सूरजपुर@क्या अधिकारी ही नहीं चाहते कि उनके प्रधान आरक्षक की पत्नी और बेटी की हत्यारे को मृत्युदंड मिले?

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-समरोज खान-
सूरजपुर,22 अक्टूबर 2024 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में प्रधान आरक्षक की पत्नी व बेटी के हत्या मामले में एक सप्ताह हो गए,इसमें सभी आरोपी भी गिरफ्तार हो गए जेल भी चले गए,फिर भी लोगों को संतुष्टि नहीं है क्योंकि जो अपराध हुआ है वह अपराध काफी बड़ा है, किसी निर्दोष की जान जाना वह भी किसी कबाड़ी और अन्य अपराधियों के हाथ यह बड़ी विडंबना है,साथ ही ऐसे अपराध के लिए दंड कैसा होना चाहिए यह भी विचार योग्य है, वैसे ऐसे जघन्य अपराध के लिए मृत्युदंड ही होनी चाहिए लेकिन यदि मृत्युदंड ना हो तो फिर क्या हो? यह तो न्यायपालिका का अधिकार क्षेत्र है? फिर भी इस पर भी गहन चिंतन इसलिए हो रही है क्योंकि प्रावधानों के तहत ऐसे अपराध के लिए फांसी या मृत्युदंड जैसी सजा मिलनी चाहिए, पर क्या इस ओर काम हो रहा? इन अपराधियों को ऐसी सजा मिले जो मृत्युदंड या मृत्युदंड जैसी हो,जिसके लिए कड़ी जांच करवाई की जानी चाहिए थी या फिर उम्र कैद की सजा मिले इस पर उच्च अधिकारियों का ध्यान ज्यादा है, जहां पर लोग या खुद खाकी के बुद्धिजीवी व न्याय की बात से वास्ता रखने वाले इस पर मृत्युदंड की राय बता रहे हैं पर सूरजपुर कांड में आज भी एक ऐसा वर्ग है जो अपराधियों को सिर्फ उम्र कैद की सजा तक की बात अपने मुंह से कह रहा है,ऐसा लग रहा है की वरिष्ठ अधिकारियों को अपने ही अधीनस्थ कर्मचारी के पत्नी व बेटे के जघन्य हत्या पर अफसोस नहीं है या फिर उसके हत्यारे को न्यायिक रूप से मृत्युदंड मिले यह भी उनका प्रयास नहीं है? पूरे कहानी के पलटवार के बाद अब जो बात आ रही है वह बात है कि अपराधियों को उम्र कैद तक की अंतिम सजा सुनाई जाएगी, इस सोच के साथ कार्रवाई की जा रही है और जांच हो रही है और यह भी समय की बात है कि यह भी सजा उम्र कैद तक भी पहुंचेगी या फिर बीच में ही दम तोड़ देगी? अभी तो अपने कर्मचारियों को सांत्वना देने के लिए उम्र कैद की सजा मिले यह अधिकारी अपने मुख से कह रहे हैं। ऐसा लग रह कि अधिकारियों की सोच सहानुभूति अपने कर्मचारी के परिजनों के प्रति नहीं अपराधियों के प्रति ज्यादा दिख रही है, इसकी वजह क्या है यह तो अधिकारी ही जाने पर सूत्रों का यही मानना है कि अपराधियों को इतने बड़े अपराध के बाद भी आगे चलकर स्थानीय जेलों में ही रखकर वीआईपी ट्रीटमेंट मिलेगा और साथ ही उन्हें कई तरह के लाभ मिल सकते हैं, उन्हें उस तरह का दंड नहीं मिलेगा जिस दंड की अपेक्षा लोगों को थी, यहां तक की कठोर दंड मिले ही यह तो एक पति व बेटी का पिता चाह रहा होगा पर वह भी कहीं ना कहीं अपने अधिकारियों की सोच को समझ चुका है और वह भी अब जान चुका होगा कि अपने विभाग से यह उम्मीद करना कतई सही नहीं है।

सूरजपुर के नए पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर

एम आर अहिरे का हुआ तबादला प्रशांत कुमार ठाकुर होंगे सूरजपुर के नए पुलिस अधीक्षक अब देखना होगा कि सूरजपुर की कानून व्यवस्था कैसी होगी? तबादले को अभी तक कार्रवाई के नजरिए से देखा जा रहा है अब आगे देखना होगा कि नए पुलिस अधीक्षक इस पूरे मामले को कैसे हैंडल करते हैं।
चार अपराधों में 12 आरोपी जेल में बंद
सूरजपुर जिले में घटी दोहरे हत्याकांड के बाद इस हत्याकांड से संबंध रखने वाले साथ इस अपराध के पूर्व ही पुलिस के ही साथ या विरुद्ध कारीत किए गए अपराध में कुल 12 आरोपी जेल भेजे गए हैं।आरक्षक पर गर्म तेल फेंकने,आरक्षकों पर वाहन चढ़ा कर उनकी हत्या का प्रयास ,पुलिस पर फायरिंग कर उन पर प्राणघातक हमला करना सहित आरक्षक की पत्नी और पुत्री की हत्या कर उनके शवों को अन्यत्र ले जाकर फेंकने के कुल चार आरोप इन 12 लोगों पर दर्ज किए गए हैं। देखा जाए तो यह एक बड़ा गिरोह था है और जो एक बड़े अपराध का कारण बन गया जिसे संरक्षण मिलना ही इतने बड़े अपराध की वजह बनी। वैसे ऐसे आरोपियों के लिए एक किसी बड़े दंड का प्रावधान और उसके लिए आधार पुलिस को तैयार करना चाहिए जिससे एक नजीर और एक उदाहरण प्रस्तुत हो समाज में एक संदेश जाए जिससे कोई और ऐसे अपराध में शामिल होने मंशा न बनाए।रिमांड खत्म…कुलदीप गए जेल…अब जेल में मिलेगा वीआईपी ट्रीटमेंट या फिर कैदियों जैसा होगा व्यवहार?
सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में आरोपी जिन्होंने मां और बेटी का बेरहमी से कत्ल किया है को अब तक पुलिस ने रिमांड में रखा था और अब उन्हें जेल भेज दिया गया है। आरोपियों में से एक आरोपी जो जिला बदर का आरोपी था को पुलिस का संरक्षण मिलता था और वह जिला बदर रहते हुए भी जिले में और जिला मुख्यालय में रहता था सार्वजनिक ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होता था जहां अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का आना जाना होता था और वह उनसे मिलता भी था।जब उसे जिला बदर रहते हुए ऐसी सुविधा मिलती थी और उसे वीआईपी माना जाता था पुलिस के द्वारा तो क्या अब जेल में भी उसे वीआईपी ट्रीटमेंट मिलेगा। वैसे जेल प्रबंधन अलग होता है पुलिस से अलग उनका एक अपना नियंत्रण होता है लेकिन जिस तरह इन आरोपियों का रिकॉर्ड रहा है वह जेल में भी जुगाड जमा लेने में सफल हो जाएंगे और वह वीआईपी बनकर मौज करेंगे यह माना जा रहा है कुछ के द्वारा।
आरोपियों पर जहां कड़ी होनी थी कार्यवाही वहीं पुलिस अधीक्षक का गिरा विकेट
सूरजपुर मामले में सिर्फ पुलिस अधीक्षक का तबादला एक हफ्ते बाद कर दिया गया, क्या यही शासन की बड़ी कार्यवाही मानी जाए? क्योंकि आरोपियों पर कड़ी होनी थी करवाई, पर वही सिर्फ पुलिस अधीक्षक का ही विकेट गिरा, क्या अन्य पुलिसकर्मी भी आएंगे जद में? क्या अन्य जिले के दो अधिकारियों के रिपोर्ट पर हटाए गए पुलिस अधीक्षक? क्या अन्य जिले के दो पुलिस अधिकारी जिन्हें बनाया गया था जांच अधिकारी व अन्य पुलिसकर्मियों की भी संलिप्त उजागर करेंगे या फिर समय के साथ सारी चीज जमीदोज हो जाएंगे और सिर्फ जिसके साथ घटना हुई है वही सामने रह जाएगा?
क्या स्थानीय जेल में रहने से आरोपियों को मिलेगा फायदा?
जघन्य अपराध के आरोपियों को सूरजपुर के स्थानीय जिला जेल में रखा गया है। जिला जेल जिला मुख्यालय में है और आरोपियों की पहचान वहां के कुछ लोगों से पहले से न हो ऐसा भी मानना अभी जल्दबाजी होगी। अब क्या उन्हें स्थानीय होने का फायदा मिलेगा यह देखने वाली बात होगी।वैसे स्थानीय जेल में ऐसे आरोपियों को रखा जाना खतरनाक भी है और ऐसे आरोपियों को निश्चित ही केंद्रीय जेल में निरुद्ध किया जाना चाहिए जिससे वह अनुचित कोई लाभ निरुद्ध रहते हुए न उठा लें।
कबाड़ी परिवार के पांच लोग जेल में
कबाड़ी परिवार के कुल पांच लोग जेल भेजे गए हैं । 12 में से 5 आरोपी एक परिवार से हैं। यह कानून व्यवस्था के लिए भी विचारणीय है क्योंकि कैसे एक दो न नंबर का व्यापार करने वाला संरक्षण प्राप्त कर पुलिस के लिए ही नासूर बन गया और पुलिस परिवार के सदस्यों का ही कातिल बन गया।पूरी घटना में पुलिस को काफी कुछ विचार करने की जरूरत है।
अपराध क्रमांक 218/2024 का आरोपी-यह अपराध सूरजपुर में पंजीबद है और इस अपराध में आरोपी कुलदीप साहू का नाम दर्ज है।
अपराध क्रमांक 573/2024 के आरोपी- सूरजपुर थाने में 573/2024 का अप्राध्यक्ष है इस अपराध में आरोपी कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू, चंद्रकांत उर्फ सीके,आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी, मनीष जायसवाल उर्फ गोलू, शानी साहू, आकाश साहू, विजय हतगेन, प्रवीण कुमार शामिल है इस अपराध क्रमांक में 9 आरोपी है।
अपराध क्रमांक 574/2024 के आरोपी- इस अपराध क्रमांक में कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू, चंद्रकांत उर्फ सीके, आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी, राजू साहू, अशोक साहू यह छः आरोपी शामिल है।
अपराध क्रमांक 575/2024 के आरोपी- इन अपराध में कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू, चंद्रकांत उर्फ सीके, सूरज साहू, यह चार लोग आरोपी बनाए गए हैं।
12 आरोपी गए जेल- फिलहाल में चार मामले सूरजपुर में दर्ज हुए इन चार मामलों को मिलाकर 12 आरोपी जेल निरुद्ध हुए, तीन मामलों में एक ही जैसे आरोपी है।


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