सूरजपुर@क्या प्रशासन का रुख कबाड़ी व हत्यारे के लिए नरम पड़ रहा है?

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सूरजपुर जिले के दोहरा हत्याकांड मामले का आरोपी कुलदीप

सूरजपुर जिले के दोहरा हत्याकांड मामले का आरोपी कुलदीप

-समरोज खान-
सूरजपुर 14 नवम्बर 2024 (घटती-घटना)। 13 अक्टूबर 2024 को घटित दोहरे हत्याकांड मामले को एक महीने होने वाला है जिस दिन यह मामला घटित हुआ था उस दिन से लेकर पूरे 30 दिन अलग-अलग माहौल में परिवर्तन हो रहे थे, जिस दिन घटना घटी उस दिन सहानुभूति कहा जाए तो प्रधान आरक्षक की पत्नी व मासूम बेटी की हत्या सभी को झिंझौड़ कर रख दी थी, इससे पूरा प्रदेश इस घटना से असहमत था तरह-तरह की बातें हो रही थी, आरोपियों के एनकाउंटर करने की मांग भी हो रही थी, तमाम तरीके से लोगों का विरोध उबाल मार रहा था, शहर जल रहा था, 13 अक्टूबर से लेकर 16 अक्टूबर २०२४ तक के हालत पूरी तरीके से खराब हो चुके थे,घटना के पहले दिन सिर्फ एक ही मांग थी आरोपी की हत्या व एनकाउंटर जिसमें पुलिस असफल रही, पर वही कुछ दिन बाद छत्तीसगढ़ में एनकाउंटर की बात भिलाई जिले में सुनने को मिली, इन दोनों मामले को लेकर सिर्फ एक ही बात आज भी लोगों के जहन में है क्या एनकाउंटर का फैसला किसी षड्यंत्र व बड़ी डील के तहत टला था? जब छत्तीसगढ़ में एनकाउंटर प्रथा नहीं है तो फिर दुर्ग में एनकाउंटर की कहानी कैसे रची गई? इस मामले में एक दूसरे पहलू को भी देखा जाए तो जैसे-जैसे समय बीत रहा वैसे-वैसे मामला सिर्फ पुलिस के फाइलों में व सही विवेचना पर आधारित हो गया है, अब प्रधान आरक्षक की बेटी व पत्नी के हत्यारे को सजा सिर्फ अब पुलिस की मजबूत विवेचना व सबूत ही दिला सकते हैं। यह घटना अब धीरे-धीरे समय के साथ लोगों के दिमाग से निकलता जा रहा है, सामान्य दिनों की तरह अब सब चीज होती जा रही है, पर यदि देखा जाए तो सामान्य किसी के लिए नहीं है तो वह है सूरजपुर के प्रधान आरक्षक के लिए, क्योंकि उसके लिए सामान्य होना शायद अभी मुमकिन नहीं। पर वही जिस अवैध कारोबारी के घर का लड़का ऐसे कृत को अंजाम दिया वह परिवार धीरे-धीरे कार्यवाहियों के बाद फिर से अपना पैर पसार रहा है, तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद भी कबाड़ के काम को अंदर खाने से किया जा रहा है, जहां तोड़फोड़ हुई थी उसे फिर से कबाड़ी की घर की महिलाओं के द्वारा संरक्षित किया जा रहा है, जिस कबाड़ की जप्ती होनी थी, वह सब कबाड़ बेचा जा रहा है आखिर इतने बड़े कृत्य के बाद भी इतना बड़ा साहस आरोपी के परिवार के द्वारा कैसे किया जा रहा है? क्या ऊपर से कोई अदृश्य शक्तियां इनके लिए काम कर रही हैं या फिर समाज का वोट बैंक का राजनीति इन्हें मदद कर रहा है? जबकि जिस घर की बात की जा रही है उस घर के आरोपियों द्वारा समाज के ही कई लोगों को प्रताडि़त किया है।
अवैध कारोबार में पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल
कबाड़ी के परिवार की महिलाएं भी अवैध कारोबार में पीछे नहीं हैं,बताया जाता है कि वह पुरुषों के साथ ही शामिल हैं व्यवसाय में। जब सभी पुरुष जेल में हैं तब भी व्यापार जारी कबाड़ी परिवार का। अतिक्रमण वाली जमीन पर पुनः कजा महिलाएं ही कर रही हैं।
पक्ष-विपक्ष दोनों मामले में अब मौन, मामला क्या 27 प्रतिशत वाला
पूरे मामले में पक्ष विपक्ष दोनों मौन हैं। कांग्रेस जहां इसलिए भी मौन है क्योंकि सभी पकड़े गए आरोपी उसके सक्रिय और महत्वपूर्ण पदों के पदाधिकारी हैं वहीं भाजपा इसलिए क्योंकि सत्ता में रहकर वह ज्यादा बयान कैसे दे विरोध में। वैसे विरोध का काम कांग्रेस का होना चाहिए था और जिस तरह सत्ता रहते वह अन्य प्रदेशों में जाकर हत्या मामलों में वहां की गैर कांग्रेसी सरकारों को घेरते थे वैसे ही यहां घेरना चाहिए था। वैसे मामला 27 प्रतिशत वाले मामले से जुड़ा है यह भी अब लोग कहने लगे हैं।
वन भूमि पर कब्जा हटाने का नोटिस सिर्फ हुआ जारी…कार्यवाही ठंडे बस्ते में
कबाड़ी के वन भूमि पर किए गए कब्जे को हटाने भी नोटिस जारी हुआ था। बताया जा रहा है कि कबाड़ी का बेटा यहीं से अपनी रणनीति तैयार करता था गुंडागर्दी की और यही से उसका आतंक शुरू होता था बैठकी उसकी यहीं होती थी जो वन भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया गया भवन था जिसे नेस्तनाबूत करने नोटिस चस्पा हो चुका था और लग रहा था अब वह नेस्तनाबूत हो जाएगा लेकिन अब प्रशासन की ढिलाई कहें या उसकी तरफ से नजरअंदाज करना मामले को अब नहीं लगता वह भवन टूटेगा और कबाड़ी का अतिक्रमण अवैध वन भूमि से हटेगा,कुल मिलाकर लगता है कुछ न कुछ अंदरूनी मामला सेट हो चुका है जिसकी चर्चा है।
क्यों लोगों को लग रहा की प्रधान आरक्षक के पत्नी व बेटी का हत्यारा बच जाएगा?
सूरजपुर जिले के दोहरा हत्याकांड मामले में भले ही आरोपी सलाखों को पीछे पर पुलिस परिवार के साथ आरोपी ने जिस क्रूरता के साथ मानवता की हत्या की उसके बाद सभी को यह लगना चाहिए कि हत्यारे को सजा मिल जाएगी पर इस समय जो चर्चा का विषय है वह यह है कि हत्यारा बच निकलेगा, अब ऐसी धारणा लोगों के अंदर कैसे आ गई है? क्यों ऐसा सोच रहे हैं यह तो बड़ा विषय है? इस विषय पर यह हमने मंथन करने का प्रयास किया तो ऐसा लगा कि लोगों को पुलिस की कार्यवाही पर विश्वास नहीं है, दूसरा जो पहलू समझ में आया कि काफी पैसे वाले व्यक्ति है पैसे के प्रभाव में बच निकलेगा, तीसरा पहलू लोगों को यह लग रहा है कि पुलिस के पास कोई गवाह नहीं है। कहीं ना कहीं आम जनता पुलिस के अब तक के कार्यवाहियों से यह समझ चुकी है कि पुलिस की कार्यवाही सजा दिलाने में काम बचाने में ज्यादा देखी जाती है, इसी वजह से कुलदीप के बचने की आशंका उन्हें सता रही है, लोगों को कुलदीप के प्रति सहानुभूति नहीं पर उसे सजा मिले यह भी वह चाहते हैं पर उन्हें सिस्टम पर भरोसा नहीं हैं।
पट्टा ढाई डिसमिल का पर कब्जा कई डिसमिल में
जब आरोपी व कबाडि़यों के अवैध घर पर कार्यवाही हो रही थी, वह कार्यवाही पूरी हो भी नहीं पाई थी और प्रशासन का बुलडोजर रुक गया था, सूत्रों की माने तो प्रशासन को यह बताया गया था कि जो बचा है उसका पट्टा है पर वही सूत्र बताते हैं कि पट्टा सिर्फ ढाई डिसमिल का है पर कब्जा कई डिसमिल में था फिर भी न जाने किस बड़ी हस्ती का फोन आया था कि प्रशासन की कार्यवाही पट्टा होना बताकर रोक दी गई थी।
कबाड़ी के परिवार का पूरा पुरुष वर्ग जेल में फिर भी… अवैध जमीन व कारोबार को संरक्षित करने का प्रयास
सूरजपुर के कबाड़ी परिवार का पूरा पुरुष वर्ग जेल में है फिर भी अवैध जमीन और कारोबार को संरक्षित किया जा रहा है। यह काम घर की महिलाएं कर रही हैं यह बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ऐसा लग ही नहीं रहा है कि कबाड़ी का परिवार जेल में है, सब कुछ सामान्य सा चल रहा है और कबाड़ी का के परिवार के अन्य सदस्य सबकुछ संरक्षित करने में लगे हुए हैं वहीं प्रशासन भी अब मामले में ढील देता नजर आ रहा है और उसकी तरफ से कार्यवाही अब धीमी कहें या बंद नजर आ रही हैं।


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