भाजपा के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को अपना बिगे्रड बतला रहे जिलाध्यक्ष का यह कैसा उतावलापन
क्या खुद अकेले लोकसभा चुनाव जीता पाएंगे जनाधार विहीन भाजपा जिलाध्यक्ष?
बेटे को वार्ड पंच और पत्नी को जिला पंचायत सदस्य ना जीता पाने वाले जिलाध्यक्ष मांग रहे थे लोकसभा का टिकट
संगठन में नही दिखता इनका कोई काम,सिर्फ दिखता है सोशल मीडिया पर नेताओं के साथ सेल्फी और फोटो
फोटो डालकर खुद को बड़ा और पहुंच वाला नेता बतलाने की कोशिश लेकिन हकीकत कोसो दूर
टिकट ना मिलने का दर्द भी दिखा सोशल मीडिया मे अभी तक नही दिया गया प्रत्याशी सरोज पांडेय को बधाई जिलाध्यक्ष की चाल नही आई काम
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,05 मार्च 2024 (घटती-घटना)। कोरबा लोकसभा से भाजपा उम्मीदवार बनाई गईं राज्यसभा सदस्य सरोज पांडेय का सोमवार को कोरिया जिला आगमन हुआ इसके पूर्व श्रेय लेने में माहिर भाजपा के जिलाध्यक्ष ने विज्ञप्ति जारी कर ऐसा बड़बोलापन दिखलाया कि उससे लोग चटकारे लेने लगे हैं,सरोज पांडेय के आगमन को लेकर जारी विज्ञप्ति में ऐसे वाक्यो का प्रयोग किया गया जो कि जिलाध्यक्ष का ही फजीहत करा रही है। विज्ञप्ति के अनुसार जिलाध्यक्ष की बिगे्रड स्वागत के लिए आतुर है ऐसा वाक्य उक्त विज्ञप्ति में उपयोग किया गया, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोरिया जिले मे भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पार्टी के लिए काम कर रहे हैं या फिर जिलाध्यक्ष के लिए। जिलाध्यक्ष के द्वारा बिग्रेड लिखवाया जाना यह प्रतीत होता है कि सारे पदाधिकारी और कार्यकर्ता उनके बिग्रेड बनकर काम कर रहे हैं और बाकी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का कहीं कोई अस्तित्व नही है। इसके पूर्व भी लोकसभा चुनाव में टिकट खोज रहे जिलाध्यक्ष द्वारा एक पेड न्यूज लगवाया गया था जिसमें खुद को सर्वश्रेष्ठ बतलाकर बाकी दावेदारों को काफी हल्का बतलाया जा रहा था। संगठन के एक जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा समय समय पर ऐसा किया जाना उनके घमंड और अकड़पन को दर्शाता है बाकि पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को भी उनकी कार्यशैली राश नही आ रही है।
फोटोबाज जिलाध्यक्ष करते हैं अन्य नेताओं का मनोबल नीचा
कोरिया के भाजपा जिलाध्यक्ष फोटोबाजी में भी आगे हैं, कई ऐसे अवसर देखने को मिलते हैं जिसमें जिलाध्यक्ष द्वारा अन्य बड़े नेताओं के आगमन पर जिले के दूसरे पदाधिकारियों तक सूचना नही पहुंचाई जाती या कि किसी कार्यक्रम में उपेक्षित किया जाता है। बड़े नेताओं के आगमन पर जिलाध्यक्ष द्वारा खुद की फोटो खींचाकर सोशल मीडिया में वायरल कर खुद को ही सर्वेसर्वा बतलाया जाता है। ऐसा करके जिलाध्यक्ष द्वारा खुद को बड़ा नेता बतलाया जाता है और खुद को जनाधार वाला साबित किया जाता है जबकि हकीकत इससे कोसो दूर है। बाकी नेताओं को दरकिनार करना या नीचा दिखलाना जिलाध्यक्ष की आदत में शुमार है। जिलाध्यक्ष दूसरे नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने मे भी पीछे नही हैं। जिससे उनके खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
सोशल मीडिया में दिख रहा टिकट ना मिलने का दर्द
जिलाध्यक्ष द्वारा लोकसभा टिकट की दावेदारी की जा रही थी किंतु जनाधारविहीन होने के कारण उन्हे टिकट नही दिया गया, टिकट ना मिलने का दर्द भी जिलाध्यक्ष पर साफ दिखलाई दे रहा है, उनके सोशल मीडिया एकाउंट पर समाचार लिखे जाने तक यह भी देखा गया कि टिकट तय होने के बाद भी उनके द्वारा सरोज पांडेय को बधाई संदेश नही दिया गया जो कि यह दर्शाता है कि वे इससे नाखश हैं। सूत्र तो यह भी बतलाते हैं कि जिलाध्यक्ष द्वारा कई कार्यकर्ताओं को भी सोशल मीडिया में बधाई देने से मना कर दिया गया था। छुटभैये नेताओं के जन्मदिवस पर भी बधाई देने वाले जिलाध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय को टिकट मिलने के बाद बधाई ना देना उनकी सोच को प्रदर्शित करता है भले ही वह अब कृष्णबिहारी बिग्रेड के द्वारा स्वागत की बात कर रहे हों या साथ ही स्वगत कार्यक्रम में भी सिर्फ औपचारिकता देखी गई।
क्या खुद के बल पर लोकसभा में जीत दिला पाएंगे जिलाध्यक्ष?
जिलाध्यक्ष में संगठन चलाने की क्षमता नही बल्कि चतुराई कुट कुट कर भरी दिखलाई देती है, हमेशा देखने में मिलता है कि वरिष्ठ नेताओं एवं मंत्री या कि अन्य पदाधिकारियेां के आगमन पर वे ऐसी घेराबंदी करके रखते हैं कि कोई भी दूसरा कार्यकर्ता अपनी बात तक रख नही पाता, जिलाध्यक्ष खुद सर्वे सर्वा बनकर बाहर से आए नेताओं को बरगलाने में भी पीछे नही हैं, ऐसा करके वे दूसरे नेताओं की बुराई भी करते हैं। जिलाध्यक्ष द्वारा बनाई गई चार-पांच लोगो की टीम ही अब सभी जगह आगे आगे दिखलाई देती है बाकि नेता और कार्यकर्ता सिर्फ भीड़ का हिस्सा बन कर रह गए हैं। जिलाध्यक्ष में इतनी क्षमता भी नही दिखलाई देती कि वे कोई भी बूथ का चुनाव अपने बलबूते जीता दें फिर काई बड़ा चुनाव वे कैसे जीता पाएंगे।
भाजपा जिलाध्यक्ष की चाल नही आई काम,पेड न्यूज में खुद को बताया था सर्वश्रेष्ठ
लोकसभा चुनाव हेतु कोरिया भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णबिहारी जायसवाल द्वारा भी दावेदारी की जा रही थी लेकिन जनता एवं कार्यकर्ताओं में भी उनकी लोकप्रियता कितनी है यह जगजाहिर है। बतलाया जाता है कि अपनी पत्नी को जिला पंचायत चुनाव एवं पुत्र को अपने गृह क्षेत्र से वार्ड पंच का चुनाव भी वे नही जीता सके थे और लोकसभा की दावेदारी कर रहे थे। उनके द्वारा कुछ दिनो पहले ही एक पेड न्यूज भी लगवाया गया था जिसमें अन्य मजबूत दावेदारों को कमजोर बतलाते हुए खुद को सर्वश्रेष्ठ और सबसे मजबूत, अनुभवी बतलाया गया था हलांकि यह पेड न्यूज लोगो के लिए हंसी का पात्र बन कर रह गया। पेड न्यूज में सरोज पांडेय एवं विकास महतो जैसे दावेदारों को भी भाजपा जिलाध्यक्ष ने कमजोर बतलाकर खुद की किरकिरी कराई थी। यह सर्वविदित है कि भाजपा जिलाध्यक्ष की लोकप्रियता एकदम शून्य है, सिर्फ जिलाध्यक्ष पद पर होने के नाते लोग उन्हे सम्मान देते हैं बाकि उनके साथ हमेशा गिनती के जनाधारविहीन नेता ही दिखलाई देते हैं । पेड न्यूज छपवाकर खुद के लिए टिकट तलाश रहे जनाधार विहीन भाजपा जिलाध्यक्ष की यह चाल भी कामयाब नही हो सकी। पार्टी के लोग ही इससे खुशी का इजहार कर रहे हैं।
फिर श्रेय लेने की होड़,जिलाध्यक्ष का यह कैसा रंग?
मैं,मैं और मैं यह आए दिन जिलाध्यक्ष कृष्णबिहारी जायसवाल के मुंह से सुना जाता है, पिछला विधानसभा चुनाव भैयालाल राजवाड़े के व्यक्तिगत कारणों एवं अंबिका सिंहदेव के विरोध के बाद मिली जीत का श्रेय जिलाध्यक्ष ने खुद ले ले लिया था। यही नही पिछले दिनों प्रकाशित पेड न्यूज पर देखा गया कि उनके द्वारा यह भी बतलाने की कोशिश हुई कि सोनहत ब्लॉक मे भी उनके नेतृत्व में रेणुका सिंह को बढत मिली जबकि जगजाहिर है कि जिलाध्यक्ष ने सोनहत क्षेत्र में रूचि नही लिया था। इसके बाद भी श्रेय लेना हंसी का पात्र बनकर रह गया है। अब लोकसभा चुनाव करीब आते ही एक बार फिर उनकी सक्रियता कुछ इसी प्रकार की दिखलाई दे रही है, जिसमें बड़बोलेपन का परिचय दिया जा रहा है। यह बतलाने की कोशिश जिलाध्यक्ष द्वारा की जा रही है कि वे ही इस जिले में सर्वश्रेष्ठ हैं और उनके हिसाब से ही मतदाता भी वोट डालते हैं तब चुनाव मे जीत मिलती है जबकि स्थिति एकदम उलट है। सूत्र बतला रहे हैं कि चुनाव में आर्थिक लाभ के उद्देश्य से जिलाध्यक्ष द्वारा प्रत्याशियों एवं प्रदेश स्तर के नेताआंे के सामने ऐसी भूमिका बांधी जाती है जिससे कि दूसरे नेताओं की पूछ परख खत्म हो जाती है वे सिर्फ कार्यकर्ता बतौर काम करते देखे जाते हैं। जिलाध्यक्ष द्वारा इन दिनों एक नई टीम भी बनाई गई है जिसमें कि गिनती के चार पांच ऐसे लोग सक्रिय हैं जिनका कोई जनाधार नही है वे ही सारे मंच पर नजर आ रहे हैं और बाकी अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपेक्षा की जा रही है।