- क्या भाजपा के शासनकाल में भी कोरिया व एमसीबी जिले के कुछ पुलिसकर्मी अपने मनपसंद थाना पाने में रहेंगे सफल?
- क्या कुछ प्रधान आरक्षक व आरक्षक के बिना नहीं चल पाते चिरमिरी व मनेंद्रगढ़ के थाना प्रभारी?
- मनेद्रगढ़ के स्थानीय निवासी होने के बावजूद सबसे लंबे समय तक रहे मनेद्रगढ थाने में रहे पदस्थ…एक बार फिर मनेन्द्रगढ़ थाने में ही आने का मिला मौका
- पूर्व में भी तबादला सूची जारी होने के बाद तबादला रुकवाने की खूब की थी कोशिस अब फिर हुई प्रधान आरक्षक की वापसी.. क्या बहुत ऊँची है पहुँच?
- एमसीबी नवीन जिले में जारी हुई है पुलिस विभाग की तबादला सूची,सूची में है चर्चित प्रधान आरक्षक का नाम
- क्या प्रधान आरक्षक इस्ताक खान के लिए जिले में मनेन्द्रगढ़, चिरमिरी व खड़गवां थाना ही है?

–रवि सिंह –
मनेन्द्रगढ़ ,28 दिसम्बर 2023 (घटती-घटना)। कांग्रेस शासन काल में पुलिस विभाग काफी सुर्खियों में रहा पुलिस के कार्य प्रणालियों पर लोगों के सवाल उठाते रहे विरोध भी होता रहा, आमजनों की परेशानी भी पुलिस बनी रही पर अब शासन भाजपा की है क्या इस समय भी पुलिस विभाग पुराने ही शासन के ढर्रे पर चलता रहेगा या फिर बदलाव होगा? ऐसा सवाल इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सत्ता बदले एक महीने होने को है पर अभी भी पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पुराने ही सत्ता शासन की तर्ज पर चल रहा है चाहे पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर पोस्टिंग हो या फिर अवैध कारोबार को लेकर उनका नजरिया, पुराने सत्ता शासन में शातिर पुलिसकर्मी अपने चहेते पुलिस थानों में ही कार्यकाल काट रहे थे बाकी पुलिसकर्मी जिनकी पहुंच पकड़ नहीं है वह दूर दराज स्थान वाले थाने में काम करते नजर आए, क्या इस बार भी ऐसा ही देखने को मिलेगा? एमसीबी में 8 थाना है पर प्रधान आरक्षक को क्यों पसंद है मनेन्द्रगढ़ व चिरमिरी थाना?
ज्ञात होकी नवीन जिले एमसीबी के पुलिस कप्तान ने जिले की कानून व्यवस्था में कसावट लाने के उद्देश्य से मई 2023 पुलिसकर्मियों का तबादला सूची जारी किया था। पुलिस अधीक्षक एमसीबी द्वारा जारी की गई सूची में प्रधान आरक्षक,आरक्षक सहित महिला पुलिसकर्मियों का तबादला किया गया था, पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी की गई तबादला सूची में एक नाम ऐसा भी था जो एमसीबी जिले का पुलिस विभाग का सबसे चर्चित नाम था और वह एक प्रधान आरक्षक का नाम था जो मनेद्रगढ का निवासी होते हुए वर्षों से मनेंद्रगढ़ पुलिस थाने में ही पदस्थ रहता चला आ रहा है और इस बार जारी की गई तबादला सूची में उसका तबादला खड़गवां पुलिस थाने से मनेन्द्रगढ़ थाना कर दिया गया था, 8 महीने बाद फिर से मनेन्द्रगढ़ थाना वापसी हो गई है इनके वापसी से एक बार फिर क्षेत्र में अवैध कारोबार तेजी से संचालित होगा ऐसा अनुमान है। वैसे प्रधान आरक्षक इस्ताक खान एमसीबी जिले के चर्चित पुलिसकर्मियों में से एक हैं जिनका नाम परिचय का मोहताज इसलिए भी नहीं है क्योंकि पूर्व मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी के करीबी रहते हुए उक्त प्रधान आरक्षक का नाम लगातार सुर्खियों में आता रहा है। इस प्रधान आरक्षक में न जाने ऐसा क्या है कि जो भी प्रभारी मनेंद्रगढ़ आता है वह इन्हें अपने साथ जरूर रखना चाहता है, मनेद्रगढ़ के ही निवासी इस्तियाक खान ने अपने अब तक के कार्यकाल में आधा से ज्यादा कार्यकाल अपने ही गृह निवास वाले पुलिस थाने में पूरा किया है। अभी तक कोई भी पुलिस अधीक्षक नहीं है जो इन्हें जनकपुर कोटाडोल थाने भेज सके। इस्ताक खान जो प्रधान आरक्षक हैं वह फिर एक बार भाजपा शासन काल में मनेंद्रगढ़ थाने पहुंचे हैं और उनके उनके आते ही अब यह चर्चा होने लगी है की यह ऐसे प्रधान आरक्षक हैं जो कांग्रेस शासनकाल में भी मनचाहे पुलिस थाने में रह चुके हैं अब वह भाजपा शासन में भी अपने मनचाहे थाने में फिर वापस आ चुके हैं जो बतलाता है की वह किस तरह सत्ता के भीतर तक घुसे हुए हैं।
कब तक अपने मर्जी से और अपने पसंद से थाना पाते रहेंगे पुलिसकर्मी?
अविभाजित कोरिया जिले के समय से ही कुछ पुलिसकर्मी सुर्खियों में बने रहते हैं मनचाहा थाना पाना तो उनका अधिकार क्षेत्र हो गया है ऐसा लगता है, किसी एक थाना के लिए पट्टा लिखवा लिए हैं कोरिया से अलग होने के बाद भी एमसीबी जिले में वैसे ही भर्रासाही आज भी चली आ रही है, कुछ ऐसा ही हाल कुछ चुनिंदा प्रधान आरक्षक व आरक्षकों का भी है जो अपनी पहुच ऊंची रखते हैं जिस वजह से विधायक कोई भी हो या सरकार किसी की भी हो पर याचना करके अपने चहेते थानों में जमे रहते हैं,जहां से उनका निवास स्थल भी नजदीक है या कहा जाए तो अपने गृह निवास क्षेत्र वाले थाने में ही रहते हैं। ऐसे ही प्रधान आरक्षक हैं इस्तियाक खान जो खड़गवां से फिर गृह थाना क्षेत्र मनेंद्रगढ़ पहुंच चुके हैं जो बताता है की उनकी पकड़ हर राजनीतिक दल में है क्या भाजपा क्या कांग्रेस।
कुछ पुलिसकर्मी अवैध कारोबार में ऐसे लिप्त हैं कि उस कारोबार के लिए अलग फोन व सीम का इस्तेमाल करते हैं
एमसीबी जिले के पुलिसिंग को लेकर जो सूत्रों के हवाले से जानकारी आ रही है उसके अनुसार कुछ पुलिसकर्मी अवैध कारोबार में इस कदर लिप्त हैं की उसके लिए मोबाइल व सीम ही अलग रखते हैं और सिर्फ उसी काम के लिए उसका इस्तेमाल होता है इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने शातिराना तरीके से अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने वाले उसके फलने फूलने की वजह बने हुए हैं।
भू-माफिया के शागिर्द ही हैं कुछ कर्मी
भू-माफिया का इतना बड़ा गिरोह है कि उस गिरोह में भू-माफिया अपने अवैध काम या किसी की भूमि पर कब्जा करने या भूमि खाली कराने के लिए पुलिसकर्मियों का इस्तेमाल करते हैं और जिसके एवज में उन्हें भारी भरकम मुनाफा भी होता है, यह काम इस समय काफी तेजी से एमसीबी जिले के कुछ थाना क्षेत्रों में चल रहा है जो जांच का विषय भी है जो दबी जुबां पर क्षेत्र में सुनने को मिल भी रहा है जानकारी तो कुछ पुलिसकर्मी भी देते हैं पर उनका नाम ना सामने आए या शर्त भी होता है इस वजह से वह डरते भी हैं सूत्रों का मानना है की भू माफिया जमीन खाली कराने या कब्जा लेने या दिलाने के लिए पुलिसकर्मियों को खड़ा करके उसका खौफ दिखाकर गरीबों की जमीन हड़प लेते हैं कुल मिलाकर समझा जा सकता है की कानून की रक्षा करने वाले लोगों को न्याय दिलाने वाले ही जब अन्याय का साथ देने लगेंगे तो जिले की कानून व्यवस्था की स्थिति समझी जा सकती है।
शिकायत कितनी भी हो जाए पर कार्यवाही तो दूर तबादला सूची में नाम तक नहीं आता
जो पुलिसकर्मी गलत कार्यों में लिप्त हैं या जिनकी शिकायत होती रहती है उनकी कितनी भी शिकायत हो जाए उनका नाम तबादला सूची में कभी नहीं आता और वह एक ही जगह बने रहते हैं। ऐसे पुलिसकर्मियों की कमी नहीं है जो देखते ही देखते धनकुबेर बन चुके हैं और अवैध कार्यों को खुलेआम होने देने में सहायता प्रदान कर रहें हैं। कोयला,कबाड़,जुआ सट्टा,सहित अवैध शराब मामले में लिप्त हैं लेकिन उनपर कार्यवाही करना तो दूर उनकी पदस्थापना भी नहीं बदली जाति है।
विधायकों का समर्थन लेकर चलते हैं पुलिसकर्मी
जिले के अधिकांश ऐसे पुलिसकर्मी जिनकी शिकायत होती रहती है या जो गलत अवैध कार्यों में लिप्त हैं वह विधायकों का भी समर्थन लेकर चलने का प्रयास करते है और जब उनकी पदस्थापना बदले जाने की बात आती है वह अपनी पहुंच दिखाकर उसे रोकने में कामयाब हो जाते हैं और वहीं बने रहते हैं। ऐसे पुलिसकर्मियों की संख्या कम नहीं है। वैसे इस सरकार व वर्तमान विधयाक क्या होगा ये तो समय तय करेगा।