@ बीजापुर जाकर दावा करते रह गए स्वास्थ्य मंत्री…नहीं संभला घर…
@ पूछ रही प्रदेश की जनता…कुर्सी संभाले 8 माह बीत गए मंत्री जी… वेंटिलेटर से बाहर कब आएगा स्वास्थ्य विभाग…?
-भूपेन्द्र सिंह-
रायपुर/अम्बिकापुर, 01 अगस्त 2024 (घटती-घटना)। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पिछले दिनों बस्तर अंचल के बीजापुर का दौरा किया था और दावा किया था कि डायरिया रोकथाम हेतु हर संभव कोशिश की जा रही है,मंत्री के दावे में कितनी
सच्चाई थी यह समझा जा सकता है कि अब खुद उनके विधानसभा क्षेत्र में डायरिया ने एक महिला की जान ले ली है,महिला की मौत के बाद परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है, परिजन का कहना है कि…लचर स्वास्थ्य सुविधा के कारण ही डायरिया से निधन हो गया…। हद है मंत्री जी…आप हवा-हवाई दावा करते फिरते हैं…और खुद आपके विधानसभा में इस प्रकार की स्थिति निर्मित है…इसके अलावा अन्य प्रभावित जन उपचार हेतु भर्ती किए गए हैं। प्रदेश भर में…स्वास्थ्य विभाग की दुर्दशा से मरीज कराह रहे हैं…सुविधाएं वेंटिलेटर पर पहुंच गई है…स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को कुर्सी संभाले 8 माह से अधिक का समय बीत चुका है… लेकिन इस बीच सिर्फ हवा-हवाई दावा ही सामने आया है…अभी तक व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ सकी है।
बतलाया गया है कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले एमसीबी अंतर्गत मनेंद्रगढ़ से 25 किमी दूर ग्राम पंचायत पाराडोल के हरकाटनपारा में विगत कई दिनों से फैले डायरिया ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। तमाम दावों के बावजूद दूसरी बार विधायक होने के बाद भी मंत्री ने यहां तक सड़क नहीं बनवा पाई जिससे कि बारिश के मौसम में यहां तक पहुंचना कठिन होता है। इस गंाव में 27 जुलाई को 25 वर्षीय महिला मीरा डायरिया के प्रकोप में आ गई और समय पर समुचित ईलाज ना मिल पाने के कारण उसका निधन हो गया। महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली उसके बाद गंाव में कैंप लगाया गया। जिसमें 20 से अधिक डायरिया पीçड़त पाये गए। 2 मरीज नाजुक हालत में थे जिन्हें अंबिकापुर रेफर किया गया। बड़ा सवाल है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के इलाके से मरीज अन्यत्र रेफर किये जा रहे हैं। 8 माह का लंबा समय व्यतीत हो जाने के बाद भी एक सामान्य बीमारी के मरीज बाहर भेजे जा रहे हैं जिससे कि विभाग की दुर्दशा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। हालांकि अभी मंत्री का सारा ध्यान विभागीय कमियों को उजागर करने वाले अखबार के संपादक और पत्रकार पर टिका हुआ है। संपादक पितृशोक में हैं और मंत्री उन पर द्वेषपूर्वक कार्यवाही में मस्त हैं इसलिए इस प्रकार की स्थिति निर्मित होना स्वाभाविक है।
