अम्बिकापुर @कलम बंद@ खुला पत्र @ क्या सरकार के लिए लोकतंत्र का चौथा स्तंभ को कुचलना ही बेहतर…जिसक ी शुरुआत हो गई?

Share


अम्बिकापुर,02 जुलाई 2024 (घटती-घटना)। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और सरकारों के बीच बढ़ रही दूरियां निश्चित ही संविधान के लिए बड़ा खतरा साबित होने वाली है जिसकी शुरुआत तेजी से हो चुकी है। ऐसे में दुविधा इस बात की भी हो गई है कि क्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सरकार की कमियां दिखाने का अधिकार नहीं रहा? आज सरकारें लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को लेकर इतनी असहिष्णु हो चुकी हैं कि वह उसे कुचलने को भी तैयार हैं जिसका ताजा उदाहरण छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है जहां स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार को उजागर करने के कारण एक समाचार-पत्र का शासकीय विज्ञापन ही रोक दिया गया है और ऐसा स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर किया जाना बताया जा रहा है और यह भी मानना गलत नहीं होगा कि इसकी जानकारी सरकार के मुखिया को न हो ऐसा नहीं हो सकता।
प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या हाल है यह तो अभी पूरी तरह प्रकाशित भी नहीं किया था उक्त समाचार-पत्र जिसका शासकीय विज्ञापन रोककर समाचार-पत्र को एक स्वतंत्र आवाज़ को कुचलने और दबाने का प्रयास किया गया है केवल सरगुजा संभाग के कुछ जिले जिनमे कोरिया,एमसीबी और सूरजपुर जिले शामिल हैं के ही मामले प्रमुख रूप से स्वास्थ्य विभाग से जुडे,भ्रष्टाचार से जुड़े समाचार-पत्र ने प्रकाशित किए थे जिसके बाद समाचार-पत्र को एक तरह से बंद करने की सरकार की कवायद जारी हो गई। देश के प्रधानमंत्री जहां भ्रष्टाचार के लिए कोई समझौता नहीं लगातार कह रहे हैं वहीं छत्तीसगढ़ में उन्ही के दल की सरकार स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप झेल रही है और उस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है यह भी विचित्र स्थिति है।अब यह कहना भी गलत नहीं होगा की कार्यवाही भ्रष्टाचार के मामले में वहीं होंगे शायद जहां गैर भाजपा दल की सरकार होगी!
लोकतंत्र की… संविधान की… रक्षा के लिए पत्रकारिता को उसका चौथा स्तंभ बताया गया था लेकिन अब उस स्तंभ को ही धराशाई किया जा रहा है और ऐसा वे लोग कर रहे हैं जिनके पास इसकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को लेकर तथ्य आधारित भ्रष्टाचार से संबंधित समाचार सरकार और स्वास्थ्य मंत्री को ऐसे नागवार गुजर रहे हैं की सरकार में निर्णय सीधे स्वास्थ्य मंत्री अपने विभाग के अलावा भी ले रहे हैं और समाचार-पत्र का शासकीय विज्ञापन रुकवा दे रहे हैं।
पहले के समय में ऐसा देखने -सुनने को नहीं मिलता था पहले समाचार पत्रों से सरकारें सीख लेती थीं और खबरों को एक सुधार की अपनी कार्यप्रणाली में आधार मानती थीं…मार्गदर्शक मानती थीं…लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब सत्य आधारित एवं कमियां दिखाते समाचार सरकारों और उसके कर्ता-धर्ता को बिल्कुल पसंद नहीं आ रहे हैं और यह छत्तीसगढ़ में एक समाचार-पत्र के शासकीय विज्ञापन को रोकने के मामले से समझा जा सकता है। वर्तमान में प्रदेश के जो स्वास्थ्य मंत्री हैं वह इसके पहले जब चुनाव हार गए थे और पांच साल जब विपक्ष में थे तब वह समाचार-पत्रों के ही भरोसे खुद की राजनीति जीवित रख सके थे वहीं उन्होंने तब तत्कालीन विधायक को लेकर…उनकी कार्यप्रणाली को लेकर…भ्रष्टाचार की बारात निकाली थी और तब वह खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ साबित करते जरा भी नहीं हिचकिचाते थे आज जब उनके ही विभाग जिसके वह मंत्री हैं को लेकर यह बात सामने आ रही है की वहां भ्रष्टाचार जारी है उनके एक तथाकथित भतीजे ने तो कांग्रेस शासनकाल में भी जमकर भ्रष्टाचार किया और अब स्वास्थ्य मंत्री को चाचा कहकर वह भ्रष्टाचार कर रहे हैं वहीं मंत्री जी के ओएसडी पर फर्जी मेडिकल दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी हथियाने का आरोप है एक अन्य विशेष सलाहकार को लेकर भी कोई साफ-सुथरा संकेत नहीं है फिर भी वह इन विषयों पर मौन हैं और वह इन मामलों में दोषियों के साथ हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो स्वास्थ्य मंत्री जिस तरह कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार की बारात निकाल रहे थे अब विपक्ष उनको लेकर यदि बारात निकाले तो अचरज की बात नहीं होगी… क्योंकि आरोप कम नहीं है उनके विभाग पर!


Share

Check Also

बेगूसराय@ अपराधियों ने घर में घुसकर लड़की पर फें का तेजाब

Share बेगूसराय,06 अप्रैल 2025 (ए)। बिहार में एक लड़की पर तेजाब से हमला कर अपराधियों …

Leave a Reply