अंबिकापुर,30 जनवरी 2024 (घटती-घटना)। आर्थिक तंगी की मार झेल रहा अम्बिकापुर नगर निगम अपने पार्षदों को पिछले आठ माह से मानदेय देने में जहां एक ओर नाकाम है तो दूसरी ओर निगम के कर्मचारियों को भी दो महीने से वेतन नहीं मिला है। निगम के खस्ताहाल स्थिति के कारण अब निर्माण कार्य से लेकर सफाई कार्यों पर भी इसका असर दिखाई देना भी शुरू हो गया है। जानकारों की माने तो समय रहते अगर निगम की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले समय में काफी गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। दरअसल छाीसगढ़ प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा नगर निगम अम्बिकापुर है जिसकी बजट सालाना लगभग 150 करोड़ के आस पास है। वहीं लगभग ढ़ाई लाख आबादी वाले इस निगम के अंतर्गत वर्तमान में 48 वार्ड आते हैं। हालांकि अम्बिकापुर नगर निगम मैनपावर से लेकर अत्याधुनिक मशीनरी से परिपूर्ण है। लेकिन प्रदेश में कांग्रेस के शासनकाल से ही राजनीतिक उठा-पटक के कारण अम्बिकापुर नगर निगम के साथ सौतेला व्यवहार किया गया जिसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने के बाद भी अम्बिकापुर नगर निगम की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका है बल्कि अब स्थिति ओर खराब होने लगी है। हालांकि भाजपा के पार्षद इसके लिए पिछली सरकार के कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराते हैं। अम्बिकापुर नगर निगम के महापौर डॉ. अजय तिर्की का कहना है कि अम्बिकापुर निगम क्षेत्र में कोई भी बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं जिसके कारण क्लेकस सीमित है जबकि सब एस्टेçलशमेंट खर्च ज्यादा है। राज्य सरकार को मांग अनुसार पत्र भेजा गया है सरकार बनने के बाद अब जब कामकाज होना शुरू गया जल्द ही सभी व्यवस्था ठीक होने की उम्मीद है। वहीं निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरिकेश कुशवाहा का कहना है कि अम्बिकापुर नगर निगम में एक हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं जिनको समय पर वेतन नहीं मिलता है। वर्तमान में दिसंबर का वेतन बकाया है वहीं जनवरी माह भी अब समाप्त होने वाली है.उनका कहना यह भी है कि राज्य सरकार की तरफ से कोई भी सहयोग नहीं मिलना भी इसका प्रमुख कारण है. कांग्रेसी पार्षद दीपक मिश्रा की माने तो हाल में प्रदेश के नगर निकाय मंत्री अरुण साव ने प्रदेश भर के निगम कमिश्नरों की बैठक बुलाई थी जिसमें अम्बिकापुर के भी कमिश्नर गये थे लेकिन सभी खाली हाथ लौटे हैं।
