- मंत्री के साथ राज्य भर में बिगड़ी स्वास्थ्य विभाग की चाल…क्या कुर्सी बचा पाएंगे स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी?
- प्रदेश मंत्रिमंडल में ओबीसी वर्ग से अरुण साव,ओपी चौधरी,श्यामबिहारी जायसवाल,टंकराम वर्मा,लक्ष्मी राजवाड़े और लखन देवांगन मंत्री हैं क्या और होगी वृद्धि?
- 6 माह का निराशाजनक रहा स्वास्थ्य मंत्री का कार्यकाल,गृह जिले से लेकर पड़ोसी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं ने तोड़ा दम
- कार्यकाल खराब होने का परिणाम ही है कि अपने गृह क्षेत्र से लोकसभा मे 14 हजार से हुए पीछे
- आलोचना से घबरा रहे हैं स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल,मंत्री पद बचाने अब कर रहे जद्वोजहद
- पहले सिर्फ फोटोबाजी और हवाहवाई दावे और दिखावे में रहे मस्त
- क्या मंत्री पर भारी हैं निज सचिव जिनके इशारे पर ही होते हैं सारे काम?
- मंत्री पद बचाने मार रहे हाथ पांव,पूर्व सीएम का ले रहे सहारा:सूत्र
- जल्द होने वाला है प्रदेश की विष्णु सरकार का विस्तार,बचेंगे या जाएंगे स्वास्थ्य मंत्री,राजधानी से लेकर गृह क्षेत्र में चर्चा का विषय
- विभाग में मची है भर्राशाही,नही संभाल पा रहे स्वास्थ्य जैसा विभाग मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल
- दलालों और सप्लायरों से घिरे हैं मंत्री,सत्ता और संगठन भी चल रहे नाराज, मंत्री को किया गया है इशारा:सूत्र
- पार्टी पदाधिकारी और संघ से जुड़े लोगों का काम भी नही कर रहे स्वास्थ्य मंत्री, हुई शिकायत…
- मंत्री के स्टॉफ ने कॉल रिसीव ना करने की कसम खाई…शासकीय से लेकर निज स्टॉफ की कार्यप्रणाली पर उठ रही उंगली
- कोरबा लोकसभा से दो ओबीसी मंत्री बनाये जाने का भी नही मिला लाभ


-रवि सिंह-
एमसीबी/रायपुर 27 जून 2024 (घटती-घटना)। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की कार्यप्रणाली इन दिनों सुर्खियां बनी हुई हैं विभाग का हाल प्रदेश भर में बेहाल है,स्वास्थ्य सुविधा बेपटरी हो गई है, मरीज कराह रहे हैं, परिजन दर दर भटक रहे हैं विभाग में दलाल और सप्लायरों का बोलबाला हैं उन्होने मंत्री को घेर लिया है, काम वहीं होता है जो दलाल चाहते हैं, निराशाजनक 6 माह के कार्यकाल और लोकसभा चुनाव में कोरबा की हार केन्द्रीय नेतृत्व को खटक रही है, निशाने पर स्वास्थ्य मंत्री भी हैं उन पर हटाये जाने की कार्यवाही भी हो सकती है लेकिन इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री ने हाथ पैर मारना शुरू कर दिया है। मंत्री के चाल ढाल को लेकर सत्ता से लेकर संगठन तक में शिकायत पहुंची है सूत्रों का कहना है कि इसके लिए मंत्री को इशारा भी कर दिया गया है लेकिन मंत्री हैं कि उनके सर पर पद का घमंड छाया हुआ है। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में कुछ मंत्रियों की चाल बदल गई थी ठीक उसी प्रकार का हाल स्वास्थ्य मंत्री का हो चुका है, मंत्री पद बचा पाएंगे या नही कुछ कहा नही जा सकता, लेकिन सरकार के मुखिया को चाहिए के वे स्वास्थ्य जैसा महत्वपूर्ण विभाग जिम्मेदार और शांत स्वभाव के मंत्री के हाथ में दें दें। किसी भी सरकार में स्वास्थ्य,शिक्षा ये ऐसे विभाग हैं जिनके आम जन का सीधा सरोकार रहता है, इस विभाग को संभालने वाले मंत्री भविष्य में सरकार का भविष्य तय करते हैं वर्तमान में प्रदेश में बृजमोहन अग्रवाल जैसे कद्वावर नेता के द्वारा मंत्री पद छोड़ने के बाद शिक्षा मंत्री का पद भी रिक्त है और फिलहाल इस विभाग को खुद मुख्यमंत्री देख रहे हैं। रही बात एक अन्य महत्वपूर्ण विभाग स्वास्थ्य की तो इस विभाग का हाल प्रदेश भर में बेहाल हो चुका है, जनता बुरी तरह से परेशान है, मरीज अपने जान पर खेलकर शासकीय चिकित्सालय जा रहा है और इन कमियों के लिए जिम्मेदार हैं तो वह हैं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल। देखने में मिलता है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री फोटोबाजी में मस्त हैं साथ में चल रहे स्टॉफ विवादित हैं,इसलिए विभाग की दुर्दशा हो चुकी है।
सत्ता और संगठन में हुई मंत्री के रवैये की शिकायत
स्वास्थ्य मंत्री का कार्य व्यवहार काफी बदला हुआ है,ना तो संगठन के नेताओं की पूछपरख हो रही है और ना ही संघ से जुड़े लोगो की । मंत्री के कारनामें से आक्रोश बढता जा रहा है,जिसकी शिकायत भी सत्ता और संगठन के प्रमुख नेताओं से हुई है। बतलाया जाता है कि स्वास्थ्य मंत्री के परफार्मेंश को लेकर सत्ता और संगठन को लगातार शिकायत मिल रही थी तालमेल का अभाव के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं को भी दरकिनार किया जा रहा था। आवश्यक कार्यो में लापरवाही के अलावा कई प्रकार की गंभीर शिकायतें भी आ रही थीं जिसके कारण स्वास्थ्य मंत्री को इशारा करते हुए काम धाम का तरीका बदलने की चेतावनी दे दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री को कहा गया है कि एक बार कुर्सी मिल गई है तो वह स्थायी नही है। कांग्रेस सरकार के करीबी रहे अधिकारी,कारोबारी और ठेकेदारों से दूर रहने की हिदायत भी स्वास्थ्य मंत्री को दी गई है जैसा कुशाभाउ ठाकरे परिसर रायपुर सूत्रों का कहना है।
पूरे प्रदेश में बेपटरी हुई स्वास्थ्य सुविधा
स्वास्थ्य सुविधा प्रदेश भर में बेपटरी हो गई है,कोई ऐसा चिकित्सालय नही जो आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर सके। ना तो डॉक्टर ध्यान दे रहे हैं और न ही अन्य स्टॉफ। सारा का सारा ध्यान सिर्फ मलाईदार पदों पर पोस्टिंग तक सीमित रह गया है। शासकीय आवास में पद के दावेदारों की लाईन देखी जाती है। सब अलग अलग कोने में अपनी अपनी सेटिंग करते देखे जाते हैं। जिसका वजन ज्यादा होगा उन्हे ही मलाईदार पर नियुक्ति दी जा रही है। दलाल और सप्लायर मनमाफिक काम करा रहे हैं। विभाग का हाल इतना बुरा होगा यह शायद प्रदेश नेतृत्व को भी संभावना नही रही होगी।
मंत्री पर भारी है निज सचिव
किसी भी मंत्री के साथ काम कर रहे स्टॉफ मंत्री के इशारे पर काम करते हैं और उनके ही निर्देश पर चलते हैं लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री पर निज सचिव बहुत भारी हैं। बतलाया जाता है कि मंत्री बनते ही निज सचिव के लिए पत्र सामान्य प्रशासन विभाग को लिखा गया था लेकिन आदेश जारी नही हुआ उसके बाद भी निज सचिव के द्वारा पूरे रौब से काम किया जा रहा है। आलम यह है कि मंत्री कोई भी काम निज सचिव से पूछे बिना नही करते जिस काम के लिए निज सचिव राजी होंगे वही काम होगा अन्यथा काम नही होगा चाहे कोई सर पटकता रह जाए। बतलाया जाता है कि प्रदेश के कई नेता और यहां तक कि कई विधायक भी काम के लिए संपर्क करते हैं लेकिन काम वही होता है जिस पर निज सचिव तैयार होते हैं। यहां तक कि किसी फाईल पर हस्ताक्षर करने के पहले भी निज सचिव अपनी राय देते हैं जैसा कि सूत्रो का कहना है। हाल देखकर कहा जा सकता है कि प्रदेश के एकमात्र मंत्री हैं जिन पर निज सचिव भारी हैं।
निराशाजनक रहा 6 माह का कार्यकाल
मनेंद्रगढ विधायक श्यामबिहारी जायसवाल को दिसंबर 2023 में मंत्री बनाया गया था और उन्हे उम्मीद के विपरीत स्वास्थ्य जैसा विभाग दे दिया गया बतलाया जाता है कि इतना बड़ा विभाग मिलने के बाद मंत्री और उनके कुछ खास स्टॉफ आउट ऑफ कंट्रोल की तरह काम कर रहे हैं। ना तो संगठन से जुड़े लोगो की पूछ परख है और ना ही संघ से जुड़े लोगों की। बतलाया जाता है कि संगठन समेत संघ के कई पदाधिकारियों ने कुछ कार्य के लिए स्वास्थ्य मंत्री से संपर्क किया लेकिन उनकी ओर से तवज्जो नही दी गई। बीते 6 महीने में प्रदेश भर में स्वास्थ्य सुविधाओं ने दम तोड़¸ कर रख दिया है। ऐसे भी मामले सामने आए जिसमें स्वत: माननीय उच्च न्यायालय को संज्ञान लेना पड़ा। मंत्री के गृह जिले के चिकित्सालय में भी बड़ी घटना देखने को मिली। दुर्दशा का ही आलम है कि पड़ोसी जिले कोरिया के विधायक भैयालाल राजवाड़े जब जिला चिकित्सालय पहुंचते हैं तो कमियों को देखकर कहना पड़ता है कि व्यवस्था सुधारो या फिर एक कमरा अस्पताल में ही मुझे दे दो इससे ज्यादा विभाग की दुर्दशा का उदाहरण और क्या हो सकता है। आलम यह है कि चिकित्सालयों में काकरोज घुम रहे हैं मरीज चादर इत्यादि खुद घर से लेकर जा रहे हैं पानी नही मिल रहा है, एक एक सुविधा के लिए तरसना पड़ रहा है। यही हाल प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालय और अन्य अस्पतालों का बना हुआ है, ध्यान सिर्फ खरीदी और भुगतान पर है बाकि स्वास्थ्य सुविधा ने दम तोड़ दिया है।
एकमात्र मंत्री जिनके गृह क्षेत्र में 14 हजार की हार
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अपने नाम एक से एक रिकार्ड भी दर्ज करते नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का इतना बुरा हाल तो पहले कभी नही रहा इनके कार्यकाल में विभाग सुर्खियां बटोर ही रहा है बीते चुनाव में मंत्री ने अपने गृह क्षेत्र में भाजपा को 14 हजार से अधिक वोटों से पीछे ले जाकर भी अपनी अलोकप्रियता सिद्व कर दिया है। इतने अधिक मतो से पीछे रहना यह बतलाता है कि मंत्री का खुद उनके गृह क्षेत्र में पकड़ नही है और 61 बूथों में 55 से अधिक बूथो में भाजपा को 14हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ता है। इस आंकडों के साथ उन्होने रिकार्ड बना लिया है प्रदेश का कोई ऐसा मंत्री नही जिसके विधानसभा के गृह क्षेत्र से इतने अधिक मतों से भाजपा की हार हुई हो।
मंत्री पद बचाने के लिए अब लगा रहे जोर आजमाईश
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद काफी चिंतित हैं ऐसा सूत्रों का कहना है। चुनाव में हार से मंत्री की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। प्रदेश स्तर पर इस बात की चर्चा भी है,और यह कहा भी जा रहा है कि यदि मंत्रीमंडल से किसी सदस्य को हटाया जाता है तो उसमें स्वास्थ्य मंत्री का नंबर सबसे पहले लगेगा। आखिर चर्चा सिर्फ स्वास्थ्य मंत्री की ही क्यों हो रही है यह सवालिया निशान है। सूत्रों का कहना है कि मंत्री को हटाये जाने का अंदेशा है इसलिए उनके द्वारा जोर आजमाईश लगाना शुरू कर दिया गया है। पूर्व सीएम के पास जाकर भी कुर्सी बचाने का आशिर्वाद मांगा जा रहा है।
दलालो और सप्लायरों से घिरे स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री को राजधानी रायपुर के शंकर नगर इलाके मे शासकीय आवास मिला हुआ है उक्त आवास के जिर्णोद्वार का सारा काम मंत्री और निज सचिव की इच्छा पर एक दलाल के द्वारा ही कराया गया है। इस बंगले पर हर समय दलाल और पुराने सप्लायर का घेरा बना रहता है। मंत्री को ऐसे गिरोह ने घेर कर रखा है जो कि कांगे्रस सरकार के कार्यकाल में भी विभाग में सप्लाई का काम किया करते थे।
कॉल रिसीव भी नही करता स्वास्थ्य मंत्री का स्टॉफ
स्वास्थ्य मंत्री का स्टॉफ आउट आफ कंट्रोल है,सभी को सत्ता का नशा है। आलम यह है कि जरूरत पड़ने पर यदि कोई प्रमुख व्यक्ति भी मोबाईल पर संपर्क करता है तो कॉल रिसीव नही किया जाता।
स्टाफ भी है विवादित इसलिए गिरी मंत्री की साख
मंत्री की कार्यशैली के साथ साथ उनका विवादित स्टॉफ भी उनकी साख के लिए जिम्मेदार है। स्टॉफ में विशेष सहायक से लेकर विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी काफी चर्चित हैं। एक अधिकारी तो श्रवण बाधित प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। कुछ ऐसे लोग भी काम रहे थे जो कि कांग्रेस सरकार में भी सक्रिय थे हलांकि उनमें से दो लोगो को हटा दिया गया है। उसके बाद भी विवादित स्टॉफ काम कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री से नही संभल रहा जनता से जुड़ा विभाग
स्वास्थ्य विभाग एक ऐसा विभाग है जिससे आम जन सीधा जुड़ा रहता है। प्रदेश में किसान वर्ग अधिकाधिक संख्या मे हैं वह इतना सक्षम नही है कि बड़े निजी अस्पतालों मे जाकर मंहगा ईलाज करा सके। इसलिए प्रदेश की एक बड़ी जनसंख्या शासकीय चिकित्सालय पर ही भरोसा करती है लेकिन इन दिनों इस विभाग की और चिकित्सालयों की दुर्दशा देखकर आम जन भी परेशान है। इससे सरकार की भी किरकिरी हो रही है। मंत्रीमंडल में अब अतिशीघ्र दो सदस्यों को स्थान मिलना है जिसके बाद पूरी संभावना है कि कई मंत्रियों के विभाग बदल दिए जाएंगे। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी किसी अन्य मंत्री को दिया जा सकता है जिससे सरकार की साख बची रह सके।
अचार संहिता से ठीक पहले हुई खरीदी विवादित
देश भर में लोकसभा चुनाव हेतु अचार संहिता मार्च में प्रभावी हुई थी,और इसके ठीक पहले भी स्वास्थ्य विभाग में प्रदेश भर में खरीदी की गई जो कि अब विवादित हो चुकी है। सूत्रो ने बतलाया कि अचार संहिता के ठीक पहले बजट जारी किया गया एक ही दिन में क्रय समिति बना ली गई बैठक भी हो गया, खरीदी का आर्डर भी कर दिया गया और सप्लाई भी हो गई यह सब आनन फानन में किया गया। लगभग 40 करोड़ की राशि से खरीदी की गई जिसमें एक दलाल की भूमिका संदिग्ध है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के पीए का भतीजा बना करीबी
प्रदेश में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री रहे टीएस सिंहदेव के पीए विनोद गुप्ता का भतीजा सौरभ गुप्ता जो कि अब भाजपा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल का करीबी बना हुआ है उसके द्वारा मंत्री का सारा काम काज संभाला जा रहा है। कांग्रेस से जुड़े लोगो का काम आसानी से अब स्वास्थ्य मंत्री के यहां से हो रहा है। प्रदेश के कई जिलों के अधिकारी तक उक्त व्यक्ति द्वारा संपर्क कर कई चीजों को लाईनअप किया जा रहा है। बतलाया जाता कि छाीसगढ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा उप अभियंता सौरभ गुप्ता को मंत्री के निज सचिव की इच्छा पर निर्माण संभाग रायपुर में संलग्न किया गया है और वह मंत्री के इर्द गिर्द ही सक्रिय होकर काम कर रहा है।
गजेंद्र यादव मंत्री बने तो बाहर होगा एक ओबीसी चेहरा
प्रदेश में इन दिनों जिस प्रकार से मंत्रिमंडल विस्तार या पुनर्गठन की चर्चा है उसके अनुसार यदि दुर्ग संभाग और आरएसएस बैक ग्राउंड से आने वाले गजेंद्र यादव को मंत्री बनाया जा सकता है वे आरएसएस के पूर्व प्रांत प्रचारक बिसरा राम यादव के सुपुत्र हैं उन्हें आरएसएस की ओर से आगे किया जाने की खबर है। हालाकी अभी प्रदेश मंत्रिमंडल में ओबीसी वर्ग से अरुण साव, ओपी चौधरी, श्यामबिहारी जायसवाल, टंकराम वर्मा, लक्ष्मी राजवाड़े और लखन देवांगन मंत्री हैं यदि गजेंद्र यादव को मंत्री बनाया जाता है तो संख्या 7 हो जायेगी इससे सही संदेश नही जायेगा और संतुलन भी बिगड़ेगा। जानकारों का कहना है कि यदि गजेंद्र यादव को मंत्री बनाया जाता है तो वर्तमान के एक ओबीसी वर्ग से आने वाले मंत्री की छुट्टी भी हो सकती है,ऐसे में यदि स्वास्थ्य मंत्री को हटाया जाता है तो कोई बड़ी बात नहीं।
अजय जामवाल और पवन साय दिल्ली पहुंचे
अभी हाल ही में प्रदेश के सीएम विष्णु देव साय दिल्ली गए हुए थे उनके आने के बाद कयास लग रहे थे कि 2 मंत्रियों की नियुक्ति जल्द हो सकती है लेकिन अब यह खबर मिल रही है कि अब क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन मंत्री पवन साय दिल्ली गए हुए हैं जहां उनकी मुलाकात संगठन के प्रमुख नेताओं से होगी। लोकसभा चुनाव की विधानसभा वार जानकारी भी दिल्ली दरबार में दी जा सकती है और उसी आधार पर मंत्रिमंडल का नया चेहरा तय होगा जैसा सूत्रों का कहना है। यदि लोकसभा के हिसाब से मंत्रियों के कुर्सी की बात होगी तो यह तय है कि कोरबा लोकसभा से आने वाले मंत्री ही हटाने के क्रम में सबसे आगे होंगे। उल्लेखनीय है कि कोरबा लोकसभा सीट केंद्र की नजर में था यही कारण है कि खुद यहां गृह मंत्री अमित शाह ने सभा ली थी उसके बाद भी स्थानीय नेताओं ने इस सीट को गंभीरता से नहीं लिया और अंततः हार का सामना करना पड़ा जिस पर केंद्रीय नेतृत्व खासा नाराज है।
बचेगी कुर्सी या जाएगी अभी कुछ तय नहीं
प्रदेश में अतिशीघ्र मंत्रीमंडल का विस्तार किया जाना है,संभावना है कि कुछेक मंत्रियों को बदल कर कुछ पुराने नेताओं को भी मंत्री पद दिया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की कुर्सी संभालने के बाद मंत्री के द्वारा दशा सुधारने कोई ठोस निर्णय नही लिया गया। देखने में मिला कि उनके इर्द गिर्द घोटालेबाजों से लेकर दलाल और सप्लायरों का घेरा है। स्वास्थ्य मंत्री फोटोबाजी पर ज्यादा फोकस करते हैं वे प्रदेश के एकमात्र ऐसे मंत्री हैं जो साथ में ड्रोन कैमरा लेकर चलते हैं। कोरबा लोकसभा की हार के बाद स्वास्थ्य मंत्री की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। बतलाया जाता है कि खुद मंत्री जी करीबी लोगों से इस बात का अंदेशा व्यक्त कर चुके हैं, उन्होने ऐसा काम नही किया जिससे कि स्वास्थ्य विभाग की दशा सुधार सके इस वजह से ही उनके मन में हटाये जाने का डर बैठा हुआ है। अभी हटाया जाता है या नही यह तो कहा नही जा सकता लेकिन अगले हर समय उन्हे हटाये जाने का भय बना रहेगा। संभवत:इसलिए स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश के जिलों का दौरा शुरू कर दिया है