चिरमिरी,@मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय में एसीबी के छापामार कार्रवाई के बादभ्रष्टाचार में लिप्त सभी अधिकारी दहशत में…

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-रवि सिंह-
चिरमिरी,26 नवम्बर 2024 (घटती-घटना)। मुख्य महाप्रबंधक के दफ्तर में चल रहे भ्रष्टाचार में एसीबी के कार्यवाही से एक निजी सहायक एवं-एक उप अभियंता के रूप में दो कड़ी क्या टूटी…पूरा दफ्तर का चैन सिस्टम ही चरमरा गया है, पूरे कार्यालय में वीरानी छाई हुई है सहकर्मियों के चेहरे में गजब का भय का माहौल झलक रहा है..सभी दहशत में है और हर एक आधिकारीयो कर्मचारियों को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं जांच में यदि एसीबी तहतक जाती है तो उनका नाम ना उजागर हो जाए…कार्यवाही की कड़ी में एसीबी के अधिकारी उनके घर और दफ्तर में दस्तक ना दें दें…दोनों आरोपियो में कोई अपने सहकर्मियों में किसी का नाम ना कबूल दे, इस बात को लेकर पूरा महकमा डरा हुआ है माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट झलक रही हैं, दो लाख का बंदर बाट चर्चा का विषय बना हुआ है सभी अपने अपने बचने के फिराक में है कई जिम्मेदार अधिकारी तो छुट्टी लेकर अपने घरों में आराम कर रहे हैं कुछ ने तो बीमारी का बहाना बनाकर इलाका ही छोड़ दिया है सिविल सहित जी एम के कार्यालय में बड़ी विरानी है सिविल इंएडम एवं सर्वे विभाग के अधिकारी बड़े भयभीत हैं और फाइलों को इधर-उधर करने का सिलसिला बदस्तूर जारी है खबर यह भी है कि कुछ फाइलों को रात के अंधेरों में जलाया भी जा रहा है।
उल्लेखनीय रहे की साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के चिरमिरी दफ्तर में पिछले 10-11 वर्षों से जिस तरह से अधिकारियों और ठेकेदारों सप्लायरों ने मिलकर कंपनी को लूटा गया है, इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग मुख्य महाप्रबंधक के एडमिस्ट्रेटिव एप्रूवल (प्रशासकीय स्वीकृति) एवं फाइनल एप्रूवल (अंतिम अनुमोदन) पर लगभग सिविल विभाग ई अंडम एवं सर्वे विभाग से दो दो लाख रुपए के छोटे-छोटे फर्जी वर्क आर्डर फाइल बनाकर लगभग 25-30 करोड रुपए का बंदर बाट किया गया है ठेकेदार,सप्लायर और अधिकारी ने अपने हिस्से का 50-50 परसेंट की पार्टनरशिप पर डाका डाला है, चिरमिरी के इतिहास में ऐसी लूट शायद ही इससे पहले कभी हुईं हो कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों ने ठेकेदारों से मिलकर फर्जी फाइलें बनाकर पूरे चिरमिरी क्षेत्र को खोखला कर डाला है, जिसकी जांच नितांत आवश्यक है, इस पूरे फर्जी वाडे में शामिल हर व्यक्ति दहशत में है एंटी करप्शन यूरो अंबिकापुर के अधिकारियों के छापा मार कार्रवाई करने के बाद सभी को यह डर सता रहा है कि कही इन 2 लाख वाली फाईलो कि परते यदि खुलने लगी तो शायद उनका भी बचपाना संभव नहीं होगा, फाइलों को जलाने और फाइलों को गोल करने का सिलसिला पिछले एक सप्ताह से पूरे दफ्तर में चल रहा है।
जिम्मेदारो ने भ्रष्टाचार कर चिरमिरी एरिया को खोखला किया
कोयला उत्खनन और दोहन के उपरांत क्षेत्र की बंद हो रही कोयला खदानों से क्षेत्र का बुरा हाल तो हुआ है यह सत्य है लेकिन उसे बुरे हाल से और बदत्तर बनाने में एसईसीएल चिरमिरी में पदस्थ सभी जिम्मेदार अधिकारी जिस तरह से भ्रष्टाचार कर चिरमिरी एरिया को खोखला और बर्बाद करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है क्षेत्र के लोग उन्हें कभी भी माफ नहीं करेगे उनके भ्रष्टाचार की परतें बहुत बड़ी हैं सीबीआई सहित एंटी करप्शन यूरो के अधिकारी यदि इसमें क्रमबद्ध तरीके से जांच करेंगे तो और भी बड़े-बड़े भ्रष्टाचार उजागर किए जाएंगे अगले समाचार में इन दोनों भ्रष्टाचारी अधिकारियों सहित अन्य भ्रष्टाचारी अधिकारियों की क्रमशः और भी जानकारियां हमारे द्वारा प्रकाशित की जाएंगे।
मैनुअल टेंडर में होता है खेल
विदित हो कि चिरमिरी क्षेत्र में 2010-11 तक 10 लाख रुपए के मैनुअल टेंडर हुआ करते थे, इसमें भी स्थानीय स्तर पर भ्रष्ट अधिकारियों के भ्रष्ट आचरण के कारण खूब भ्रष्टाचार हुआ जिस पर कंपनी के क्षेत्र अंतर्गत कार्य करने वाले विजिलेंस ने इस मैन्युअल टेंडर पद्धति की राशि को 5 लाख कर दिया था, और सोचा था कि शायद भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा, किंतु उसे पर कोई बदलाव न होता देख इन्होंने वर्ष 2013-14 के उसे राशि को कम कर दो लाख रुपए कर दी थी और दो लाख के मैनुअल टेंडर होने लगे, जिसमें यह शर्त रखा गया कि उसे एसईसीएल की साइड पर प्रकाशन करना होगा और ठेकेदारों सप्लायरों को क्षेत्रीय कार्यालय से टेंडर डॉक्युमेंट आवेदन देकर इशू कराना होगा, भ्रष्टाचार में पूरी तरह से डूबे शातिर अधिकारियों ने इसमें भी अपना काली कमाई कमाने का नया रास्ता ढूंढ़ निकाला, जिसमें अभियंता संजय सिंह, ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी इसी शातिर व्यक्ति ने इस 25 से 30 करोड रुपए के लूट में अपने चाहतों को टेंडर फॉर्म बांटता था और 50-50 की पार्टनरशिप में ठेकेदारों और सप्लायरों से पैसा वसूल कर अपने ऊपर के अधिकारियों को पैसा पहुंचाता था, पिछले 15 वर्षों से लगातार चिरमिरी क्षेत्र में ही यह जमा हुआ है, सभी महाप्रबंधकों का गरीबी बने रहने का इसमें गजब का गुण विद्यमान है।
ट्रांसफर बैकुंठपुर क्षेत्र में किया गया था लेकिन मुख्य महाप्रबंधक के आशीर्वाद से ओवरसीयर रिलीज नहीं हुए
इन 14-15 वर्षों में जो भी महाप्रबंधक यहां पर कार्यरत थे उनकी चड्डी से लेकर जैकेट तक की व्यवस्था इसी के जि़म्मेदारी में हुआ करती है,यही वजह थी कि इसे एक ही स्थान पर जमाए रखा गया ऐसा नहीं है कि इसका ट्रांसफर नहीं किया गया नियमों के तहत एरिया स्तर में कहीं ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिम्मेदार अधिकारियों के आंख में धूल झोंकते हुए उसे फिर मुख्यालय में अटैच कर दिया जाता था इसकी शिकायतें हमेशा होती भी रही हैं लेकिन कोई भी माइ का लाल इसका बाल बांका नहीं कर सका,अभी इसका ट्रांसफर बैकुंठपुर क्षेत्र में किया गया था लेकिन मुख्य महाप्रबंधक के आशीर्वाद प्राप्त यह सेवक ओवरसीयर रिलीज नहीं किया गया, इसके साथ कार्यरत और भी ओवर शियर चिरमिरी क्षेत्र में कार्यरत थे लेकिन दिन-रात जितना यह दौड़ भाग करता हुआ परेशान रहता था उतना किसी भी ओवर शियर को परेशान नहीं देखा गया यह सुबह 6ः00 बजे से मुख्य महाप्रबंधक के दरवाजे देखने को मिल जाता था और रात 11ः00 तक अधिकारियों की सेवा में व्यस्त रहता था बताया जाता है कि एंटी करप्शन यूरो की कार्रवाई के दौरान भी यह सतर्कता जागरूकता का एक कार्यक्रम जो उसे समय चल रहा था के खर्च और मैनेज की जिम्मेदारी भी इसी की थी, उन्हें सभी व्यवस्थाओं को मैनेज करने में या व्यस्त था इसी दौरान एसीबी की टीम में से धर दबोचा, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों अधिकारियों पत्रकारों को यह मैनेज करते देखा जा सकता था, किसी पान ठेले चाय दुकान सहित मदिरा दुकानों के इर्द-गिर्द यह मंडराते रहता था, जो जिस स्तर का था उसे उसे तरह से मैनेज करना इसकी जिम्मेदारी सी बन गई थी कुल मिलाकर इसकी पर्सनालिटी और चापलूसी के गुण ने इसे आज इस स्तर में लाकर खड़ा कर दिया है।
पिछले 20-25 सालों से एक ही कुर्सी पर
मुख्य महाप्रबंधक का निजी सचिव श्रीनिवासन भी पिछले 20-25 सालों से एक ही कुर्सी पर जमा हुआ था इसके ऊपर भी बड़े गंभीर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं कथित तौर पर क्षेत्र में बड़े साहब के खजांची के नाम से मशहूर श्रीनिवासन बड़े साहब के हिस्से का पैसा यही लेता था और सभी काले पीले सफेद कार्यों की मध्यसता भी यही करता था श्यामली गेस्ट हाउस की जिम्मेदारी इसी के हाथ में रहती थी वहां के खाना किराना एवं अन्य आवश्यक मेंटेनेंस कार्य यही करवाता था रेस्ट हाउस का खर्च भी साल में कई लाख रुपए होते थे जिसमें फर्जी बिल के आधार पर इसके द्वारा काफी निकासी की गई है और बड़े साहब के मध्यस्ता की फीस भी इसकी काफी बड़ी थी यदि किसी काम को लाइजनिंग करता था तो 2 प्रतिशत यह भी लेता था, उसके बाद ही किसी फाइल में हाथ लगाता था ठेकेदारों के मुताबिक अगर इसके हिस्से का 1000 से नहीं दिया गया तो कई महीनो तक लाखों रुपए की फाइल गायब कर देता था और जानबूझकर के मुख्य महाप्रबंधक के हस्ताक्षर नहीं करवाता था आधे लोगों को यही भ्रमित करके रखता था कुछ महाप्रबंधक काफी सकारात्मक दृष्टिकोण के भी थे जो क्षेत्र का उत्थान करना चाहते थे लेकिन यह उन्हें डाइवर्ट करता था इससे भी क्षेत्र के लोग काफी त्रस्त थे और इसका व्यवहार भी बड़ा अकडू और अहंकारी था, खबर यह भी है कि यह अपनी पारिवारिक सदस्यों के नाम पर विभिन्न प्रकार के इन्वेस्टमेंट कंपनियों का एजेंट बंन कर सप्लायरों ठेकेदारों और अधिकारियों को धमका कर पैसे भी इन्वेस्टमेंट करवाता है और नहीं करने पर उनका नुकसान करने का धमकी देता था खजांची साहब के नाम से मशहूर यह निजी सचिव अपने आप को मुख्य महाप्रबंधक से काम नहीं समझता था सूत्रों के मुताबिक यह करोड़ों का स्वामी है बिलासपुर सहित अन्य स्थानों पर इसकी कई जमीने है जिसकी जांच नितांत आवश्यक है और यदि एसीबी इससे कड़ाई से पूछताछ करती है तो काफी भ्रष्टाचार उजागर हो सकते हैं।


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