@ क्या स्वास्थ्य मंत्री तत्काल अपने तथाकथित भतीजे व ओएसडी पर करवाएंगे कार्यवाही या फिर अखबार के शासकीय विज्ञापन रुकवाने भर की है ताकत?
@ क्या फर्जी और विवादित लोग ही पसंद है प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को?
@ दिव्यांग संघ ने फिर बतलाया…फर्जी है स्वास्थ्य मंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का दिव्यांग प्रमाण-पत्र…
@ विधानसभा सत्र में स्वास्थ्य मंत्री की हो रही खिंचाई…विपक्ष सहित खुद के विधायक भी उठा रहे स्वास्थ्य विभाग को लेकर आवाज…
@ स्वास्थ्य मंत्री के लिए बढ़ती जा रही मुसीबत…उनके इर्द-गिर्द के लोग ही स्वास्थ्य मंत्री के लिए बने मुसीबत…
@ सच दिखाने वाले अखबार को स्वास्थ्य मंत्री ने माना अपना दुश्मन…वहीं उनके हितैषी बनने वाले ही बने उनकी मुसीबत की वजह…
@ अपने इर्द-गिर्द वालों के ही चक्रव्यूह में फंसे स्वास्थ्य मंत्री… हो रही प्रदेश में किरकिरी….?
@ स्वास्थ्य मंत्री के तथाकथित भतीजे प्रभारी डीपीएम प्रिंस जायसवाल की डिग्री फर्जी निकली:संजय
@ शिकायत पर विश्वविद्यालय से वेरिफिकेशन के बाद हुई पुष्टि…क्या अब भी भतीजे को प्रभारी डीपीएम बनाकर रखेंगे स्वास्थ्य मंत्री…?
@ अपनी गलती छुपाने शिकायतकर्ता एवं अखबार के विरूद्व भी प्रभारी डीपीएम कर रहा था शिकायत…
@ उधर दिव्यांग संघ ने भी सूची जारी की…स्वास्थ्य मंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का प्रमाण-पत्र बतलाया फर्जी…

-रवि सिंह-
अम्बिकापुर/रायपुर,26 जुलाई 2024 (घटती-घटना)। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज दबाने का कुत्सित प्रयास करने वाले छत्तीसगढ के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के तथाकथित भतीजे प्रभारी डीपीएम सूरजपुर के शैक्षणिक योग्यता की डिग्री फर्जी साबित हुई है। बैकुंठपुर के सक्रिय नागरिक एवं पार्षद संजय जायसवाल ने उक्ताशय की शिकायत सूरजपुर पुलिस से की थी जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने मामले पर संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय से डिग्री का वेरिफिकेशन कराया जिसके बाद मामला उजागर हुआ है। इसके बाद पार्षद संजय जायसवाल ने स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने व नौकरी से हटाये जाने की मांग की है। ज्ञात हो कि स्वास्थ्य मंत्री का भतीजा प्रिंस जायसवाल पूर्व में कोरिया जिले में प्रभारी डीपीएम था । उसके द्वारा एनएचएम की खरीदी में काफी भर्राशाही की गई। तमाम शिकायतों के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने ईनाम स्वरूप भतीजे को कोरिया से बड़ा जिला सूरजपुर में पदस्थ कर दिया था लेकिन अब भतीजे की डिग्री ही फर्जी साबित हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य मंत्री अपने भतीजे को पद से हटाएंगे या फिर किरकिरी कराते रहेंगे। वहीं एक अन्य मामले में एक बार फिर मंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी संजय मरकार के फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र को लेकर बात उठ रही है,इस बार दिव्यांग संघ ने खुद प्रेस वार्ता कर फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे शासकीय सेवकों की पूरी लिस्ट सौंपी है इस लिस्ट में मंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का नाम भी शामिल है । ऐसे अधिकारी को अपने साथ लेकर चल रहे स्वास्थ्य मंत्री के विभाग से जुड़ी कमियों का खबर प्रकाशन करने पर उनके द्वारा अखबार को दबाने का प्रयास किया जाता है जो कि अति निंदनीय है।
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री लगातार सुर्खियों में…हाल ही में उन्हें विधानसभा में बैकुंठपुर विधायक ने निरुत्तर कर दिया
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री लगातार सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्हें विधानसभा में बैकुंठपुर विधायक ने निरुत्तर कर दिया वहीं उन्हे अन्य भाजपा विधायकों में से धरम लाल कौशिक सहित अजय चंद्राकर ने भी प्रश्नों से परेशान किया। स्वास्थ्य मंत्री के अब तक के कार्यकाल में प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग कितना बेहतर काम कर रहा है इसकी बानगी केवल बैकुंठपुर विधायक ने ही विधानसभा में सामने रख दी जहां उन्होंने बैकुंठपुर जिला चिकित्सालय की व्यथा को सामने रखा और कोरिया जिले में जारी मेडिकल व्यवसाय को लेकर कई प्रश्न स्वास्थ्य मंत्री के सामने उछाल दिए जिसका जवाब देने की बजाए स्वास्थ्य मंत्री बैकुंठपुर विधायक की ही तारीफ और उन्हें अपनी मीठी बातों भावुक बातों के प्रभाव में लेने के प्रयास में ज्यादा नजर आए। वहीं कोरिया जिले का मुख्यालय बैकुंठपुर जहां की व्यथा बता बैकुंठपुर विधायक रहे थे जबकि वह जिला चिकित्सालय ही फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री के जिले के लोगों के लिए भी जिला चिकित्सालय की सुविधा प्रदान करता है और वहीं का हाल-बेहाल है। कहने का मतलब खुद स्वास्थ्य मंत्री के जिले में जब स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट है तो अन्य जिलों का हाल समझा जा सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री के लिए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बनी चुनौती तो वहीं उनके इर्द गिर्द वाले अधिकारी भी उनकी मट्टी
पलीद करने में लगे हुए?
स्वास्थ्य मंत्री के लिए जहां प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चुनौती बनी हुई है जिसे वह सम्हाल नहीं पा रहे हैं वहीं उनके इर्द-गिर्द वाले अधिकारी भी उनकी मट्टी पलीद करने में ही लगे हुए हैं। जिनमें एक उनके भतीजे बनकर स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार करते चले आ रहे हैं जबकि उनके पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के भ्रष्टाचार की ही जांच बाकी है। वहीं उनके विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की नौकरी फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर लगी हुई है यह आरोप पुनः दिव्यांग संघ ने लगाया है और उन्हें पद से ही पृथक कर कानूनी कार्यवाही की मांग शासन से की है। स्वास्थ्य मंत्री के तथाकथित भतीजे की भी डिग्री अहर्ता की फर्जी है अब यह आरोप भी जोर पकड़ता जा रहा जिसकी एक प्रति फर्जी होने की पुष्टि के साथ सोशल मीडिया में दौड़ रही है जिसको लेकर स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे सूरजपुर के प्रभारी डीपीएम खुद शिकायत कर रहे हैं और फर्जी डिग्री मामले में अपना पक्ष रख रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का ख्याल रखना भी चाहें तो पहले उन्हें अपने भतीजे और विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का ख्याल रखना पड़ रहा है जिनका यदि वह साथ छोड़ते हैं वह
शायद कार्यवाही की जद में आ जाएंगे जिन्हें अब स्वास्थ्य मंत्री का ही सहारा है। स्वास्थ्य मंत्री देखा जाए तो अपने इर्द-गिर्द वाले अधिकारियों, भतीजे सहित अपने सलाहकारों से कारण बुरी तरह भंवरजाल में फंस चुके हैं जहां से वह चाहकर भी नहीं निकल पा रहे हैं न ही वह प्रदेश के लोगों का हित स्वास्थ्य हित सोच समझ पा रहे हैं क्योंकि उन्हें फिलहाल अपने उन लोगों की ज्यादा फिक्र है जिन्हे वह अपने इर्द-गिर्द रखे हुए हैं जिन्हे वह कहीं न कहीं बचाने में लगे हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी फर्जी दिव्यांग प्रमाण -पत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं और इसकी शिकायत जब दिव्यांग संघ कर रहा है फिर भी स्वास्थ्य मंत्री चुप हैं,मौन हैं उस अधिकारी की पैरवी में हैं जबकि उन्हे सबसे पहले उसे खुद से दूर करना चाहिए क्योंकि वह अधिकारी स्वास्थ्य मंत्री के यहां इसलिए संलग्न है क्योंकि जब स्वास्थ्य प्रमाण पत्र दिव्यांग प्रमाण-पत्र की जांच हो स्वास्थ्य मंत्री के प्रभाव का इस्तेमाल कर बच निकलना आसान हो वहीं उनका तथाकथित भतीजा जिसकी डिग्री ही फर्जी है भी स्वास्थ्य मंत्री के ही भरोसे है और इसीलिए डिग्री फर्जी होने के बावजूद जैसा की आरोप है।
पार्षद संजय की मांग पर पुलिस ने कराई जांच
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के भतीजे प्रभारी डीपीएम सूरजपुर प्रिंस जायसवाल के विरूद्व पार्षद संजय जायसवाल ने मई 2024 में लिखित शिकायत किया था जिसमें कहा गया था कि काफी शिकायतों के बाद प्रिंस जायसवाल को सूरजपुर पदस्थ किया गया है,प्रिंस जायसवाल के द्वारा मास्टर आफ पब्लिक हेल्थ का कोर्स जिस विश्वविद्यालय से कराया गया है उससे संपर्क करने पर बतलाया गया कि 2012 से 2014 के बीच फर्जी डिग्री का वितरण किया गया है, और रिजल्ट में हस्ताक्षरित रजिस्टार एसके गुप्ता वर्तमान में फर्जी डिग्री प्रकरण में जेल में हैं। पार्षद की शिकायत के बाद सूरजपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच विश्वविद्यालय से कराई जिसके बाद जांच में पाया गया कि प्रिंस जायसवाल की डिग्री फर्जी है और विश्वविद्यालय से जारी नहीं की गई है।
पुलिस महानिरीक्षक को ज्ञापन सौंपकर एफआईआर की मांग
विश्वविद्यालय द्वारा वेरिफिकेशन में डिग्री फर्जी होने की जानकारी सामने आने के बाद पार्षद संजय जायसवाल ने स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे प्रभारी डीपीएम के खिलाफ एफआईआर करने की मांग सरगुजा पुलिस महानिरीक्षक से की है। उन्होने महानिरीक्षक को सौंपे ज्ञापन में लिखा है कि उनकी शिकायत पर सूरजपुर पुलिस अधीक्षक द्वारा 14 जुलाई 2024 को साबरमती विश्वविद्यालय अहमदाबाद गुजरात को डिग्री की सत्यता को लेकर ईमेल एवं स्पीड पोस्ट किया गया था। विश्वविद्यालय द्वारा 16 जुलाई को ही पुलिस अधीक्षक को डिग्री के फर्जी और कूटरचित होने की जानकारी दी गई,पत्र में बतलाया गया कि प्रिंस जायसवाल के द्वारा उनके यहां से डिग्री हासिल नहीं की गई है और इसका कोई रिकार्ड भी विवि के पास उपलब्ध नहीं है। पार्षद ने लिखा है कि विश्वविद्यालय के पत्र के बाद साफ हो गया है कि प्रिंस जायसवाल फर्जी डिग्री को सेल्फ अटेस्ट कर डीपीएम की भर्ती का आवेदन किया था जो कि गैर कानूनी है। पत्र में लिखा गया है कि फिलहाल प्रिंस जायसवाल प्रभारी डीपीएम सूरजपुर के रूप में संविदा के रूप में कार्यरत है और इसमे भी फर्जी डिग्री का प्रयोग किया गया है। पार्षद ने मामले की निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
खबर आते ही सफाई पेश करने लगा स्वास्थ्य मंत्री का भतीजा
पार्षद संजय जायसवाल के द्वारा स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे प्रभारी डीपीएम के विरूद्व शिकायत की खबर सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद प्रभारी डीपीएम द्वारा तत्काल एक पत्र सूरजपुर पुलिस को देकर सोशल मीडिया में वायरल किया जाने लगा,उसके द्वारा खुद को पाक साफ बतलाते हुए उल्टा शिकायतकर्ता के खिलाफ ही कार्यवाही की मांग की जाने लगी।
गलत लोगों को बचाने स्वास्थ्य मंत्री और सरकार एक समाचार पत्र के ही विरुद्ध कार्यवाही करते हुए,जबकि उन्हे गलत लोगों के विरुद्ध करनी चाहिए कार्यवाही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री काफी सुर्खियों में हैं और वह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ करने के मामले में सुर्खियों में नहीं हैं बल्कि वह अपने तथाकथित भतीजे सहित अपने विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी को लेकर सुर्खियों में हैं जिनमे से उनके भतीजे से ऊपर फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी करने का आरोप है भ्रष्टाचार का आरोप है वहीं विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के ऊपर फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के सहारे राज्य प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बनने का आरोप है। दोनों के लिए स्वास्थ्य मंत्री ढाल बने हुए हैं वहीं गलत लोगों के विरुद्ध समाचार प्रकाशित करने के कारण स्वास्थ्य मंत्री और सरकार एक अखबार के पीछे पड़े हुए हैं जो की सच का प्रकाशन कर रहा है। कुल मिलाकर भ्रष्ट लोगों के लिए या आरोपित लोगो के लिए सरकार और स्वास्थ्य मंत्री ढाल बनने का काम कर रहे हैं और इसके लिए वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को भी कुचलने तैयार हैं।
दिव्यांग संघ ने जारी की सूची…फर्जी है स्वास्थ्य मंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का प्रमाण-पत्र…
एक ओर स्वास्थ्य मंत्री के तथाकथित भतीजे प्रभारी डीपीएम की डिग्री के फर्जी होने की पुष्टि विवि द्वारा की गई है तो वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ दिव्यांग संघ के द्वारा गत दिनों रायपुर प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया है कि प्रदेश के 21 अफसर फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। दिव्यांग संघ के द्वारा सूची में 7 डिप्टी कलेक्टर, 3 लेखा अधिकारी,3 नायब तहसीलदार, 2 सहकारिता निरीक्षक,3 वेटनरी डॉक्टर का नाम दिया गया है जो कि फर्जी दिव्यांग बन कर नौकरी कर रहे हैं। संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि 15 दिन के भीतर इस मामले पर कार्यवाही नही की गई तो 21 अगस्त को प्रदेश के दिव्यांग रायपुर में प्रदर्शन करेंगे। दिव्यांग संघ की सूची में तीसरे क्रम पर संजय कुमार मरकाम का नाम अंकित है जो कि 2017 बैच में दिव्यांग कोटे से डिप्टी कलेक्टर बने थे। दिव्यांग संघ द्वारा जारी सूची में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का नाम शामिल है और इसके बाद भी हवा हवाई घोषणा करने में माहिर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अब तक उस बारे मे ना तो संज्ञान लिया गया और ना ही विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी को हटाया गया जो कि आश्चर्यजनक है। ज्ञात हो कि प्रमाण बनाने का काम स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही किया जाता है,प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के साथ ही फर्जी प्रमाण -पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले अधिकारी कार्यरत हैं इससे प्रतीत होता है कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का हाल कितना बेहाल है और इसमें कितनी भर्राशाही चल रही है।