-सोनू कश्यप-
प्रतापपुर,13 नवंबर 2024 (घटती-घटना)। छाीसगढ़ में नवंबर से धान मंडियों में खरीदी शुरू होने वाली है, लेकिन इसके पहले ही क्षेत्र में अवैध धान भंडारण और जमाखोरी का खेल चरम पर है। राइस मिलर्स और धान के दलाल हर साल करोड़ों का गोरखधंधा करते हैं, और प्रशासन की धीमी गति के कारण यह घोटाला बिना किसी रोक-टोक के फल-फूल रहा है। प्रतापपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध धान भंडारण किया जा रहा है, जिससे शासन-प्रशासन को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग…जनता में आक्रोश
स्थानीय लोगों और किसानों में इस अवैध धंधे को लेकर भारी आक्रोश है। उनका मानना है कि अगर प्रशासन इस पर समय रहते कार्रवाई करे, तो करोड़ों का यह घोटाला रोका जा सकता है। जनता ने प्रशासन से मांग की है कि एक साथ मिलर्स और कोचियों के ठिकानों पर बड़े स्तर पर छापेमारी की जाए ताकि इस अवैध धान भंडारण का भंडाफोड़ किया जा सके। अगर प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तो यह घोटाला हर साल बढ़ता ही जाएगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और किसानों के हितों को भारी नुकसान होगा। इस विषय में एसडीएम ललिता भगत ने कहा कि राजस्व विभाग, कृषि विभाग, मंडी विभाग के द्वारा, घर पकड़ कार्यवाही तथा सघन जांच की जाएगी तथा अवैध रूप से आ रहे धान को कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
राइस मिलर्स की साजिशः किसानों के खातों में फर्जी एंट्री से होता है खेल
सूत्रों के मुताबिक, बिहार, झारखंड और उार प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से राइस मिलर्स 1500-1600 रुपये प्रति मि्ंटल के दाम पर धान खरीदकर इसे अपने गोदामों में स्टॉक कर रहे हैं। इन मिलर्स ने कुछ किसानों और समितियों के प्रबंधकों के साथ मिलीभगत कर फर्जी तरीके से इस धान को किसानों के खातों में “कृषक धान” के तौर पर दिखाने का प्लान तैयार किया है, ताकि मंडी में समर्थन मूल्य पर इसे ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। इस तरह हर साल शासन को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
चेकपोस्ट पर भी भ्रष्टाचार,सीमाओं से अवैध धान की तस्करी आसान
अवैध धान तस्करी में चेकपोस्टों की भी बड़ी भूमिका है। चेकपोस्ट के कर्मचारियों और अधिकारियों पर आरोप हैं कि वे मोटी रिश्वत लेकर अवैध धान को बिना मंडी कटे आसानी से दूसरे राज्यों से लाने देते हैं। इस तस्करी के चलते अवैध धान धड़ल्ले से राज्य की सीमाओं में दाखिल हो रहा है। चेकपोस्ट पर कार्यरत लोग रिश्वत लेकर इस धान को बिना किसी जांच-पड़ताल के अंदर आने देते हैं, जिससे ये गोरखधंधा हर साल और फैलता जा रहा है।
मंडी विभाग की उदासीनता और मिलीभगत से फल-फूल रहा अवैध धंधा
कई सालों से मंडी विभाग के अधिकारियों पर भी इस अवैध धंधे में संलिप्तता के आरोप लगे हैं। जानकारों का कहना है कि मंडी विभाग को अवैध धान की इस बिक्री की पूरी जानकारी है, लेकिन अधिकारी रिश्वत के बदले आंखें मूंदे रहते हैं। शिकायतों के बावजूद बड़ी कार्रवाई न होने के कारण इस गोरखधंधे में प्रशासन के बड़े अधिकारियों की भी संलिप्तता मानी जा रही है।
