- क्या विधानसभा 2 व 3 दोनों में कांग्रेस पार्टी से महिला विधायक प्रत्याशियों को मिलेगा मौका?
- कोरबा लोकसभा अंतर्गत आठ विधानसभा सीटों मे से दो से महिला प्रत्याशियों को प्रत्याशी बनाया जाना तय,तो क्या 2 व 3 नंबर विधानसभा ही होगा सही?
- मनेंद्रगढ़ से प्रत्याशी बनाए जाने पर कांग्रेस को हो सकता है नुकसान यह भी है जनचर्चा।
- मनेंद्रगढ़ कांग्रेस का वैसे भी अभेद किला,जिला निर्माण किले के लिए नई कील,ऐसे में चिरमिरी क्षेत्र से ही प्रत्याशी बनाए जाने पर कांग्रेस को होगा फायदा।
- चिरमिरी क्षेत्र वैसे ही जिला मुख्यालय की मांग को लेकर है नाराज,ऐसे में विधानसभा प्रत्याशी भी क्षेत्र से नहीं चुने जाने पर दिख सकता है वहां के जनता का आक्रोश।
-रवि सिंह-
कोरिया,एमसीबी 27 सितम्बर 2023 (घटती-घटना)। अविभाजित कोरिया जिले में तीन विधानसभाएं आती हैं, जिनका क्रम भी पूरे प्रदेश की 90 विधानसभाओं में यदि देखा जाए तो 1,2,3 है, वहीं सत्ताधारी दल के हिसाब से आगामी चुनाव के मद्देनजर यदि अविभाजित कोरिया जिले की तीनो विधानसभाओं की बात की जाए और यहां प्रत्याशियों के चयन की बात की जाए तो क्रमांक 1 विधानसभा जिसे भरतपुर सोनहत विधानसभा के नाम से जाना जाता है वहां वर्तमान विधायक ही प्रत्याशी होंगे उनका न ही फिलहाल विरोध कहीं नजर आता है और न ही उनके विरुद्ध किसी अन्य ने ही दावेदारी की है जिससे यह भी स्पष्ट हो जाता है की क्रमांक 1 विधानसभा में सत्ताधारी दल एकजुट होकर लड़ेगा और आज की स्थिति की बात की जाए तो वहां जीत सत्ताधारी दल की सुनिश्चित मानी जा रही है। वहीं क्रमांक 2 व क्रमांक 3 नंबर विधानसभाओं को लेकर बात की जाए तो यहां के दोनों विधायकों का परफॉर्मेंस खराब आंका गया है सबसे ज्यादा खराब स्थिति संगठन से तालमेल को लेकर है और दोनो ही जगह पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से लेकर छोटे छोटे कार्यकर्ता भी विधायकों से नाराज हैं जिसका उदाहरण भी देखने को सोशल मिडिया में वहीं सार्वजनिक आयोजनों पार्टी कार्यक्रमों में मिलता रहता है जब विधायकों के खिलाफ ही वरिष्ठ सहित छोटे कार्यकर्ताओं का आक्रोश झलकता है।
सत्ताधारी दल अपने विधायकों के परफॉर्मेंस का लगातार आंकलन करवाती चली आ रही है वह समय समय पर अपना आंतरिक सर्वे भी करवाती आई है वहीं एल आई बी रिपोर्टों का भी पार्टी अध्ययन करती रही है वहीं इन सभी आंकलन और आंतरिक सर्वे रिपोर्ट अनुसार पार्टी ने भी माना है जैसा की सूत्रों का दावा है की क्रमांक 2,और 3 नंबर की विधानसभाओं में पार्टी के लिए वर्तमान विधायक कमजोर साबित पड़ सकते हैं और ऐसा ही जन चर्चाओं में भी सुनने को मिलता रहता है की अविभाजित जिले की दो विधानसभाओं में वर्तमान विधायकों के भरोसे जीत सुनिश्चित सत्ताधारी दल की नजर नही आती है।वहीं पार्टी परफार्मेंस के आधार पर टिकट काटेगी यह भी पार्टी के अंदरखाने की ही बातें हैं जो सूत्रों का भी दावा है। वहीं बताया यह भी जा रहा है की अविभाजित जिले में मनेंद्रगढ़ से वर्तमान विधायक का टिकट पार्टी काट सकती है वहीं कुछ का तो यह भी कहना है काट ही चुकी है, ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है की जब अविभाजित जिले के दो विधानसभाओं के दो विधायकों का परफॉर्मेंस खराब सामने आया है तो एक का ही टिकट मनेंद्रगढ़ विधायक का ही टिकट पार्टी क्यों काट रही है, क्रमांक 3 विधानसभा में पार्टी खराब परफॉर्मेंस साथ ही संगठन के लगातार अंदरूनी विरोध के बावजूद क्यों वर्तमान पर ही दांव लगाने तैयार है यह भी बड़ा सवाल है?
कांग्रेस दो विधानसभाओं में महिला प्रत्याशी चुनाव में उतार सकती है
वैसे सत्ताधारी दल प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र अन्तर्गत आने वाली विधानसभाओं में से दो विधानसभाओं में महिला प्रत्याशी चुनाव में उतार सकती है और मनेंद्रगढ़ से भी पार्टी एक महिला प्रत्याशी पर ही दांव लगाएगी ऐसी बातें सामने आ रही हैं ऐसे में यह भी माना जा रहा है की मनेंद्रगढ़ विधायक का टिकट कटना लगभग तय है। वहीं बैकुंठपुर विधानसभा से वर्तमान में भी महिला विधायक ही निर्वाचित हैं सत्ताधारी दल से और भले ही उन की संगठन के वरिष्ठ सहित छोटे कार्यकर्ताओं से दूरी कायम है उन्हे भी पार्टी प्रत्याशी बनाएगी ऐसे में परफॉर्मेंस के आधार पर एक ही का टिकट क्यों काटा जा रहा है जबकि दो विधायकों का परफॉर्मेंस खराब है। वैसे यदि विधानसभा क्रमांक 2 और 3 नंबर के वर्तमान विधायकों को लेकर उनके आगामी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी होने की स्थिति में यदि लोगों के आंकलन और जन चर्चा की बात की जाए तो क्रमांक 3 नंबर के विधायक फिलहाल उतनी भी बुरी स्थिति में नहीं हैं जितनी हार की संभावनाओं को लेकर बैकुंठपुर विधानसभा की वर्तमान विधायक की चर्चा है। बैकुंठपुर विधानसभा से कम से कम बेहतर स्थिति में हैं मनेंद्रगढ़ विधायक।
चिरमिरी क्षेत्र से विधायक पद छीना आक्रोश बढ़ावा देने जैसा, सत्ताधारी दल को नुकसान होना भी तय
वैसे मनेंद्रगढ़ विधायक हाल फिलहाल में संगठन में खुद को कम शामिल पा रहे हैं और उन्हे कहीं न कहीं वही झेलना पड़ रहा है जो पांच सालों तक संगठन के लोगों ने झेला था और आज चुनाव समीप आते ही संगठन हावी है और ऐसे में विधायक का कमजोर पड़ना लाजमी है वहीं यदि जमीनी पकड़ और चुनाव की जीत हार की बात की जाए तो मनेंद्रगढ़ के वर्तमान विधायक इतनी भी बुरी स्थिति में नहीं हैं की उन्हे हार का ही सामना करना पड़ेगा, उनके कुछ कामों को लेकर जनता भी फिलहाल उनके लिए कुछ सहनुभूति रखती नजर आ रही है जिसकी वजह से वह हार ही जाने वाले हैं और इसलिए उनका टिकट कटना तय है यह कहना गलत होगा। वैसे सत्ताधारी दल की यदि बात मनेंद्रगढ़ विधानसभा को लेकर की जाए तो मनेंद्रगढ़ से कांग्रेस पार्टी के लिए प्रत्याशी चुनना नुकसानदायक साबित हो सकता है क्योंकि जिला मुख्यालय की मांग चिरमिरी ने अभी छोड़ी नहीं है और ऐसे में यदि उनसे या उनके क्षेत्र से विधायक पद भी छीना जाएगा उनका आक्रोश बढ़ जाएगा और वह निश्चित तौर पर दूसरा विकल्प तलाशेंगे और ऐसे में सत्ताधारी दल को नुकसान होना तय है। वैसे मनेंद्रगढ़ विधानसभा के तीन प्रमुख क्षेत्र शामिल होते हैं जहां के लोग मतदान करते हैं जिसमे मनेंद्रगढ़,चिरमिरी,खड़गवां क्षेत्र ही प्रमुख है जहां के मतदाता अपना विधायक चुनते हैं वहीं यदि पिछले चुनावों की यदि बात की जाए तो मनेंद्रगढ़ क्षेत्र से भाजपा को कभी बढ़त नहीं मिली,यहां तक की भाजपा कई चुनावों में एक निश्चित मतों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी, इस क्षेत्र से कांग्रेस ही हमेशा आगे रही वहीं कांग्रेस ने ही मनेंद्रगढ़ को जिला बनाया है और वर्तमान विधायक की मांग पर बनाया है ऐसे में इस बार मनेंद्रगढ़ क्षेत्र से कांग्रेस का कोई भी प्रत्याशी बड़े मतों से आगे रहेगा भले ही वह वर्तमान विधायक ही क्यों न हों यह तय है इस बार मनेंद्रगढ़ से कांग्रेस पिछले चुनावों से भी ज्यादा मतों से आगे रहेगी यह भी तय है वहीं अब पार्टी यदि चिरमिरी क्षेत्र से प्रत्याशी बनाती है तो मनेंद्रगढ़ सहित चिरमिरी क्षेत्र मिलकर पार्टी के लिए जीत का मार्ग तय कर देंगे यह भी कहा जा सकता है रही बात खड़गवां की तो वहां से कोई दावेदार उतना मजबूत है भी नहीं जो आगे आए या जिसपर पार्टी ही विश्वास जता पाए, इस तरह पार्टी के लिए चिरमिरी क्षेत्र से ही प्रत्याशी चयन फायदेमंद होगा वरना मनेंद्रगढ़ से प्रत्याशी बनाए जाने पर चिरमिरी क्षेत्र की नाराजगी झेलनी होगी और पार्टी को नुकसान भी होना तय नजर आ रहा है।
क्या मनेन्द्रगढ़ से प्रत्याशी चुनकर जीत सुनिश्चित कर पाएगी कांग्रेस?
कांग्रेस पार्टी का विरोध खुलकर सामने नहीं दिख रहा है वहीं सरकार के कामकाज का भी जनता में कोई विरोध देखने को फिलहाल नहीं मिल रहा है यदि विरोध और आक्रोश कहीं नजर आ रहा है तो वह है वर्तमान विधायकों को लेकर जो बैकुंठपुर विधानसभा सहित मनेंद्रगढ़ विधानसभा में ज्यादा देखा जा रहा है अविभाजित कोरिया जिले में। विरोध विधायकों का जनता में भी है और सबसे ज्यादा विरोध कार्यकर्ताओं सहित वरिष्ठ कांग्रेसियों में देखा जा रहा है जो पांच साल से खुद को उपेक्षित मान रहे हैं,अब इसी आधार पर पार्टी टिकट भी काटने वाली है जिसमे मनेंद्रगढ़ विधायक का नाम टिकट कटने वाले विधायकों के नाम की सूची में प्रमुख नाम है जैसा सूत्रों का दावा है,वहीं अब सवाल यह भी उठ रहा है की यदि मनेंद्रगढ़ विधायक का टिकट कटता है तो किसे मौका मिल सकता है ऐसे में सूत्रों का यह भी दावा है की मनेंद्रगढ़ से इस बार किसी महिला को पार्टी उम्मीदवार बना सकती है वहीं मनेंद्रगढ़ से ही प्रत्याशी चयन की धारणा के साथ पार्टी टिकट देने पर विचार कर रही है,अब मनेद्रगढ़ से टिकट यदि पार्टी देती है किसी को तो क्या पार्टी को इसका फायदा मिलेगा या इसका नुकसान होगा पार्टी को,वैसे मनेंद्रगढ़ विधानसभा से कांग्रेस पार्टी के लिए किस क्षेत्र का प्रत्याशी फायदेमंद हो सकता है इसको लेकर यदि राजनीति से जुड़े लोगों की बात मानी जाए तो उनका कहना यही है की मनेंद्रगढ़ से चिरमिरी क्षेत्र का ही प्रत्याशी कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि मनेंद्रगढ़ शहर जिला मुख्यालय चाहता था जो उसे मिल गया अब वह इधर उधर जाने वाला नहीं किसी अन्य दल के पक्ष में वहीं चिरमिरी क्षेत्र फिलहाल नाराज है इसलिए विधायक पद पर उसी का हक यदि पार्टी तय कर देती है तो पार्टी की पार्टी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित है।
विधायक नंबर 3 के विरुद्ध 51 लोगों ने की दावेदारी तो वहीं विधायक नंबर 2 के विरूद्ध 21 ने दावेदारी पेश की
विधानसभा क्रमांक 2 और 3 में यदि विधायकों के विरोध और उनके खिलाफ पार्टी से ही आक्रोश का यदि आंकलन किया जाए तो भी विधानसभा क्रमांक 2 के विधायक के विरुद्ध 22 लोगों ने ही दावेदारी पेश की वहीं यदि क्रमांक 3 की विधायक या उनके विरुद्ध दावेदारों की संख्या की बात की जाए तो वह 51 रही जो बहुत ज्यादा है। ऐसे में यह भी कहा जा सकता है की क्रमांक 2 से क्रमांक 3 का विरोध ज्यादा है,वैसे जिन्होंने भी विधायकों के खिलाफ जाकर दावेदारी की है सभी कांग्रेस के ही सक्रिय कार्यकर्ता हैं पार्टी के ही पदाधिकारी हैं और टिकट जिसे मिले प्रत्याशी जिसे बनाया जाए काम उसके लिए इन्हीं को मिलकर करना है।वहीं यह भी माना जाता है की मनेंद्रगढ़ विधायक का सामने से दिख रहा विरोध वह एक दिन में खत्म कर लेंगे उन्हे बस प्रत्याशी बनने का इंतजार है और उसके बाद वह अपनी जीत सुनिश्चित कर लेंगे यह लोगों का मानना है वहीं बैकुंठपुर की बात की जाए तो इस विधानसभा से सभी नाराज कांग्रेसी वर्तमान विधायक को टिकट मिलने की स्थिति में एकजुट होकर किसी पार्टी के ही निर्दल होकर चुनाव में उतरने वाले के साथ वह जा सकते हैं जिसकी संभावना ज्यादा बनती देखी जा रही है।
यदि परफॉर्मेंस पर विचार किया जाए तो दो नंबर विधायक का परफॉर्मेंस 3 नंबर से बेहतर
यदि अविभाजित कोरिया जिले की तीन विधानसभाओं में से दो विधानसभाओं की बात की जाए जो क्रमांक 2 और 3 के नंबर से जानी जाती हैं तो यहां के विधायकों में से क्रमांक 2 का परफॉर्मेंस क्रमांक 3 से काफी बेहतर है यदि तुलनात्मक रूप से बात की जाए तो,विधानसभा क्रमांक 2 और 3 के ही लोगों की बात यदि मानी जाए तो वहां के लोगों का अलग अलग जो मानना है उसके अनुसार विधानसभा क्रमांक 2 के विधायक विधानसभा क्रमांक 3 की अपेक्षा ज्यादा मजबूत नजर आते हैं।उसके पीछे के कारणों पर यदि लोगों की राय समझी जाए तो उनका कहना है की मनेंद्रगढ़ विधायक कर आरोप लगते रहे उन्हे कई बार कई मंचो पर विरोध भी झेलना पड़ा जिसमे जिला मुख्यालय को ही लेकर विरोध प्रदर्शन और पदयात्रा की बात शामिल है तब विधायक मैदान छोड़कर भागे नहीं उन्होंने उस समय जनता से सीधा संवाद किया,विपक्ष के भी आरोपों से मनेंद्रगढ़ विधायक भागे नहीं उन्होंने विपक्ष को भी सामने आकर जवाब दिया वहीं उन्होंने विपक्ष को ही कई मामलो मे दागदार बना दिया जिसका एक उदाहरण हाल का ही है जिसमे विपक्ष को अपना एक महत्वपूर्ण पदाधिकारी बदलना पड़ा वहीं बैकुंठपुर विधायक आरोपों से सामना करने सामने कभी नहीं नजर आईं और उन्होंने आरोप लगने पर कभी सामने आकर न ही सफाई दी जो उन्हे मनेंद्रगढ़ विधायक की तुलना में कमजोर प्रत्याशी साबित करता है।मनेंद्रगढ़ विधायक के पास आज कार्यकर्ताओं की लंबी फौज है वहीं उनके साथ अभी भी संगठन का आधा धड़ा मौजूद है जबकि बैकुंठपुर विधायक के साथ आज जो नजर आ रहे हैं वह उनके साथ पिछले चुनाव में नहीं थे वहीं जो पिछले चुनाव में उनके साथ थे वह आज अलग रास्ते निकल चुके हैं,संगठन में भी उनका कोई समर्थक है यह भी नजर नहीं आता है।