कोरिया,@गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व अस्तित्व में नहीं आ सका…कांग्रेस सरकार ने रोक रखा था नोटिफिकेशन…क्या भाजपा सरकार में आ पाएगा अस्तित्व में?

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-रवि सिंह-
कोरिया,15 मार्च 2024 (घटती-घटना)। केंद्र सरकार ने 2021 में गुरु घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया, लेकिन यह अस्तित्व में नहीं आ सका है। टाइगर रिजर्व का नोटिफिकेशन ढाई साल से प्रदेश की कांग्रेस सरकार रोके हुए थी। शासन का मत था कि जहां रिजर्व घोषित किया गया, उस पूरे इलाके में महत्वपूर्ण खनिजों की खदानें और घना जंगल है। रिजर्व बनने के बाद अगर इस इलाके में खनन बंद करना पड़ा तो इससे राज्य को गंभीर आर्थिक संकट उठाना पड़ सकता है।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में पिछले एक साल में टाइगर 19 से घटकर 17 रह गए है। यह रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने जारी की है। दूसरी ओर प्रदेश में 4 टाइगर रिजर्व मंजूर हैं, लेकिन अस्तित्व में केवल 3 ही हैं। चौथा यानी गुरु घासीदार टाइगर रिजर्व केंद्र से 2021 में मंजूर जरूर हुआ, लेकिन राज्य शासन ने इसे रोक दिया। पार्क को रिजर्व में बदलने का प्रस्ताव 2012 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने केंद्र को भेजा था। इसके शुरू होने से आय के स्त्रोत बाधित होंगे। ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रदेश की विष्णु देव आय की सरकार टाइगर रिजर्व को लेकर क्या फैसला लेती है।
भाजपा की सरकार ने भेजा था ड्राफ्ट
छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की ओर से गुरु घासीदास नेशनल पार्क और तमोर पिंगला सेंचुरी को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाने का ड्राफ्ट एनटीसीए को भेजा गया था। एनटीसीए ने ही इसे टाइगर रिजर्व के रूप में मंजूरी दी, लेकिन कांग्रेस शासन में यह मामला इस रिजर्व एरिया के कोल ब्लॉक, आइल ब्लॉक और मिथेन गैस ब्लॉक पर फंस गया है। इसी संबंध में राज्य खनिज विभाग और केंद्र को पत्र लिखाकर अभिमत मांगा गया, हालांकि अंतिम निर्णय राज्य का ही है। प्रस्तावित गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल के हिसाब से देश का तीसरा सबसे बड़ा रिजर्व होगा। गुरुघासीदास पार्क के डायरेक्टर ने कहा कि प्रस्तावित टाइगर रिजर्व को लेकर राज्य स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।
बाघ की सुरक्षा के लिए बेहतर
जब एनटीसीए ने मंजूरी दे दी है, तो उसके बाद कोई सवाल ही नहीं बचता है। गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व में टाइगर हैं और इनका अच्छा मूवमेंट भी है। निश्चित तौर पर टाइगर रिजर्व के नोटिफिकेशन के बाद यह एनटीसीए के अधीन आ जाएगा। टाइगर की सघन निगरानी शुरू हो जाएगी, प्रोटेक्शन और ज्यादा होगा। साथ ही बायोडायर्सिटी के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।


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