अम्बिकापुर@क्या अब पुलिस का सायरन जन्मदिवस मनाने के लिए बजेगा?

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भूपेन्द्र सिंह –
अम्बिकापुर,28 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। एक वायरल वीडियो ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठा दिया है और यह सवाल इसलिए उठ गया है क्योंकि पुलिस का सायरन हमेशा ही गुंडे बदमाशों के अंदर दहशत पैदा करता था, पर आज पुलिस का सायरन किसी के जन्मदिवस मनाने के उपलक्ष्य में बजने लगा है तो फिर कानून व्यवस्था की स्थिति को समझा जा सकता है, वायरल वीडियो में देखा जा रहा है कि एक पुलिस वाहन के साथ कई वाहन खड़े हैं और कई वाहनों से सायरन बजाया जा रहा था और एक लड़के का जन्मदिन मनाया जा रहा था, जन्मदिन मनाने के लिए किसी डीजे का उपयोग नहीं पुलिस गाड़ी के सायरन को बजाकर उसका उपयोग किया गया, क्या यह कानूनी रूप से अपराध नहीं या फिर रसूखदार लोग पुलिस को भी अपने पैकेट में रख लिए हैं? जिस वजह से ऐसे ढंग से जन्मदिन मना कर वह अपनी दबंगई साबित करना चाह रहे हैं? वायरल वीडियो अंबिकापुर का बताया जा रहा है पर इस पूरे मामले में जांच अत्यंत जरूरी है, पर दैनिक घटती घटना इस पूरे वायरल वीडियो में कोई भी दावा नहीं करता है पर यह बात जरूर है कि इस वायरल वीडियो की जांच होनी चाहिए और यह जांच पुलिस के गाड़ी नंबर से ही संभव है, ऐसा कहा जा रहा है क्योंकि वायरल वीडियो जो फेसबुक पर डाला गया है वह कहां का है और कब का है? यह भी पता चल जाएगा और उसमें किस पुलिस अधिकारी की शासकीय गाड़ी का उपयोग हुआ है सायरन बजाते हुए किस गाड़ी को जन्मदिन के लिए उपयोग किया गया है यह पता चल जाएगा। इस मामले में जांच और कार्यवाही नहीं हुई तो आगे से पुलिस का वह दबदबा खत्म हो जाएगा गुंडे बदमाशों के मन से जिस दबदबे के कारण ही गुंडे बदमाश बदमाशी करने से डरते हैं।


क्या यदि मामला सही है और कानूनन गलत है तो संबंधित पर होगी कार्यवाही?
पूरे मामले में सबसे पहले जांच जरूरी है और तदोपरांत कार्यवाही जरूरी है। अब जांच में यदि मामला सही पाया जाता है और पुलिस कर्मी या अधिकारी की गलती या उसकी त्रुटि पाई जाती है तो क्या कार्यवाही होगी। संबंधित पर कार्यवाही के दौरान कही यह तो नहीं सुनने देखने को मिलेगा कि पुलिस की जांच पुलिस के हाथ आते ही मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।देखना है कि आखिर क्या होता है मामले में और इस बार पुलिस अपनी छवि के लिए कितना कठोर निर्णय लेती है।
पुलिस वाहन कहां का जांच का विषय वायरल वीडियो अंबिकापुर काः सूत्र
सायरन बजाकर जन्मदिवस मनाए जाने का वायरल वीडियो अंबिकापुर का है यह सूत्रों का कहना है वहीं पुलिस वाहन कहां का है किसके नाम पर एलॉट है कौन उसका चालक है यह जांच का विषय है। अब जांच क्या होती है यह पुलिस को तय करना है और अपनी गिरती साख बचाना है।
क्या पुलिस सायरन का उपयोग जन्मदिवस मनाने के लिए सड़क किनारे करना उचित?
वायरल वीडियो जो फेसबुक पर वायरल है में देखा जा सकता है कि कुछ लोग (युवक) एक युवक का सड़क पर ही या कहीं खुले में जन्मदिवस मना रहे हैं और केक काटे जाने के दौरान ही वहां कई गाडि़यों का काफिला भी खड़ा है जिसमें से एक पुलिस गाड़ी भी है शासकीय जिसका सायरन केक काटने के दौरान बज रहा है। सायरन बजाते हुए ही केक काटा जा रहा है यह समझा जा सकता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसा करना सही है।क्या पुलिस सायरन का उपयोग पुलिस की शासकीय गाड़ी का उपयोग केक काटने के लिए सायरन और लाल नीली बत्ती बजाने के लिए किया जा सकता है। सवाल बड़ा है जांच और जवाब पुलिस का बनता है।
पुलिस गाड़ी का सायरन बजाकर सार्वजनिक स्थान पर किसी का केक कटवाना क्या उस व्यक्ति के लिए दहशत बनाने का पुलिसिया प्रयास?
सवाल यह भी है कि क्या पुलिस सायरन बजाकर सार्वजनिक स्थान पर किसी का केक कटवाना उस व्यक्ति के लिए दहशत बनाने का प्रयास था पुलिस का। सवाल उठेगा जरूर ऐसा क्योंकि जिस तरह का वीडीयो वायरल है उसके अनुसार यह कहना गलत नहीं है कि मामला दहशत बनाने का ही है और दहशत भी सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश या वैश्विक स्तर पर साबित करने का प्रयास था। पुलिस के वाहन से सायरन वरना बजाकर केक काटने के पीछे की मंशा क्या रही होगी।
क्या किसी पुलिसकर्मी या उसके परिजन का था जन्मदिवस या फिर किसी रसूखदार या नेता मंत्री के परिवार रिश्तेदार का था जन्मदिवस जिसमें सायरन बजाना था जरूरी?
फेसबुक में जो वीडियो वायरल है उसमें सायरन बजाती गाडि़यों के बीच पुलिस की भी शासकीय गाड़ी खड़ी है सायरन बजा रही है यह देखा जा सकता है सायरन सुना जा सकता है। अब सवाल यह है कि क्या जन्मदिवस किसी पुलिसकर्मी का था उसके परिजन का था या किसी रसूखदार नेता मंत्री का या उसके परिजन का था जिसमें पुलिस वाहन से सायरन बजाना जरूरी और मजबूरी था। सायरन तो वैसे पुलिसकर्मी हो अधिकारी हो नेता मंत्री हो कोई हो किसी के जन्मदिवस के केक काटने के दौरान बजना जरूरी नहीं है। अब किस मजबूरी में सायरन बजा और क्या पुलिस गाड़ी का वहां होना जांच का विषय नहीं है यह जांच का विषय है।


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