कोरिया/एमसीबी@क्या यही है पत्रकारिता लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का काम,क्या अनुचित लाभ लेकर अपनी कलम गिरवी रखना ही है पत्रकारिता?

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  • किसी ने शासकीय जमीन पर किया है कब्जा,किसी ने पत्नी पुत्र के नाम से लिया है स्वेक्षानुदान,कोई कर रहा एसडीएम के लिए बिचौलिए का काम।
  • एमसीबी जिले के तीन पत्रकारों ने किया है शासकीय भूमि पर कब्जा,बैकुंठपुर के एक पत्रकार का एसडीएम के नाम से वसूली का ऑडियो हुआ है जारी।
  • बैकुंठपुर के ही दो बड़े पत्रकारों ने विधायकों से ली है लंबी स्वेक्षानुदान राशि,पत्नी पुत्र के नाम से सूची में नाम है दर्ज।
  • अविभाजित कोरिया जिले में लगातार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हो रहा बदनाम,आरोप सही तो क्या यही है पत्रकारिता का असली धर्म।
  • कहीं पत्नी पुत्र के नाम से स्वेक्षानुदान मामला,कहीं शासकीय भूमि पर कब्जा,कहीं अधिकारियों नेताओं के बीच बैचौलिया बनने का आरोप,क्या यही है पत्रकारिता पेशे का असली स्वरूप?
  • आरोपों पर निंदा प्रस्ताव से क्या पत्रकारिता पर लग रहे गंभीर आरोप दूर होंगे या हटेंगे, क्या आरोपों पर सफाई देना सच सामने लाना पत्रकारिता का धर्म नहीं।
  • क्या कुछ पत्रकार पत्रकारिता की आड़ में कर रहें हैं अधिकारियों व नेताओं की दलाली,उठा रहे ऐसा कर अपने लिए अनुचित लाभ?
  • आम आदमी पार्टी ने एमसीबी जिले के एक वरिष्ठ पत्रकार को लेकर सरेआम किया था एक प्रदर्शन,लगाए थे गंभीर आरोप।
  • अब कई अन्य पत्रकारों को लेकर भी आने लगीं कई नई बातें।

-रवि सिंह-
कोरिया/एमसीबी 18 सितम्बर 2023 (घटती-घटना)।
अविभाजित कोरिया जिले में जिस तरह अभी भी कई शासकीय विभाग एकसाथ काम कर रहें हैं जिला विभाजन के बाद भी जिस तरह एक ही कार्यालय से दोनो जिले के कार्य संपादित हो रहें हैं उसी तरह पत्रकारिता क्षेत्र में भी दोनो जिले अभी एक ही साथ काम कर रहें हैं और अभी पत्रकारिता क्षेत्र में विभाजन नहीं हुआ है। एक दूसरे जिले में दोनो जिले के पत्रकार कई कार्यक्रमों में आमंत्रित भी किए जा रहे हैं जहां उनका मान सम्मान भी किया जा रहा है लेकिन आम आदमी पार्टी के एमसीबी जिले के किए गए एक आंदोलन एक प्रदर्शन के बाद अविभाजित जिले की पत्रकारिता सवालों के घेरे में आ गई है और अब यह सवाल उठने लगा है की लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों पर जिस तरह के आरोप लगाए गए यदि वह सही है तो क्या यही पत्रकारिता का धर्म है? आम आदमी पार्टी ने एक पत्रकार प्रतिष्ठित टीवी न्यूज चैनल के पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और वह भी खुले मंच से सरेआम वहीं उसके बाद अविभाजित जिले के पत्रकारों ने भी उन आरोपों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया और आम आदमी पार्टी के उन नेताओं पर कार्यवाही की मांग की जिन्होंने भी एक प्रतिष्ठित टीवी न्यूज चैनल के प्रतिनिधि को लेकर खुले मंच से आरोप लगाए वहीं निंदा प्रस्ताव पारित हुए एक भी दिन नहीं बीता था की अब अविभाजित जिले के चार पांच बड़े पत्रकारों को लेकर खासकर उन पत्रकारों को लेकर जिन्होंने या जिनके नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित हुआ नई नई जानकारी सामने आने लगी है और जिन्हे यदि सही माना जाए तो या आरोप सही हैं तो यह कहना गलत नहीं होगा की लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अब अविभाजित जिले में अपना असली कर्तव्य नहीं निभा रहा है वह अपने धर्म पथ से पृथक चल रहा है।
ताजा मिल रही जानकारी अनुसार अविभाजित जिले के कई नामी पत्रकार विधायकों की स्वेक्षानुदान सूची में अपने परिजनों को लाभ पहुंचाते देखे जा सकते हैं जिसके अनुसार किसी की पत्नी किसी के पुत्र को भी स्वेक्षानुदान राशि विधायकों से मिली है जैसा की आरोप आम आदमी पार्टी ने मनेंद्रगढ़ शहर के एक पत्रकार जिला प्रतिनिधि अविभाजित कोरिया जिला को लेकर खुलेआम मंच से लगाया था जिसके लिए ही प्रेस क्लब सहित कौंसिल का निंदा प्रस्ताव आया था वहीं एमसीबी जिले के तीन पत्रकार शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे हथियाने में लगे हुए हैं जो प्रकरण भी राजस्व न्यायालय में दर्ज है जो भी अनुचित तरह से लाभ का मामला है जिसके बारे में यह भी बताया जा रहा है की जो भूमि उक्त तीन पत्रकार मिलकर कब्जा कर रहें हैं वह जिला संयुक्त कार्यालय से लगा हुआ है और काफी कीमती है साथ ही कोरिया जिले के एक पत्रकार का ऑडियो वायरल हुआ है जिसमे वह जिला मुख्यालय साथ ही अनुविभाग की एक राजस्व अधिकारी के लिए वसूली का काम करते सुने जा रहे हैं और उस ऑडियो में यह भी सुना जा सकता है की बैकुंठपुर की वह अनुविभाग राजस्व अधिकारी पैसों को लेकर खासकर वेतन से अतिरिक्त मिलने वाली राशि के लिए किस कदर व्यग्र और उत्साहित रहती हैं जो एक ऑडियो जो बताया जा रहा है की जिले के एक पत्रकार की आवाज वाला ऑडियो है जिसमे वह एक अन्य से अधिकारी के लिए काम के एवज में पैसों की मांग कर रहा है। ऑडियो की पुष्टि दैनिक घटती-घटना नहीं करता लेकिन यदि ऑडियो सही है और स्वेक्षानुदान सहित जमीन पर शासकीय कब्जा पत्रकार अपनी धौंस दिखाकर कर रहें हैं राजनीतिक पकड़ साबित कर कर रहें हैं तो यह पत्रकारिता का धर्म नहीं है।


पत्रकारिता क्षेत्र पेशे की छवि धूमिल हो रही है,अब समय यह आ गया है की अविभाजित कोरिया के समस्त पत्रकार साबित करें की उनकी निष्पक्षता बरकरार है
वैसे लगातार अविभाजित जिले के पत्रकारों को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं और यह देखा जा रहा है की इससे पत्रकारिता क्षेत्र पेशे की छवि धूमिल हो रही है और अब समय यह आ गया है की अविभाजित जिले के समस्त पत्रकार यह साबित करें की उनकी निष्पक्षता बरकरार है और उनके ऊपर लग रहे आरोप मिथ्या एवम गलत हैं यदि लग रहे आरोप सही मायने में गलत हैं,स्वेक्षानुदान राशि विधायकों से यदि किसी विज्ञापन के एवज में मिले हैं तो वह निश्चित रूप से पत्रकारों का अधिकार कहा जा सकता है भुगतान का माध्यम तय करने वाला पत्रकार नहीं होता वह अपने भुगतान का अधिकारी होता है मात्र और उसके विज्ञापन के प्रकाशन का यदि कोई भुगतान शेष है और भुगतान करने वाला उसे प्रदान करता है तो वह निश्चित रूप से ग्रहण करेगा, वैसे स्वेक्षानुदान मामला जरा गंभीर मामला है स्वेक्षानुदान गरीब वंचितों जरूरतमंदों का अधिकार है जो विधायकों के माध्यम से उन्हे प्राप्त होता है उसमे या उसके माध्यम से विज्ञापन का भुगतान लेना अनुचित ही कहा जायेगा गलत कहा जायेगा इससे पत्रकारिता साथ ही उसकी विश्वशनीयता प्रभावित होगी ही इसमें कोई शक नहीं है।
नवीन जिले में तीन पत्रकारों पर शासकीय भूमि कब्जा करने का आरोप
वहीं नवीन जिले में जीन तीन पत्रकारों पर शासकीय भूमि कब्जा करने का आरोप लगा है उन्हे भी सामने से आकर यह अवगत कराना चाहिए की क्या उनका कृत्य यह सही है और क्या वह किसी नियम के तहत ऐसा कर रहे हैं,यदि ऐसा नहीं है तो उन्हे पूरे मामले से खुद को किनारे करना चाहिए वरना पत्रकारिता पर से लोगों का विश्वास उठ जायेगा क्योंकि अतिक्रमण को लेकर टूटते घरों को लेकर पत्रकारों की खबरें अतिक्रमण मुक्त अभियान की वजह बनती हैं और ऐसे में यदि पत्रकार ही कब्जा करने लगेंगे शासकीय जमीन पर फिर अन्य यदि कब्जा करेगा तो कैसे उस विषय में निस्पक्ष कोई खबर लिखेगा जबकि वह स्वयं ऐसे कामों में संलिप्त रहेगा।
पत्रकार का ऑडियो हुआ वायरल
बैकुंठपुर के भी जिस पत्रकार का ऑडियो वायरल हुआ है जिसमे एक अनुविभाग की राजस्व अधिकारी के नाम से पत्रकार राशि की मांग किसी काम की एवज में मांग रहें हैं उन्हे भी उक्त ऑडियो जिसे घटती घटना सही है यह नहीं कहता फिर भी अपना पक्ष उक्त पत्रकार को रखना चाहिए और साबित करना चाहिए की उसकी निष्पक्षता बिचौलिए वाली है वह खरीदी बिक्री एजेंट नहीं है वह ऑडियो अनुसार वह व्यक्ति ही नहीं है जो दावा किया जा रहा है और ऑडियो की जांच करवानी चाहिए। वैसे ऑडियो में अनुविभाग की एक राजस्व अधिकारी को लेकर गलत शब्दों का भी उच्चारण किया गया है जो शायद ही शोभनीय कोई कहे ऐसे में ऑडियो की जांच तो प्रशासन को भी करवानी चाहिए क्योंकि यह पूरे प्रशासनिक अमले को लेकर गलत संदेश देता ऑडियो है जो वायरल है और जिसकी जांच अत्यावश्यक है वरना पत्रकार और प्रशासन आपस में मिलकर गड़बड़ी कर रहें हैं यही संदेश जनता के बीच जायेगा।
अविभाजित कोरिया में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ लगातार हो रहा बदनाम
अविभाजित कोरिया जिले में हाल फिलहाल में यह देखा गया की पत्रकारिता को लेकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को लेकर काफी आरोप लगे,आरोपों में विधायक स्वेक्षानुदान का मामला प्रमुख रहा और वहीं शासकीय भूमि पर कब्जा अधिकारियों से मिलकर उनके लिए मध्यस्थ का काम करना ऐसे कई मामले देखने सुनने को मिल रहे हैं ऑडियो वायरल हो रहा है और राजस्व प्रकरण भी सामने आ रहें हैं ,अब ऐसे में देखा जाए तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अविभाजित जिले में काफी बदनाम होता जा रहा है,अब यदि आरोप सही हैं तो यह यह सवाल उठता है की क्या यही है पत्रकारिता का असली धर्म,लोकतंत्र को सजग और सचेत करने वाला स्तंभ लोकतंत्र को ही कमजोर कर रहा है जबकि उसका काम आलोचक सहित एक पथ प्रदर्शक का है। पत्रकारिता का धर्म कतई अवैध अनुचित लाभ लेना नहीं है यह कहना गलत नहीं होगा और यदि कोई इससे जुड़ा ऐसा कर रहा है तो उसे माफ करना उसका पक्ष लेना भी छोड़ना होगा तभी इसकी विश्वशनीयता कायम रह सकेगी।
विधायक स्वेक्षानुदान मामले में लाभार्थी पत्रकारों को रखना चाहिए प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर अपना पक्ष
विधायक स्वेक्षानुदान मद वैसे तो गरीब वंचितों सहित जरूरतमंदों के लिए शासन की सरकार की योजना है जो विधायक के माध्यम से उन्हे प्राप्त होनी तय की गई है सरकार की तरफ से, लेकिन विगत कई वर्षों से अविभाजित कोरिया जिले में देखा गया है की आरोप लगते रहें हैं की स्वेक्षानुदान राशि पत्रकारों को विधायक प्रदान कर रहें हैं और वह भी उनके पत्रकारों के पत्नी पिता पुत्र के नाम से ,कई ऐसे भी भुगतान हुए हैं जो अन्य अन्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक ने अन्य क्षेत्र जिले के पत्रकार को उनके परिजनों के नाम से किए हैं जिनको लेकर पत्रकारों की स्थिति यह है की उन्हे कई बार मुंह छिपाने की जरूरत पड़ती है। मनेंद्रगढ़ शहर में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने जिस तरह स्वेक्षानुदान मामले में एक प्रतिष्ठित टी वी न्यूज चैनल के पत्रकार का नाम लेकर खुलेआम उसकी फजीहत की उसके बाद अब जरूरी हो गया है की इस मामले में सभी पत्रकार एक साथ बैठकर एक प्रेस कांफ्रेंस अपनी आयोजित करें और आम जन मानस को अवगत कराएं की उन्हे उनके विज्ञापन का भुगतान प्राप्त हुआ है स्वेक्षानुदान मद से जो विधायकों ने उनके पत्नी पुत्र पिता के नाम से उन्हे प्रदाय किया है। आम आदमी पार्टी के आरोप के बाद यह बात भी सुनने को मिली की जिस पत्रकार पर आरोप लगे हैं उसे यह राशि उसके विज्ञापन के भुगतान का मिला है जो उसने विधायक के लिए प्रकाशित या प्रसारण कराया है। अब जब पत्रकार को राशि विधायक द्वारा विज्ञापन के भुगतान के एवज में मिली है और भले वह स्वेक्षानुदान मद से मिली है जो विधायक का अधिकार क्षेत्र का विषय है इसमें पत्रकार दोषी नही यह साबित करना जरूरी हो गया है। यदि आज पत्रकार ऐसा साबित नहीं करते हैं तो वह दोषी मान लिए जायेंगे जो उनकी विश्वशनीयता के लिए घातक है उनकी निष्पक्षता के लिए भी घातक है। वैसे स्वेक्षानुदान राशि से कोई भुगतान प्रेस के लिए लेना अनुचित है यह गलत आरोप भी नही है।वह गरीब वंचितों और जरूरतमंदों का हक है और यदि उसमे पत्रकार ही विज्ञापन के नाम पर अपना अधिकार समझने लगेंगे ऐसे में फिर गरीब वंचितों को आवाज उठाने वाला कौन बचेगा जबकि यही जिम्मेदारी पत्रकार ही होती है,अयाना दिखाने वाला ही दोषी साबित होने लगेगा लोकतांत्रिक ढांचा ही ध्वस्त हो जायेगा जो कहा जा सकता है।
नवीन जिले में शासकीय भूमि पर कब्जा मामले में शामिल होने का जिन पत्रकारों पर लग रहा आरोप,उन्हे भी सामने रखना चाहिए अपना पक्ष
नवीन एमसीबी जिले के तीन पत्रकारों पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है की वह शासकीय भूमि जिसकी कीमत काफी ज्यादा है जो संयुक्त जिला कार्यालय के बिलकुल समीप की भूमि है पर वह कब्जा कर चुके हैं,पत्रकारों पर ऐसे आरोप कोई आम विषय नहीं है, इस मामले में संबंधित तीनो पत्रकारों को जिनका भी नाम इस मामले में सामने आ रहा है उन्हे अपना पक्ष जनता के सामने रखना चाहिए।उनका फर्ज है की वह खुद को पाक साफ साबित करें,यदि आरोप सही है तो उन्हे क्या जरूरत आन पड़ी यह भी वह बताएं सार्वजनिक करें,आज अविभाजित कोरिया जिला पत्रकारिता क्षेत्र के बदनामी के दौर से गुजर रहा है चौक चौराहों में पत्रकार की फजीहत माइक लगाकर किया जा रहा है ऐसे में पत्रकारिता समाज के मान सम्मान के लिए उन्हे सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। पत्रकारिता अवैध कब्जा मामला उजागर करने के लिए एक प्रकाशन, प्रसारण माध्यम है,शासन प्रशासन को अवगत कराकर ऐसे मामलो में कार्यवाही हो यह उसका असली धर्म है यदि इस क्षेत्र पेशे से जुड़ा व्यक्ति ऐसा करने लगेगा यह पेशा विश्वशनीयता खो चुका पेशा साबित हो जायेगा जो लोकतंत्र के लिए भी सुखद संदेश नहीं होगा। अवैध कब्जा कहीं हो रहा है उसे हटाने उसके कब्जा मुक्त होने तक कलम चलती रहे यह है पेशे का धर्म खुद कब्जा करना कतई उचित कदम नहीं। वैसे मामल में राजस्व विभाग को भी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है,क्या नवीन जिले में पत्रकार अवैध कब्जा कर रहें हैं क्या मामले में सच्चाई है यदि ऐसा है तो उन पर क्या कार्यवाही हुई या हो रही है यह उसे बताना चाहिए। वैसे क्या अवैध कब्जा मामले में नवीन जिले में सभी को छूट है आम आदमी भी कब्जा कर पट्टा बनवा सकता है यदि पत्रकारों पर लग रहे आरोप सही हैं तो इस बात से भी राजस्व अधिकारियों को सभी को अवगत कराना चाहिए,यह प्रशासन का धर्म है और उसकी जिम्मेदारी क्योंकि गरीबों के कब्जे उसी जिले के अंदर हटाए गए हैं।
कोरिया के एक पत्रकार के वायरल ऑडियो जिसमे उसके द्वारा एक राजस्व अधिकारी के नाम पर वसूली की बात एक अन्य व्यक्ति से की जा रही है
कोरिया जिले में भी एक ऑडियो वायरल हुआ है,वायरल ऑडियो एक पत्रकार की आवाज वाला है जिसमे वह किसी अन्य से एक राजस्व अधिकारी के नाम पर पैसे की मांग कर रहा है किसी काम के एवज में उस मामले में भी उस पत्रकार को अपना पक्ष सभी के सामने रखना चाहिए। क्या ऑडियो में उसी की आवाज है क्या वह सही मायने में एक राजस्व अधिकारी के लिए वसूली कार्य करता है क्या वह मध्यस्थ है राजस्व अधिकारी का और यदि नहीं तो क्या वह ऑडियो फर्जी है यह उस पत्रकार को खुद से सामने आकर सभी को बताना चाहिए। ऑडियो की सच्चाई की पुष्टि घटती घटना नहीं करती लेकिन यह सवाल जरूर है की यदि ऑडियो सही है तो प्रशासन राजस्व विभाग इसकी जांच कराए इसकी सत्यता सामने रखे जिससे प्रशासन सहित राजस्व विभाग की छवि धूमिल न हो वहीं संबंधित पर जिसने ऐसा ऑडियो बनाया है उस पर कठोर कार्यवाही करे यदि वह मिथ्या है बदनाम करने की विभाग को साजिश है वहीं पत्रकार का जिसका इसमें आवाज है जैसा दावा है ऑडियो को लेकर वह समाने आकर इसका खंडन करे यदि यह उसको बदनाम करने की साजिश है।
अविभाजित कोरिया में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ करे बैठकर चिंतन,वरना राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह किया गया है राजनीतिक दलों द्वारा पत्रकारों का बहिष्कार यहां भी वह दिन दूर नहीं
अविभाजित कोरिया जिले में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाने वाला पत्रकारिता समूह बैठकर आपस में चिंतन करे यह जरूरी हो गया है,लगातार जीतने आरोप जिस तरह के आरोप सामने आएं हैं पत्रकारिता जगत के लिए सही नहीं कहे जा सकते। यदि पत्रकारों पर गरीब वांचितो सहित जरूरतमंदों के हक का हनन करने का आरोप लगाया जाता है गरीबों से हांथ जोड़कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के मंच से माइक लगाकर कहा जाता है वहीं पत्रकारों पर जिले के शासकीय जमीन पर कब्जा का आरोप लगाया जाता है साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं वहीं किसी राजस्व अधिकारी का मध्यस्थ बनकर वसूली का ऑडियो जारी होता है जो प्रमाणिक है नहीं है यह स्पष्ट नहीं है तो चिंतन जरूरी है और अपना पक्ष रखना जरूरी है। आज अविभाजित जिले में सभी मामलों के मद्देनजर पत्रकारिता बदनाम हो रही है और निंदा प्रस्ताव पारित कर इससे नहीं बचा जा सकता। स्वेक्षानुदान मामले में पत्रकारों के पुत्र पत्नी पिता सहित अन्य परिजनों का नाम उजागर किया जा रहा है जिसे विज्ञापन का पैसा जनता नहीं मानने वाली वह इसे कलम गिरवी रखना और अपने कर्तव्यों से भागना या उसके एवज में लाभ कमाना ही मानेगी जिसमे अब सच्चाई सामने रखना जरूरी हो गया है। स्वेक्षानुदान मामले में तो परिजनों का भी बाहर निकलना मुहाल है क्योंकि आरोप उन पर भी हैं क्योंकि नाम उनका ही सूची में दर्ज है।


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