चल तू लक्ष्य का संधान कर
इस समय को बर्बाद मत कर
ये समय नहीं आएगा लौटकर
अपने सपने को जरा याद कर
चल तू लक्ष्य का संधान कर।
अपने हौसले को बुलंद कर
सब कुछ तुझे हासिल होगा
मेहनत पर जरा विश्वास कर
चल तू लक्ष्य का संधान कर।
किस बात का है तुझको ग़म
मंजिल की ओर बढ़ा कदम
लक्ष्य नहीं है तुमसे ज्यादा दूर
चल तू लक्ष्य का संधान कर।
मत बैठ हाथ में हाथ रखकर
चल उठ मंजिल की ओर बढ़
दुनिया को दिखा कुछ बनकर
चल तू लक्ष्य का संधान कर।
श्याम सुंदर साहू
राजिम,गरियाबंद,छत्तीसगढ़
