अंबिकापुर@क्या नए मुख्यमंत्री सरगुजा में हुए भूमि के भ्रष्टाचार का करवायेंगे जांच…

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  • शासकीय नजूल की बेशकीमती जमीन आखिर बन्सु लोहार के नाम कैसे हुई?
  • सरकार बदल गई पर राजस्व विभाग का घोटाला बदलने का नाम नहीं ले रहा है…
  • मुख्यमंत्री का है सरगुजा में आगमन क्या लगभग 60 करोड़ की जमीन नामांतरण के मामले की होगी जांच?
  • क्या चार करोड़ में कर दिया लगभग 60 करोड़ की जमीन का नामांतरण,अंबिकापुर में एक और जमीन घोटाले की शिकायत


-भूपेन्द्र सिंह-
अंबिकापुर 07 जनवरी 2023 (घटती-घटना)। आने वाले समय में 1 इंच भी शासकीय जमीन नहीं बचेगी, क्योंकि सारे शासकीय जमीन पर तो भू माफिया कब्जा कर लेंगे, जो अब तक होते चला जा रहा है, भूमि की रक्षा करने वाला राजस्व विभाग भी भू-माफिया के साथ मिलकर शासकीय भूमि को निजी भूमि बनाने पर आमदा है पिछली सरकार में राजस्व विभाग में भू-माफिया का किस कदर आतंक बड़ा यह किसी से छुपा नहीं है पूरे अंबिकापुर शहर के आसपास की शासकीय भूमि पर भू माफियाओं ने कब्जा कर बैठा है शिकायत होती गई पर कार्यवाही नहीं हुई,पुराने कलेक्टर भी बदल गए नए कलेक्टर आ गए फिर भी शिकायत की जांच करना राजस्व विभाग मुनासिब नहीं समझ रहा है। ये अंबिकापुर का मामला जो लगभग 60 करोड़ की शासकीय जमीन जो निजी व्यक्ति के नाम पर हो गई जिसकी शिकायत भी हुई पर जांच अभी भी ठंडे बस्ते में है अब सीएम साहब का सरगुजा दौरा होना है अब देखना यह है कि क्या इस मामले में राजस्व विभाग जांच करके निजी भूमि को शासकीय भूमि करेगा या फिर शासकीय भूमि को निजी हाथों में देखकर भू-माफिया की मदद करेगा?
ज्ञात हो की शासकीय जमीन की हेराफेरी के लिए अंबिकापुर शहर कई वर्षों से बदनाम रहा है। यहां के कुछ राजस्व कर्मचारियों और भू-माफियाओं के बीच तगड़ी सेटिंग किसी से छिपी नहीं है। इसी तगड़ी सेटिंग का परिणाम है कि अंबिकापुर शहर के नमनाकला राजमोहिनी देवी के पीछे बेशकीमती जमीन का घोटाला कर दिया गया। नियम विरुद्ध तरीके से लगभग 60 करोड़ रूपये की भूमि का फर्जी तौर से नामांतरण कर दिया गया। जिस व्यक्ति के नाम जमीन का नामांतरण किया गया उसका कब्जा कभी भी उस जमीन पर नहीं था लेकिन सूत्रों की माने तो चार करोड़ रूपये की सेटिंग में कुछ कर्मचारियों ने फर्जी तरीके से जमीन का नामांतरण कर दिया। नामांतरण से पहले ही जमीन पर दूसरे लोगों का निर्माण था। राजस्व अभिलेखों में नाम अंकित होते ही संबंधित व्यक्ति ने उक्त जमीन को नियम विरुद्ध तरीक़े से बेचना भी शुरू कर दिया है। मामले में नजूल अधिकारी कार्यालय के एक लिपिक तथा नमनाकला के हलका पटवारी तथा राजस्व निरीक्षक की भूमिका संदिग्ध है। मामले की शिकायत कलेक्टर सरगुजा से हुई है। इस शिकायत के सामने आने के बाद गड़बड़ी में संलिप्त अधिकारी, कर्मचारी बचाव की मुद्रा में आ गए हैं।
कलेक्टर को प्रेषित ज्ञापन में आवेदक ने लिखा क्या है…
आवेदक के अनुसार खसरा नंबर 243/1 में से रकबा 1.710 डिसमिल भूमि स्थित ग्राम नमना कला, तहसील अम्बिकापुर जिला सरगुजा छ.ग. को फर्जी तौर से नजूल अधिकारी तथा नजूल अधिकारी के लिपिक एवं नमना कला के हल्का पटवारी व राजस्व निरीक्षक केद्वारा भू-माफियाओं से मिलकर लगभग 60 करोड़ रूपये की भूमि का फर्जी तौर से नामांतरण कर 04 करोड़ रूपये की अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा धन उगाही कर भ्रष्टाचार करने के संबंध में।
चार करोड़ का ऐसा कमाल की हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण का निर्णय सुना दिया नजूल न्यायालय ने
शहर के राजमोहिनी देवी भवन के पीछे 60 करोड़ की जमीन फर्जीवाड़ा के मामले में कार्रवाई की प्रतीक्षा है। इस मामले ने राजस्व व नजूल विभाग के कुछ कर्मचारियों के स्वेच्छारिता की पोल खोल कर रख दी है। जिस बेशकीमती जमीन पर 50 वर्ष बाद कब्जा बताकर नामांतरण कर दिया गया उस जमीन का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। जानकारों की माने तो न्यायालय से फैसला आने से पहले ही स्थानीय स्तर पर चार करोड़ रुपये में सेटिंग कर लगभग 60 करोड़ की जमीन का फर्जी तरीके से नामांतरण कर दिया गया। राजस्व व नजूल विभाग के जिन कर्मचारियों ने यह गड़बड़ी की है उनके द्वारा भू-माफिया के रूप में कार्य किया जा रहा है। एक तीसरे व्यक्ति को सामने खड़ा कर बेशक़ीमती जमीन को उसके नाम कर खुद जमीन बिक्री की जा रही है। अंबिकापुर शहर व इसके आसपास के इलाके में पहुंच और प्रभाव के दम पर जमीन फर्जीवाड़ा कमाई का सबसे बड़ा माध्यम रहा है। जमीन के धंधे में कई शासकीय कर्मचारी भी लाल हो चुके हैं। उन्हें किसी कार्रवाई का भी डर नहीं रहता है। यही कारण है कि उच्च अधिकारी भी सब कुछ जानते हुए शांत बैठे हुए हैं। इस मामले में अभी तक प्रशासनिक स्तर पर जांच के आदेश नहीं हुए हैं। नए साल के स्वागत और पुराने साल के विदाई में उच्च प्रशासनिक अमला भी व्यस्त है लेकिन जमीन फर्जीवाड़े के इस मामले में जनहित में जब तक कार्रवाई नहीं हो जाती तब तक इस गड़बड़ी की कहानी सामने लाई जाएगी जिसमें कई सफेदपोश शामिल बताए जा रहे हैं। शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान कर अपनी जेबें भरने वालों को यूं ही नहीं छोड़ा जा सकता। उनकी काली कमाई के चिट्ठे सामने लाकर उच्च प्रशासनिकअधिकारियों को कार्रवाई के लिए मजबूर किया जाएगा।
यह है पूरा मामला…
जानकारों की मानें तो नगर अम्बिकापुर में राज मोहनी भवन के पास मोहल्ला नमना कला अंबिकापुर में खसरा नंबर 243 स्थित है,उक्त भूमि पूर्व में 111.40 एकड़ भूमि थी। जो कालांतर में शासकीय प्रयोगों के लिए उपयोग में लाई गई और कुछ भूमि पर शासन के द्वारा पट्टा प्रदान किया गया तथा इसी से संबंधित भूमि पर व्यवहारवाद क्रमांक 41-ए-90 निर्णय दिनांक 23.09.1991 विचाराधीन था। जिस पर निर्णय पारित किया गया है और वर्तमान में उक्त भूमि का प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय,बिलासपुर में विचाराधीन है। उक्त भूमि वर्तमान नक्शे में दत्ता कॉलोनी की भूमि खसरा नंबर 243 को भूमि डिग्री भूमि 233 के भाग में फर्जी तौर से समाहित कर नक्शा तैयार किया गया है। जबकि 233 खसरा नंबर भूमि का प्रकरण व्यवहारवाद में विचाराधीन था। जिसका अभी निराकरण नहीं होना बताया जा रहा है। इसी दौरान तात्कालीन नजूल अधिकारी,अंबिकापुर के न्यायालय में भू-माफिया द्वारा बन्सु आ0 भुटकुल लोहार निवासी-फुन्दुरडिहारी, अंबिकापुर जिला सरगुजा के माध्यम से एक राजस्व प्रकरण. / अ-6/2021-22 में दिनांक 06.10.2022 को आदेश पारित किया गया है कि बंशु आ0 भुटकुल के द्वारा नजूल भूमि खसरा नंबर 154,243/10 रकबा क्रमशः 0.934,1.710 भूमि का पट्टा तहसीलदार अंबिकापुर द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 1967-68 आदेश दिनांक 15.04.1968 के माध्यम से मोहल्ला नमना कला नगर अंबिकापुर में स्थित नजूल भूमि भू खण्ड क्रमांक खसरा नंबर 154, 243/10 रकबा क्रमशः 934, 1.710 का पट्टा प्रदान किया गया है। किन्तु राजस्व अभिलेखों में नाम विलोपित हो गया है। जिसके आधार पर तात्कालीन नजूल अधिकारी तथा नजूल अधिकारी के लिपिक तिवारी एवं हल्का पटवारी गणेश मिश्रा व राजस्व निरीक्षक नारायण सिंह द्वारा मिलकर शासन की 60 करोड़ रूपये की भूमि का 04 करोड़ रूपये का मिलकर भू-माफियाओं से अवैध धन की उगाही कर भ्रष्टाचार कर नियम विरूद्ध शासकीय भूमि को बंशु आ0 भुटकुल के नाम दर्ज करने का आदेश दिनांक 06.10.2022 को पारित करवा कर उक्त भूमि को अवैध प्लाटिंग कर 15-15 लाख रूपये प्रति डिसमिल से विक्रय किया जा रहा है। यह बहुत बडे भू-माफियाओं से मिलकर किया गया भूमि घोटाला है। जिसकी जांच कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध तथा इसमें सम्मिलित व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाही किया जाना न्यायहित में जनहित के लिए आवश्यक है।
फर्जी तौर से आगे के पन्नों में नाम उल्लेखित करने का लेख आदेश में किया गया…
राजस्व प्रकरण क्रमांक 107/अ-19/1967-68 आदेश दिनांक 15.04.1968 के अनुसार अंबिकापुर स्थित भूमि खसरा नंबर 243/10 रकबा 4.25 एकड़ भूमि बंशु आ0 भुटकुल लोहार को भूमि प्राप्त हुई। खसरा पंचशाला वर्ष 1967-68 से वर्ष 1972-73 के आधार पर वर्ष में 241 के बाद 243/11 के बीच का पन्ना पृष्ठ क्रमांक 89 एवं 90 नहीं पाया गया, जिसके आभाव में खसरा कमांक 243/10 के स्वामित्व के संबंध में उल्लेखित नहीं किया जा सका। जो यह प्रमाणित करता है, कि उक्त वर्ष के खसरा पंचशाला में उसका नाम दर्ज नहीं है,जिस कारण से उक्त खसरा पंचशाला पृष्ट क्रमांक 89 व 90 को फाड़ कर हटा दिया गया है ताकि सच्चाई प्रदर्शित न हो सके और फर्जी तौर से आगे के पन्नों में नाम उल्लेखित करने का लेख आदेश में किया गया है। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि उक्तभूमि वर्तमान में कई लोग निवासरत है तथा घनी आबादी की भूमि है, उस पर उसका कब्जा बताया जा रहा है तथा यह भी उल्लेखित किया जा रहा है कि चालू नक्शे के अनुसार भू-खण्ड कमांक 243/10 में आवेदक का कभी कब्जा नहीं रहा है। उसका चालू नक्शे के अनुसार 243/1 रकबा 38 एकड़,15 डिसमिल जो कि शासकीय नजूल भूमि का भाग है जो मौके पर खुली एवं परत भूमि है। उस भूमि पर कब्जा होने के कारण उसे 243/10 जोकि राजस्व भूमि बतायी गई थी के स्थान पर 243/1 में से रकबा 1.710 हेक्ट0 यानी 4 एकड़,25 डिसमिल भूमि नजूल का नामांतरण किया जाना उचित प्रतीत होने से नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया है। यह कैसे संभव है, कि किसी को यदि कोई पट्टा राजस्व भूमि का 243/10 का यदि मिला भी होगा तो उसे उसके स्थान पर 50 साल के बाद नया भू-खण्ड 243/1 मे से 04 एकड़, 25 डिसमिल भूमि नाम दर्ज करने का आदेश दे दिया जाये साथ ही उसे राजस्व भूमि की तरह संबंधित अधिकारी ने भू माफियाओं से मिलकर तत्काल बेचने के उद्देश्य से दिनांक 07.10.2022 का नवीन संशोधन का उल्लेख करते हुए उसे 20 वर्ष पूर्ण करने के आधार पर भू स्वामी अधिकार भी प्रदान कर दिया है।
भूमि सरगुजा स्टेट सेटेलमेंट के अनुसार गोचर मद में दर्ज थी
जबकि उक्त भूमि नगर सीमा से सटी हुई है, जिसके अनुसार वह भूमि राजस्व पुस्तक परिपत्र के अनुसार किसी भी परिस्थिति किसी को 01 वर्ष से के लिए कृषि कार्य से अतिरिक्त पट्टे पर प्रदान नहीं की जा सकती साथ ही यह उल्लेखनीय है कि उक्त भूमि सरगुजा स्टेट सेटेलमेंट के अनुसार गोचर मद में दर्ज है, जिसका किसी भी स्थिति में पट्टा प्रदान नही किया जा सकता है। इन सब तथ्यों को प्रकरण में विद्यमान होने के बाद भी तात्कालीन नजूल अधिकारी ने उक्त विधि विरूद्ध आदेश पारित कर शासन को 60 करोड़ रूपये की क्षति पहुंचाई है जिसकी जांच उच्च स्तरीय स्तर पर कर कार्यवाही किया जाना आवश्यक है। क्योंकि यह राजस्व पत्रों की हेराफरी कर भू माफियाओं से मिलकर तात्कालीन नजूल अधिकारी तथा उनका लिपिक और नमनाकला का हल्का पटवारी गणेश मिश्रा एवं राजस्व निरीक्षक(नजुल) नारायण सिंह और भू माफिया के द्वारा किया गया भू घोटाला है, जिसकी जांच करने से स्पष्ट रूप से पता चलेगा कि किस तरह से राजस्व अधिकारी भू माफियाओं से मिलकर सरगुजा जिले और खास तौर से अंबिकापुर तहसील में भूमि का करोड़ो घोटाला कर रहे हैं।


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