- एक और बाघ की मौत के बाद वन विभाग की जिम्मेदारियों की खुली पोल
- कोरिया वन मंडल क्षेत्र में हुई बाघ की मौत,क्या अफसरों की लापरवाही का नतीजा?
- राज्योत्सव में सेवा सत्कार में मुख्यालय में डटे रहे अधिकारी,नही थी बाघ के विचरण की जानकारी?
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,09 नवम्बर 2024 (घटती-घटना)। वन विभाग के पास यदि कोई सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है तो वह है जंगल व जंगल के जीव जंतु को सुरक्षित व संरक्षित करना पर क्या आज के समय में यह काम वन विभाग या उसका अमला ईमानदारी से कर पा रहा है? आज यह सवाल इसलिए उत्पन्न हो रहे हैं क्योंकि ना तो जंगल बच रहे हैं और ना जंगल में रहने वाले जीव जंतु, यहां राष्ट्रीय उद्यान से लेकर वन मंडल क्षेत्र में ना तो जंगल सुरक्षित है और ना ही जीव जंतु, हर साल जंगल से पेड़ काट दिए जाते हैं तो वही जंगली जानवरों के भी मौत की खबरें आती रहती हैं, पेड़ तो शहरी क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्र में वन क्षेत्र में कटना आम ही हो गया है, वहीं एक बार फिर बाघ के मरने की खबर ने वन विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है, कुछ दिन पहले बाघ के देखे जाने पर वन विभाग ने काफी तत्परता दिखाई थी और उसकी गतिविधियों पर विचरण कर रहे बाघ पर वन विभाग की पूरी नजर है यह विभाग ने दावा भी किया था, पर अचानक वही एक महीने के अंदर ही बाघ के मरने की खबर भी आ गई, अब यह कौन सा बाघ मरा है जो दिखा था वह मरा है या फिर कोई अन्य बाघ मर गया है? अब यह तो जांच उपरांत ही पता चलेगा और बाग कैसे मरा यह भी जांच के बाद ही सामने आएगा। बाघ की मौत के बाद कई सवाल विभाग की ओर मुंह बाए खड़े हैं।
ज्ञात हो कि कोरिया जिले में एक और बाघ की मौत अफसरों की लापरवाही से हो गयी है। जबकि इसी इलाके में वर्ष 2018 व वर्ष 2022 में बाघ की मौत जहरखुरानी से हो चुकी थी फिर भी जिम्मेदार सतर्क नही हुए। बाघ के शव का पोस्टमार्टम देर शाम तक रायपुर व मध्यप्रदेश से आये अफसर व तीन सदस्यीय चिकित्सक की उपस्थिति में किये जाने की जानकारी है, वही कुछ अंग गायब होने की भी आशंका जताई जा रही हैं जहा अब लापरवाह जिम्मेदार अफसर पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही उसके मौत की सही वजह की जानकारी देने की बात कह रहे, जबकि बाघ की मौत ग्रामीणों के अनुसार तीन चार दिन पूर्व होने की बात कही जा रही, वही ग्रामीणों की माने तो बाघ की मौत दो तीन दिन पहले ही हो चुकी है किंतु इन्हें ही वन विभाग के जिम्मेदार फसा न दे इसलिए कोई भी कुछ कहना नही चाह रहे, परन्तु वन विभाग के कोरिया वन मंडल और गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के अफसरों को इसकी जानकारी तब हुई जब बाघ के शव से दुर्गंघ आने लगी व इसकी सूचना ग्रामीणों ने दी। वही सरगुजा वन वृत व सीसीएफ देर रात मौके पर पहुंच कर तस्दीक करते देखे गए। साथ ही मीडिया प्रतिनिधि को अंदर जाने की अनुमति नही होने का हवाला देकर रोक दिया गया।
जिम्मेदार नहीं रहते मुख्यालय में
गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान हो या कोरिया वन मंडल इनके ज्यादातर अधिकारी अपने मुख्यालय में नहीं रहते, सिर्फ निर्माण कार्यो में जेसीबी लेकर जंगल में पहुंचा करते है। दूसरी ओर संजय गांधी नेशनल पार्क लगे होने के कारण बाघों की आवाजाही लगातार बढ़ती जा रही है। परन्तु ना तो इससे अधिकारियों को कोई लेना देना है और ना कर्मचारियों को,जिसके कारण बाघों के विचरण की जानकारी किसी को नही रहती है,यही कारण है कि जब बाघ के शव से दुर्गध आने लगी तब विभाग को बाघ के मारे जाने की जानकारी मिल सकी।वही ग्रामीणों के अनुसार चार पाँच दिन से बाघ का शव उसी स्थान पर होने की बात कही जा रही जिससे वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी के मुख्यालय में नही रहने को लेकर सवाल उठना लाजमी हैं।
क्या दिवाली व राज्योत्सव में वन विभाग था व्यस्त?
वही बाघ की मौत तब हुई जब वन विभाग के जिम्मेदार वन की निगरानी के बजाय अपने मातहतों को लेकर राज्योत्सव में सेवा सत्कार में दो दिनों तक जमे रहे वही कर्मचारी मुख्यालय छोड़ दिवाली छुट्टियां मना रहे थे। वही इस बाघ के आने की कोई भी जानकारी राष्ट्रीय उद्यान गुरुघासीदास व कोरिया वन मंडल को नही थी जबकि कोरिया जिले में इनदिनों मध्यप्रदेश के संजय राष्ट्रीय उद्यान व बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से बाघों का आना जाना लगा हुआ है।
वीडियो व तस्वीर वायरल होने के बाद बाघ के मरने की जानकारी हुई
जानकारी के अनुसार 8 नवंबर शुक्रवार को दोपहर पश्चात सोशल मीडिया में बाघ की मौत की तस्वीरें वायरल हुई जिसके बाद कोरिया वन मंडल और गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के अफसर अपने अमले के साथ तीन बजे मौके पर पहुंचें,यहां पहुंचकर उन्होने बाघ के चारों ओर बेरिकेटिंग की और बाघ की मौत को लेकर रणनीति बनाते रहे, दोपहर की सूचना के बाद सरगुजा वन वृत के सीसीएफ 8 बजे रात घटना स्थल पहुंचें। इधर, बाघ की मौत को लेकर वन विभाग में हडकंप मचा हुआ है। वहीं अधिकारियों ने बताया कि बाघ के नाखून और मूंछें सही सलामत हैै,बाघ पूर्ण व्यस्क नर बाघ है, उसके पहले कोरिया वन मंडल और गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में आवाजाही का रिकार्ड नहीं है। जिससे साफ है कि कही ना कही विभाग बाघ के आने जाने विचरण के कार्य में लापरवाही बरत रहा है।
ऑरेंज एरिया में हुई बाघ की मौत
आजादी के बाद वन क्षेत्र के सीमांकन से छूटे क्षेत्र को ऑरेंज एरिया कहा जाता है,जहां बाघ की मौत हुई है वह ओरेंज एरिया है, हलांकि यह कोरिया वन मंडल के सोनहत वन सीमा में ही आता है,बैकुंठपुर से 80 किमी दूर स्थित ग्राम कटवार के पास निकलने वाले नाले के पास बाघ का शव पाया गया है। मौत के स्थान से लगभग 1 किमी की दूरी पर गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान शुरू हो जाता है। वही ग्रामीणों ने बाघ के आराम करने की वजह से घटना स्थल पर हमले के डर से जाना उचित नही समझा।
पूर्व में हो चुकी है दो बाघ की मौत
वर्ष 2022 में इसी क्षेत्र में गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के सोनहत रेंज में एक बाघिन की मौत हुई थी,स्थान था ग्राम सलगवांकला,जिसके बाद 4 लोगों को भैस के मांस में जहर देकर बाघ को मारे जाने की बात सामने आई थी और चारों पर विभाग ने कार्यवाही की थी, इसके पूर्व 2018 में इसी क्षेत्र के ग्राम सुकतरा में एक बाघ की मौत सामने आई थी, अब इसी क्षेत्र में बाघ के मारे जाने की तीसरी बड़ी घटना सामने आई है।
बाघ की निगरानी में लापरवाही
गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2019 में जब बाघ की आवाजाही की बात सामने आई थी तब बाघ के मल के सेम्पल से लेकर उसके पग मार्क को लेकर विभाग एलर्ट मोड पर रहता था, तब से बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ, अब भी पार्क क्षेत्र मे 7 से 8 बाघ विचरण कर रहे है। परन्तु अब ऐसा नहीं हो रहा है। कल जब विभाग के अधिकारी ने मैदानी अमले से बाघ के मूवमेंट को लेकर सवाल किया तो उसने कहा कि परसों की उसके मूवमेंट की जानकारी उसे थी, तब उसने मुनादी करने की बात कही, परन्तु जब उसके मल की जानकारी पर सवाल किया तो उसने चुप्पी साघ ली। मतलब साफ है वर्तमान में पूरे सरगुजा वन वृत का हाल बेहाल है। अधिकारियों की सुस्ती और लापरवाही के कारण लगातार बाघों की मौत हो रही है।