अम्बिकापुर @ कलम बंद का चौदहवां दिन @ खुला पत्र @भाजपा सरकार इमरजेंसी की सालगिरह मना रही है उस समय को कोस रही है…!वहीं दूसरी तरफ एक प्रशासनिक तड़ीपार की शिकायत पर प्रदेश में सच लिखने वाले समाचार-पत्र पर इमरजेंसी जैसे हालात क्यों?

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-रवि सिंह-
रायपुर/सरगुजा 13 जुलाई 2024 (घटती-घटना)।
भारत में इस समय भाजपा की सरकार है और इस समय भाजपा की सरकार 25 जून 1975 के दिन को आपातकाल बताकर इमरजेंसी की सालगिरह मनाते हुए उस दिन को कोस रही है और वैसा दिन फिर कभी ना आए इसकी बात कही जा रही है पर वहीं छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार पत्रकारों व समाचार-पत्रों पर ही इमरजेंसी लगाने पर तुली हुई है। अब इस पर क्या भारत सरकार संज्ञान लेने की कोशिश करने वाली है,ऐसी स्थिति तब निर्मित हुई है…जब एक प्रशासनिक तड़ीपार की शिकायत पर किसी अखबार को दबाने का प्रयास किया जा रहा है? प्रशासनिक तड़ीपार इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि वह प्रशासन का व्यक्ति है और उसके विरुद्ध खुद की एक दर्जन से ज्यादा शिकायत है…यदि इतनी शिकायत पुलिस के समक्ष हुई होती तो शायद उसे तड़ीपार ही कहते,क्योंकि इतनी शिकायत पर अपराध पंजीबद हो जाता और सारे मामले फर्जीवाड़े के होते…और गबन के होते…भ्रष्टाचार के होते…पर ऐसे प्रशासनिक तड़ीपार की शिकायत को तव्वजो देते हुए छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने अखबार पर ही इमरजेंसी जैसी स्थिति निर्मित कर दी है। आखिर प्रशासनिक तड़ीपार व्यक्ति को स्वास्थ्य मंत्री के अलावा मुख्यमंत्री भी इतना तवज्जो कैसे दे रहे हैं यह सोचने वाली बात है?
पूरा मामला सरगुजा संभाग से प्रकाशित दैनिक घटती-घटना समाचार-पत्र से जुड़ा हुआ है जिसको लेकर प्रदेश की सरकार का अलग ही रुख देखने को मिल रहा है जो कहीं से भी इमरजेंसी से अलग रुख नहीं है और एक तरह से समाचार-पत्र को बंद कराने…उसका प्रकाशन रोकने…साथ ही साथ उसका प्रेस भवन जहां से समाचार प्रकाशित होता है…उसे भी जमीदोंज किए जाने की तैयारी चल रही है…क्योंकि समाचार-पत्र लगातार एक स्वास्थ्य विभाग के संविदा अधिकारी की कारगुजारी छाप रहा था…भ्रष्टाचार छाप रहा था…उसकी मनमानी छाप रहा था…जिससे वह क्षुब्ध हो गया और उसने इसका अलग ही रास्ता निकाल लिया जो खुद की कमियों में सुधार वाला रास्ता नहीं था बल्कि वह समाचार-पत्र को ही बर्बाद और नेस्तनाबूत करने निकल पड़ा और एक तरह से उसने समाचार-पत्र के लिए इमरजेंसी जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी। उस संविदा अधिकारी के लिए समाचार-पत्र के लिए इमरजेंसी जैसी स्थिति उत्पन्न करना आसान भी इसलिए हो जा रहा है कि वह प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का भतीजा होने का लगातार उल्लेख करता है। वहीं वह यह दावा करता है कि स्वास्थ्य मंत्री ही स्वयं सरकार है।ं प्रदेश के और मुखिया भी उनकी बात काटने की हिम्मत नहीं कर सकते और उन्हें वही करना होगा जो मंत्री जी की मंशा होगी। इसीलिए ही समाचार-पत्र के लिए इमरजेंसी जैसी स्थिति बना दी गई है और अब उसका कार्यालय और प्रेस भी नेस्तनाबूत होगा क्योंकि वह संविदा स्वास्थ्य अधिकारी के मामले में उनकी कमियां प्रकाशित कर रहा है साथ ही वह उसके भ्रष्टाचार की लगातार पोल खोल रहा है जिससे वह संविदा स्वास्थ्य अधिकारी जो स्वास्थ्य मंत्री का खुद को भतीजा बताता है वह चिढ़ा हुआ है।


वैसे जिस संविदा स्वास्थ्य अधिकारी को लेकर दैनिक घटती-घटना समाचार-पत्र के लिए इमरजेंसी जैसे हालात उत्पन्न किए जा रहे हैं जिसमे उसका शासकीय विज्ञापन रोकना उसके प्रेस भवन को तोड़ना इस आशय की लगातार बांते करना शामिल है उसकी कमियां कांग्रेस शासनकाल से ही दैनिक घटती-घटना उजागर करता चला आ रहा है वहीं उसकी कई कमियां भ्रष्टाचार यहां तक की उसके डिग्री के भी फर्जी होने की शिकायत किसी अन्य ने की है जिसके आधार पर ही खबर का प्रकाशन किया जाता रहा है। वैसे संविदा स्वास्थ्य अधिकारी कोरोना काल से ही प्रसिद्ध रहा है आपदा को अवसर बनाने की उसकी कला ने उसे तब भी अधिकारियों और नेताओं का चहेता बनाकर रखा था वहीं अब भी वह चहेता है इस बार इसलिए क्योंकि वह स्वास्थ्य मंत्री का भतीजा है और इसलिए भले ही प्रदेश में सभी मामलों में अखबारों में एमरजेंसी लग जाए उस संविदा अधिकारी की न जांच होगी न उसके भ्रष्टाचार के मामले में कोई कार्यवाही होगी।


वैसे यह विषय इसलिए भी आज उठाया जा रहा है की भारत सरकार कांग्रेस के इमरजेंसी को कई दशकों बाद याद करने का काम कर रही है वहीं प्रदेश में उसी दल की सरकार है और सरकार भी मोदी गारंटी के साथ काम कर रही है एक तरह से मोदी ही सर्वेसर्वा हैं यह बताकर चल रही है ऐसे में आखिर एक समाचार पत्र पर लगाया गया इमरजेंसी जो केवल सत्य का प्रकाशन करने के लिए लगाया गया है उसको लेकर केंद्र सरकार क्यों मौन है यह सोचने वाली बात है जबकि प्रतिदिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को इस आशय से अवगत कराने का भी प्रयास समाचार-पत्र कर रहा है की उसके विरुद्ध प्रदेश सरकार का प्रशासनिक तंत्र द्वेषवश काम कर रहा है उसे बांधने का दबाव डाल रहा है जिसके लिए जब समाचार-पत्र तैयार नहीं हुआ तो उसे उजाड़ने की बात कहकर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में एक संविदा अधिकारी वह भी स्वास्थ्य विभाग का जिसके ऊपर कई भ्रष्टाचार के आरोप हैं वहीं उसकी डिग्री फर्जी होने का भी आरोप है उसके द्वारा संचालित नर्सिंग कॉलेज की भी न्यूनतम अनिवार्य व्यवस्था सही नहीं है इसकी भी शिकायत है बावजूद उसे संरक्षण प्रदान किया जा रहा है उसे बचाने समाचार पत्र पर इमरजेंसी लगाई जा रही है।


इस मामले में केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री से गृहमंत्री से देश से एक सवाल है कि क्या इमरजेंसी को केवल राजनीतिक क्षेत्र तक ही सीमित कर दिया गया है छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार खासकर स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार को उजागर करने के कारण एक संविदा स्वास्थ्य अधिकारी के भ्रष्टाचार को उजागर करने के कारण जो स्वास्थ्य मंत्री का भतीजा खुद को बताता है क्या समाचार-पत्र को ही प्रदेश सरकार बंद कर देगी। वैसे यह भी बताना जरूरी है की यह संविदा अधिकारी कांग्रेस शासनकाल में उधर एक नेता का रिश्तेदार बन बैठा था वहीं जब सत्ता परिवर्तन हुआ वह भाजपा नेता विधायक साथ ही स्वास्थ्य मंत्री का ही भतीजा बन बैठा। अब केंद्र की सरकार से सवाल यही की क्या भाजपा शासित राज्यों में समाचार-पत्रों के लिए इमरजेंसी लगा दी गई है और वह इस आशय की है की भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार और सरकार की कमियां उजागर करना मना होगा वहीं यदि ऐसा है तो एक राजपत्र इस आशय का भी प्रकाशित करना आवश्यक है जिससे लिखने की स्वतंत्रता मानकर समझकर कोई समाचार-पत्र सच न लिख जाए कमियां न उजागर कर जाए सरकार की और उसे भी फिर परेशानी झेलनी पड़े। वैसे इसी तरह मंत्री का भतीजा होने पर भी भ्रष्टाचार की छूट होगी मनमानी करने बिना न्यूनतम सुविधा उपलब्ध कराए नर्सिंग कॉलेज संचालित करने का भी हक होगा यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए जिससे बार-बार समाचार-पत्र सच दिखाने की खासकर मंत्री के भतीजे या रिश्तेदार का भयभीत रहें।


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