अंबिकापर,04 अप्रैल 2024(घटती-घटना)। भारत सरकार ने एक व्यापक राष्ट्रीय स्तरीय आहार सर्वेक्षण शुरू किया है। जो भारत में अल्प पोषण की लगातार समस्या को कम करने और अधिक वजन,मोटापे की बढ़ती महामारी को रोकने के लिए भोजन-आधारित हस्तक्षेपों के लिए महत्वपूर्ण अंतराल को परिभाषित करेगा। आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्था (एनआईएन), हैदराबाद द्वारा तीन चरणों (प्रत्येक चरण में 12 राज्य, केन्द्र शासित प्रदेश) में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रमुख पोषण संकेतकों के अनुमानों के लिए 36 राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।
इसी परिपेक्ष्य में छाीसगढ़ के 6 जिलों क्रमशः सरगुजा, बिलासपुर, महासंमुद, रायगढ़ तथा दंतेवाड़ा (2011 जनगणना के अनुसार) में इस परियोजना को संचालित किया जा रहा है। जिसके लिए आईसीएमआर एनआईएन
द्वारा एक प्रशिक्षित परियोजना स्टाफ का गठन किया गया है। जो अभी सरगुजा जिले के 27 गाँव में सर्वे कर रही है।
डीएबीएस-का उदेश्य एनीमिया की व्यापकता और आहार की पर्याप्तता, अपर्याप्तता का सही अनुमान देंगे और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आईसीडीएस, एमडीएम और अन्य सरकारी पूरक कार्यक्रमों (पीडीएस) के लिए पोषण मानदंडों को तय करने में मार्गदर्शन करेंगे।
यह सर्वेक्षण पहली बार विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों से पके और बिना पोषक तत्व संरचना डेटा भी प्रदान करेगा। पके खाद्य पदार्थों पर छाीसगढ़ राज्य में इस परियोजना को संचालित करने के लिए जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर के कम्यूनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट से डॉ. मिनी शर्मा (नोडल ऑफिसर), एनआईआरटीएच
जबलपुर से डॉ. राकेश भारती (रिजनल मॉनिटरिंग ऑफिसर) तथा डॉ. युवराज जायसवाल (प्रोजेक्ट जूनियर मेडिकल ऑफिसर) के साथ परियोजना स्टाफ की पूरी टीम, मिशन मोड में यह सर्वेक्षण कर रही है।
उक्त सर्वेक्षण के सफल क्रियान्वयन हेतु डीन डॉ. रमणेश मूर्ती राजमाता देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अम्बिकापुर की अध्यक्षता में तथा डॉ. आरसी आर्या, संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधिक्षक, डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव विभागाध्यक्ष बायोकेमेस्ट्री विभाग, डॉ. विशाल कुलकर्णी सह प्राध्यापक पैथोलॉजी, डॉ विकास पाण्डेय, डॉ. अरविन्द कुमार सिंह की उपस्थिति में एक बैठक गुरुवार को आयोजन किया गया, साथ ही चिकित्सा महाविद्यालय स्तर पर उक्त सर्वेक्षण के सुचारू रूप से संचालन हेतु डॉ. विकास पाण्डेय, सहायक प्राध्यापक पैथोलॉजी विभाग को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया। “उक्त सर्वेक्षण के क्रियान्वयन से इलाज की गुणवाा बढ़ेगी एवं जाँच रिपोर्ट तत्परता पूर्वक उपलध कराने में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
