@ दी जाएगी 21 तोपों की सलामी…
नई दिल्ली,27 दिसम्बर 2024 (ए)। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ आज, शनिवार को सुबह 10-11 बजे दिल्ली में शक्ति स्थल के पास किया जाएगा। आज देर रात उनकी बेटी अमेरिका से दिल्ली पहुंचेगी। डॉ. मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर पार्थिव शरीर कल रात एम्स से दिल्ली के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित उनके आवास लाया गया था। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को होने वाले सभी सरकारी कार्यक्रमों को रद्द कर सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।
पूर्व पीएम का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए कांग्रेस मुख्यालय में रखा जाएगा। डॉ. मनमोहन सिंह के पार्थिव शरीर को कांग्रेस मुख्यालय से ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा। पूर्व पीएम के अंतिम संस्कार के दौरान विशेष राजकीय प्रोटोकॉल का पालन किया जायगा।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जायगा। उनके पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) में लपेटा जायगा। इसके साथ उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी जायगी। बता दें, इस सलामी को सर्वोच्च राजकीय सम्मान का प्रतीक माना जाता है
पूर्व प्रधानमंत्री की अंतिम यात्रा में गणमान्य लोग और राजनेता के अलावा आम लोग भी शामिल होंगे। अंतिम यात्रा में सैन्य बैंड और सशस्त्र बलों के जवान भी शामिल होकर पारंपरिक मार्च करते हैं। इस दौरान प्रोटोकॉल और सुरक्षा का कड़ाई से पालन किया जाता है।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होगी। सरकार ने आज के सभी कार्यक्रम रद्द कर सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।
एन चंद्रबाबू नायडू ने मनमोहन सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि दी
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
सीएम सुक्खू
ने भी जताया शोक
डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी शोक जताया है। उन्होंने कहा, जब देश में आर्थिक संकट था, मनमोहन सिंह ने उससे उबारा। देश का सोना गिरवी रखा था, उसे वापस लाए और देश की गरिमा को दुबारा एक नई पहचान दिलाई
लोकसभा स्पीकर ने भी जताया दुख
मनमोहन सिंह के निधन पर लोकसभा
स्पीकर ओम बिरला ने कहा, मनमोहन सिंह दुनिया में नहीं रहे। उनका भारतीय राजनीति में बहुत बड़ा योगदान था। उन्होंने आर्थिक, सामाजिक क्षेत्र में बड़े परिवर्तन किए। उनका योगदान देश हमेशा याद रखेगा। पीएम रहते हुए उन्होंने देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दिया। यह देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने डॉ. मनमोहन सिंह के सम्मान में सभी कार्यक्रम किया रद्द
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने आगामी सात दिनों के लिए सभी आधिकारिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। पार्टी ने एक महत्वपूर्ण सूचना जारी करते हुए बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार, दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सम्मान में कांग्रेस के स्थापना दिवस समारोह सहित सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। इन कार्यक्रमों में कांग्रेस के आंदोलनात्मक और आउटरीच कार्यक्रम भी शामिल हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय डॉ. मनमोहन सिंह के प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए लिया गया है। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी के कार्यक्रम 3 जनवरी 2025 से फिर से शुरू होंगे, और तब तक सभी गतिविधियाँ स्थगित रहेंगी।
पीएम मोदी, जेपी नड्डा और शाह ने दी श्रद्धांजलि

शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री जे.पी. नड्डा ने डॉ. सिंह के आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
टीएस सिंहदेव ने पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की
कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। टीएस सिंहदेव ने कहा, एक महान नेता और अर्थशास्त्री के रूप में उन्होंने देश को अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। देश के अमीर व्यापारी से ले कर साधारण कर्मचारी तक उनका अमूल्य योगदान नहीं भूल पाएंगे। भारत आपको सदा याद रखेगा। ॐ शांति।
शक्तिस्थल के पास होगा अंतिम संस्कार
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार कल (28 दिसंबर) को सुबह 11: 45 बजे दिल्ली के शक्ति स्थल स्थित निगम बोध घाट में होगा। उनकी बेटी आज देर रात अमेरिका से लौटेगी।
मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर दिल्ली के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित उनके आवास पर रखा गया है। अंतिम संस्कार के दौरान विशेष राजकीय प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।
सरकारी नौकरी से प्रधानमंत्री तक का सफर,
कैसा रहा मनमोहन सिंह का मुश्किल भरा जीवन यात्रा

भारत के 14वें प्रधानमंत्री, डॉ. मनमोहन सिंह, जिनका नाम आज भी आर्थिक सुधारों के पितामह के रूप में लिया जाता है, ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ राजनीति में कदम रखा और देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। 22 मई, 2004 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले डॉ. सिंह ने 26 मई, 2014 तक दो कार्यकाल पूरे किए। वे कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के प्रमुख थे और कुल 3,656 दिनों तक प्रधानमंत्री के रूप में सेवा प्रदान की। अपने कार्यकाल में, डॉ. मनमोहन सिंह ने भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में कई अहम बदलाव किए और भारतीय इतिहास में तीसरे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बने। उनसे पहले सिर्फ जवाहरलाल नेहरू (6,130 दिन) और इंदिरा गांधी (5,829 दिन) ही इतने लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे थे।
शिक्षा और प्रारंभिक करियर
26 सितंबर, 1932 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गाह गांव में जन्मे डॉ. मनमोहन सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र में की और फिर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। उनकी सरकारी सेवा में लंबी और सफल यात्रा रही। 1971 में, जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, डॉ. सिंह ने विदेश व्यापार मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। इसके बाद, 1972 में, वे वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बने, जहां उन्होंने 1976 तक कार्य किया।
सरकारी नौकरी से राजनीति में कदम
डॉ. सिंह ने 1991 में भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, जब देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। उन्होंने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसमें रुपये का अवमूल्यन, करों में कमी और सरकारी उद्योगों का निजीकरण शामिल था। इसके परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे और 1991 में राज्यसभा के सदस्य बने। हालांकि, 1999 के लोकसभा चुनाव में वे हार गए थे।
प्रधानमंत्री पद तक का कठिन सफर
2004 के संसदीय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) को हराने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद से मना कर दिया। इसके बाद, डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया। 22 मई, 2004 को उन्होंने पदभार संभाला और 2014 तक देश की सेवा की। उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद, उनके मुख्य लक्ष्यों में भारत के गरीबों की स्थिति में सुधार लाना, पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करना, और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच सामंजस्य कायम करना था।
सिंह ने भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए कई योजनाओं पर काम किया, लेकिन ईंधन की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति ने उनके लिए चुनौतियाँ खड़ी कर दीं। 2005 में, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के साथ एक ऐतिहासिक परमाणु सहयोग समझौता किया, जो भारत को परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी और ईंधन प्राप्त करने में मदद करता था। हालांकि, इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध हुआ, और 2008 में जब इस पर आगे बढ़ने का फैसला लिया गया, तो उनकी सरकार को संसद में विश्वास मत का सामना करना पड़ा।
दूसरा कार्यकाल और चुनौतीपूर्ण दौर
2009 के चुनावों में कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या में वृद्धि की, और डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी बार पदभार संभाला। हालांकि, इस कार्यकाल में भारत की आर्थिक वृद्धि में मंदी आई और कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों ने सरकार की छवि को प्रभावित किया। 2014 में, डॉ. सिंह ने घोषणा की कि वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की कोशिश नहीं करेंगे। इसी वर्ष, 26 मई को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, और डॉ. सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।