बैकुण्ठपुर@आखिर नगर पालिका बैकुंठपुर का 1 मत का फैसला कब तक टालते रहेंगे वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष?

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  • नगर पालिका बैकुंठपुर अध्यक्ष पद के लिए बराबरी मुकाबले को न्यायालय में चुनौती दी जा रही है, फैसला बार-बार टलता जा रहा है।
  • यदि वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष को ईमानदारी से जीत मिली है तो फिर घबराहट क्यों,क्यों वह उच्च न्यायालय की शरण में जा बैठे हैं?
  • वहीं कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष के दावेदार जिला न्यायालय में परिणाम को गलत बताते हुए प्रशासन पर आरोप लगाते हुए न्यायालय में चुनौती दे रहे हैं।
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बैकुण्ठपुर 04 सितम्बर 2023 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में कुल दो नगर पालिकाएं हैं और जिनमे से एक है जिला मुख्यालय का नगर पालिका जो आजकल सुर्खियों में हैं और इसकी वजह है नगरपालिका चुनाव जो विगत वर्षों में हुआ था जब बहुमत के बाद भी सत्ताधारी दल सरकार पालिका में नहीं बना पाई थी और पार्षदों के जब मतदान हुए थे तो मामला बराबरी पर आ टिका था और जिसका परिणाम टॉस से हुआ था जिसमे टॉस का परिणाम भाजपा के प्रत्याशी के पक्ष में गया था और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष साथ ही भाजपा नेता की धर्मपत्नी को अध्यक्ष बनने का मौका मिल सका था,जैसा की बताया जा रहा है की उस दौरान अध्यक्ष पद के लिए जो मत कुल डाले गए थे उसमे से एक मत को लेकर यह दावा हार का सामना करने वाले कांग्रेस नेता का है की वह अमान्य साबित किया जाना था और जिसे मान्य किया गया और इसीलिए जीत भाजपा के पक्ष में चला गया था।
अब उस एक मत को निरस्त करने की मांग के साथ मामला न्यायालय में चल रहा है और जिसमे परिणाम क्या आना है क्या सच में कांग्रेस प्रत्याशी का दावा सही है यह न्यायालय का निर्णय आना शेष है। वैसे चुनाव परिणाम आने और अब तक न्यायालय में चल रहे प्रकरण के बीच लगभग दो वर्ष बीतने को हैं और यह भी बताया जा रहा है की इस बीच मतपेटी को खोलकर पुनः गणना करने और सच्चाई सामने लाने के लिए दो बार न्यायालय ने प्रयास किया लेकिन इस बीच भाजपा से नगर पालिका अध्यक्ष ने जिनके चयन पर ही निर्वाचन पर ही कांग्रेस नेता और प्रतिद्वंदी प्रत्याशी ने दावा पेश कर न्यायालय की शरण ली है उच्च न्यायालय की शरण में जा पहुंचे हैं और अब जिला न्यायालय में होने वाले फैसले और मतपेटी में बंद मत की गणना और उसकी स्थिति पर उसकी सच्चाई पर तब तक के लिए रोक लग गई है जब तक की उच्च न्यायालय से आगे कोई दिशानिर्देश प्राप्त न हो जाए। वैसे जिला न्यायालय से फैसल और मतपेटी में बंद मतों की जांच 1 सितंबर 2023 को होनी तय था जो अब कब होगी यह उच्च न्यायालय से मिल सकने वाले निर्णय या दिशा निर्देश के बाद ही तय होगा। वैसे भाजपा से अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने वाली वर्तमान अध्यक्ष उच्च न्यायालय की शरण में क्यों गईं हुईं हैं और यदि उनका चयन निर्वाचन सही है तो वह मत गणना पुनः के लिए क्यों सहमत नहीं हैं यह बड़ा सवाल है।
वर्तमान नगरपालिका अध्यक्ष आखिर क्यों नहीं चाहतीं की अध्यक्ष पद निर्वाचन प्रकिया की मतपेटी पुनः खोली जाए पुनः मतों की गणना हो और वैध अवैध मतों के दावे की सच्चाई सामने आए
पूरे मामले में जिस कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है और जिनका यह आरोप है की हार का कारण एक अवैध मत को वैध साबित करना ही कारण है और जिसको लेकर ही वह न्यायालय की शरण में हैं वहीं निर्वाचित हुई अध्यक्ष यह नहीं चाहतीं की मत पेटी पुनः खोली जाए पुनः मत गणना हो अवैध वैध मत की सच्चाई न्यायालय के माध्यम से समाने आए,वह ऐसा क्यों नहीं चाहतीं हैं यह बड़ा सवाल है,मामले में दो ऐसी तिथि न्यायालय ने तय की थी जिस दिन मत पेटी खोली जानी थी और मतों के वैध अवैध होने की पुष्टि होनी थी उसमे से एक दिन तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी की उपस्थिति को लेकर मतपेटी नहीं खोली जा सकी वहीं दूसरी तिथि जो 1 सितंबर थी उस दिन इसलिए मत पेटी नहीं खोली गई जबकि न्यायालय लाई गई क्योंकि मतपेटी खुलने से पहले ही वर्तमान अध्यक्ष जो उच्च न्यायालय की शरण में जा चूंकि हैं के द्वारा इस आशय का स्थगन लाया जा चुका था की आगामी आदेश पर्यंत तक मतपेटी खोली ही न जाए और जिसका परिणाम यह हुआ की जिला न्यायालय में स्ट्रॉन्ग रूम से लाई गई मतपेटी वापस स्ट्रॉन्ग रूम भेज दी गई और अब उच्च न्यायालय का निर्णय आदेश का इंतजार है इसके बाद ही कोई फैसला आएगा जिसकी संभावना ज्यादा है।वैसे वर्तमान नगरपालिका अध्यक्ष क्यों नहीं चाहती हैं की मतपेटी खोली जाए सच्चाई सामने आए यह बड़ा सवाल है और इससे यह जरूर स्पष्ट है की उन्हे भी कुर्सी जाने का भय जरूर है और निर्वाचन प्रकिया के दौरान हुई गड़बड़ी की उन्हे भी आशंका है।
20 वार्डों में से 11 पार्षद कांग्रेस के चुने गए थे,दो निर्दलीय भी थे कांग्रेस के साथ फिर कैसे बनी नगर पालिका में भाजपा की सरकार यह भी है सवाल
बैकुंठपुर नगरपालिका चुनाव में कुल 20 वार्डों में हुए चुनावों में से 11 वार्ड में सत्ताधारी दल कांग्रेस के पार्षद चुनाव जीतकर आए थे दो निर्दलीय भी कांग्रेस के ही साथ थे उसके बाद अध्यक्ष पद पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया था और उस समय अध्यक्ष पद के लिए हुए पार्षदों के मतदान के दौरान स्थिति बराबरी वाली बनी थी और टॉस से निर्णय हुआ था। अब सवाल यह भी है की आखिर क्यों बहुमत के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी की हार हुई थी,वैसे दो कांग्रेस पार्षदों ने सीधे सीधे बगावत की थी वहीं उसके बाद भी बहुमत निर्दलीय पार्षदों को लेकर सत्ताधारी दल के पास ही थी तो फिर क्यों हर हुई सत्ताधारी दल की यह बड़ा सवाल है। बताया जाता है की इसमें सत्ताधारी दल के आपसी वर्चस्व का मामला मुख्य कारण बना था और जीती हुई बाजी हारकर सभी जिम्मेदारों ने खुद अंदर ही अंदर खुद को बाजीगर साबित कर लिया था।
चुनाव में प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित कराने मंत्री थे जिले में मुख्यालय में मौजूद फिर भी सत्ताधारी दल के प्रत्याशी की हुई थी हार
बैकुंठपुर नगर पालिका में सत्ताधारी दल का अध्यक्ष बन सके इसको लेकर एक मंत्री को चुनाव में प्रभारी बनाकर भेजा गया था और उनके मौजूद रहने के बाद भी पार्टी प्रत्याशी की बहुमत होने के बाद हार हूई थी जो बड़ी बात बड़ी असफलता साबित हुई थी पार्टी के लिए,आपसी गुटबाजी और एक दूसरे को अध्यक्ष मानने से इंकार करने की वजह से ही ऐसा परिणाम आया था और जो हार का या कांटे की टक्कर का मुख्य कारण बना था जिससे इनकार नहीं किया जा सकता,मौजूद मंत्री भी सामंजस्य नहीं बना सके और हार का सामना सत्ताधारी दल के प्रत्याशी को करना पड़ा था।
एक मत को लेकर हारे हुए प्रत्याशी का दावा यदि सही है की वह अमान्य किए जाने लायक मत था ,तब सवाल प्रत्याशी को सत्ता का ही साथ नहीं मिला था
नगर पालिका अध्यक्ष पद चुनाव बैकुंठपुर में अध्यक्ष पद को लेकर हुए चुनाव में बहुमत के बावजूद सत्ताधारी दल के प्रत्याशी की हार हुई थी और यह हार कुल पड़े मतों में से बराबरी की स्थिति बनने पर टॉस प्रकिया में हुई थी,वहीं सत्ताधारी दल के प्रत्याशी जिनकी हार हुई थी उनका आरंभ से ही यह आरोप था की मतगणना में धांधली हुई थी और एक अमान्य मत को भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में जोड़ा गया था जिसके बाद बराबरी की स्थिति बनी थी और टॉस हुआ और उन्हे हार मिली,अब जब सत्ताधारी दल के प्रत्याशी ने आरोप लगाया मतगणना में तब उसे सत्ताधारी दल का साथ क्यों नहीं मिला उसके गड़बड़ी के दावे पर सत्ताधारी दल ने क्यों संज्ञान नहीं लिया यह बड़ा सवाल है क्यों उसे बाद में न्यायालय जाना पड़ा जबकि विधायक के वार्ड से 9 मतों से हारने वाली कांग्रेस पार्षद प्रत्याशी के मतगणना के दौरान कई बार मतगणना हुई। कुल मिलाकर सत्ता का भी साथ सत्ताधारी दल के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को नहीं मिला और अब उसे न्यायालय से न्याय की आस है जिसके लिए वह प्रयासरत है।
कोरोना बीमारी की वजह से एक वर्ष विलंब से हुआ था नगरपालिका चुनाव
बैकुंठपुर नगर पालिका चुनाव वर्ष 2020 में होना था लेकिन कोरोना बीमारी की वजह से यह चुनाव वर्ष 2021 अंत में संपन्न हुआ,इस बीच शहर सरकार में भागीदार बनने इक्षुक लोगों को काफी समय भी मिला और लोगों ने एक वर्ष के दौरान जमकर जनसेवा साबित की। टिकट की आस भले ही वह कांग्रेस से हो जो सत्ता में थी और विपक्ष भाजपा में इक्षुक दावेदार  एक एक वार्ड से कई कई तैयार थे और राजनीतिक दलों को भी टिकट वितरण में दिक्कतों का सामान करना पड़ा था क्योंकि एक वर्ष पूर्व चुनाव होने की घोषणा के बाद एक वर्ष बाद होने जा रहे चुनाव में कई उम्मीदवार दावेदार हर दल से सामने थे जिन्हे मनाने में दलों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी, चुनाव परिणाम वार्डों के हिसाब से सत्ताधारी दल के पक्ष में गया था लेकिन जब अध्यक्ष पद की बारी आई परिणाम में भाजपा बाजी मार ले गई जो सत्ताधारी दल की बड़ी विफलता साबित हुई थी।
विधायक की मनमानी और उनकी पसंद का अध्यक्ष उम्मीदवार न होना भी सत्ताधारी दल के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की हार का कारण बना था,यह भी बात सामने आई थी
पार्षद चुनाव में सत्ताधारी दल को बहुमत मिला था सबसे ज्यादा निर्णायक पार्षद सत्ताधारी दल से चुनकर आए थे और उसके बावजूद सत्ताधारी दल अपना अध्यक्ष नहीं बना सका था जबकि सभी जीते हुए पार्षदों में सामंजस्य बनाने की जिम्मेदारी विधायक को ही मिली थी और उन्होंने बकायदा सभी को साथ लेकर राज्य के कई पर्यटक स्थलों का भ्रमण भी किया था,विधायक की पसंद अध्यक्ष पद के लिए कोई और था और अंत में संगठन की तरफ से किसी अन्य को उम्मीदवार बनाया गया और यही वजह भी बनी सत्ताधारी दल के प्रत्याशी के हार की क्योंकि विधायक के पसंद को दरकिनार किया गया था।


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