क्या प्रशासन के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिखने वाले पत्रकार के खिलाफ चुनाव आयोग करेगा कार्यवाही?
पत्रकार भवन में पत्रकारों ने भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी के साथ रखा चाय पर चर्चा कार्यक्रम…आचार संहिता उलंघन मानकर जिला निर्वाचन अधिकारी ने किया भवन सील
पत्रकारों ने की गलती और प्रशासन को दिखाई आंख वहीं सोशल मीडिया पर दी प्रशासन को खुली चुनौती

-रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़ 28 मार्च 2024 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले के कुछ पत्रकार कुछ ज्यादा ही मनचले हो चुके हैं उन्हें अपने अधिकार से ऊपर काम करने का लाइसेंस मिल गया है? जिस वजह से हमेशा वह विवादों में घिरे रहते हैं एमसीबी जिले का पत्रकार भवन शुरू से लेकर अब तक विवादों में ही घिरा हुआ है, वहीं एक बार फिर कुछ पत्रकारों के अत्यधिक होशियारी में उस भवन में ताला भी लग गया, पत्रकार जो काफी लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे हैं कई विधानसभा व लोकसभा का चुनाव का कवरेज कर चुके हैं फिर भी उन्हें इस बात का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं रहा की किस बात से चुनाव आयोग के निर्देश आदेशों का उल्लंघन होगा? एमसीबी जिले के कुछ पत्रकारों ने भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी के लिए शासकीय पैसे से बने पत्रकार भवन में चाय पर चर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका पोस्ट भी भाजपाइयों द्वारा सोशल मीडिया पर डाला गया जिसके बाद किसी ने जिला निर्वाचन अधिकारी को इसकी शिकायत कर दी और जिला निर्वाचन अधिकारी ने पत्रकार भवन को बिना किसी से पूछे सील कर दिया, जैसे ही यह बात पत्रकारों को पता चली पत्रकार आग बबुला हो गए और बिना जानकारी लिए आदर्श आचार संहिता के दौरान धरने पर बैठ गए, और प्रशासन को ही आंख दिखाना उन्होंने जरूरी समझा, जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्रकार झुकाने का प्रयास कर रहे थे यहां तक की सोशल मीडिया पर एक पत्रकार ने तो जिला निर्वाचन अधिकारियों को ही चुनौती दे दी कि जिस प्रकार उन्होंने बिना सूचना दिए भवन को सील किया है ठीक उसी प्रकार हम भी जाकर उस सील को खोल देंगे। जब जिला निर्वाचन अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि आपकी गलती की वजह से पत्रकार भवन सील हुआ है भवन शासकीय पैसे से बना है और आप आदर्श आचार संहिता के दौरान कैसे किसी प्रत्याशी के साथ चाय पर चर्चा का कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं जिसके बाद धरने पर बैठे पत्रकारों ने लिखित में दिया कि हम उस भवन में कोई भी ऐसा कार्यक्रम नहीं करेंगे जिस वजह से आदर्श आचार संहिता का उलंघन हो जिसके बाद जाकर जिला निर्वाचन अधिकारी ने पत्रकार भवन के सील को खोल दिया।
मिली जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा बुधवार की रात मनेद्रगढ़ पत्रकार भवन के गेट पर ताला लगाकर किया सीलबंद, सोशल मीडिया पर सीलबंद फोटो वायरल हुआ। पूरा मामला क्या है। हम विस्तार से आपको अपनी खबर के माध्यम से सत्य से अवगत करा रहे हैं, गुरुवार सुबह लगभग 11:00 बजे एमसीबी- प्रेस क्लब के सदस्यों द्वारा वीडियो पोस्ट कर विरोध प्रदर्शन किया गया,मनेंद्रगढ़ में पत्रकार भवन को सील किया गया है जिसको लेकर आज मनेंद्रगढ़ के पत्रकार इसे काला दिवस के रूप मनाएंगे चुनाव आयोग किसके इशारे से काम कर रहा है? तथा की काला कपड़े पहने सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।पत्रकारों ने भवन के सामने बैठ नारे लगाएं एमसीबी- कलेक्टर होश में आओ होश में आओ तुम्हारी तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी, पत्रकार एकता जिंदाबाद हम अपना अधिकार मागते नहीं किसी से भीख मागते,प्रशासन की गुंडागर्दी नहीं चलेगी नहीं चलेगी। शोसल मीडिया में पत्रकार फर्जी पत्रकार बोलकर पत्रकारों को टारगेट कर रहे थे। जबकि सच्चाई तब सामने आई जब जिला प्रशासन के अधिकारी द्वारा पत्रकार भवन के गेट का ताला खोल दिया गया।

सवाल ताला क्यों लगाया गया था?
प्रशासन के अधिकारी का जवाब 27 मार्च को यह आया की अन्य राजनीतिक पार्टी द्वारा शिकायत किया गया था जिसमें यह कहा गया कि पत्रकार भवन शासकीय भूमि पर है वहां पर सुबह 28 मार्च को अन्य पार्टी की प्रेस वार्ता सुबह समय 9:30 बजे होने को है जिसे देखते हुए आदर्श आचार संहिता का सीधा-सीधा उल्लंघन है, इसलिए कुछ घंटे के लिए प्रेस वार्ता को टालने के लिए पत्रकार भवन गेट को सील कर दिया गया था। एमसीबी- प्रेस क्लब के पत्रकारों द्वारा लिखित कोई राजनीतिक पार्टी का आचार संहिता पर पत्रकार भवन में प्रेसवार्ता नहीं होगा, आश्वासन देने पर प्रशासन अधिकारी ने गेट का ताला खोला, सवाल यह क्या है एमसीबी-प्रेस क्लब सोशल मीडिया में बने रहने पर अपनी झूठी वाहवाही लूटने कार्य तो नहीं कर रहे हैं? सवाल धारा 144 आचार संहिता का उल्लंघन पत्रकारों ने नहीं किया है, क्या चुनाव आयोग को इन पर कार्रवाई नहीं करना चाहिए?
आचार संहिता के दौरान पत्रकार कैसे बैठे धरने पर?
एमसीबी प्रेस क्लब के पदाधिकारी ने पत्रकार भवन में ताले में लगी सील को देखा और बैठ गए धरने पर क्या उन्होंने पहले किसी अधिकारी से बात किया यदि अधिकारियों से बात करते तो इस समय समस्या का हल हो जाता कि ताला कितनी समय खुलेगा परंतु उन्होंने प्रोपेगेंडा कर दूसरों पर आरोप लगाते हुए हल्ला गुल्ला किया और आचार संहिता का उल्लंघन किया।क्या जिला प्रशासन आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज करेगा। वैसे एक पत्रकार ने तो सोशल मिडिया पर प्रशासन को ही चुनौती दे डाली थी और ताला तोड़ने की ही बात कह डाली थी वैसे यह वही पत्रकार हैं जिनको लेकर आम आदमी पार्टी ने शहर में मंच लगाकर विरोध किया था और इनकी करतूतों को उजागर किया था। यह पत्रकार कांग्रेस शासनकाल में अपनी मनमानियों के लिए जाने जाते थे और इन्हे तत्कालीन जनप्रतिनिधियों का ऐसा संरक्षण प्राप्त था की उन्हे हर मनमानी का अधिकार था। कांग्रेस शासनकाल की ही तर्ज पर वह ताला तोड़ने की बात कर रहे थे और जिसके पहले ही ताला प्रशासन के द्वारा खोल दिया गया।