कोलकाता@विदाई भाषण के बाद चर्चा में आए जज

Share


कोलकाता,21 मई 20254 (ए)।
कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस चितरंजन दास ने दावा किया कि वो बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। संघ ने ही उनके व्यक्तित्व को आकार देने और उनमें साहस, देशभक्ति पैदा करने में मदद की थी। न्यायमूर्ति चितरंजन दास ये खुलासा कलकत्ता हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त होने के बाद अपनी फेयरवेल में किया है। उन्होंने अपनी फेयरवेल पार्टी में बोलते हुए कहा कि आज मुझे अपनी असलियत बतानी चाहिए। मैं एक संगठन का बहुत आभारी हूं, मैं बचपन से लेकर युवावस्था तक वहां रहा हूं। मैंने वहां साहसी, ईमानदार होना और दूसरों के लिए समान विचार रखना, देशभक्ति और जहां आप काम करते हैं। उस काम के लिए प्रतिबद्धता की भावना सीखी. मुझे स्वीकार करना चाहिए कि मैं आरएसएस का सदस्य था और हूं। मैंने अपने काम की वजह से लगभग 37 साल तक संगठन से दूरी बना ली।
उन्होंने दावा करते हुए यह भी कहा कि मैंने कभी भी अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए अपने संगठन का इस्तेमाल नहीं किया, क्योंकि यह हमारे सिद्धांतों के खिलाफ है। मैंने हर किसी को एक ही तराजू में तोला, चाहे वह कम्युनिस्ट हो, भाजपा, कांग्रेस या फिर टीएमसी से संबंधित व्यक्ति हो। मेरा किसी से कोई लेना-देना नहीं है। मैं किसी राजनीतिक शख्सियत के खिलाफ नहीं हूं. मेरे सामने सब बराबर थे। मैंने दो सिद्धांतों पर न्याय देने की कोशिश की। पहला सहानुभूति और दूसरा है न्याय करने के लिए कानून को झुकाया जा सकता है, लेकिन न्याय को कानून के अनुरूप नहीं बनाया जा सकता।
न्यायाधीश ने यह भी खुलासा किया कि वह अब आरएसएस के लिए काम करना चाहते हैं, क्योंकि अब वो रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि वे मुझे किसी मदद या किसी काम के लिए बुलाते हैं, जिसे करने में मैं सक्षम हूं तो मैं अब संगठन में वापस जाने के लिए तैयार हूं।


Share

Check Also

नई दिल्ली,@ मणिपुर में शांति बहाली की कोशिश में जुटा केंद्र

Share नई दिल्ली,05 अप्रैल 2025 (ए)। मणिपुर में शांति की दिशा में केंद्र सरकार ने …

Leave a Reply