मनेंद्रगढ़/रायपुर@क्या स्वास्थ्य मंत्री की नजर से बच कर डॉ सुरेश तिवारी बने प्रभारी संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं जिला बिलासपुर?

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-रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़/रायपुर 23 नवम्बर 2024 (घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़ के सर्जन डॉक्टर सुरेश तिवारी कितने रसूखदार हैं यह किसी से छुपा नहीं है,पुरानी सरकार में उनके खिलाफ कितना विरोध प्रदर्शन हुआ था यह भी किसी से छुपा नहीं है वहीं तब खुद कांग्रेस विधायक डॉक्टर सुरेश तिवारी के विरोध को कुचलने नगर पालिका मनेंद्रगढ़ पहुंचे थे जहां निर्वाचित पार्षदों से उन्होंने माफी मंगवाया था कांग्रेस के वह भी सरेआम बैठक करके वह भी उसका वीडियो भी वायरल किया और जताया कि सुरेश तिवारी के सामने कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों की भी औकात कुछ नहीं शून्य है और पूर्व विधायक उनके बहुत बड़े समर्थक थे जो उन्हें बचाकर तबसे रखा था अब वर्तमान विधायक व कैबिनेट मंत्री के आंखों से बचकर डॉ सुरेश तिवारी प्रभारी संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं जिला बिलासपुर की जिम्मेदारी ले लिए हैं जैसे ही यह सूची सामने आई पूरे मनेंद्रगढ़ शहर में इस बात की चर्चा तेज हो गई क्योंकि किसी को भी विश्वास नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है, क्या वर्तमान सरकार में भी इनका जलवा जलाल है? पूर्व विधायक तो उनके कायल थे ही पर यह उम्मीद नहीं थी कि वर्तमान विधायक भी उनके कायल हो जाएंगे वैसे सूत्रों का कहना है कि नजरों से बचकर निकल गए हैं विधायक की। सूची आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री को भी इस मामले में संज्ञान लेना होगा और विचार करना होगा क्योंकि यह उनके छवि से जुड़ा मामला बन सकता है विपक्ष निशाना साध सकता है। सुरेश तिवारी उन डॉक्टरों में से हैं जो सेवा क्षेत्र को व्यापार क्षेत्र बनाने के लिए जीवन भर काम करते रहे हैं। सर्जन बतौर मिली जिम्मेदारी को उन्होंने जो उन्हें निशुल्क लोगों को प्रदान करनी थी वह शुक्ल सहित प्रदान करने वाले एक सेवा क्षेत्र के चिकित्सक थे और जो शासकीय अस्पताल में भी भर्ती मरीज से शुल्क लिया करते थे और जिसके कई मामले सामने आए थे।
वैसे सुरेश तिवारी को लेकर लोगों की सहानुभूति कभी सामने नहीं आई और उन्हें हमेशा यह माना गया कि वह लाभ के लिए ही मात्र इस क्षेत्र से जुड़े रहे और पहले बीएमओ का पद लेकर विभाग को काफी उन्होंने स्वार्थ सिद्धि के लिए उपयोग किया वहीं जब जिला की जिम्मेदारी मिली तब भी वह यही करते रहे और सेवा क्षेत्र को उन्होंने पेशा व्यापार क्षेत्र बना दिया। मनेंद्रगढ़ में चिकित्सा क्षेत्र में निजी हस्तक्षेप बढ़ने का कारण भी इन्हें ही माना जाता है और इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान निजी संस्थाओं को काफी उपकृत किया यह किसी से छिपा भी नहीं है। वैसे कांग्रेस शासनकाल के यह सबसे स्वतंत्र जिला अधिकारियों में शामिल रहे स्वास्थ्य क्षेत्र के जिन्हे हर तरह की छूट प्राप्त थी मनमानी की। अब भाजपा शासनकाल में भी इनकी पदोन्नति को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं कि यह कैसे संभव हुआ क्योंकि सुरेश तिवारी कम से कम भाजपा शासनकाल में उपकृत होंगे यह नहीं माना जा रहा था क्योंकि इनसे भाजपा का जुड़ाव भाजपा के लिए फायदेमंद नहीं होगा यह माना जाता है। सुरेश तिवारी की लंबी छलांग को लेकर चर्चा जारी है और उन्हें काफी जुगाड़ू माना जा रहा है कि उन्होंने भाजपा में भी जुगाड लगा किया वहीं जब कांग्रेस की सरकार थी तब वह तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के घर तक जाकर जी हुजूरी कर आते थे वहीं अब उन्होंने कहां से जुगाड लगाया यह चर्चा भी सुनी जा रही है।


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