- खड़गवां तहसील कार्यालय के मामला क्रमांक 262 / 2022-2023 के मामले में ऐसा क्या था की अधिकारी के द्वारा महज 16 दिनों में ही स्थगन हटा दिया गया?
- क्या राजस्व निरीक्षक खड़गवां के जांच प्रतिवेदन का कोई महत्व नहीं था इस मामले में क्या तहसीलदार गलत को सिर्फ सही करने के लिए पदस्थ थे?
- क्या ये मामला तात्कालिक कांग्रेस सरकार में हुआ है कही अधिकारी सफेद पोश नेताओं के दबाव में गलत को सही कर दिए हैं?
- क्या इस तहसील कार्यालय में और जो किसानों के स्थगन के मामले चल रहे हैं वो क्यों 16 दिनों में स्थगन आदेश नहीं हटाए गए?
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,28 दिसम्बर 2023 (घटती-घटना)। खडगवा तहसील मुख्यालय खड़गवां में भू-बंटन की भूमि का वितरण मध्य प्रदेश की सरकार के समय किसानों के जीविकापार्जन के लिए भू-बंटन के तहत किसानों को पट्टा वितरण किया गया है
खड़गवां मुख्यालय में किसानों के भू – बंटन की भूमि पर गिद्ध दृष्टि लगी हुई है। सूत्रों से ये जानकारी मिल रही है कि इन गरीब किसानों की गरीबी का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसाकर उन्हें राशि का प्रदान कर उनसे बाद में राशि का ब्याज दर सहित राशि वापस करने का दबाव बना कर सड़क किनारे की कीमती जमीन पर व्यावसायिक दुकान का निर्माण हो रहा है भूमि खसरा नंबर 428 बीस सूत्रीय के तहत भूमिहीन किसानों को उनके जीविकापार्जन के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने बीस सूत्रीय कार्यक्रम के तहत भूमि- आवंटित किया गया था।
इस भूमि 428 के आवंटित पट्टे में स्पष्ट निर्देश भी लिखे गए हैं कि पट्टेदार को उक्त भूमि का उपयोग केवल कृषि प्रयोजनों के लिए ही करेगा वह उक्त भूमि या उसके किसी भाग का उपयोग किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं करेगा? पट्टेदार उक्त भूमि या उसके किसी भाग पर स्थायी स्वरूप की कोई संरचना खडी नहीं करेगा किन्तु वह कृषि प्रयोजनों के लिए अस्थायी शेड का निर्माण कर सकेगा? पट्टेदार भूमि में अपने अधिकार या उसके किसी भाग को बिक्री भेंट बंधक उप – पट्टा या अन्य प्रकार से अंतरित नहीं करेगा और ऐसी प्रत्येक बिक्री भेंट बंधक उप-पट्टा या अन्य प्रकार से किया गया अंतरण निष्प्रभावी होंगा?
उसके बाद भी उक्त भूमि पर धड़ल्ले से राजस्व विभाग के अधिकारियों के सामने किया जा रहा है। पूर्व में हुई शिकायत में राजस्व अधिकारियों के द्वारा खसरा नंबर 428/3 रकबा 0.31 हे.पर शासन द्वारा भू बंटन की भूमि है जांच प्रतिवेदन में राजस्व निरीक्षक ने शासन द्वारा प्रदाय भूमि का उल्लेख किया है कि पक्का मकान 1380 वर्ग फीट में बन रहा है। और उस प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख भी किया गया है कि ये भू बंटन से प्रदान किये हुई कृषि भूमि है जो किसान को जीविकापार्जन हेतु प्रदान है इस पर जो मकान का निर्माण किया जा रहा है कृषि कार्य हेतु प्राप्त भूमि है कृषि कार्य भूमि के भिन्न प्रयोजन हेतु भूमि का प्रयोग किया जा रहा है एवं भिन्न प्रयोजन उपयोग हेतु किसी प्रकार का दस्तावेज मकान निर्माण कर्ता द्वारा पेश नहीं किया है। और बिना अनुमति के शासन की भूमि पर व्यावसायिक दुकान निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस जांच प्रतिवेदन के आधार से न्यायालय तहसीलदार खड़गवां में मामला क्रमांक 262 / 2022-2023 को मकान निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश दिनांक 8.6.2023 को दिया गया था।
उसके बाद खड़गवां तहसीलदार के द्वारा इसी मामले में महज 16 दिनों में मामले से स्थगन आदेश हटा दिया गया वो भी अपने आदेश में ये कहते हुए की मकान का निर्माण कार्य किया जाना नहीं पाया गया है जबकि इस मामले में राजस्व निरीक्षक का जाच प्रतिवेदन एवं पंचनामा स्थगन आदेश आदि सभी दस्तावेज संलग्न होने के बाद न्यायालय तहसीलदार खड़गवां ने महज चंद दिनों में स्थगन आदेश हटा दिया गया जबकि जांच राजस्व निरीक्षक के जांच प्रतिवेदन में किसी भी प्रकार के कोई शासन की भूमि में अनुमति के दस्तावेज नहीं होने की पुष्टि होने के बाद भी इतनी जल्दी स्थगन का हटाया जाना अपने आप में एक सवाल खड़े कर रहा है? प्रशासन के बिना अनुमति के धड़ल्ले से कृषि भूमि पर व्यावसायिक दुकान तैयार किया गया है जबकि उक्त भूमि पर व्यावसायिक दुकान निर्माण पूर्णतः भूमि प्रतिबंधित हैं। इनके द्वारा भू-आवंटित कृषि भूमि पर व्यावसायिक दुकान धड़ल्ले से निर्माण कार्य किया जा रहा है ये भू-माफिया भू-आवंटित कृषि भूमि पर व्यावसायिक दुकान का निर्माण कार्य कृषक का होना बताकर भू-आवंटित भूमि पर मकान कि जगह पर व्यावसायिक दुकान निर्माण कराया गया है। भवन का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद इस भवन पर अपना कब्जा दिखा रहे है ऐसा खेल खड़गवां में जोर पर चल रहा है। और गरीब किसानों की भूमि में भू माफिया इस तरह के खेल कर कब्जा कर रहे हैं इनके द्वारा शासन प्रशासन से भू-बंटन की भूमि पर व्यावसायिक दुकान निर्माण कार्य या भवन निर्माण कार्य की कोई अनुमति शासन के द्वारा नहीं ली गई है?