एमसीबी,@कांग्रेसियों का यह कैसा चेहरा,सरकार थी तो मिलीभगत कर चल रहा था रेत का कारोबार…अब कर रहे विरोध?

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रवि सिंह –
एमसीबी,26 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। एक समय था जब रेत पर नजरे तरेर रहे जिले के कलेक्टर को विधायक के विरोध के बाद हटा दिया गया था एक समय है आज वही पूर्व विधायक रेत घाट पर धरने पर बैठे दिखलाई दे रहे हैं,यह कांग्रेसियों का दोहरा चरित्र ही कहा जा सकता है जिसमे देखने में मिला था कि जब वर्ष 2018 से 2023 तक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तो उनकी ही मिलीभगत पर भरतपुर क्षेत्र में रेत का कारोबार चल रहा था,इसके विरोध में कभी आवाज नही उठाई जाती थी और अब सरकार बदलते ही उन्हे रेत और क्षेत्र की चिंता सता रही है। हलांकि यह अवैध कार्य है और इस पर रोक लगाया जाना निंतात आवष्यक है लेकिन कांग्रेसियों के चरित्र को देखकर उनकी हंसी उड़ाई जा रही है। एक और दिलचस्प पहलू है कि पूर्व मे खुद प्रदेष के पूर्व सीएम भूपेष बघेल के सिपहसलारों द्वारा सीएम हाउस के नाम पर यह अवैध काम किया जा रहा था लेकिन अब सत्ता से बेदखल होने के बाद उनके द्वारा भी सोषल मीडिया के माध्यम से आवाज उठाई जा रही है। पूरा मामला भरतपुर क्षेत्र की जीवनदायनी नदियों से जुड़ा हुआ है जहां पिछले कई वर्षो से रेत का बड़ा कारोबार किया जा रहा है।
दोहरा चरित्र,दिखावा करने रेत घाट पहुंचे कमरो
गुरूवार को क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो का भी दोहरा चरित्र देखने को मिला,विधायक पद से हाथ धोने के बाद अब उन्हे क्षेत्र के नदी नालो,निर्माण कार्य और अवैध रेत कारोबार की याद आ रही है जो कि अत्यंत निंदनीय है। बतलाया जाता है कि पूर्व विधायक कमरो गुरूवार को भरतपुर क्षेत्र से बहने वाली मवई नदी में रेत कारोबार का विरोध करने पहुंच गए, उन्हाने ग्रामीणों के साथ रेत पर बैठकर उत्खनन का विरोध किया। उन्होने कारोबार बंद ना होने पर धरना प्रदर्षन की चेतावनी भी दी है वहीं विवाद के मद्वेनजर स्थल पर पुलिस बल भी मौजूद था।
2013 से 2018 तक कमरो करते थे विरोध
भरतपुर क्षेत्र में रेत कारोबारियों ने अपना पांव पसार लिया है,देखने में मिलता है जब प्रदेश मे 2013 से 2018 तक भाजपा की सरकार थी तब गुलाब कमरो एक नेता के रूप में रेत कारोबार का खुलकर विरोध किया करते थे,उस समय भी बड़ी मात्रा में रेत का कारोबार इस क्षेत्र में चल रहा था। लेकिन वर्ष 2018 में राज्य में सत्ता बदली और कांग्रेस की सरकार बदली,इसे संयोग ही कहा जाए कि भरतपुर क्षेत्र के विधायक भी गुलाब कमरो बने। लेकिन इससे दुखद और हास्यप्रद क्या हो सकता है कि जो गुलाब कमरो विपक्ष में रहने पर रेत कारोबार का विरोध खुलकर किया करते थे विधायक बनने के बाद खुद उन्होने ही कारोबारियों को संरक्षण दे रखा था।गा्रमीण जन पूरे पांच साल रेत कारोबार का विरोध कर रहे थे लेकिन तात्कालिक विधायक के रूप में गुलाब कमरो ने चुप्पी साध रखी थी। विष्वस्त सूत्रों का कहना है कि उस दौरान रेत के कारोबार में गुलाब कमरों का भी हाथ था जिससे कि कारोबारियों ने बैखौफ होकर काम को अंजाम दिया।
सीएम हाउस के इसारे पर चल रहा था रेत का कारोबार
सूत्रों का दावा है कि प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी और उसके मुखिया भूपेश बघेल हुआ करते थे तब रायपुर के ढेबर बंधुओं के द्वारा रेत का कारोबार पूरे प्रदेश में किया जा रहा था। यही वजह था कि कभी भी गुलाब कमरो ने रेत को लेकर आवाज नही उठाई थी। जानकारो की माने तो सीएम हाउस के इषारे पर ही रेत का कारोबार चल रहा था जिसमें कई लोग पार्टनर के रूप में काम किया करते थे।
रेत पर नही बनी थी बात,हटाये गए थे कलेक्टर संदीपान
बतलाया जाता है कि जब भरतपुर क्षेत्र कोरिया जिले में शामिल था उस दौरान कोरिया के कलेक्टर भोस्कर विलास संदीपान हुआ करते थे। तब रेत का कारोबार करने वाले व्यापारी ने तात्कालिक विधायक गुलाब कमरो के माध्यम से श्री संदीपान पर दबाव भी बनवाया था यहीं नही तब राज्य की सुपर सीएम कही जाने वाली राप्रसे अधिकारी और पूर्व सीएम की करीबी सौम्या चैरसिया ने भी कलेक्टर से इस मुद्वे पर बात की थी। हलांकि उस दौरान भी कलेक्टर संदीपान ने सहयोग नही किया और तुरंत ही उन्हे कोरिया से हटा दिया गया था। इसके बाद डोमन सिंह को कोरिया कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई थी फिर कारोबार शुरू हो सका था।
भरतपुर क्षेत्र की नदियों से होता है उत्खनन
ज्ञात हो कि अविभाजित कोरिया और वर्तमान में एमसीबी में शामिल भरतपुर जनपद में कई बड़ी नदियां हैं,जिनमें भारी मात्रा में रेत इकट्ठा होता है। विगत कई वर्षो से देखने में मिल रहा है कि उक्त नदियों से बड़ी मात्रा में रेत का अवैध कारोबार चल रहा है,सत्ता तक पहुंच रखने वाले बड़े ठेकेदार बड़ी मात्रा में ठंड के समय से लेकर बारिश के पूर्व तक रेत का अवैध कारोबार संचालित करते हैं। यह क्षेत्र रामवनगमन क्षेत्र हरचैका में स्थित है। रेत को लेकर पिछले कई वर्षो से स्थानीय नागरिक विरोध कर रहे हैं लेकिन सत्ता की भागीदारी और प्रषासन की उदासिनता के कारण कारोबार थमने का नाम नही ले रहा है। रेत उत्खनन कर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश ले जाया जाता है।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने उठाया मुद्दा
भरतपुर क्षेत्र में रेत का कारोबार काफी हाई प्रोफाईल हो चुका है,जानकारी तो सभी दल के लोगो को है लेकिन उसे बंद करने में किसी ने दिलचस्पी नही दिखलाई। पिछले दिनों प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने सोशल मीडिया पेज से उक्त मुद्वे को उठाकर और ताजा कर दिया उन्होने रेत परिवहन का एक वीडियो डालकर लिखा कि…हे राम,राम के नाम पर वोट बैंक की राजनीति करने वाली भाजपा ने उस ही नही से रेत उत्खान करवा दिया, जिस नदी को पार कर प्रभु श्रीराम ने छाीसगढ प्रवेश किया था। सीतामढी हरचैका में रेत उत्खनन। यह पोस्ट करते हुए उन्होने रेत कारोबार का विरोध करने का संदेष दिया था लेकिन एक बड़ा सवाल है कि जव वे राज्य के मुखिया थे उस दौरान भी इसी तरह रेत का कारोबार चल रहा था लेकिन उन्होने इसे बंद कराने की कभी नही सोची और आज सत्ता जाने के बाद घडि़याली आसु बहाते नजर आ रहे हैं।
आज क्या हुआ कि कमरो कर रहे फिर विरोध,कहीं लाभ कमाना उद्देश्य तो नही
कभी रेत कारोबार का विरोध फिर विधायक बनने के बाद एकदम चुप्पी और आज फिर विधायक पद से हटने के एक साल बाद अचानक गुलाब कमरो ने रेत को लेकर आवाज बुलंद किय है। पिछले छःवर्ष में पहली बार देखने मंे मिला कि गुलाब कमरो रेत पर बैठकर विरोध प्रदर्षन कर रहे हैं माना जा सकता है कि यह गंदी राजनीति का एक उदाहरण ही है। जब वे क्षेत्र के विधायक हुआ करते थे उस दौरान यदि एक बार भी जोर शोर से इस बारे में आवाज उठाते थे आज रेत पर विरोध करने की नौबत नही आती यह लोगो मे चर्चा का विषय भी है। स्थानीय जनों का कहना है कि पूर्व विधायक गुलाब कमरो का यह दोहरा चरित्र है,वे आम जन को दिग्भ्रमित और बरगला कर रेत कारोबार पर दबाव बनाना चाह रहे हैं और फिर कोई स्वार्थ सिद्व होने के बाद फिर उनके द्वारा चुप्पी साध ली जाएगी। इसके पीछे गुलाब कमरो का क्या उद्वेष्य है यह तो वहीं बतला सकते हैं लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह घडि़याली आंसु और दिखावे की राजनीति से बढकर और कुछ भी नही है।


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