सूरजपुर@45 दुकानों की होनी थी नीलामी फिर 14 दुकान छोड़कर31 दुकानों की ही क्यों होगी नीलामी?

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-ओमकार पांडेय-
सूरजपुर,21 जनवरी 2024 (घटती-घटना)।
नगर पालिका सूरजपुर में दुकान नीलामी को लेकर बवाल मचा हुआ है पहले आदेश निकल गया था जिसमें पूरे 45 दुकानों के नीलामी होनी थी इसके बाद मुख्यमंत्री सहित तमाम उच्च स्तरीय शिकायत हुई जिसके बाद नीलामी की तिथि में परिवर्तन करते हुए नगर पालिका द्वारा आदेश निकाला गया जिसमें 14 दुकानों को छोड़कर 31 दुकानों की नीलामी करने का आदेश दिया गया इसके बाद फिर से लोगों को इसका विरोध है कि जब नीलामी करना है तो पूरी दुकानों को करें 14 दुकान क्यों रोक कर नीलामी की जा रही है क्या इसके पीछे किसी एक समाज विशेष का योगदान है या फिर नगर पालिका अधिकारी व नगर पालिका के जनप्रतिनिधि मनमानी करने पर उतावले हैं? नगर पालिका दुकान नीलामी को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा नगर पालिका बिना शिकायत के निपटारा किए ही आखिर क्यों दुकान नीलामी में जल्दबाजी दिखा रही है यह भी बड़ा प्रश्न है जबकि सारे विवादों को निपटा कर भी दुकानों की नीलामी हो सकती है।
मिली जानकारी के अनुसार कार्यालय नगर पालिका परिषद सूरजपुर के द्वारा सुभाष चौक शॉपिंग कांप्लेक्स में निर्मित 35 दुकान, प्राइमरी स्कूल के पीछे बाजार गली में निर्मित 9 दुकान व कन्या हाई स्कूल के बगल में निर्मित एक दुकान यानि की कुल 45 दुकानों की नीलामी होनी है, जिसे लेकर पहले एक बार और आदेश निकल गया था यह आदेश के अनुसार 18 जनवरी को पूरे 45 दुकानों की नीलामी होनी थी पर सुभाष चौक भैयाथान रोड के व्यापारियों द्वारा इस नीलामी के विरोध में शिकायत दर्ज कराते हुए, नीलामी प्रक्रिया को निरस्त कराया था, उनका कहना था कि जहां पर आज उनकी दुकान हैं वह दुकान टूट जाएंगे इस वजह से रोड तरफ की दुकानों में पहली प्राथमिकता उन्हें दी जाए, इसके बाद दुकानों की नीलामी तिथि को निरस्त कर दिया गया था, कुछ दिन बाद फिर से नीलामी की तिथि तय की गई यह तिथि 7 फरवरी 2024 को तय की गई है पर पूरे दुकानों में से 14 दुकान छोड़कर सिर्फ 31 दुकानों की ही नीलामी की जा रही है इसका भी विरोध अब शुरू हो गया है इसके खिलाफ भी शिकायत हो रही है और लोगों का कहना है कि सारे दुकानों की नीलामी एक साथ की जाए और आरक्षण रोस्टर का पालन पूरे 45 दुकानों में सही तरीके से कराया जाए।


कन्या हाई स्कूल की जमीन पर बना दिया दुकान
नगर पालिका सूरजपुर में मनमानी खूब चली है इसका जीता जागता उदाहरण है कन्या हाई स्कूल की जमीन पर बिना एनओसी के दुकान बनाना जिसे लेकर विरोध भी हुआ था फिर बाद में काम रुका भी फिर नेता गिरी व जोर आजमाइश के दम पर आखिर उसे दुकान को पूरा कर लिया, आज उसे दुकान की नीलामी होने जा रही है पर नुकसान तो उसे स्कूल का हुआ जिसकी वह जमीन थी।
क्या सूरजपुर कलेक्टर दुकान नीलामी मामले मिलेंगे संज्ञान?
दुकान नीलामी मामले में कई सारी अनियमिताएं हैं जिससे यह साफ जाहिर हो रहा है कि कुछ लोग अपने लाभ कमाने के लिए दुकान नीलामी को गलत दिशा में ले जा रहे हैं, यह वजह है की नीलामी को लेकर विरोध हो रहा है और लोग शिकायत भी कर रहे हैं अब इस मामले में सूरजपुर कलेक्टर को संज्ञान लेकर सही तरीके से नीलामी प्रक्रिया करा सकेगे? जिसकी मांग भी हो रही है, नीलामी सही तरीके से हो सके बिना दबाव के यह सूरजपुर कलेक्टर के संज्ञान लेने के बाद ही संभव है ऐसा लोगों का कहना है।
अतिक्रमणकारियों के पास फ्री होल्ड के तहत जमीन अपने नाम करने का था मौका फिर क्यों नहीं किया?
कांग्रेस की सरकार ने जो लंबे समय से शासकीय जमीन पर कजा करके जीवन यापन कर रहे थे उनके लिए फ्री होल्ड योजना लाया था, जिसके तहत वह शासन से जमीन खरीद सकते थे और जमीन को अपना कर सकते थे फिर भी वह पुरानी सरकार में यह नहीं कर पाए और आज नीलामी प्रक्रिया में प्राथमिकता चाह रहे हैं। जबकि उनके पास काबिज जमीन को अपने नाम करने का पूरा मौका था प्रशासन भी इनका सहयोग कर सकता था पर ऐसा इन्होंने किया नहीं।
वन विभाग की जमीन को नगर पालिका ने अपने कमाई के उद्देश्य से कराया अपना
सुभाष चौक के पास जिस जमीन पर नगर पालिका द्वारा 35 दुकान का निर्माण कराया गया है वह जमीन वन विभाग की थी और वह जमीन वन विभाग के लिए काफी मौके की जमीन थी, वहां पर वन विभाग भी अपना व्यवसायिक परिसर बना सकता था और उसे आय अर्जित कर सकता था पर नगर पालिका के जनप्रतिनिधि व नेताओं के द्वारा तत्कालीन डीएफओ को अपने पक्ष में करके उसे जमीन को अपने नाम हस्तांतरित कर ली और वहां पर दुकान बना दिया, जिसकी नीलामी को लेकर आज विरोध हो रहा है और कई वजह से विरोध हो रहा है।
क्या जहां-जहां मुक्ता सिंह चौहान नगर पालिका अधिकारी होगी वहां-वहां दुकानों की नीलामी निष्पक्ष तरीके से नहीं होगी?
नगर पालिका सूरजपुर में इस समय मुख्य नगर पालिका अधिकारी मुक्ता सिंह चौहान है जो इससे पहले बैकुंठपुर नगरपालिका में भी पदस्थ रह चुकी है और उनके पदस्थापना के दौरान बैकुंठपुर नगरपालिका की दुकान नीलामी में अनियमिताएं देखी गई है जिसकी शिकायतें भी खूब हुई थी,और एक बार फिर सूरजपुर में वह पदस्थ है और उनके ही कार्यकाल में एक बार फिर से दुकानों की नीलामी प्रक्रिया संपन्न होने जा रही है जिसका विरोध अंदर खाने से शुरू हो चुका है लोगों का आरोप यह भी है कि मुक्ता सिंह चौहान इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रही हैं और सही जानकारी नहीं दे रही। सूत्रों का यह भी कहना है कि मुक्ता सिंह चौहान कांग्रेस विचारधाराओं से जुड़ी हुई हैं इसी वजह से वह कांग्रेस के शासनकाल में मनचाहा जगह पर अपनी पदस्थापना पाने में सफल रही है यह जहां-जहां पर रही है वहां पर इनकी शिकायत हुई है। एक बार फिर इनके नगर पालिका क्षेत्र में नीलामी में गड़बड़ी होने का संदेह जताया जा रहा है, लोगों का आरोप है कि यह कांग्रेस पार्षद व नेताओं का ज्यादा सुन रही हैं।
सभी दुकानों की नीलामी एक साथ हो?
सभी दुकानों के नंबरिंग हो गई और साथ ही सभी दुकानों का रोस्टर भी तैयार कर दिया गया पर सवाल यह है कि जब सब कुछ तैयार है तो सारी दुकानों की नीलामी क्यों नहीं हो रही है रोस्टर भी सारे दुकानों के हिसाब से बन गए पर सारे दुकानों की नीलामी पर पेंच फंसा गए ऐसा लग रहा है कि नगर पालिका सूरजपुर व उनके पार्षद सहित नगर पालिका अधिकारी कर रहे हैं पूरी तरीके से अपनी मनमानी जिसका विरोध अब दिखने लगा है और शिकायत भी होने लगी है।
क्या एक समाज विशेष के कुछ रसूखदार चला रहा नगर पालिका सूरजपुर को?
सूरजपुर नगर पालिका में क्या एक समाज विशेष के कुछ रसूखदार का एकाधिकार हो गया है उस समाज के कुछ रसूखदार लोग नगर पालिका को अपने हिसाब से चला रहे हैं इसमें बीजेपी कांग्रेस सभी दलों के लोग शामिल हैं जिसे लेकर दबी जुबान पर हर तरफ इस बात की चर्चा भी हो रही है और इनकी मनमानी किसी से छुपी नहीं है हर तरफ उनके मनमानी की चर्चाएं जारी हैं।
सुभाष चौक स्थित दुकान नीलामी में है पूरा पेंच
सुभाष चौक स्थित दुकान की नीलामी में काफी सारे पेंच हैं, दुकान जिस स्थल पर बना है वह स्थल वन विभाग का था उस स्थल पर नगर पालिका ने 35 दुकानें बनाई है, पर सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस दुकान के सामने अवैध तरीके से शासकीय जमीन पर कुछ व्यापारियों द्वारा दुकान बनाकर कई वर्षों से व्यापार संचालित किया जा रहा था अब जब उनकी दुकान टूटने की बारी आई है तो वह उस दुकान की नीलामी में अपनी प्राथमिकता मांग रहे हैं जबकि खुद वह अवैध तरीके से दुकान निर्माण कर इतने समय से अपना जीवन यापन करते आ रहे थे और आज जब उन्हें सही तरीके से दुकान खरीदने चाहिए तो वह उसमें पेंच फंसा रहे हैं और उन्हें पहली प्राथमिकता चाहिए और कम दर पर दुकान चाहिए। और साथ ही चाहिए भी तो वही दुकान चाहिए जो उनके दुकान के सामने पड़ रही है। जिसे लेकर दुकान नीलामी में काफी विरोध देखने को मिल रहा और विरोध की वजह भी समझा जा सकता है।
अतिक्रमण करने वाले मांग रहे नीलामी में पहली प्राथमिकता और दर में भी कटौती
शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर सालों से अपना व्यापार जमाकर व्यवसाय कर रहे लोगों को अब उनके दुकान टूटने की तकलीफ समझ में आने लगी है इस वजह से वह अपने दुकान के पीछे की दुकान चाहते हैं ताकि उनका व्यापार यहां से वहां शिफ्ट हो जाए और जहां है यह वहीं पर रह जाए पर यह 35 दुकानों में से सब दुकानों में नहीं जाना चाहते यह जाना भी चाहते हैं तो अपने दुकान के पीछे वाले दुकान को ही चाहते हैं इनका कहना है कि उनके अनुसार नगर पालिका दुकान की नीलामी करें और इन्हें प्राथमिकता दें जो न्याय संगत है। यही वजह है कि नगर पालिका के दुकान नीलामी को लेकर कई समस्याएं खड़ी हो गई। इसमें से कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनकी दुकान रोड चौड़ीकरण के दौरान टूट गई थी वह भी इस नीलामी में प्राथमिकता चाह रहे हैं यदि इन्हें ही प्राथमिकता मिलेगी तो फिर बाकी लोगों को तो दुकान मिलना ही मुश्किल है क्योंकि जितनी दुकानें बनी है यह इतनी दुकान इन्हीं कोई प्राथमिकता देने में खत्म हो जाएंगे फिर ना तो रोस्टर का कोई मतलब है और ना ही किसी नीलामी प्रक्रिया की।
कांग्रेस शासन काल में बने नगर पालिका दुकान को जल्द से जल्द नीलाम करने क्यों जूटे हैं कांग्रेसी पार्षद?
कांग्रेस शासन काल में सूरजपुर नगर पालिका की बनी 45 दुकान अब जल्द से जल्द नीलाम हो जाए और ज्यादा से ज्यादा आय अर्जित किया जा सके इस उद्देश्य में कांग्रेसी पार्षद लगे हुए हैं क्योंकि अभी समय है जो दुकान नीलाम हो गई उसमें आय अधिक अर्जित किया जा सकता है क्योंकि उसके बाद फिर से नगर पालिका का चुनाव आ जाएगा और उससे पहले लोकसभा चुनाव है नीलामी प्रभावित हो जाएगी इन सब चीजों को देखकर जल्द से जल्द नीलामी करना चाह रहे।
दुकान नीलामी कर ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में दिख रही जल्दबाजी
सूत्रों का कहना है की नीलामी प्रक्रिया को जैसे तैसे करके पूरा कर लिया जाए ताकि ज्यादा पैसा अर्जित किया जा सके सेटिंग भी कुछ इसी तरीके की अंदर खाने में चल रही है पर वहीं शहरवासियों को इस नीलामी से काफी दिक्कत है उनका कहना है की नीलामी प्रक्रिया सही तरीके से नहीं की जा रही नगर पालिका के अंदर जो खिचड़ी पक रही है वह नीलामी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है और नियम से भटका रही है।


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