बच्चों की शिक्षा को संवारने के लिए शिक्षक दिनेश ने की अनोखी पहल
-अनिल मानिकपुरी-
अंबिकापुर,29 नवंबर 2024 घटती घटना। शिक्षा बहुत जरूरी है,पर कई बार ऐसी परिस्थिति आ जाती हैं कि बच्चे कम उम्र में ही शिक्षा से वंचित होने का दंस झेलने लगते हैं। आर्थिक स्थितियों व परिस्थिति भी उन्हें शिक्षा से दूर कर देती है। पर यदि सही समय पर किसी की सलाह मिल जाए, सहयोग मिल जाए,तो ऐसे लोगों का जीवन संवर सकता है। कुछ ऐसा ही कार्य शिक्षक दिनेश मिश्रा ने कर दिखाया। दो ऐसे बच्चों को उन्होंने फिर से स्कूल में अध्ययन कराने का प्रयास किया, जो अपने घरेलू परिस्थितियों की वजह से सालों से शिक्षा से दूरी बना लिए थे।
हम बात कर रहे हैं सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत मुडेसा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के छठवीं कक्षा के दो बच्चों की निरंतर शाला से अनुपस्थित रहने पर वे शाला त्यागी हो चुके थे, आपको बता दें कि वहां पदस्थ शिक्षक दिनेश मिश्रा ने बताया कि हमारे शाला में कुमारी बबिता और कुमारी भारती सिंह लगातार लगभग एक माह से अनुपस्थित रह रही थी। जिसे पता करने पर पता चला कि बबीता सिंह की मां की मृत्यु कुछ दिन पहले हो चुकी, उसके घर में और कोई नहीं है,घर का पूरा जिम्मा बबीता के ऊपर था,इसी वजह से स्कूल में लगातार अनुपस्थित रहती रही,वही हम बात करें मुडेसा की छात्रा कुमारी भारती राजवाड़े के पिता का अचानक अकाल मृत्यु हो गई, जिससे भारती राजवाड़े की जिम्मे पर पूरा घर का देखा होना पाया गया, जिसके कारण वह भी अपने स्कूल से काफी दिनों तक अनुपस्थित रह रही थी। और वह भी शाला त्यागी चुकी थी। श्री मिश्रा का कहना है कि मेरे काफी प्रयास और बार-बार घर में जाकर दोनों बच्चे को समझा बुझाकर उनको फिर से स्कूल में दाखिल करवाया गया है,अब वह दोनों बच्चे निरंतर अपने स्कूल में शिक्षा का लाभ ले रही है। मिश्रा का कहना है कि हर कोई शिक्षक इस तरह से और भी स्कूल में बच्चे अनुपस्थित अगर पाए जाते हो तो वहां के जो भी शिक्षक हैं उन बच्चों के ऊपर विशेष ध्यान देकर विशेष पहल करे, ताकि उस बच्चे का भविष्य फिर से संवरने लगे और बच्चे अच्छा शिक्षा प्राप्त कर सके।
वास्तव में शिक्षा के अलग जगाने वाले शिक्षक यदि तन मन धन से चाह ले तो समाज में कोई भी बालक बालिका शिक्षा से वंचित नहीं रह सकते।