- कांग्रेस प्रत्याशी अपना गृह वार्ड भी नहीं बचा पाईं,पोड़ी बचरा क्षेत्र छोड़कर हर जगह से मिली हार,समीक्षा जारी…
- 228 मतदान केंद्रों में कुल 17 मतदान केंद्रों में ही मिली कांग्रेस प्रत्याशी को बढ़त, बढ़त भी ऐसी की जिसे बढ़त कहना भी गलत
- अपनों के विरोध ने कांग्रेस प्रत्याशी को दिलाई हार,गैरों पर भरोसा कर कांग्रेस प्रत्याशी की हुई हार
- कांग्रेस की अंबिका सिंहदेव को एक पोलिंग में केवल 02 वोट…बैकुंठपुर,पटना, चरचा से रही काफी पीछे
- पोंडीबचरा क्षेत्र ने बचाई लाज…गोंगपाने हर बूथ में पाया वोट,शहर में भी दिखी गोगपा की पैठ
- बैकुंठपुर कांग्रेस प्रत्याशी नहीं समेट पाई अपनों को और अंततःअपनों के ही विरोध ने परिणाम को बदल दिया

-रवि सिंह –
कोरिया,04 दिसम्बर 2023 (घटती-घटना)। सत्ता पक्ष की विधायकों की हार ने पूरे प्रदेश में कांग्रेस को झकझोर कर रख दिया, हर वर्ग में काम करने के बावजूद दोबारा सत्ता में आ ना सके, इसकी वजहों पर यदि गहन चिंतन किया जाए तो इसकी वजह सिर्फ एक ही थी सारे विधायकों व प्रशासन को फ्री हैंड छोड़ देना और जनता की परेशानियों को दरकानार करना, कांग्रेस 75 पार का नारा लेकर बैठी थी और कार्यकर्ताओं को उपेक्षित कर रखा था, उपेक्षित कार्यकर्ताओं के बावजूद किस मुंह से इस उम्मीद में थे कि सत्ता में दोबारा काबिज होंगे? यही कांग्रेस की बड़ी भूल थी, यदि बैकुंठपुर विधानसभा की बात की जाए तो सब कुछ होने के बावजूद सत्ता पक्ष की विधायक अंबिका सिंहदेव का हारना कहीं ना कहीं आश्चर्यचकित करता है, यहां पर भाजपा के विधायक की जीत नहीं सत्ता पक्ष के विधायक की हार ज्यादा चर्चा में है। भाजपा विधायक को यदि जीत मिली तो सिर्फ कांग्रेस विधायक के विरोध की वजह से, यदि कांग्रेस विधायक समय रहते अपने लोगों को समेट लेती तो शायद ऐसी शर्मनाक हार ना मिलती यह लोगों का भी कहना है, जीत हार अपनी जगह है जीत हार का अंतर बताता है की आक्रोश के कारण बुरी हार हुई है, सत्ताधारी दल के विधायक की अब हार के बाद सिर्फ समीक्षा हो रही है और चेहरे को देखा जा रहा है कि किसने अंदर खाने में विरोध किया पर अपनी कमियों को आज भी विधायक प्रत्याशी व बाकी लोग देखने को तैयार नहीं है, जबकि शुरू से पता था कि उनके विरोधी कौन है और कैसे विरोधी बने हैं उन्हें समेट पाने में और एकत्रित कर पाने में कांग्रेस प्रत्याशी फेल हो गईं और परिणाम बड़ी हार में बदल गया, स्थितियां ऐसी निर्मित हुई कि यदि सारे मतदान केंद्र के गणना पर नजर डाला जाए तो हर जगह से कांग्रेस प्रत्याशी को हारना पड़ा यहां तक की अपना गृह वार्ड भी नहीं बचा पाईं, कांग्रेस प्रत्याशी वहीं 228 मतदान केंद्रों में कांग्रेस प्रत्याशी को कुल 17 मतदान केंद्रों में बढ़त मिली वह भी ऐसी बढ़त जो भाजपा प्रत्याशी के अन्य सभी मतदान केंद्रों की बढ़त के सामने नाकाफी थी।
ज्ञात होगी बैकुंठपुर विधानसभा सीट में भारतीय जनता पार्टी के भईयालाल राजवाड़े ने 25,413 मतों से शानदार जीत हासिल की है। दरअसल बैकुंठपुर सीट से अंबिका सिंहदेव के लिए कांग्रेसियों के अलावा आम मतदाताओं में भारी नाराजगी का आलम था। इसलिए जैसे ही भारतीय जनता पार्टी ने भईयालाल राजवाड़े को अपना प्रत्याशी घोषित किया, वैसे ही हवा की यह बयार बहने लगी कि भईयालाल राजवाड़े 15,000 से अधिक मतों से चुनाव जीतेंगे। इस आशंका को सही साबित करते हुए भईयालाल राजवाड़े ने 25,000 से अधिक मतों से कांग्रेस की अंबिका सिंहदेव को हरा दिया।

कांग्रेस प्रत्याशी अंबिका सिंहदेव गृह वार्ड से हारी
कांग्रेस प्रत्याशी अंबिका सिंहदेव की हार का आलम यह रहा कि वह अपने ही गृह वार्ड महलपारा से 235 वोटो से पीछे रहीं। जबकि भईयालाल राजवाड़े अपने गृह वार्ड सरडी से 500 से अधिक मतों से आगे रहे। अपने गृह वार्ड में ही जिस तरह कांग्रेस प्रत्याशी बड़े अंतर से पीछे रहीं उसे देखकर लगता है की उनका विरोध किस स्तर का था जो उन्हे अपने ही पड़ोसियों ने समर्थन देने से मना कर दिया। बात भाजपा प्रत्याशी की यदि की जाए तो उन्हे उनके गृह वार्ड से तो बढ़त मिली ही वहीं उन्हे उसके अलावा पूरे विधानसभा से अपार समर्थन मिला और उनको जानने वाले और पास रहने वालों का कहना है की जनता उनकी पिछली हार की इस तरह भरपाई करेगी वह खुद इसके लिए जनता के ऋणी हैं उनका कहना है।
एक बूथ में कांग्रेस को केवल 2 मत
हैरानी की बात तो यह है कि बूथ क्रमांक 6 दुर्गापुर में कांग्रेस प्रत्याशी को केवल दो वोट मिले जो एक राष्ट्रीय पार्टी के लिए बेहद गंभीर बात है। इस बूथ में भाजपा प्रत्याशी को 77 मत और गोंगपा को 10 मत प्राप्त हुए।
अपने क्षेत्र से बड़ी बढ़त से आगे रहे भईयालाल राजवाड़े
भाजपा के भईयालाल राजवाड़े जगतपुर से लेकर खरवत तक अपने परंपरागत बेल्ट में 4,742 मतों से आगे रहे। कुल मिलाकर उन्होंने साबित किया की वह बैकुंठपुर विधानसभा में तो वह लोकप्रिय हैं ही लेकिन अपने गृह क्षेत्र में आज भी उनका मुकाबला करने वाला कोई नहीं वह बढ़त लेकर ही वहां से निकलेंगे यह तय हुआ।
चरचा में कांग्रेस को मिला भारी गढ्ढा
वहीं चरचा कालरी शहर में कांग्रेस नेता भूपेंद्र यादव की अगुवाई के बावजूद कांग्रेस वहां से 1586 मतों से पीछे रही चरचा के 14 पोलिंग में केवल दो पोलिंग में ही कांग्रेस को मामूली बढ़त मिल सकी। चरचा से कांग्रेस प्रत्याशी को ज्यादा उम्मीद थी और उनका मानना था की कांग्रेस मतदान केंद्र क्रमांक 1 से जारी भाजपा प्रत्याशी की बढ़त को चरचा में रोक लेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं और कांग्रेस चरचा में बुरी तरह पिछड़ गई। पिछले चुनाव में जहां भाजपा के भईयालाल राजवाड़े मात्र 89 वोटों के आसपास से चरचा से आगे थे इस बार उन्होंने 1500 से ज्यादा मतों का अंतर मात्र चरचा से ले लिया और बड़ी जीत के लिए वह आगे बढ़ गए।

संभाग बनाने की घोषणा काम नही आई,शहर में कांग्रेस हारी
बैकुंठपुर शहर की 11 पोलिंग में भाजपा को 3,919 और कांग्रेस को 2,600 मत मिले बैकुंठपुर शहर से भाजपा 1,319 मतों से आगे रही। शहर की 11 पोलिंग में कांग्रेस को केवल डबरीपारा की एक पोलिंग से बढ़त मिली है। शहर में भाजपा का आगे होना यह दर्शा गया बैकुंठपुर में की अब शहर भी परंपरा तोड़कर आगे बढ़ना चाहता है और जिला विभाजन का दुख उसे है। शहर से कांग्रेस कभी नहीं पिछड़ी थी और इस चुनाव में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन यह भी बता गया की जनता परंपरा तोड़कर भी अपना नेतृत्व चुनने में विश्वास रखती है।
कांग्रेस के बड़े नेता का पटना में बढ़त का दावा भी हुआ फुस्स
बात यदि पटना क्षेत्र की की जाए तो भाजपा को वहां 25,183 मत मिले और कांग्रेस को 14,036 मत मिले। इस प्रकार भाजपा पूरे पटना क्षेत्र में 11,147 मतों से आगे रही। इतना ही नहीं पटना शहर की पांच पोलिंग में भाजपा 282 मतों से आगे रही। ,पटना में भाजपा की बढ़त बताया जाता है की कभी नहीं हुई थी जो इस बार हुई,इसके पीछे की वजह भी आक्रोश ही था जबकि नगर पंचायत की घोषणा और उसके स्थापना की ओर कांग्रेस विधायक काम कर रही थीं फिर भी पटना ग्राम ने कांग्रेस प्रत्याशी को नकार दिया,कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में उभरे और हाल ही में बनाए गए कार्यकारी ब्लॉक अध्यक्ष बिहारीलाल राजवाड़े के गृह क्षेत्र बरदिया में जहां भाजपा को 752 मत तो वहीं कांग्रेस को 211 मत मिले। बिहारीलाल राजवाड़े जो पिछले चुनाव में खुद जनता जोगी कांग्रेस से प्रत्याशी थे उन्होंने देखा जाए तो उतनी भी बढ़त कांग्रेस प्रत्याशी से खाते में दर्ज नहीं करा पाया जितना वह खुद पिछले चुनाव में पा सके थे । कुल मिलाकर उनका कांग्रेस के साथ जुड़ना कतई फायदेमंद साबित नहीं हुआ और कहीं न कहीं इसका नुकसान ही कांग्रेस प्रत्याशी को झेलना पड़ा जो बड़ी हार के रूप में सामने है।
रनई में कांग्रेस की जीत बरकरार
कांग्रेस के गढ़ रनई में 224 मत से कांग्रेस आगे रही। यह कांग्रेस के कद्दावर नेता और रनई जमीदार योगेश शुक्ला का क्षेत्र है, यहां इनका काफी दबदबा है और आज तक कांग्रेस यहां से हारी नहीं है। इसका रिकॉर्ड भी बरकरार रहा। लेकिन वहां कांग्रेस को एक बूथ में मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि योगेश शुक्ला भी बैकुंठपुर विधानसभा सीट से विधायक पद के दावेदार रहे हैं।
कुडेली बेल्ट से भी पीछे हुई कांग्रेस
यदि कांग्रेस के ही एक कद्दावर नेता वेदांती तिवारी की चर्चा की जाए तो कुडेली से वह आते हैं कूड़ेली बेल्ट से भाजपा को 3,420 और कांग्रेस को 2,288 वोट मिले यहां भी भाजपा 1,132 मतों से आगे रही। वेदांती तिवारी खुद प्रत्याशी की दौड़ में आगे थे और कहीं न कहीं कांग्रेस की घोषित प्रत्याशी को उनके ऊपर विश्वास कम था इसलिए उन्हे चुनाव के दौरान पार्टी ने भरतपुर सोनहत का प्रभारी बना दिया था और वह वहीं डटे हुए थे जिसके कारण भी कांग्रेस इस क्षेत्र में पिछड़ गई। यदि वह क्षेत्र में रहते निश्चित रूप से अपनी साख बचाने काम करते जिसका मौका पार्टी ने भी उन्हे नहीं दिया जो भाजपा की बढ़त के लिए कारगर हो गई।
कांग्रेस प्रत्याशी की पोंडीबचरा क्षेत्र ने बचाई लाज
केवल पोंडी बचरा क्षेत्र ने कांग्रेस की कुछ लाज बचाई है यहां से वह 644 मतों से आगे रही है। लेकिन यहां गोंडवाना गणतंत्र पार्टी सबसे पहले नंबर में रही है। यहां कांग्रेस को 8,927 मत, भाजपा को 8,283 मत मिले। वही गोंडवाना को 9345 मत प्राप्त हुए। केवल इस इलाके से कांग्रेस 644 मतों से भाजपा को पीछे कर पाई। जबकि कांग्रेस का मानना था खुद विधायक के लोगों का मानना था की इस इस क्षेत्र से ही ही कांग्रेस कम से कम पांच हजार की लीड लेकर निकलेगी जो दावा भी गलत साबित हुआ यहां भी भईयालाल राजवाड़े ने मत प्राप्त किए।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में शहर में भी बनाई पैठ
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने सभी 228 बूथों में मत प्राप्त किए। हैरानी की बात तो यह है कि बैकुंठपुर शहर में भी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपनी पैठ बनाते हुए सभी 11 पोलिंग में कुल 72 मत प्राप्त किया। पूरे विधानसभा में गोंगपा को 23,140 मत को मिले।

कांग्रेस की बड़ी हार के पीछे विधायक के खास सिपहसलारों की रणनीति भी जिम्मेदार
बैकुंठपुर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी की बड़ी हार के पीछे विधायक प्रत्याशी के खास सिपहसलारों की रणनीति भी काफी हद तक जिम्मेदार है। विधायक के खास लोगों ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से प्रत्याशी को दूर रखा वहीं उन्होंने अपनी ही रणनीति बनाई जिसके अनुसार उन्होंने विरोधी दल में सेंध लगाना ज्यादा उचित समझा। बताया जाता है विरोधी दल के लोगों को अपनी तरफ करने के चक्कर में काफी अर्थ भी व्यय किया गया लेकिन सब बेकार साबित हुआ और विरोधी दल एकजुट हुआ और जनता के आक्रोश को वह अपने पक्ष में कर ले गया।

दैनिक घटती घटना की खबर को दरकिनार करना पड़ा भारी
सरगुजा संभाग का दैनिक घटती-घटना अखबार ने खबर को प्रकाशित कर कांग्रेस प्रत्याशी को हर बार कमियो को बताने का प्रयास किया ताकि समय रहते संभल जाए पर हर बार कांग्रेस प्रत्याशी ने खबरों को दरकिनार अपनी सोच में परिवर्तन नहीं लाया, जिसका परिणाम हार में बदल गया, घटती-घटना ने हर बार जिस जिस पर संदेह व्यक्त किया आखिर अंतत: उसे उसे संदेह पर मोहर लगाते गई और अंत में वह परिणाम के तरफ बढ़ और कांग्रेस प्रत्याशी के सारे संदेह सही हो गया, घटती-घटना की खबर भले ही कांग्रेस प्रत्याशी को बुरी लग रही थी पर हर खबर पर मोहर लगी है आज परिणाम भी यही बता रहे हैं।

घटती-घटना की कई खबरों पर लगी मुहर
दैनिक घटती-घटना खबर ने लगातार इस बात को लेकर खबर प्रकाशित कर रही थी कि बैकुंठपुर में प्रत्याशी नहीं बदल गया तो कांग्रेस को हर का सामना करना पड़ेगा और अंततः वही हुआ, प्रत्याशी नहीं बदल गया और जिस प्रत्याशी को दोबारा मौका दिया गया अंतत उन्हें बहुत बुरी तरीके से भाजपा प्रत्याशी भईया लाल राजवाड़े के सामने हार न पड़ा और साथ ही कई इतिहास भी इसके साथ जुड़ गए।

पैलेस की होगी हार,घटती घटना ने पहले ही कहा था
कोरिया पैलेस आज तक चुनाव को लेकर एक कीर्तिमान बनाकर रखा था कि उसकी हर नहीं हुई थी पर हर होना संभव था जिस बात को लेकर दैनिक घटती-घटना ने कई बार खबरों में प्रकाशित करके इसका अंदेश जताया था अंततः बैकुंठपुर प्रत्याशी के हार ने के बाद पैलेस की हर अंततः हो ही गई, लोगों का भी ऐसा मानना है की पहली बार चुनाव में पैलेस को हारना पड़ा। सरगुजा संभाग का दोनों पैलेस इस बार हार गया।