बैकुण्ठपुर@क्या भाजपा नेता देवेंद्र तिवारी तभी तक के लिए थे बैकुंठपुर निवासी जब तक उन्हे थी भाजपा से टिकट की आस?

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  • क्या देवेंद्र तिवारी ने बैकुंठपुर से कर लिया है पलायन,क्या वह अब फिर सोनहत को ही बनाएंगे अपना गृह निवास?
  • देवेंद्र तिवारी के गिने चुने समर्थक भी हुए भूमिगत..भाजपा से क्या उनका लगाव केवल टिकट की चाह तक था सीमित..जो नहीं मिला?

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 05 नवम्बर 2023 (घटती-घटना)। कोरिया जिला भाजपा के कद्दावर नेता वहीं बैकुंठपुर से विधानसभा टिकट के प्रबल दावेदार रहे देवेंद्र तिवारी बैकुंठपुर विधानसभा से अदृश्य नजर आ रहे हैं, माना जा रहा है की उन्हे प्रत्याशी नहीं बनाए जाने के कारण अब वह बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रचार नहीं कर रहे हैं और खुद से भरतपुर सोनहत क्षेत्र में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी की जीत का जिम्मा लिया हुआ है। देवेंद्र तिवारी के बैकुंठपुर विधानसभा से दूरी को यह मानकर चला जा रहा है की यदि उन्हे पार्टी प्रत्याशी बनाती तब वह विधानसभा में दिखते अपना प्रचार करते वहीं उन्हे प्रत्याशी नहीं बनाया गया इसलिए वह पलायन कर गए वहीं वह अपने गिने चुने समर्थकों को भी भूमिगत रहने निर्देश दे गए जो भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करते नजर नहीं आ रहे हैं वहीं वह कहीं न कहीं प्रत्याशी के विरुद्ध ही भावना सार्वजनिक जाहिर कर रहे हैं।
देवेंद्र तिवारी का बैकुंठपुर विधानसभा छोड़कर अन्य विधानसभा में जाकर प्रचार करना यह एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिससे उन्हे बैकुंठपुर के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार न करना पड़े वैसे अब सवाल यह उठता है की क्या देवेंद्र तिवारी तभी तक बैकुंठपुर के निवासी थे बैकुंठपुर के लिए उनके मन में विकास का भाव था जब तक उन्हे टिकट का आस था, टिकट नहीं मिला उनका बैकुंठपुर मोह खत्म हो गया और वह पुनः अपने गृह ग्राम पैतृक ग्राम लौट गए। लोगों का खासकर भाजपा के कई लोगों का यही मानना है। वैसे देवेंद्र तिवारी को लेकर बताया जा रहा है की वह फिलहाल भरतपुर सोनहत में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में वहीं अब वह आपने गृह क्षेत्र में ही पैतृक गृह क्षेत्र से ही राजनीति करने वाले हैं अगले पांच वर्ष और वह अब तभी बैकुंठपुर का रुख करेंगे जब उन्हे बैकुंठपुर से टिकट की आस समझ में आयेगी। देवेंद्र तिवारी के कुछ गिने चुने समर्थक भी अब शांत बैठे हैं वैसे वह भी पार्टी के पदाधिकारी हैं लेकिन वह पार्टी का काम नहीं कर रहे हैं यह देखने को मिल रहा है,वहीं वह पार्टी प्रत्याशी के लिए माहौल को विपरीत करने में लगे हुए हैं।
क्या देवेंद्र तिवारी का बैकुंठपुर से किनारे करने का निर्णय उनके लिए घातक होगा?
भाजपा नेता देवेंद्र तिवारी को लेकर सवाल यह भी उठ रहा है की क्या वह सचमुच अब बैकुंठपुर से पलायन कर गए हैं और बैकुंठपुर से अपना राजनीतिक भविष्य वह समाप्त मानकर चल रहे हैं टिकट मामले में, ऐसा इसलिए सवाल खड़ा हो रहा है क्योंकि उनका दर्शन लोग प्रचार के दौरान बैकुंठपुर में नहीं कर पा रहे हैं, वह सोनहत लौट गए यह भी सवाल खड़ा हो रहा है और वह वहीं से अब अपनी राजनीति की पारी खेलेंगे यह भी सवाल उठ खड़ा हुआ है। उनका बैकुंठपुर में प्रचार के दौरान नहीं दिखना यह भी साबित करता है की वह बैकुंठपुर से भाजपा प्रत्याशी बतौर खुद को मौका नहीं दिए जाने से नाराज हैं और वह इसलिए अब बैकुंठपुर में चुनाव के दौरान शायद ही नजर आएं। वैसे देवेंद्र तिवारी का ऐसा निर्णय भरतपुर सोनहत का जिम्मा लेकर खुद को बैकुंठपुर से किनारे करने का निर्णय उनके लिए घातक साबित होने वाला है। भाजपा सहित अन्य राजनीतिक लोगों की बात माने तो वह एक तरह से बैकुंठपुर से अपनी राजनीति समाप्त करने का निर्णय ले चुके हैं यदि वह बैकुंठपुर में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने नहीं आते हैं,क्योंकि वह पुनः बैकुंठपुर में अपनी दावेदारी कैसे प्रस्तुत करेंगे जबकि वह इस चुनाव में ही टिकट नहीं मिलने पर अपने गृह क्षेत्र लौट गए। उनका गृह क्षेत्र सोनहत है जो भरतपुर सोनहत विधानसभा क्षेत्र है और उन्हे आगे वहीं की राजनीति से जुड़कर चलना पसंद आ रहा है यह भी लोगों का कहां है वहीं वह बैकुंठपुर को केवल प्रत्याशी बनने के लिए अपनत्व भाव से देखने और उसे दिखाने का प्रयास कर रहे थे जबकि वह मन से सोनहत से ही लगाव रखते हैं यह भी अब बातें सुनने को मिलने लगी हैं।
सोशल मीडिया में सक्रिय रहने वाले देवेंद्र तिवारी सोशल मीडिया से भी दिख रहे दूर,भाजपा के पक्ष में कोई संदेश नहीं कर रहे जारी
सोशल मिडिया में सक्रिय रहने वाले देवेंद्र तिवारी सोशल मिडिया से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं,वह जबसे चुनावी बिगुल बजा है पूरी तरह शांत नजर आ रहे हैं। उनकी नाराजगी टिकट नहीं मिलने को लेकर हो सकती है लेकिन वह पार्टी के लिए कोई संदेश पार्टी की कोई विचारधारा घोषणा साथ ही संकल्प सोशल मिडिया में भी साझा नहीं कर रहे हैं जिससे यह लगने लगा है की वह फिलहाल पार्टी हित में प्रचार करने की अनीक्षा मन में बना चुके हैं।
भरतपुर सोनहत क्षेत्र से भी उनकी सक्रियता नहीं के बराबर सामने आ रही है
जैसा बताया जा रहा था की अब वह बैकुंठपुर क्षेत्र छोड़कर भरतपुर सोनहत क्षेत्र में प्रत्याशी के लिए काम करेंगे वैसा भी देखने को नहीं मिल पा रहा है। वह पूरी तरह गुप्त नजर आ रहे हैं। उनके समर्थक भी शांत हैं और मौन हैं।
अब क्या उनका बैकुंठपुर से हो गया मोह भंग,अब उन्होंने पैतृक गृह क्षेत्र को ही बना लिया ठिकाना?
देवेंद्र तिवारी की सक्रियता जिस तरह बैकुंठपुर विधानसभा में घटी है उसे लेकर लोगों का कहना यही है की वह टिकट के दावेदार और टिकट पाने तक के लिए ही बैकुंठपुर वासी बने थे,टिकट नहीं मिला वह पैतृक क्षेत्र लौट गए। अब सवाल यह भी उठने लगा है की वह मान चुके की अब उनका बैकुंठपुर से कभी नंबर नहीं लगने वाला और वह अब पैतृक क्षेत्र से ही आगे की राजनीति करेंगे। वैसे उनका बैकुंठपुर विधानसभा मामले में मौन रहना बहुत कुछ कह जाता है और माना जा रहा है की उनकी नाराजगी अभी तक बनी हुई है जो बनी भी रहेगी।


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