सूरजपुर@ क्या शासन के नियमों के तहत नहीं…जिला पंचायत सीईओ अपने कार्यालय हेड के नाते कुछ भी करने के लिए हैं अधिकृत?

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@ किसी कर्मचारी से क्या काम लेना है यह अधिकार जिला पंचायत सीईओ का है?
@ किस अधिग्रहीत वाहन को अपने घर के भागवत कार्यक्रम में उपयोग करना है यह भी उनका अधिकार है?
@ अपने घर के भागवत कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों का खूब हुआ उपयोग:सूत्र
@ विभागीय स्टेनो न होने पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रभारी स्टेनो बनाया जाता है,पर क्या विभागीय स्टेनो के रहते हुए भी

@ प्रभारी स्टेनो से काम लेना नियम के विरोध नहीं?
@ किसे क्या काम लेना है यह अधिकार कम से कम जिला पंचायत सीईओ के पास होना चाहिए ऐसा कहना है सीईओ मैडम का संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद भी कर्मचारी अपने मूल पद पर वापस क्यों नहीं हुए?
@ क्या जिला पंचायत सीईओ का संरक्षण मिला संलग्नीकरण समाप्त होने वाला कर्मचारियों को?
@ सुरजपुर जिला पंचायत में संलग्नीकरण का खेल,संलग्नीकरण समाप्ति के आदेश पश्चात भी अपने मूल विभाग में नहीं लौट रहे संलग्न कर्मचारी

-ओंकार पांडेय –
सूरजपुर,25 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)।
जिला पंचायत सूरजपुर में मनमानियां का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा,कहा जाए तो जिला पंचायत सीईओ को एक अलग तरह की छूट है कि वह अपने अधिकारों का उपयोग करेंके वह कुछ भी कर सकती हैं? यह बात इसलिए हो रही है क्योंकि ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है जब जिला पंचायत का विभागीय स्टेनो कार्यालय में मौजूद है फिर भी वैकल्पिक व्यवस्था वाले प्रभारी स्टेनो से काम लेना बड़ा सवाल है? साथी अटैचमेंट पूरे प्रदेश में खत्म होने के बाद भी दूसरे विभाग के कर्मचारियों को अटैच करके जिला पंचायत सीईओ कहीं ना कहीं मनमानी कर रही हैं और इस पर सवाल पूछने जाने पर उनके अंदर की बौखलाहट भी साफ देखने को मिली,जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि प्रभारी स्टेनो से कम लिया जा रहा है जबकि आपके कार्यालय में विभागीय स्टेनो मौजूद है, इस पर वह तिलमिला गई और कहने लगी कि किसने इस खबर को लगाने को कहा है? और मेरा कार्यालय हेड होने के नाते अधिकार है कि किसे क्या काम लेना है? और उन्होंने फोन काट दिया, उनके फोन काटने के बाद यह सवाल उत्पन्न होता है कि क्या सही में कार्यालय हेड होने के नाते अपना मनमर्जी चलाने का अधिकार शासन ने दिया है? शासन ने जो गाइडलाइन बनाई है उसके विरुद्ध काम करने का अधिकार दिया है या फिर जो सीओ होगा वह शासन के नियमों को दरकिनार करके अपनी मर्जी चलाएगा?
आपको बात दे की जिला पंचायत कार्यालय सूरजपुर में प्रभारी स्टेनो पूरा कार्यभार देख रहे हैं वहीं विभागीय स्टेनो से अन्य काम कराया जा रहा है,जानकारी मिली है कि विभागीय स्टेनो विधानसभा चुनाव के दौरान दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिस वजह से वह कार्यालय नहीं आ पा रहे थे,जिसे देखते हुए तत्कालीन सीईओ ने सहायक ग्रेड 3 कर्मचारियों को प्रभारी स्टेनो बनाया था, अब जब विभागीय स्टेनो ठीक होकर कार्यालय आ गए हैं तोभी उन्हें अपने ही जगह पर बैठने की अनुमति नहीं मिल रही है, वैसे यह बात अलग है कि कार्यालय हेड किसी से भी कोई भी काम कर सकता है, पर यह भी शासन के द्वारा तय किया गया है कि विभागीय स्टेनो ही फूल प्लेस कम कर सकता है पर विभागीय स्टेनो की कार्यालय में उपस्थित के बाद भी उनसे उनका काम ना करा कर अन्य काम करना, क्या यह अधिकार शासन ने सूरजपुर जिला पंचायत सीईओ को दिया है? या फिर अपने पावर का धौंस दिखाकर वह जिसे जो चाहेंगी वह काम कराएगी? क्योंकि पत्रकार के सवाल पर कुछ ऐसा ही उनका जवाब था।
संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद की कर्मचारियों को अपने मूल पद पर जाने से क्यों रोक रखी हैं जिला पंचायत सीई?
क्या जिला पंचायत सीईओ सूरजपुर अपने आशीर्वाद पर संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद की कर्मचारियों को अपने मूल पद पर जाने से रोक रखी हैं? यह सवाल इसलिए उठा है क्योंकि प्रदेश सरकार आते ही संलग्नीकरण समाप्त कर दी थी फिर भी कर्मचारी अपने मूल पद पर नहीं पहुंच पाए, जिसमें से सूरजपुर जिला पंचायत में संलग्नीकरण के तीन कर्मचारी अभी भी बने हुए, सूरजपुर जिले के जिला पंचायत कर्यालय में संलग्नीकरण का खेल देखा जा रहा है जहां संलग्न कर्मचारी अपने मूल विभाग में वापस नही जाना चाहते वहीं उन्हे जिला पंचायत कार्यालय से भी सह प्राप्त हो रहा है अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त हो रहा है जिसकी वजह से संलग्नीकरण समाप्ति आदेश को भी धता बता रहे हैं और अपनी मनमानी कर रहे हैं। बता दें की जिले के जिला पंचायत कार्यालय में शिक्षा विभाग के तीन स्कूलों से तीन लिपिक वहीं जनपद पंचायत प्रतापपुर से उप अभियंता विगत कई वर्षों से संलग्न हैं और वह जिला पंचायत में ही कार्य कर रहे हैं वहीं फरवरी माह में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा ही उनका संलग्नीकरण समाप्त कर दिया गया है लेकिन आज दिनांक तक तीनो जिला पंचायत में ही जमे हुए हैं और वहीं कार्य कर रहे हैं। पूर्व पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सूरजपुर द्वारा चारों को उनके मूल पदस्थ संस्था में वापसी के लिए आदेशित किया गया था लेकिन फरवरी माह में आदेश जारी करने उपरांत जब तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ का तबादला हो गया और नए जिला पंचायत सीईओ ने कार्यभार ग्रहण कर लिया उन्होंने पूर्व जिला पंचायत सीईओ के जारी आदेश अनुसार चारों संलग्न कर्मचारियों जिन्हे उनके मूल पदस्थ कार्यालय संस्था के लिए कार्यभार मुक्त करने आदेशित किया गया था को कार्यभार मुक्त नहीं किया गया और वह आज भी जिला पंचायत में ही जमे हुए हैं। सूत्रों का कहना है की चारों जुगाड से 12 सालों से एक ही जगह संलग्न होकर काम कर रहे हैं जबकि संलग्नीकरण समाप्ति का इस दौरान कई बार आदेश आया। अभी भी चारों जिला पंचायत में ही काम कर रहे हैं और उन्हे कोई हटा नहीं सकता उनका दावा है।
क्या संलग्न तीन कर्मचारियों को मिला हुआ है राजनीतिक संरक्षण या वह अधिकारियों से जुगाड लगाकर वर्षों से हैं संलग्न?
जिले के जिला पंचायत कार्यालय में संलग्न तीन कर्मचारी किसका संरक्षण प्राप्त करके मनचाहे कार्यालय में कार्य कर रहे हैं यह एक बड़ा प्रश्न है वहीं सवाल यह भी है की क्या उन्हे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है या फिर उनका जुगाड अधिकारियों से है।वैसे राजनीतिक यदि उन्हे संरक्षण प्राप्त है तो उनका जुगाड काफी तगड़ा है क्योंकि वह दोनो दलों की सरकार में अपने अनुसार अपनी मनचाही जगह पर काम कर रहे हैं और उनका जुगाड कोई बिगाड़ भी नही पा रहा है वहीं यदि वह अधिकारियों से जुगाड बना रहे हैं तब भी उनकी काबिलियत जुगाड मामले में कम नहीं क्योंकि अलग अलग अधिकारियों के कार्यकाल में वह लगातार संलग्न ही चले आ रहे हैं।
जिला पंचायत में शिक्षा विभाग के लिपिक अपनी सेवा प्रदान कर रहे जबकि शिक्षा विभाग और जिला पंचायत का नाता ही समाप्त हो गया है
सबसे आश्चर्य की बात यह है की जिला पंचायत में शिक्षा विभाग के लिपिक अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं जबकि शिक्षा विभाग और जिला पंचायत का संबंध का पुराना नाता ही समाप्त हो गया और शिक्षा विभाग जो पहले जिला पंचायत की तरफ ज्यादा विस्तृत था अब शिक्षा विभाग तक ही सिमट गया है। वैसे जिला पंचायत सूरजपुर में संलग्न शिक्षा विभाग के लिपिकों की बात की जाए तो यह कहा जा सकता है की ऐसा शायद ही कहीं और प्रदेश में देखने को मिलेगा जहां शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को वर्षों से जिला पंचायत में संलग्न कर रखा गया होगा। सुरजपुर जिला अपने आप में इकलौता जिला होगा जहां एक नहीं दो नहीं तीन तीन स्कूलों के लिपिकों को जिला पंचायत में संलग्न करके रखा गया है।
शिक्षा विभाग के लिपिकों को लेकर शिक्षा विभाग क्यों है मौन?
जिले के तीन स्कूलों के तीन लिपिक वर्षों से जिला पंचायत में संलग्न हैं,तीनों के द्वारा क्या जुगाड लगाया गया है संलग्न रहने के लिए यह तो वही जाने लेकिन तीनों अपने मूल विभाग की जगह अन्य विभाग में संलग्न होकर काम करने में ज्यादा खुश हैं। वैसे इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय क्यों मौन है वह क्यों अपने कर्मचारियों की वापसी की मांग नहीं करता यह बड़ा सवाल है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को अपने विभाग के उन लिपिकों की वापसी की मांग करनी चाहिए जो वर्षों से जिला पंचायत में जुगाड से संलग्न हैं।
क्या जिला पंचायत में है वेतन के अतिरिक्त अन्य कोई लाभ जिसके कारण नहीं लौट रहे अपने मूल कार्यालय में वहां संलग्न कर्मचारी?
जिला पंचायत में वर्षों से संलग्न कर्मचारी अपने मूल पदस्थ कार्यालय नहीं जाना चाहते और वह जिला पंचायत में ही पदस्थ रहना चाहते हैं यह देखने सुनने और जारी संलग्नीकरण आदेश की अवहेलना उपरांत समझा जा सकता है। अब सवाल यह उठता है की क्या जिला पंचायत में उन्हे वेतन के अलावा कोई अतिरिक्त लाभ मिल रहा है जिस वजह से वह वापस नहीं जाना चाहते अपने मूल पदस्थ कार्यालय में। अब वजह जो भी हो लेकिन आदेश की अवहेलना जो संलग्निकरण समाप्ति को लेकर जारी आदेश है वह तो होती नजर आ रही है और यह भी कहना गलत नहीं होगा कि जिले में चार कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे हैं वह अपने अनुसार कार्यालय का चयन कर काम करना पसंद कर रहे हैं और वह अपना मूल विभाग भी त्याग कर रहे हैं वहीं उनकी इस मनमानी को संरक्षण मिल रहा है। वैसे सवाल यह भी उठ रहा है की क्या ऐसी ही सुविधा मन अनुसार विभाग और कार्यालय चुनने की जिले के अन्य कर्मचारियों को भी मिलेगी या यह सुविधा इन्हीं चार लोगों के लिए है।


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