- शपथ ग्रहण समारोह में अतिथि सहित अधिकारी रहे उपस्थित,शपथ लेने वाले रहे नदारद
- भाजपाई होने के बाद भी कई मनोनीत पार्षद नहीं पहुंचे शपथ ग्रहण समारोह में…
- क्या भाजपाई मनोनीत पार्षदों ने अपनी ही पार्टी के निर्णय को किया मानने से इंकार?
- क्या भाजपाई मनोनीत पार्षदों पर भाजपा अब करेगी कार्यवाही, क्या उन्हें जारी होगा नोटिस?
- क्या ऐसे भाजपाई मनोनीत पार्षदों की भविष्य में चुनाव में भी दावेदारी होगी खारिज?
- एक मनोनीत पार्षद हैं खुद अध्यक्ष पद के दावेदार,क्या उनकी भी दावेदारी हुई समाप्त?
- सरपंच सहित उपसरपंच का नहीं है भाजपा से कोई जुड़ाव,मनोनीत पार्षद ही हैं भाजपा के सदस्य

–रवि सिंह-
बैकुंठपुर/पटना 13 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। नए नए बनाए गए नगर पंचायत पटना में दिनांक 13 दिसंबर को मनोनीत अध्यक्ष, मनोनीत उपाध्यक्ष,सहित मनोनीत पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया था जहां शपथ ग्रहण के लिए वही लोग नहीं पहुंचे जिन्हें शासन से मनोनीत किया गया था। अतिथि और अधिकारी तो पहुंचे नगर पंचायत की मनोनीत अध्यक्ष, मनोनीत उपाध्यक्ष,मनोनीत पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में लेकिन खुद वह लोग नहीं पहुंचे जिन्हें शपथ ग्रहण करना था जिन्हे प्रथम कार्यभार अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,पार्षद का प्राप्त करना था आगे कार्य दायित्व निर्वहन करना था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नगर पंचायत के गठन का विरोध हो रहा है और यह विरोध सरपंच का है और सरपंच के ही विरोध को सभी ने सहमति प्रदान की है और शपथ ग्रहण का बहिष्कार किया है ऐसा बताया जा रहा है।वैसे बताया यह भी जा रहा है कि शपथ ग्रहण का बहिष्कार करने में भाजपा के वह नेता भी पीछे नहीं थे जिन्हें पार्षद मनोनीत किया गया है।

क्या मनोनीत पार्षद एक तरह से अपनी ही सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे?
भाजपा के नेता जिन्हें पार्षद मनोनीत किया गया है उनकी तरफ से शपथ ग्रहण का बहिष्कार किया जाना भी बड़ी बात मानी जा रही है क्योंकि वह खुद भाजपा के सदस्य हैं और पटना को नगर पंचायत बनाए जाने का निर्णय भी सरकार का है जो भाजपा की है सरकार है वहीं सरकार ने ही उन्हें पार्षद मनोनीत किया है। अब ऐसे में मनोनीत पार्षद एक तरह से अपनी ही सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं। वैसे माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल में ही यह गठन हुआ होता नगर पंचायत का यह विरोध नहीं होता बशर्ते इसका स्वागत होता और अब जारी विरोध श्रेय की राजनीति है।वैसे अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या उन मनोनीत पार्षदों को भाजपा पार्टी की सरकार के जारी आदेश की जो मनोनयन का आदेश है कि अवहेलना के लिए दंडित करती है और उन्हें आगमी चुनाव में पार्टी से दावेदारी के लिए मना करती है उनकी दावेदारी खारिज करती है। वैसे इन मनोनीत पार्षदों में से एक ऐसे भी हैं जिन्हें लड़ना अध्यक्ष का चुनाव है लेकिन वह अपनी ही पार्टी की सरकार के निर्णय के विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं। क्या ऐसे लोगों को पार्टी अवसर देगी यह बड़ा प्रश्न है। वैसे शपथ ग्रहण समारोह का विरोध होगा कार्यक्रम का बहिष्कार होगा यह तय था क्योंकि ऐसा नगर पंचायत के गठन उपरांत ही नजर आ रहा था वहीं ऐसी संभावनाओं के बावजूद नगर पंचायत सीएमओ के द्वारा शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन कराना कहां तक उचित था कहां तक जायज था।
सरपंच पति नगर पंचायत के बनने के रहे विरोध में कही इसलिए तो सरपंच ने नहीं लिया शपथ?
शपथ ग्रहण समारोह में सरपंच के साथ मनोनीत हुए पार्षद की अनुपस्थित से लोगो में यह चर्चा का विषय है कि सरपंच पति नगर पंचायत के विरोध में अपना आपत्ति दर्ज किए है कही इसलिए तो सरपंच ने नवीन नगर पंचायत का पहला अध्यक्ष पद का पदभार नहीं संभाला? सरपंच के इस तरह गैर जिम्मेदारी से उपस्थित अतिथियों का घोर अपमान हुआ।
ग्राम पंचायत के रहते-रहते पंचायत निधि का पैसों का हो सकता है बंदरबांट
क्या पंचायत के पैसे को नहीं खर्च कर पाए इसलिए वह अध्यक्ष पद की शपथ नहीं ले रहे हैं, वह सरपंच रहते ही उसे पैसे को खर्च कर सकते हैं इसीलिए वह सरपंच बनकर ही उस पैसे को विकास कार्यों में खर्च करना चाह रहे हैं क्या इसी वजह से विरोध अध्यक्ष पद के शपथ ग्रहण को लेकर दिख रहा है?
अतिथि करते रहे नगर पंचायत अध्यक्ष का इंतजार,नहीं पहुंची मनोनीत अध्यक्ष के साथ पार्षद,अतिथियों का हुआ अपमान
जब मनोनीत अध्यक्ष व पार्षद शपथ लेने को तैयार नहीं थे तो फिर नगर पंचायत अधिकारी ने क्यों कार्यक्रम आयोजित कर अतिथियों को बुलाया? और उन्हें अपमानित किया यह भी अब सवाल उठने लगा है, वैसे भी पंचायत का कार्यकाल अब खत्म होने की कगार पर है फिर भी खत्म होते कार्यकाल के बीच तनातनी आज भी जारी है अब न जाने ऐसा क्या अंदर खाने में हो रहा है की मनोनीत अध्यक्ष पार्षद अपने ही राग अलापने में लगे हुए हैं, कभी भी उम्मीद है कि नगर पंचायत निरस्त हो जाएगा या फिर सपना मिथक रहेगा? आदिम जाति सहकारी समिति के साथ तहसीलदार ने दीप प्रज्वलित किया तो सीएमओ ने आए अतिथियों को स्वल्पाहार करा कर किया विदा।
सरपंच गायत्री सिंह ने किया सबको निराश, नहीं स्वीकारना था अध्यक्ष पद तो करना विरोध
जब उन्हें मनोनीत अध्यक्ष होना पसंद नहीं था तब उन्होंने क्यों नहीं इसका विरोध किया? क्यों नहीं मनोनीत अध्यक्ष पद को आस्वीकार करते हुए सरकार को पत्र लिखकर अध्यक्ष पद ना स्वीकार होने की बात कही।
सिकंदर सिदार,पटना नगर पंचायत सीएमओ
इस पूरे मामले में सीएमओ ने बताया कि 13 दिसंबर को मनोनीत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के साथ पार्षदों का शपथ ग्रहण होना था चुकी किसी कारणवस समारोह में उनकी उपस्थिति नहीं हुई जिस कारण इसे निरस्त किया जाता है। आगे की कार्यवाही उच्चाधिकारियों के परामर्श पश्चात पुनः आयोजित किया जाएगा।