बैकुण्ठपुर 01 सितम्बर 2023 (घटती-घटना)। कमिश्नर कार्यालय अंबिकापुर के न्यायालय से सुरेश चंद बदरिया को मिली बड़ी राहत लंबे समय से अपनी जमीन के लिए लड़ रहे थे लड़ाई, तहसील व एसडीएम कार्यालय के निर्णय को दी चुनौती देते हुए कमिश्नर में लगाई थी न्याय की गुहार, जहां से आया उनके पक्ष में फैसला, जिसमें दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ करने की भी बात आई सामने।
सुरेश चंद्र बड़ेरिया बैकुंठपुर निवासी ने बताया की सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर भू-माफियाओं से मिलकर, नियम कानून दरकिनार करते हुए एवं गुण्डा गर्दी से भूमि हड़पने की साजिश सन् 1954-55 से ग्राम खरवत (बैकुण्ठपुर) में भूमि खसरा क्र. पुराना 1223 एवं नया क्रमांक 2102 रकबा 0.190 हे. जोकि स्व. देवीदयाल बडेरिया ने क्रय किया था जोकि सरकारी अभिलेखों में उक्त समय से नाम चढ़ा हुआ है। सुरेश चन्द्र बड़ेरिया के दादा स्व० देवीदयाल ने उक्त भूमि वर्ष 1955 में मंगलसाय रजवार वल्द भिखारी रजवार से क्रय किए थे। उनकी मृत्यु के बाद 1985 से सुरेश चन्द्र बड़ेरिया वगै. के नाम से सरकारी दस्तावेजों में नाम चढ़ा, 1955 के ही दस्तावेजों जो मंगला पनिका वल्द गोल्होई पनिका के रिश्तेदार महादेव पनिका ने सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर, कूटरचित, फर्जी दस्तावेज पेश किया, जिसमें उक्त भूमि मंगला पनिका की मृत्यु के पश्चात् उसकी पत्नी निरासो पनिका के नाम होना बताकर अपील अनुविभागीय अधिकारी के यहां किए कागजों का सूक्ष्म निरीक्षण किए बिना अपने अधिकार क्षेत्र से परे यह जमीन के लिए अलोच्य आदेश पारित कर भूमि दस्तावेजों में सुरेश चन्द्र बड़ेरिया वगै0 का नाम विलोपित करते हुए महादेव पनिका वगैरह का नाम चढ़वा दिया जोकि 70 वर्ष के अभिलेखों में परिवर्तन का अधिकार अनुविभागीय अधिकारी को नहीं हैं। सुरेश चन्द्र बड़ेरिया ने अपील न्यायालय अपर आयुक्त सरगुजा से किया शासकीय दस्तावेजों से एवं नियमानुसार जो तथ्य सामने आए काफी चौंकाने वाले एवं प्रशासन के नियम कानून की कैसे धज्जियाँ उड़ाई गई स्पष्ट है। इस खबर की पुष्टि हम नहीं करते यह खबर पीड़ित की जानकारी पर तयार किया गया है।
संक्षिप्त तथ्या आयुक्त द्वारा
सुरेश चंद्र बड़ेरिया बैकुंठपुर के अनुसार महादेव पनिका वगैरह द्वारा अपना नाम अंकित किए जाने बावत् अधीनस्थ विचारण न्यायालय तहसीलदार बैकुण्ठपुर के समक्ष संहिता की धारा 115 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया जिसे की निरस्त करते हुए लिखा कि, उक्त धारा के अधीन शुद्धिकरण तहसीलदार की स्वप्रेरणा से ही कर सकता है किसी के आवेदन पर नहीं, पटवारी द्वारा प्रस्तुत 1984-85 की नामान्तरण पंजी में सुरेश चन्द्र बड़ेरिया के दादा एवं पिताजी की मृत्यु के बाद सुरेश चन्द्र बड़ेरिया वगै का नाम संशोधन पंजी में दर्ज किया गया, जिससे स्पष्ट है कि 1985 के पूर्व राजस्व दस्तावेज में सुरेश चन्द्र बड़ेरिया के दादा देवीदयाल के नाम दर्ज था। अर्थात् 33 वर्षों बाद अनुविभागीय न्यायालय के समक्ष आवेदन धारा 115 के अधीन प्रस्तुत किया और आधार अभिलेख 1954-55 को बताया यह वही अभिलेख हैं जिसे कूटरचित, कांट छांटकर बनाया गया था और उल्लेख किया गया है कि, विरासतन हक में मंगला की 1964 में मृत्यु होने के कारण निरासो का नाम संशोधित हुआ।
1954-55 के अधिकार अभिलेख में 1964 में मंगला की मृत्यु के पश्चात 1954-55 दस्तावेजों में कैसे संशोधन अंकित किया गया?
विचारणीय प्रश्न यह है कि, 1954-55 के अधिकार अभिलेख में 1964 में मंगला की मृत्यु 1954-55 दस्तावेजों में कैसे संशोधन अंकित किया गया। स्पष्ट है कि, महादेव पनिका वगै० ने कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किया उल्लेखनीय है कि अधिकार अभिलेख के दस्तावेजों में संशोधन अंकित नहीं किया जा सकता। इससे प्रमाणित होता है कि, महादेव पनिका वगै0 द्वारा मूल दस्तावेज में हेराफेरी किया गया है जोकि गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इस तथ्य की ओर अनुविभागीय न्यायालय ध्यान न देकर आलोच्य आदेश पारित किया जो विधि एवं प्रक्रियाओं के विपरीत है।
नियम के विरुद्ध किया कार्य
धारा 114 के अधीन तैयार भू-अभिलेखों में किसी ऐसी प्रविष्टी से व्यथित हो जो धारा 108 में निर्दिष्ट की गई बातों से भिन्न बातों के संबंध में गई है तो ऐसी प्रविष्टि के दिनांक के 01 वर्ष के भीतर उसकी शुद्धिकरण के लिए तहसीलदार को आवेदन करेगा और तहसीलदार जांच करने के पश्चात् जो उचित समझें मामले में अपना आदेश देगा। इसके बावजूद अधीनस्थ न्यायालय (एसडीएम) ने 45 वर्षों से अधिक पुराने दस्तावेजों में सुधार करने का अधिकरिता विहीन आदेश पारित किया है जो निरस्त किए जाने योग्य है। भूमि व्यपवर्तित है तथा सुरेश चन्द्र बड़ेरिया वगै. अपने पूर्वजों के समय से लगभग 60-70 वर्षों से काबिज कास्त होते हुए पूर्ण रूप से स्वत्व अर्जित कर चुके हैं। राजस्व न्यायालय को धारा 115 116 अनुसार राजस्व दस्तावेजों में सुधार करने का क्षेत्राधिकारी एसडीएम न्यायालय को ना होकर व्यवहार न्यायालय को हैं। इसके बावजूद भी राजस्व न्यायालय अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाते हुए आदेश पारित किया। कंवलसाय आत्मज मोहरसाय जोकि महादेव पनिका का सहयोगी के साक्ष्य प्रतिपरीक्षण का भी अध्ययन नहीं किया जिसमें उसने स्वीकार किया कि, बाद भूमि के नामान्तरण होने की जानकारी उन्हें 20 वर्ष पूर्व से थी तथा इस भूमि पर सुरेश चन्द्र बड़ेरिया वगै0 का कई पीढ़ी से कब्जा है। सरगुजा स्टेट सेटलमेंट में वादभूमि मंगलसाय आठ भिखारी रजवार के नाम पर दर्ज है तथा ग्राम – खरवत की जमाबन्दी 1946-47 के खाता क्रं. 129 में मंगलसाय वल्द भिखी रजवार का नाम बतौर भूस्वामी एवं कब्जेदार के रूप में दर्ज हैं। इसी प्रकार 1946-47 की जमाबंदी में महादेव के पूर्वज मंगला आO गल्होई पनिका के नाम पर कुल 04 प्लाट कुल रकबा 2.97 एकड़ भूमि दर्ज है। इसमें बाद प्लाट 1223 नवीन नं. 1102 दर्ज नहीं है जिससे स्पष्ट हैं वाद भूमि खसरा नं० 1223 तथा नया नं. 2102 महादेव पनिका के पूर्वजों की न होकर मंगलसाय आ० भिखारी रजवार के स्वामित्व की भूमि थी जिसे स्व० देवीदयाल बड़ेरिया द्वारा क्रय की गई थी। मंगलसाय रजवार एवं मंगला पनिका एक ही ग्राम एवं नाम समरूप है जबकि दोनों अलग-अलग व्यक्ति है। मंगला उर्फ मंगलसाय, महादेव पनिका द्वारा आवेदित किया जाता था जबकि वादभूमि का मालिक मंगलसाय रजवार है। दोनों अलग-अलग जाति के है मंगला पनिका के पूर्वजों के नहीं है और अपनी पैतृक सम्पत्ति बताते हैं। अपने आपको मंगलसाय रजवार का वारिस बताना गंभीर अपराध है एवं 420 की श्रेणी में आता है। ताO 23.06.23 को अनुविभागीय न्यायालय द्वारा भूमि हस्तक्षेप न करने हेतु महादेव पनिका एवं 01 अन्य से 50-50 हजार का बाण्ड भरवाया गया था जिसका उल्लघंन करते हुए ता० 24.09.23 जेसीबी द्वारा बांउड्री वाल एवं पिलर को तोड़ दिया गया। जोकि जानबूझकर किया गया अपराध है। इसके पूर्व भी महादेव पनिका द्वारा गेट, बिजली मीटर, बोर्ड एंगल, चादर एवं मोटर पंप वहां से चोरी करके ले गये हैं जिसकी शिकायत छरछा थाने में किया गया था किन्तु आज तक न ही कोई कार्यवाही की गई, नहीं चोरी का पता चल सका है।
