- प्रतापपुर विधायक ने सोशल मीडिया पर लिखा पोस्ट,कुछ पुलिसकर्मियों को इधर से उधर करने की कही बात…
- आखिर क्यों हटाना है पुलिसकर्मियों को और कौन हटाएगा इसका सोशल मिडिया पोस्ट में नहीं है उल्लेख?
- सोशल मिडिया पोस्ट से उठ रहे सवाल,क्या अपने ही विधायकों की भी नहीं सुन रही छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार?
-ओंकार पांडेय-
सुरजपुर,15 जून 2024 (घटती-घटना)। प्रदेश में क्या विधायकों की खासकर भाजपा विधायकों की सुनवाई नहीं हो रही है क्या प्रशासन में भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि हाल ही में सूरजपुर जिले की प्रतापपुर विधायक ने सोशल मिडिया पर एक पोस्ट साझा किया है और जिसमे उन्होंने यह मांग की है की कुछ पुलिसकर्मियों को इधर से उधर करना है वर्तमान जगह से अन्यत्र पदस्थ करना है और जिन्हे वह एक जगह से दूसरी जगह भेजना चाहती हैं उनके नाम और पदनाम भी वह स्पष्ट रूप से लिखकर साझा की हैं जो सोशल मिडिया पर उनके पोस्ट स्वरूप उपलब्ध है।पुलिस सहायक उपनिरीक्षक से लेकर आरक्षक तक का नाम उनकी सोशल मिडिया पोस्ट में देखा जा सकता है। अब विधायक कुछ गिने चुने पुलिसकर्मियों का तबादला क्यों चाहती हैं और वह यदि तबादला चाहती हैं भी तो वह सोशल मिडिया के माध्यम से ही क्यों तबादला चाहती हैं यह बड़ा सवाल है वहीं उनकी पोस्ट से यह भी सवाल उठ रहा है की क्या सरकार खासकर उन्ही की दल की सरकार में उनकी नहीं चल पा रही है सुनवाई नहीं हो रही है और इसी कारण जिला प्रशासन भी विधायकों की नहीं सुन रहा है और जिस वजह से विधायक को पुलिसकर्मियों का तबादला करने की मांग सोशल मिडिया के माध्यम से करनी पड़ रही है। वैसे तबादला कौन करेगा और क्यों वह तबादला कुछ पुलिसकर्मियों का चाहती हैं इसका उल्लेख नहीं है उनके सोशल मिडिया पोस्ट में। प्रतापपुर विधानसभा सूरजपुर जिले के अंतर्गत आता है वहीं सूरजपुर जिले से ही भटगांव विधायक कैबिनेट मंत्री हैं जिनकी सरकार और जिला प्रशासन में बेहतर धमक है ऐसे में भी प्रतापपुर विधायक को प्रशासन से सहयोग नही मिला रहा है यह सोचने वाली बात है।
क्या प्रतापपुर विधायक की सोशल मिडिया पोस्ट से क्या प्रशासन खासकर पुलिस विभाग संज्ञान लेगा?
वैसे अब देखना यह भी है की क्या प्रतापपुर विधायक की सोशल मिडिया पोस्ट से क्या प्रशासन खासकर पुलिस विभाग संज्ञान लेगा क्या वह विधायक की सोशल मिडिया पोस्ट पर संज्ञान लेकर तबादले की कार्यवाही करेगा,वैसे ऐसा लगता नहीं है क्योंकि सूरजपुर जिले में प्रतापपुर के अलावा अन्य कई ऐसे पुलिस थाने और चौकियां हैं जहां के प्रभारियों और कई पुलिसकर्मियों को हटाए जाने की जरूरत है क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कहीं न कहीं दोषपूर्ण ही कार्यप्रणाली प्रदर्शित की है जो प्रतापपुर विधायक की सोशल मिडिया पोस्ट के बाद भी समझा जा सकता है की किस तरह एक विधायक सुनवाई के अभाव में सोशल मीडिया का सहारा ले रहा है। सोशल मिडिया को पहले यह माना जाता था की वह उन लोगों की आवाज है जिनकी सुनवाई नहीं हो पाती कहीं और जो आम लोग होते हैं वहीं अब विधायक खासकर सााधारी दल के विधायक भी सोशल मीडिया के भरोसे हैं जो विचारणीय स्थिति है किसी सरकार के लिए। आज प्रदेश में भाजपा की सरकार है प्रदेश के मुख्यमंत्री भी सरगुजा संभाग से हैं वहीं सरगुजा संभाग का ही एक जिला है सूरजपुर और उसी जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं जो सोशल मिडिया पर गुहार लगा रही हैं।
विधायक ने नहीं उठाया फोन
इस विषय में पूछने के लिए विधायक को कई बार फोन लगाया गया पर वह फोन उठाना उचित नहीं समझी जिस वजह से बात नहीं हो पाई, जिस वजह से हम उनका पक्ष नहीं रख पाए और उनके इस घटना के बारे में उनकी मनसा नहीं पता चल पाई,पर अपना व्हाट्सएप स्टेटस तत्काल ही हटा दिया था पर समझ नहीं आया कि आखिर ऐसा ही हूं क्यों किया था?
सुरजपुर जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति क्या बेहतर नहीं है क्या पुलिस विभाग में मनमानी चल रही है?
सुरजपुर जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति क्या बेहतर नहीं है क्या पुलिस विभाग में मनमानी चल रही है विधायकों की भी सुनवाई नहीं हो रही है मनमुताबिक पुलिसकर्मी काम कर रहे हैं जिससे विधायकों को सोशल मिडिया के माध्यम से उन्हे हटाए जाने की मांग करनी पड़ रही है। विधायक ने पुलिसकर्मियों को हटाने की बात तो सोशल मिडिया पर लिखी है लेकिन क्या यह उनकी मांग पुलिसकर्मियों की सहमति वाली मांग है यह भी सवाल उठ रहा है। वैसे यदि विधायक यदि पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली से रूष्ट हैं और कार्यकर्ता उन्हे कार्यप्रणाली की शिकायत कर रहे हैं पुलिसकर्मियों को वर्तमान जगह से हटाने की मांग कर रहे हैं विधायक से और विधायक प्रशासन या पुलिस विभाग के द्वारा सुनवाई नहीं होने की वजह से सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों को हटाने की मांग कर रही हैं तो यह शासन और प्रशासन के हिसाब से एक विधायक खासकर सााधारी दल के विधायक की मांग को अनसुना करके का मामला है और यह कहीं न कहीं एक तरह से ऐसी स्थिति है जहां जनप्रतिनिधि निर्वाचित मजबूर है और उसे गुहार लगाने की जरूरत पड़ रही है।सुरजपुर जिले में एक तरफ भटगांव विधायक साथ ही मंत्री पत्राचार करके तेंदूपाा फड़ मुंशी तक बदलने का आदेश विभाग को दे रही हैं वहीं दूसरी तरफ एक सााधारी दल की विधायक सोशल मिडिया पर पुलिसकर्मियों को हटाने के लिए गुहार लगा रही हैं कुल मिलाकर एक ही दल के दो विधायकों की अलग अलग स्थिति कहना गलत नहीं होगा स्थिति को देखते हुए।