- बिना लेनदेन के किसी भी फाइल को बढ़ाने में रुचि नहीं ले रहे हैं अधिकारी एवं लिपिक,पैसे डायरेक्ट ना लेकर पान ठेले चाय दुकानों में जमा कराए जा रहे हैं कमीशन के:सूत्र
- दो लखिया फाइलों के माध्यम से तेजी से पैसे निकालने की प्रक्रिया अभी भी निरंतर जारी
- 50-50 प्रतिशत वाली पद्धति में बराबर हिस्सेदारी वाले फार्मूले पर महाप्रबंधक कार्यालय में चल रहा कार्य
- लगभग 25 करोड रुपए के घोटाले की फाइलों की जांच नितांत आवश्यक,हो सकता है बड़ा भ्रष्टाचार उजागर

-रवि सिंह-
चिरमिरी,03 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र के महाप्रबंधक कार्यालय का एसीबी की कार्यवाही के बाद आज तक डर और भय का माहौल खत्म नहीं हुआ है,सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग में बैठे बाबू और साहब किसी भी नए व्यक्ति से किसी भी तरह की बात करने के लिए तैयार नहीं है,पुराने सप्लायर और ठेकेदार से ही बातचीत हो रही है और लेनदेन में बड़ी सहजता और सतर्कता बरती जा रही है, घुस के पैसे आसपास के पान ठेले किराना दुकान सहित अन्य किसी दुकानों में पैसे जमा करने की परंपरा फिर से शुरू हो गई है कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी उधारी पटाने की जिम्मेदारी भी इन सप्लायरों और ठेकेदारों को दे दी है। इस भय भरे माहौल में सिर्फ छोटे अधिकारी कर्मचारी ही डर में नहीं है, बड़े साहब भी इन दिनों किसी से मिल नहीं रहे हैं कंपनी में कार्यरत उनके अधीनस्थ किसी अनजान बाबू और साहब को भी वह संदेह भरी निगाहों से देख रहे है और हर नए व्यक्ति से पूछ रहे हैं कि आप कौन हैं और कहां से आए हैं? क्या उन्हें शायद हर नया व्यक्ति जिसे वे नहीं जानते पहचानते वह ए सी बी का अधिकारी दिख रहा है? वेस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड में सब एरिया मैनेजर के पद पर रहकर काफी भ्रष्टाचार करने वाले कुछ माह के बाद ही सेवानिवृçा होने वाले महाप्रबंधक काफी डरे सहमे दिख रहे हैं, उनका दाहिना और बाया हाथ कहे जाने वाले संजय सिंह और श्रीनिवासन एंटी करप्शन यूरो के गिरफ्त में हैं और साहब दहशत में है,दबी जुबान यह भी बात कही जा रही है कि दोनों लोगों ने बड़े साहब के लिए ही इस तरह के पैसा जुगाड़ बनाने का ठेका ले रखा था,साहब की किस्मत शायद उनके साथ नहीं दे रही है डल्युसीएल में भी वह प्रयास किए थे, जिसमें उन्हें वहां पर यातना झेलनी पड़ी थी, यहां भी इन्होंने पैसे कमाने के बहुत सारे हथकंडे अपनी और कमाए भी लेकिन अब एसीबी की दखल से उनके मंसूबे पर पानी फिरता दिख रहा है, साहब बड़े परेशान चल रहे हैं।
जिम्मेदार कौन है?
मिली जानकारी के अनुसार बड़े साहब के खजांची महोदय के नाम से चर्चित एसीबी के गिरफ्त में गए, अभियुक्त कि पत्नी इन दोनों काफी फायर ब्रांड बनकर उभरी है, उनके द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर यह कहा जा रहा है कि जब इन्हें काला पैसा खाना था तो डायरेक्ट ही ले लेते मेरे पति के माध्यम से अपने पैसे क्यों लेते थे, क्या अब मेरे पति जो 2 साल में रिटायर हो जाने वाले थे, क्या उन्हें रिटायरमेंट में मिलने वाला पैसा मिल पाएगा? क्या जितने दिन वह जेल में रहेंगे उनकी सैलरी उन्हें कहां से मिलेगी, समाज में जो हमारी बदनामी हो रही है उसका जिम्मेदार कौन है क्या इन सभी नुकसान की भरपाई बड़े साहब करेंगे…यदि मामले में सच कहा जाए तो उनका कहना भी गलत नहीं है यदि उन्हें काला धन लेना था तो डायरेक्ट लेते अपना तो ईमानदार बने रहते हैं और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को ढाल बनाकर अपना पूरा काम करते रहते हैं, सूत्रों की यदि मन तो आगे चलकर इस विषय पर बड़ा हंगामा खड़ा होने के संकेत दिख रहे हैं।
फर्जी एस्टीमेट बनाकर लगभग 25-26 करोड रुपए का बड़ा घोटाला:सूत्र
पूरे चिरमिरी क्षेत्र में दो लाख रुपए तक के फर्जी एस्टीमेट बनाकर लगभग 25 से 26 करोड रुपए का बड़ा घोटाला करने वाले अधिकारी और ठेकेदार इन दिनों शेर बने घूम रहे हैं विभाग के कुछ चर्चित अधिकारियों के करीबी ठेकेदार इन दिनों अपने कार्यालय में जाने से भी कतरा रहे हैं, एसईसीएल दफ्तर में एसीबी की कार्रवाई के बाद नहीं दिख रहे हैं, हर एक ओवर शियर के पीछे एक ठेकेदार जोक की तरह चिपका रहता था। दिन भर और देर रात तक महाप्रबंधक उक्त कार्यालय को अपना चारागाह मानने वाले कई ठेकेदार क्षेत्र से फरार है, सभी के चेहरे में बड़ी विरानी देखी जा रही है चिरमिरी क्षेत्र के इन दफ्तरों में कई दर्जन फायदे ऐसी भी हैं जिनका भुगतान पिछले चार-पांच वर्षों से नहीं किया गया है उसकी मूल वजह है कि ठेकेदार और सप्लायर इनके कमीशन खोरी वाले वाले कार्यों में इनका सहयोग नहीं कर रहा है इसी वजह से उन फाइलों में कुछ ना कुछ कमी बात कर पिछले चार-पांच सालों से उक्त फाइल को कभी घुमा दिया जाता है और यदि फाइलो को पुनः कंप्लीट कर दी जाती है तो उन में दर्जनों कमी निकालकर उसे पेंडिंग रखने का खेल खेला जा रहा है इस दफ्तर के महाप्रबंधक यदि ईमानदारी से अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करते तो शायद ठेकेदार और सप्लायर परेशान नहीं रहते।
सतर्कता जागरूकता सप्ताह सिर्फ अपचारिकता?
सतर्कता जागरूकता सप्ताह में जिम्मेदार अधिकारी को इस बात का भी हिसाब किताब मांगा जाना चाहिए कि आपके दफ्तर में कितनी फाइलें कितने वर्षों से पेंडिंग है और पेंडिंग रहने की वजह क्या है क्या किसी ठेकेदार और सप्लायर का चार-चार-पांच वर्षों तक पैसा नहीं दिए जाने पर विजिलेंस किसी तरह की कार्रवाई करता है और यदि नहीं करता है तो फिर सतर्कता विभाग ईमानदार नहीं है। देशभर में संचालित रत्न और मिनी रत्न कंपनियां में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सीवीसी दिल्ली के द्वारा कंपनी स्तर पर चीफ विजिलेंस ऑफिसर की नियुक्ति कर इन पçलक सेक्टर की कंपनियों पर उगाही ना हो इसके लिए इन विभागों को बड़ी मजबूती से सक्रिय किया गया था,और इन्हें पावरफुल भी बनाया गया है किंतु दुर्भाग्य वस इन विभागों में जमे भ्रष्ट अधिकारी भी भ्रष्टाचार के दलदल में समा गए और अपने मूल काम से भटक गए हैं,देश को आगे बढ़ाना है तो भ्रष्टाचार को मिटाना है” जैसे नारे देकर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड चिरमिरी क्षेत्र के सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2024 का आयोजन 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक क्षेत्रीय मुख्यालय में स्थित तानसेन भवन में संपन्न कराया गया था, “सत्य निष्ठा की संस्कृति से राष्ट्र की समृद्धि” का दंभ भरने वाले भ्रष्ट अधिकारी और लिपिकों को झूठी शपथ दी लाकर महज़ इस पूरे कार्यक्रम का मजाक बनाकर रख दिया गया है, सी वी सी दिल्ली को ऐसे महज जिम्मेदारी वाले कार्य कर्मो को फॉर्मेलिटी और मजाक बना कर करने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्य वाही किए जाने की आवश्यकता है ताकि भ्रष्टाचार जागरूकता वाले आयोजनों को महज़ मज़ाक ना समझा जाए।