कोरिया@झुमका जल महोत्सव के आयोजन में ऐसा मशगूल हुआ प्रशासन की बिना अशोक चक्र वाला तिरंगा झुमका क्षेत्र में फहरा दिया…

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रवि सिंह-
कोरिया 11 फरवरी 2024 (घटती-घटना)। कोरिया जिले का झुमका जल महोत्सव शुरू से ही लोगों को खटक रहा था पर प्रशासन की जिद थी कि यह आयोजन करना है और इस जिद की वजह से यह आयोजन हुआ भी और इस आयोजन में कई कमियां भी देखी गई, जहां पर यह आयोजन जिले वासियों के लिए मनाया जा रहा था उनके मनोरंजन के लिए मनाया जा रहा था वही यह आयोजन सिर्फ अधिकारियों और उनके परिवार के लिए ही होकर रह गया ऐसी चर्चा है, वहीं इस बीच एक बड़ी बात सामने आई जो वाकई में चौंकाने वाली है प्रशासन को पता था कि इस कार्यक्रम का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे, जिसके लिए खूब तैयारी की गई पर पूरी तैयारी पर पानी तब फिर गया जब झुमका में बिना अशोक चक्र वाला झंडा प्रशासन ने लगा दिया जो आसमान में लहराता रहा जब तक पहले दिन मुख्यमंत्री आकर लौट नहीं गए, लेकिन देश के तिरंगे के तीन रंग तो दिख रहे थे पर नहीं दिख रहा था तो अशोक चक्र इस पर प्रशासन पूरे मामले को दबा दिया और किसी तरह आयोजन निपटा भी लिया, अब यह बात अचानक वीडियो व फोटो के साथ सामने आ रही है जो कहीं ना कहीं प्रशासन की इतनी बड़ी लापरवाही को उजागर करता है तिरंगा उतार भी दिया गया लेकिन तब उतारा गया जब मुख्यमंत्री जिले से चले गए।
बताया जा रहा है की मामले को तत्काल प्रशासन के आला अधिकारियों के संज्ञान में किसी ने लाया भी लेकिन उन्होंने बिना अशोक चक्र वाले तिरंगे को फहरने दिया तब तक जब तक मुख्यमंत्री चले नहीं गए वहीं जब मुख्यमंत्री चले गए तिरंगा धीरे से उतार लिया गया और बात दबाने।की पूरी कोशिश की गई। बताया जाता है की यह बड़ी भूल थी जिसे तब सुधारने की बजाए गलती होने दिया गया और जब देखा गया की मुख्यमंत्री चले गए प्रशासन ने तत्परता दिखाई और तिरंगा खंभे से उतार दिया। जिला प्रशासन कोरिया पूरे आयोजन के दौरान केवल आयोजन को पारिवारिक उत्साह के लिए होने वाला आयोजन बनाता रहा जहां अधिकारियों के परिवार के सदस्यों और खुद अधिकारियों को विभिन्न सुविधाएं मिलती रही और अन्य के हिस्से जिलेवासियों के हिस्से केवल पुलिस वालों की फटकार ही आती रही और उन्हे बड़ी मुश्किल से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचते हुए देखा गया। भोजन, नाश्ता, चाय काफी अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों को परोसा जाता रहा वहीं आम लोगों को खड़े होने की जगह भी बमुस्किल मिलती नजर आई जिसमे पासधारी वह लोग भी शामिल थे जिन्हे राजनीतिक दलों से होने या अन्य किसी बड़े संपर्क की वजह से वीआईपी पास मिल सका था।

बिना अशोक चक्र का तिरंगा मुख्यमंत्री के रहते हुए झुमका जल महोत्सव के दौरान फहरता रहा,आखिर इसके लिए कौन है दोषी?
झुमका जल महोत्सव के दौरान बिना अशोक चक्र दर्शाता तिरंगा झुमका पर्यटन क्षेत्र के तिरंगे के लिए लगाए गए पोल पर फहरता हुआ नजर आता रहा वहीं इसपर नजर पड़ने के बाद भी जिले के आला अधिकारी तब तक मौन रहे जबतक की मुख्यमंत्री वापस लौट नहीं गए। मुख्यमंत्री के जाते ही तिरंगा उतार लिया गया वहीं तबसे पोल खाली है बिना तिरंगे के ही है। अब इस मामले में गलती हुई है या वह ध्वज किसी अन्य देश का था या वह ध्वज भारत का राष्ट्रीय ध्वज प्रतीक स्वरूप वहां लगाया ही नहीं गया था यह तो जिला प्रशासन ही बता सकता है लेकिन जिसने उस दौरान फोटो विडियो बनाया उसे जरुर अटपटा लगा यह कहा जा सकता है। कुल मिलाकर प्रशासन को बताना चाहिए की आखिर वह किस प्रतीक स्वरूप का तिरंगा था जिसमे अशोक चक्र ही नहीं था जो मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान झुमका क्षेत्र में लगाया गया था।

झुमका जल महोत्सव अधिकारियों का पारिवारिक उत्सव साबित हुआ,आम लोगों के लिए दोनो दिन परेशानियों भरे रहे
झुमका जल महोत्सव जिले के झुमका क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया जहां जिलेवासियों के मनोरंजन के लिए कई ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों को भी बुलाया गया था ऐसा प्रशासन का दावा था। कार्यक्रम के प्रारंभ से अंत तक यह देखने को मिला की कार्यक्रम अधिकारियों सहित उनके परिवार के सदस्यों के लिए आयोजित कार्यक्रम था जो उद्देश्य से ही भटक गया था अपने ऐसा लोगों ने महसूस किया। कार्यक्रम में कई मानक तय किए गए आमंत्रित सदस्यों के लिए जिसमे वीआईपी, वीवीआईपी, जैसी परंपरा पास के माध्यम से बनाई ही गई वहीं अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए उससे भी हटकर अलग ही तरह की व्यवस्था बैठक सहित अन्य सुविधाओं की की गई जो कार्यक्रम को सीमित लोगों के मनोरंजन खासकर अधिकारियों सहित उनके परिजनों के उत्साह के लिए होने वाला माना गया। कार्यक्रम में अधिकारियों सहित उनके परिवार के सदस्यों के लिए समय समय पर चाय नाश्ते की व्यवस्था उनके लिए भोजन की भी व्यवस्था की गई। अन्य लोग भीड़ में एक दूसरे को पछाड़कर किसी तरह आगे बढ़ते भी तो उन्हे पुलिस की फटकार मिलती और वह लौटते रहे। आम लोग रास्ता नापने का ही काम करते रहे।
भोजन के दौरान एक अधिकारी हुए थे नाराज,कुछ न मिलने से सामने आई थी नाराजगी
बताया यह भी जाता है की झुमका जल महोत्सव के दौरान भोजन की जो व्यवस्था अधिकारियों सहित उनके परिवार के सदस्यों के लिए की गई थी उसमे पहले दिवस की रात एक अधिकारी नाराज भी हो गए। बताया जा रहा है की उन्हे खाने में एक ऐसी चीज नहीं परोसी गई जो बनाई तो गई थी लेकिन जल्द खत्म हो गई थी। अधिकारी काफी नाराज हुए थे ऐसा बताया जा रहा है वहीं वह कार्यक्रम से बिना कुछ खाए लौट भी गए थे।
प्रथम दिवस मंच संचालक उद्घोषकों का किया गया था आयात,आयातित मंच संचालक उद्घोषकों पर जिले के आला अधिकारी को था अधिक विश्वास,कार्यक्रम के बीच हटाए गए आयातित मंच संचालक- बताया यह भी जा रहा है की जिले के एक आला अधिकारी को जिले में मंच संचालकों साथ ही उद्घोषकों पर विश्वास नहीं था की वह मुख्यमंत्री के आगमन साहित दो दिवसीय आयोजन में मंच संचालन कर पाएंगे,जबकि कोरिया जिले का मंच संचालन अपने आप में हमेशा उदाहरण बना है अन्य जिले के लिए। आला अधिकारी ने दो मंच संचालक अन्य जिले से आयात किए और उन्हे मुख्यमंत्री के आगमन पर मंच संचालन की जिम्मेदारी दी गई। आयातित मंच संचालकों को कार्यक्रम के आरंभ में ही शब्द चयन में परेशान होते देखा गया वहीं उनकी जगह कोरिया जिले के उद्घोषकों को मंच संचालन के।लिए मंच प्रदान किया गया। आयातित केवल अपनी साज सज्जा तक ही प्रतिभावान साबित हुए मंच संचालन में कोरिया के उद्घोषकों के समाने वह बौने साबित हुए जो उपस्थित लोगों ने भी माना।
जिले के जिला मुख्यालय का एक क्लब बार भी इस मामले में हुआ था बदनाम,उस पर भी नए पुलिस अधीक्षक को रखना होगा ध्यान
कांग्रेस शासनकाल में जिला मुख्यालय के एक क्लब बार का भी इस मामले में नाम बदनाम हुआ था। क्लब बार भी किसी आम व्यक्ति का नहीं था,क्लब बार में तब सत्ताधारी दल के लोग सदस्य बतौर दर्ज थे जिनके कारण क्लब बार पर कोई कार्यवाही तब संभव नहीं हो पाई थी। नए पुलिस अधीक्षक को क्लब बार मामले में भी ध्यान देना होगा जिससे वहां भी मध्यप्रदेश की अवैध शराब न बेची जा सके क्योंकि कई बार ऐसी बातें सामने आती रहीं हैं।
पुराने बोटों का देखरेख हो नहीं पा रही है,शिकारा चप्पू के सहारे कैसे चलेगा
झुमका में कलेक्टर कोरिया ने शिकारा की व्यवस्था की है। शिकारा कितने में खरीदा गया कहां से खरीदा गया यह तो स्पष्ट नहीं हो सका लेकिन शिकारा झुमका में पहुंच गया क्योंकि पूर्व की सरकार और और उस दल के नेताओं ने पिछले कार्यक्रम में कलेक्टर से आग्रह किया था जिसे उन्होंने पूरा किया। झुमका की स्थिति वोटिंग के हिसाब से देखी जाए तो झुमका में पहले के बोट बेहतर रख रखाव के अभाव में कंडम होते जा रहे हैं वहीं अब शिकारा भी आ गया है। शिकारा का रखरखाव कैसे होगा चप्पू के सहारे कितने दिन शिकारा आय प्रदान करेगा सैलानियों को आकर्षित करेगा अपनी तरफ यह देखने वाली बात होगी।
कार्यक्रम के लिए नए स्थल का चयन करना था पर पार्क को ही बर्बाद किया गया
झुमका महोत्सव के दौरान आयोजन के लिए किसी अन्य स्थान का चयन करना था जहां अधिक लोग भी आयोजन का आनंद ले सकते थे वहीं झुमका में बना हुआ छोटा सा पार्क जहां बच्चों के लिए झूला वगैरह भी लगा हुआ था उसे नहीं तोड़ना पड़ता नहीं हटाना पड़ता। आयोजन के लिए प्रशासन ने जल्दबाजी में पार्क और झूला स्थल को ही नेस्तनाबूत कर दिया जहां परिवार सहित आने वाले छोटे बच्चे और महिलाएं झूला झूलने का आनंद लेते थे साथ ही कुछ समय वहां बैठकर बिताते थे।फिलहाल देखा जाए तो पार्क का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया है।
शिकारा किस चीज से बनता है?
शिकारा एक प्रकार की लकड़ी की नाव है जो मुख्यतः भारतीय केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर शहर की डल झील में प्रयोग में लाई जाती है। जम्मू कश्मीर के अलावा शिकारे जैसी नावें भारत के राज्य केरल में भी प्रयोग की जाती है। इसका निर्माण यह शिल्प देवदार की लकड़ी (जो पानी में विघटित नहीं होती) पर निर्भर है और इसकी लंबाई 25 से 41 फीट तक होती है। नुकीले अग्र सिरे के बाद लकड़ी के 8 तख्तों से बना एक केंद्रीय खंड होता है और नाव अंततः एक सपाट पिछले खंड में समाप्त होती, कारा और हाउसबोट में क्या अंतर है? हालांकि कश्मीर के डल झील में भी शिकारा में इसी तरह का अनुभव मिल जाता है, लेकिन हाउसबोट और शिकारा में अंतर है, शिकारा झील में एक ही जगह पर रहती है, लेकिन केरल के हाउसबोट सारी सुविधाओं को देने के साथ आपको धीरे-धीरे सफर कराते हैं। इसका उपयोग रोमांटिक सेनन के लिए ज्यादा किया जाता था कपल के साथ इस वोट में घूमने ज्यादा मशहूर है पर क्या झुमका में वैसा माहौल है जो कपल घूम सके?
झुमका महोत्सव को संपन्न हुए 9 दिन बीत गए लेकिन नहीं हुई सफाई,अब श्रमदान कर सफाई करने की चलाएगा मुहिम जिला प्रशासन
कोरिया प्रशासन क्या क्या आडंबर या दिखावा कर रहा है यह फिर सही में उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की फिक्र है ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कोरिया जिले का झुमका जल महोत्सव खत्म हो गया खत्म हुए तकरीबन 9 दिन बीत गए पर वहां पर जो गंदगी पसरी हुई है उसकी सफाई नहीं हुई, जबकि जिम्मेदारी समझी जाती तो कार्यक्रम के समाप्त होने के दूसरे दिन ही साफ-सफाई व्यवस्था हो जाती पर ऐसा हुआ नहीं और 9 दिन बीत गए पर सफाई नहीं हुई, अब 9 दिन बाद प्रशासन कुछ आडंबर ही दिखा रहा है ऐसा कहना गलत नहीं होगा क्योंकि जिला प्राशासन द्वारा झुमका जल महोत्सव के उपरांत कार्यक्रम स्थल की साफ सफाई हेतु सोमवार 12.02.2024 को प्रातः 8 बजे से श्रमदान आयोजित किया गया है। जिसे लेकर सवाल खड़े होते हैं की क्या श्रमदान की वजह से ही वहां की सफाई नहीं हो पाई? या फिर श्रमदान करके प्रशासन अपनी वाह वाही कराना चाहता है, वही इस पूरे आडंबर को प्रसारित करने के लिए भी प्रिंट एवम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधियों को झुमका बोट क्लब बुलाया गया है। वैसे झुमका पर्यटन क्षेत्र में साफ सफाई पहले भी नहीं हुआ करती थी जिसकी खबर भी प्रकाशित की गई थी वहीं झुमका जल महोत्सव के बाद गंदगी और ज्यादा हुई है जिसकी सफाई अब एक मुहिम के तहत होने जा रही है।


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