में अक्टूबर 2022 से जुलाई 2024 तक फर्जी कोटेशन बनाकर खरीदी का मामला सामने आ रहा है, ऐसा ही कहीं साबरमती यूनिवर्सिटी अहमदाबाद का फर्जी लेटरपेड बनाने का मामला तो नही है? फर्जी लेटरपेड बनाकर डाक से भेजा गया? क्योंकि यदि ईमेल से भेजा जाता तो साबरमती यूनिवर्सिटी का ईमेल दिखता, इसलिए जानबूझकर डाक से भेज कर फर्जी पत्र भेजा गया हो? इसकी जांच बेहद जरूरी है कि साबरमती यूनिवर्सिटी अहमदाबाद का मार्च 2024 का पत्र किसने कूटरचित कर बनाया गया है ऐसा सूत्रों का दावा है।
सिर्फ फोटो खिंचवाने के अलावा इन्होंने किया क्या है?
प्रिंस जायसवाल की कुल काबिलियत और कुल उपलब्ध इतनी है कि वह फोटो खिंचाने में माहिर हैं, उन्हें जानने और देखने वाले भी बताते हैं कि हर जगह खुद को सामने रखकर केवल फोटोग्राफी के लिए ही वह खुद को कामकाजी जाहिर करते हैं। काम उनका उपलब्ध उनकी शून्य है। पैसा देकर प्रशस्ति पाना उनकी खूबी-खासियत है। वैसे जो व्यक्ति अपनी फर्जी डिग्री के पक्ष में एक भी सही दस्तावेज नहीं रख पा रहा है और केवल धमकी शिकायत करके ही खुद को सही साबित करना चाह रहा है और इस बीच वह काम से दूरी बनाकर केवल शिकायत के लिए ही समय निकाल पा रहा है वह कितना ईमानदार और योग्य समर्पित है यह भी विचारणीय है।
तथ्यों के साथ खबर प्रकाशित करने वाले अखबार का लाइसेंस रद्द करके क्या वह बच जाएंगे?
फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनकर शासकीय विभाग के बड़े पद पर बैठकर लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाला एक व्यक्ति जैसा कि पार्षद संजय जायसवाल के तथ्य सहित प्रस्तुत दस्तावेज बताते हैं अब समाचार-पत्र की मान्यता समाप्त करने के लिए शिकायत कर रहा है। यह बड़ी विडम्बना वाली स्थिति है क्योंकि हमेशा सत्य का ही प्रकाशन करने वाला दैनिक घटती-घटना समाचार-पत्र अब फर्जी डिग्री वाले की शिकायत पर यदि प्रभावित होता है या उसकी मान्यता रद्द होती है तो यह देश के इतिहास के लिए बेहद काला दिन होगा। वैसे यदि ऐसा होता भी है और एक फर्जी व्यक्ति यदि ऐसा करवा पाने में सफल हो जाता है तो क्या वह ऐसा करके बच जाएगा? क्योंकि सच और झूठ में जीत सच की ही होगी वह आज हो या कल यह अलग बात है और इसके लिए दैनिक घटती-घटना तैयार है।
यह लिखा है जांच पत्र में…
जांच पत्र में थाना प्रभारी ने लिखा है कि आवेदक प्रिंस जायसवाल जिला कार्यक्रम प्रबंधक राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन जिला अस्पताल सूरजपुर के द्वारा शिकायत पत्र प्रस्तूत किया है कि उसके डिप्लोमा दस्तावेज के फर्जी होने का दावा कर विभिन्न व्यक्तियों एवं पत्रकारों में प्रचार कर छवि धूमिल करने व परेशान करने के नियत से व्हॉटसअप में भेजा गया है। शिकायत पत्र में संलग्न दस्तावेज का अध्ययन किया गया जिससे ज्ञात हुआ कि पूर्व में आवेदक प्रिंस जायसवाल के खिलाफ संजय जायसवाल निवासी बैकुंठपुर द्वारा आवेदक के वर्तमान पद नियूक्ति में फर्जी दस्तावेज का प्रयोग करने संबंधी शिकायत किया है। जांच दौरान आवेदक प्रिंस जायसवाल का कथन दिया गया एवं प्रस्तूत दस्तावेज का अध्ययन किया गया जिसमें आवेदक प्रिंस जायसवाल के खिलाफ संजय जायसवाल निवासी बैकुंठपुर के द्वारा साबरमती विश्वविद्यालय अहमदाबाद गूजरात से झूठा प्रमाणपत्र बनवाकर वर्तमान पद में नौकरी कर रहा है। जांच दौरान साबरमती विश्वविधालय अहमदाबाद गुजरात से पत्राचार कर दस्तावेज प्राप्त किया गया है जिसमें आवेदक प्रिंस द्वारा प्रस्तूत दस्तावेज एवं प्राप्त दस्तावेज में विराधाभास होना पाया गया है जांच जारी है। आवेदक प्रिंस जायसवाल के खिलाफ शिकायत होने से आवेदक अपने बचाव में वरिष्ठ कार्यालय में शिकायत किया है। आवेदक का शिकायत पत्र जांच योग्य नहीं पाया गया। अतः श्रीमान जी के समक्ष शिकायत जांच प्रतिवेदन अवलोकनार्थ सादर प्रेषित है।
आखिर पुलिस ने क्यों नही की कार्यवाही?
मामले को विस्तार से समझिए,सामाजिक कार्यकर्ता संजय जायसवाल ने पहले एक शिकायत स्वास्थ्य विभाग को की थी कि प्रिंस जायसवाल की केलोरेक्स टीचर्स यूनिवर्सिटी की डिग्री फर्जी है, जिस पर डायरेक्टर एनएचएम ने पत्राचार किया और एक साबरमती यूनिवर्सिटी के लेटरपेड पर छोटा सा लोगो बना हुआ पत्र डाक के जरिए एनएचएम डायरेक्टर को मिला,जिसमे बताया गया कि प्रिंस जायसवाल की डिग्री ठीक है, यह पत्र मार्च 2024 को प्राप्त हुआ, जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता संजय जायसवाल ने पुलिस अधीक्षक सुरजपुर को शिकायत की, जहां से पुलिस अधीक्षक सुरजपुर ने साबरमती यूनिवर्सिटी अहमदाबाद से ईमेल के जरिये जवाब मांगा, संजय जायसवाल भी यूनिवर्सिटी से जुड़े रहे, इस बीच उन्हें जानकारी मिली कि साबरमती यूनिवर्सिटी ने मेल से एसपी सुरजपुर को बताया है कि प्रिंस की डिग्री फर्जी है, तो उन्होंने मामले से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया में पोस्ट की जिसके जवाब में प्रिंस भागता हुआ पुलिस के पास पहुंचा औऱ आइजी सरगुजा को पत्र देकर मामले की शिकायत की।
मंत्री का रिश्तेदार होने का भ्रम दिखा उठा रहा है फायदा
इधर प्रिंस जायसवाल की शिकायत पर आईजी ने तत्काल जांच के निर्देश दे दिए। क्योंकि वर्तमान में स्वास्थ्य मंत्री का वो खुद को रिश्तेदार बता रहा है, जिसके बाद जांच शुरू हुई, तो सच्चाई सामने आई, पुलिस की एक टीम अहमदाबाद भी पहुंची, तो जुलाई 2024 में यह पत्र सामने आया कि प्रिंस की डिग्री फर्जी है। वही पुलिस आवेदक के खिलाफ कार्यवाही करने से हिचक रही थी,और उस पर मंत्री का रिश्तेदार, जिसके बाद पुलिस ने दोनो पत्र में विरोधाभास बता मामले की जांच जारी बता दी।