साइडिंग की जमीन में हुई फीलिंग,रेलवे और खनिज विभाग से नहीं ली अनुमति

वैसे तो कोयला माफियाओं के एक से बढ़कर एक कारनामे चर्चा में आते रहते हैं लेकिन वर्तमान में बिजुरी रेलवे की वृक्षारोपण के लिए आवंटित जमीन से 15 से 20 फीट गहरी खाई बनाकर रेलवे द्वारा कोयला साइडिंग के लिए एलाट जमीन की फिलिंग की जा रही है जो की खुलेआम खनिज विभाग और रेलवे के नियमों का उल्लंघन तो है ही साथ ही रेलवे साइडिंग के जिम्मेदारों द्वारा लगभग 300 से ज्यादा हरे पेड़ों को भी जमीदोज कर दिया गया है जो इस समय बिजुरी नगर की जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
-बागी कलम-
अनूपपुर,05 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। बिजुरी क्षेत्र में कोयला की खदानों से देश के कोने कोने में कोयले की आपूर्ति करने के लिए रेलवे द्वारा पहले एक कोयला साइडिंग मां शारदा को 9 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। अब यहां पर साईं कृपा कंपनी बुढ़ार को 3 एकड़ और दीपक सेल्स बिजुरी को 4.5 एकड़ जमीन रेलवे द्वारा आवंटित की गई है। रेलवे द्वारा जिस जमीन का आवंटन दोनों कंपनियों को किया गया है उसमें गहरी खाई है जिसे समतल करने के लिए बगल में रेलवे की ही खाली जमीन जिस पर 5 साल तक वृक्षारोपण करने के लिए मां शारदा साइडिंग कंपनी को आवंटित किया गया था और मां शारदा कंपनी ने इस क्षेत्र में 3000 पौधों का वृक्षारोपण भी किया था। बगल में खड़े आधा सैकड़ा पेड़ गवाह हैं कि इस क्षेत्र में वृक्षारोपण हुआ है लेकिन जिस तरह से वृक्षारोपण के लिए आवंटित या यह कहा जाए की वृक्षारोपण वाली जमीन से 15, 20 फीट गहरी खाई बना मिट्टी निकाल कर इतने बड़े स्तर पर रेलवे की सीईडिंग के लिए आवंटित जमीन की खाई को भरा जा रहा है। यह आश्चर्य की बात है कि इस पूरे मामले में वन विभाग, रेलवे और खनिज विभाग की चुप्पी आम जनता के समझ में नहीं आ रहा है कि इसके पीछे राज क्या है.?
तो… रेलवे की लापरवाही या अधिकारियों की मिलीभगत
इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार रेलवे की संपçायों की सुरक्षा के लिए जहां रेलवे सुरक्षा बल तैनात है वही रेलवे की जमीन संपत्ती रेलवे लाइन और बिल्डिंग की सुरक्षा निगरानी के लिए भी अधिकारियों की एक लंबी चौड़ी फौज बिजुरी से लेकर मनेन्द्रगढ़ में कार्यरत है। अधिकारियों की पूरी टीम होने के बाद यह बात किसी के गले के नीचे नहीं उतर रही कि रेलवे की खाली पड़ी जमीन पर इस तरह से बिना अनुमति लिए ही वृक्षारोपण की गई जमीन को खोदकर अपने निजी लाभ के लिए गहरी खाई बना दिया गया और रेलवे के अधिकारियों को इसका पता नहीं। अधिकतर लोगों का कहना है कि आए दिन रेलवे के अधिकारी इस क्षेत्र में आते रहते हैं उसके बावजूद रेलवे के अधिकारियों की नजर यहां पर ना पड़ी हो ऐसे में केवल इस बात की ही संभावना ज्यादा नजर आ रही है कि रेलवे कोल साईडिंग के लिए आवंटित जमीन को फीलिंग कर रहे उसके मालिकों के द्वारा रेलवे की जिम्मेदार अधिकारियों को मैनेज किया गया है जिसकी चर्चा यहां के रेलवे के छोटे कर्मचारियों द्वारा भी की जा रही है।
क्या कहता है जमीन के नीचे मिट्टी खनन के लिए कानून
प्रतिएकड़ जमीन पर 3 से 5 फुट तक ही मिट्टी खनन हो सकती है अगर जमीन के पास डेढ़ किलोमीटर के दायरे में जंगल है तब खनन नहीं हो सकता। जमीन के पास 40 मी. में बिजली के हाइटेंशन वाले खंभे और 5 मीटर के दायरे छोटे खंभे है तब भी खनन पर प्रतिबंध रहता है। किसानो को निजी उपयोग के लिए खेत से मिट्टी खोदने पर कोई रोक टोक नहीं है, उनको किसी प्रकार का स्वामित्व शुल्क भी नहीं देना होता है। वहीं मिट्टी के वाणिज्यिक उपयोग के लिए खान एवं भूतत्व विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन देकर मंजूरी लेनी होती हूं। यह तो अपने स्वामित्व वाली जमीन के लिए नियम कानून है लेकिन रेलवे की सरकारी जमीन और जिस पर वृक्षारोपण हुआ हो उस जमीन पर कोयला माफियाओं के द्वारा लगभग आधे एकड़ क्षेत्र में 20 फीट गहरी लंबी खाई या तालाब बना दिया जाना यह साफ-साफ संकेत है कि चाहे मध्य प्रदेश सरकार का वन विभाग, खनिज विभाग या राजस्व के नियम कानून हो या भारत सरकार के रेलवे जैसे विभागों के नियम कानून कोयला माफियाओं के लिए कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि यह तो चढ़ावा चढ़ा कर अपना काम कैसे करना है बहुत अच्छी तरह से जानते हैं।