मरम्मत के लिए 30 लाख की मंजूरी और किया गया 32 लाख का भुगतान
कोरबा,14 मार्च 2024 (घटती-घटना)। कोरबा नगर निगम में काम लेने वाले ठेकेदारों ने कमीशन खोरी से तंग आकर नगर निगम के लेखा अधिकारी ऑफिसर अशोक देशमुख के खिलाफ खोल दिया है मोर्चा। उनकी शिकायत है कि देशमुख, अपने पद का दुरुपयोग कर निगम कोष को क्षति पहुंचा रहे है। बताया गया है के कार्य की राशि जारी होने पर लेखा अधिकारी द्वारा स्वयं डोर टू डोर जाकर ठेकेदारों से कमीशन वसूल रहे हैं। और तो और एक बैंक में काम कर रहे अपने बेटे के प्रमोशन के लिए भी निगम के खाते से रकम ट्रांसफर कर उसे लाभ दिलाने अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। ठेकेदारों ने उक्त शिकायत पत्र में दर्शाया है ,साथ ही ठेकेदारों द्वारा उक्त लेखाधिकारी को हटाने की भी मांग की गई है।शिकायत में ठेकेदारों ने बताया है कि नगर निगम कोरबा के लेखा अधिकारी अशोक कुमार देशमुख अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नगर निगम को विाीय क्षति पहुंचा रहे हैं। शिकायत में लिखा गया है कि देशमुख द्वारा सभी ठेकेदारों के घर-घर जाकर 4.5 प्रतिशत का कमिशन लिया जा रहा है। यही नहीं, लेखाधिकारी अशोक देशमुख द्वारा जिसका पैसा प्राप्त होता है उनका चेक पहले भुगतान कर दिया जाता है और जो ठेकेदार पैसा नहीं देते है उनका भुगतान महीनों तक नहीं करते है। वे अपने पुत्र चंद्रकांत देशमुख को ढ्ढष्ठख्ढ्ढ बैंक में सर्विस दिलाने के लिए उक्त बैंक में खाता खोला गया एवं पुत्र के प्रमोशन हेतु निगम फण्ड ढ्ढष्ठस्नष्ट फर्स्ट बैंक में भेजा जा रहा है। इसकी जानकारी कैश शाखा से विाीय लेनदेन एवं उनकी पुत्र की ज्वाइनिंग आदि की तिथि से प्राप्त की जा सकता है। इतना ही नहीं, नगर पालिक निगम में चार्टर्ड एकाउंटेंट को प्रतिमाह डेढ़ लाख का भुगतान किया जाता है। जबकि चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा अंबिकापुर से महीने में एक दिन ही कोरबा का दौरा होता है। नस्तियों में साईन उनके कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। उक्त राशि से कम खर्च पर कोरबा में सीए मिल सकते हैं, जिसके लिए खुली रूचि की अभिव्यक्ति आमंत्रण करने पर मिल सकते हैं।
बदहाल सड़कों की मरम्मत के लिए 30 लाख की मंजूरी और किया गया 32 लाख भुगतान
जीर्ण शीर्ण सड़कों के मरम्मत कार्य मद के लिए स्वीकृत 30 लाख में भुगतान 32 लाख रुपये किया गया। बिना आयुक्त की स्वीकृति 2 लाख का खर्च किया गया। यह खर्च भी रोका जा सकता था। इसे शासन से स्वीकृति उपरांत भुगतान किया जाना था। यह कृत्य विाीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इसी तरह यूआईपीए के तहत शासन से प्राप्त राशि का दूसरे मद में व्यय कर दिया गया है, जो शासन के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है,पर कमिशन खोरी के चक्कर में भुगतान कर दिया गया है।