बैकुण्ठपुर@बिना अनुमति जल संसाधन की जमीन पर रातो रात चौक स्थापित करने वाले पर कब होगी कार्यवाही?

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  • क्या सत्ता दल के नेताओं को कुछ भी करने का अधिकार मिला हुआ है?
  • क्या नियम विरुद्ध तरीके से चौक स्थापित करने में स्थानीय विधायक की भी भूमिका थी अहम?
  • आम लोगों के लिए कड़े नियम कानून पर क्या सत्ता के करीबियों के लिए कड़े नियम कानून नहीं है?
  • नहर की भूमि पर हुआ अतिक्रमण,सत्ता की हनक में प्रशासन मूक दर्शक,ब्राह्मण समाज ने सौंपा ज्ञापन

बैकुण्ठपुर 16 सितम्बर 2023 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर का राजस्व विभाग सिर्फ अपने हिसाब से चलाने वाले अधिकारियों ने अब एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। नहरों में हो रहे अतिक्रमण के लिए जल संसाधन लेटर लिखता रह गया पर नहर के अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही राजस्व विभाग से अब तक नही हो पाई है। अब उस अतिक्रमण को हटाने के लिए ब्राम्हण समाज ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है परन्तु अब तक कार्यवाही शिफर ही है।
पूरा मामला जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत भांडी का है। जन्हा सिल्फोडा जलाशय की नहर पर रातो रात कुछ असामाजिक तत्वों ने साहू समाज के नाम पर अतिक्रमण कर दिया और प्रशासन चुपचाप बैठकर सहभागिता निभाता रहा। ऐसा नहीं है कि यह अतिक्रमण का पहला मामला है बल्कि पूरी नहर ही अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई है। बकायदा सिल्फोडा नहर के ऊपर पक्की इमारतें बनकर तैयार है और जल संसाधन विभाग के साथ राजस्व विभाग आंख मूंदकर बैठा हुआ है। इस अलग मामले में बात तब शुरू हुई है जब एक पीड़ित व्यक्ति के भूमि के सामने अतिक्रमण किया गया, तब उसने प्रशासन से कार्यवाही की गुहार लगाई लेकिन सत्ता के दबाव में पूरे मामले को स्थानीय प्रशासन ने सिर्फ पत्राचार करके अब तक लटकाए रखा है। सोचनीय विषय यह भी है की भांडी चौक में लगभग 55 प्रतिशत जमीन साहू समाज की है तो ऐसा क्या कारण है कि मात्र 15 प्रतिशत भूमि रखने वाले व्यक्ति की जमीन के सामने ही अतिक्रमण कर मूर्ति लगाई गई?
सिल्फोडा जलाशय की माइनर नहर में एक दर्जन से ज्यादा लोगों का अतिक्रमण
इस सम्बंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार सिल्फोडा जलाशय की माइनर नहर में एक दर्जन से ज्यादा लोगों ने बाकायदा अतिक्रमण कर पक्के माकान बना लिए हैं। इस तरह के अतिक्रमण से पीड़ित एक आवेदक को न्याय दिलाने के लिए ब्राम्हण समाज ने गत 5 सितम्बर को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमे उसने स्पस्ट उल्लेख किया है कि उसकी भूमि के सामने सिल्फोडा नहर की भूमि है जिस पर पक्की दीवार बनाकर अतिक्रमण कर दिया गया है और उसे हटाया जाए। ब्राम्हण समाज के प्रमुख ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि यदि अतिक्रमण करने वालों को समाज का भी समर्थन प्राप्त है तो स्थापित मूर्ति को कंही और विस्थापित कर दिया जाए। परन्तु पूरे मामले में दमदार राजनैतिक हैसियत की दखल देने के कारण पूरा मामला सिर्फ कागजों में उलझाकर रख दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि इस मामले के निराकरण के लिए आवेदन करने वाले कृषक के निवेदन को सही जानते हुए, कलेक्टर कोरिया ने कई बार अपने मातहतों को निर्देशित किया की उक्त अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करें। परन्तु कलेक्टर कोरिया के आदेश और निर्देश की बात सिर्फ निर्देश तक ही सीमित होकर रह गई है। जिन्हें कार्यवाही करनी है वह स्थानीय नेताओं की खुशामद करने के लिए चुपचाप समाजिक सौहार्द बिगड़ने के इंतजार में बैठे हैं। विदित हो कि ज्ञापन में ब्राम्हण समाज ने स्पष्ट लिखा है कि वह आगामी 15 सितम्बर के बाद इस मामले पर उग्र आंदोलन करेगा, जिसकी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी। अब शायद उस दिन का इंतजार करते हुए प्रशासन ने सब कुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
मामले में अब तक क्या हुआ
साहू समाज के आवेदन पर मुख्यमंत्री ने भक्त माता कर्मा चौक के नाम पर 5 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की। इस कार्य के लिए ग्राम पंचायत भांडी को निर्माण एजेंसी बनाया गया सत्ता के रसूखदार लोगों ने स्थानीय विधायक को बुलाकर भूमिपूजन करा दिया, ग्राम पंचायत ने जब भांडी चौक में प्रस्तावित स्थल को नहर की भूमि मद में पाया तो ग्राम पंचायत ने काम प्रारम्भ नही किया और स्थल परिवर्तन के लिए प्रस्ताव पारित किया। उक्त प्रस्ताव सत्ता के एक खास द्वारा जनपद पंचायत में जमा ही नहीं करने दिया गया। इस बीच आवेदन देकर रुद्र मिश्रा ने उपयुक्त स्थल पर चौक बनाने की कार्यवाही करने का अनुरोध प्रशासन से किया। वह आवेदन ठंडे बस्ते में डालकर राजस्व विभाग चुपचाप बैठा रहा।
सत्ता से जुड़े 4 से 6 लोगों ने आधीरात को चौक के नाम पर सिल्फोडा की नहर पर अतिक्रमण कर लिया
सोची समझी साजिश के तहत 5 और 6 जून की दरम्यानी रात को सत्ता से जुड़े 4 से 6 लोगों ने आधीरात को चौक के नाम पर सिल्फोडा की नहर पर अतिक्रमण कर लिया। आवेदक ने रात को ही स्थानीय पुलिस प्रशासन को अवगत कराया परन्तु सत्ता का ऐसा दबाव रहा कि सब खड़े होकर दर्शक बने रहे। कलेक्टर कोरिया के हस्तक्षेप के बाद प्रभारी मंत्री ने 6 जून को उस चौक का उद्घाटन करने से मना कर दिया।  इसी दिन कलेक्टर के निर्देश पर एक राजस्व टीम जांच के लिए भेजी गई जिसने स्पष्ट लिखकर दिया कि सारा निर्माण अतिक्रमण कर बनाया गया है। जब निर्माण पूरा हो गया तो इसके बाद तहसीलदार द्वारा बकायदे स्थगन आदेश जारी कर दिया गया। 
पूरे मामले को उलझाने के लिए तहसीलदार ने जनपद पंचायत के सीईओ और जल संसाधन विभाग को लिखा पत्र
अब पूरे मामले को उलझाने के लिए तहसीलदार ने जनपद पंचायत के सीईओ और जल संसाधन विभाग को पत्र भेजकर रिपोर्ट देने को कहा है 28 जून को जनपद पंचायत के सीईओ ने पत्र लिखकर बता दिया कि ग्राम पंचायत ने यह काम प्रारम्भ नही किया है। 6 जुलाई को जल संसाधन ने अपनी रिपोर्ट देते हुए बताया कि यह सिल्फोडा नहर में अतिक्रमण कर बना दिया गया है कृपया हटायें। लेकिन खबर लिखे जाने तक अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर सका है। 
पूरे मामले में तीन माह बीत चुके
पूरे मामले में तीन माह बीत चुके हैं और ब्राम्हण समाज ने इस अतिक्रमण हटाने के सम्बंध में 5 सितम्बर को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमे कार्यवाही न होने पर आंदोलन की बात कही है। पूरे मामले में राजस्व विभाग की अब तक की कार्यवाही देखकर लगता है कि यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने का ना होकर सत्ता के प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। सूत्रों ने बताया कि सत्ता के निर्देश हैं यदि हमारे आदमियों ने बना दिया है तो फिर क्या सही ओर क्या गलत? क्योंकि ऐसे ही एक मामले में राजनैतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले ठेकेदार संजय अग्रवाल को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था और उसमें जल संसाधन विभाग के साथ पुलिस और प्रशासन ने गजब की फुर्ती दिखाकर कार्यवाही की थी। परन्तु इस मामले में अब तक सब कुछ ठंडे बस्ते में ही है।


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