
दुकानें तो हमने बहुत सुनी है जैसे हलवाई की दुकान, नाई की दुकान, करियाने की दुकान, कपड़े की दुकान आदि। लेकिन साहब हमने पहले कभी मोहब्बत की दुकान के बारे में नहीं सुना हुआ था। राजनीति भी अजीब खेल है। इसमें राजनीति साधने के लिए कौन कब और क्या कर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। बात लोगों को प्रभावित करके आकर्षित करने की है। जो इस मकसद में कामयाब हो गया वह बहुत बड़ा राजनीतिक खिलाड़ी और जो इस मकसद में कामयाब नहीं हुआ वह बहुत बड़ा अनाड़ी। देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी को भाजपा वाले,,, पप्पू, पप्पू,,, कहकर उनका मजाक किया करते थे, क्योंकि संसद के अंदर और संसद के बाहर राहुल गांधी जो भी वक्तव्य देते थे उसको तोड़ मरोड़ कर मजाक ही किया जाता था। बीजेपी वालों ने टीवी चैनलों को न जाने कितने करोड रुपए देकर उनके महत्व को कम करने के लिए दिए होंगे । परंतु यह पप्पू महाशय, आखिर है तो नेहरू गांधी परिवार से। जल्दी-जल्दी हार मानने वाले कहां है। उनको कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। एक के बाद एक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और विपक्ष वालों को उनका मजाक करने का मौका मिल गया। हार की जिम्मेवारी लेकर उन्होंने अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया और कांग्रेस पद पर नेहरू गांधी परिवार से इत्तर, मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस को अध्यक्ष बना दिया और कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक पैदल यात्रा की ताकि अलग-अलग राज्यों के लोगों को मिल सके, उनको पेश आने वाली समस्याओं को समझ सके और उनके साथ व्यक्तिगत संबंध कायम कर सके! जगह-जगह रुक कर उन्होंने सत्ता पक्ष भाजपा को देश में नफरत तथा भेदभाव पैदा करने के लिए कोसा और कहा कि उन्होंने तो,, मोहब्बत की दुकान… खोल ली है! इस यात्रा का उद्देश्य कोई राजनीतिक लाभ उठाना नहीं है बल्कि लोगों में एकता, भाईचारा, मोहब्बत, राष्ट्रीयता को बढ़ावा देना है! राहुल गांधी इस लंबी यात्रा में जिस जिस राज्य में से गुजरे, लोगों की भारी भरकम भीड़
ने उनका उत्साह से स्वागत किया! जितनी दूर इस यात्रा में उनके साथ चल सकते थे चलते रहे! उनकी बहन, प्रियंका गांधी वाड्रा तथा कांग्रेस के पुरानी तथा नई पीढ़ी के लोगों ने इस यात्रा में उनका साथ दिया! इस यात्रा ने उनको एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभार कर रख दिया। अचानक उनकी कांग्रेस नेता के तौर पर स्वीकार्यता तथा यश में वृद्धि हुई। इतनी लंबी यात्रा के दरमियान उन्होंने भाजपा या इसके किसी नेता के खिलाफ कोई बयान जारी नहीं किया। हां, भाजपा द्वारा देश में नफरत फैलाने की बात के बदले में अपने द्वारा,,, मोहब्बत की दुकान,, खोलने की बात कहकर एक लोकप्रिय नेता के तौर पर लोगों के सामने पेश कर दिया। निश्चित तौर पर भाजपा को यह जरूर लगा होगा कि उनको राहुल गांधी का मूल्यांकन करने में भारी भूल हुई है। इस यात्रा के पूरा होने के बाद जब संसदीय चुनाव हुए तो भाजपा ने नारा लगाया… अबकी बार….400 से पार…! लेकिन अपनी भारत यात्रा दौरान राहुल गांधी ने लोगों के सामने वास्तविक आर्थिक, राजनीतिक तथा सामाजिक स्थिति को लोगों को अवगत कराया जिसका परिणाम यह हुआ कि जब 2024 के संसदीय चुनावों के सामने आए तो भाजपा के 400 का लक्ष्य तो क्या प्राप्त होना था उसके 240 सांसद ही जीत सके। भाजपा के नरेंद्र मोदी तीसरी बार तेलुगु देशम पार्टी, जेडीयू तथा कुछ अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर बैसाखी वाली सरकार ही बना सके। विपक्ष को भारी भरकम जीत मिली जिसके बल पर संसद में वह भाजपा की पहले की तरह मनमानी रोकने में सफल हुए। इस सफलता का श्रेय… जिसे भाजपा पप्पू कहती थी.. राहुल गांधी तथा समाज वादी पार्टी के सुप्रीमो, अखिलेश यादव तथा इंडिया संगठन के राजनेताओं को जाता है! मोहब्बत की दुकान खोलने वाले राहुल गांधी को संसद में विपक्ष का नेता बना दिया गया और वह नरेंद्र मोदी के साथ आंख मिलाकर बात करने के काबिल हो गए! मोहब्बत की दुकान वाले इस लड़के ने जो भारतीय राजनीति में सफलता प्राप्त की वह अनुकरणीय है! आखिर मोहब्बत की जीत हुई और सत्ता प्राप्त करने की भेदभाव तथा नफरत फैलाने की नीति की हार हुई। मोहब्बत तो साहब आखिर मोहब्बत होती है। इसे देखकर हमें यकीन हो जाता है कि…. पप्पू सचमुच पास हो गया…..!
इस समय जरूरत इस बात की है कि राहुल गांधी से शिक्षा लेते हुए हमें देश में जीवन के हर एक क्षेत्र में…. मोहब्बत की दुकानें…. खोलनी
हमारे देश में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नफरत, ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा, दूसरे को नीचा दिखाना, अपने आप को बहुत कुछ और दूसरे को कुछ ना समझना, पारिवारिक कलह,क्लेश, स्ति्रयों तथा बुजुर्गों के प्रति अवहेलना, तिरस्कार, हिंसा, अपेक्षा, शोषण, भ्रष्टाचार, अहंकार, लालच, क्रोध, कामवासना में विस्तार, नवयुवकों में बेरोजगारी, बड़ों के प्रति निरादर तथा अवज्ञा तथा मादक पदार्थों का बढ़ता प्रयोग आदि बातों को लेकर मोहब्बत की दुकानें जगह-जगह खोलने की जरूरत है। आम आदमी पार्टी ने तो यह कहा था कि दिल्ली में करियाना की दुकान पर भी शराब मिलने लग जाएगी लेकिन मेरा ख्याल यह है कि हमारे समाज में शराब नहीं बल्कि मोहब्बत की दुकानें बोलने की जरूरत है। लोगों को मोहब्बत का पाठ पढाने के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोलने की जरूरत है। लड़का और लड़की लव मैरिज करते हैं, जिसमें उनके मां बाप का कोई रोल नहीं होता। मैरिज के कुछ ही दिनों में उन में इगो का टकराव हो जाता है, आपस में मारपीट और नफरत बढ़ जाती है और मामला कोर्ट कचहरी तक जा पहुंचता है और परिणाम होता है तलाक। अब अगर इन लोगों ने.. मोहब्बत की दुकान… से थोड़ी सी मोहब्बत ली होती, तो परिणाम इतने निराशाजनक और शर्मनाक नहीं होते। मेरे प्यारो! राहुल गांधी ने सिर्फ राजनीति को लेकर ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों को लेकर भी…. मोहब्बत की दुकान.. खोलने की बात कही है! हमारे परिवारों में सदस्यों में आपस में ही ईर्षा, क्रोध अहंकार, गाली गलौज, मारपीट आदि का बोलबाला होता है। इस प्रकार के परिवार के सदस्यों ने अगर… मोहब्बत की दुकान… से थोड़ी बहुत मोहब्बत ली होती तो इनमें आपस में प्रेम ,प्यार, सहयोग, संयम और आपसी मान सम्मान होता! बहुत बार देखा गया है कि शमशान भूमि के प्रबंध के लिए प्रधान को लेकर लोगों में आपस में मारपीट हो जाती है। ऐसे लोगों से पूछा जाए…. भले लोगों! मरने के बाद आप लोगों का यहीं पर ही तो दाह संस्कार होना है! फिर ऐसी जगह के लिए आपस में क्यों लड़ रहे हो! अंत सामने है! फिर भी आपस में दिवंगत लोगों की सेवा के लिए… मोहब्बत की दुकान… से कुछ मोहब्बत लेकर आपने आपस में इकट्ठे रहना नहीं सीखा। हमने बहुत सारे धर्मगुरु, साधु ,संत, महंत, मठाधीश आदि देखे हैं। अपने श्रद्धालुओं को उपदेश देकर प्रेम प्यार का पाठ पढ़ाते हैं लेकिन उनमें आपस में प्रतिस्पर्धा, ईर्षा,वैर, अहंकार तथा क्रोध होता है। ऐसे धर्माचार्य को अपने यहां एक…. मोहब्बत की दुकान… जरूर खोल लेनी चाहिए! हम सब का जन्म हमारे माता-पिता के बीच मोहब्बत नतीजा है! तो फिर सारा जीवन नफरत, अहंकार और इर्षा में बिताने का क्या फायदा? हमारे यहां हर साल रामलीला के लिए रामलीला कमेटियां बनती हैं! रामलीला का उद्देश्य श्री रामचंद्र जी के मर्यादा को निभाने, पिता का आज्ञाकारी होने, राजा दशरथ के चारों पुत्रों में प्रेम प्यार दिखाने, रावण के पराई स्त्री को अपहृत करने तथा अहंकार के कारण उसके पतन को दिखाना होता है। लेकिन कमाल की बात यह है कि इन रामलीला कमेटियों के सदस्य रामलीला से कुछ सीखने के बदले में आपस में ही झगड़ा करते रहते हैं, प्रधान पद प्राप्त करने के लिए धन तथा शराब का प्रयोग करते हैं, उनका आपस में कई बार खून खराबा भी हो जाता है। मेरा मानना है कि हर रोज़ रामलीला दिखाने से पहले पंडाल में एक…. मोहब्बत की दुकान… जरूर खुलनी चाहिए जो कि लोगों में लड़ाई झगड़ा, नफरत के बदले में मोहब्बत का पैगाम दे! आजकल इसराइल और हमास, रूस तथा यूक्रेन मैं युद्ध हो रहा है। युद्धग्रस्त देश में अभूतपूर्व क्षति हो रही है, सब अपने शत्रु को तबाह करने में लगे हुए हैं। इनसे पूछा जाए कि यह क्या कर रहे हो। जवाब मिलेगा,,, नफरत, नफरत और नफरत। संयुक्त राष्ट्र को चाहिए कि सदस्य देशों को इस प्रकार के युद्ध रोकने के लिए अपने यहां जगह-जगह… मोहब्बत की दुकानें.. खोलने की सलाह दे ताकि युद्ध हो ही ना! आजकल गरीबों और अमीरों में जो फर्क बढ़ रहा है उसका जवाब… मोहब्बत की दुकानें.. खोल कर ही प्राप्त किया जा सकता है! अमीर लोग अगर अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा गरीबों के भले के लिए खर्च करें तो उन्हें तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन बहुत सारे गरीब लोग पेट भर खाना खा सकेंगे, अच्छे वस्त्र पहन सकेंगे, अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे! इसलिए मेरा मानना यह है के राहुल गांधी ने जो सियासत में… मोहब्बत की दुकान.. खोलने की बात कही है उसी में ही आपसी भाईचारा, देश का विकास, कल्याण तथा विश्व शांति छुपी हुई है! मोहब्बत की दुकान पर सियासत करने का कोई फायदा नहीं।
शामलाल कौशल
रोहतक, हरियाणा