संपादकीय@बीजेपी प्रत्याशियों की घोषणा कर रही है और कांग्रेस बी फॉर्म भरा रही है

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कांग्रेस में प्रत्याशियों की बढ़ती संख्या कांग्रेस के लिए ही घातक।
बीजेपी की केंद्रीय कमेटी सीधे जारी कर रही है बिना फॉर्म भरे प्रत्याशियों की सूची।
आखिर बीजेपी कराए गए सर्वे को मानकर तय कर रही है विधायक प्रत्याशियों सूची।
बीजेपी में प्रदेश कमेटी को भी नहीं पता है सूची में किसका नाम होगा तय,जारी होने के बाद उन्हें भी चल रहा पता।

लेखक रवि सिंह– विधानसभा चुनाव सामने है और दोनों राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी 90 के 90 प्रत्याशी छत्तीसगढ़ में जीतने के लिए उतारेंगे जो तय है लेकिन यदि इन दोनों पार्टियों के प्रत्याशी चयन की बात की जाए तो दोनों ही एकदम से अलग है जहां कांग्रेस पार्टी प्रोपेगेंडा तैयार कर बी फॉर्म भरने में जुटी हुई है, जिसकी अंतिम तारीख 22 अगस्त तय की गई है वहीं भारतीय जनता पार्टी ने बिना प्रोपेगेंडा के सीधे 21 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है और आगे भी सूची जारी करेगी, यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा के सारे प्रत्याशियों की सूची तय है सिर्फ बारी-बारी से जारी करना है यह बताया जा रहा है, ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी सही फार्मूले में चल रही है या फिर कॉन्ग्रेस गलत फार्मूला अपनाकर विवाद को जन्म दे रही है, क्योंकि जैसे-जैसे बी फॉर्म भरा  जा रहा है वैसे वैसे कांग्रेस में दावेदारों की संख्या बढ़ रही है माना जा रहा है कि 22 तारीख तक पूरे प्रदेश भर में 500 से ज्यादा प्रत्याशी कांग्रेस के होंगे, जो फॉर्म भरेंगे फिर उसके बाद फॉर्म वापसी कराने का सिलसिला चलेगा तो ऐसे में क्या कांग्रेस अपना समय बर्बाद कर रही है या फिर अंदरूनी कलह को जन्म दे रही है? वहीं भारतीय जनता पार्टी की बात की जाए तो भारतीय जनता पार्टी बिना किसी से पूछे अपने सर्वे के आधार पर प्रत्याशियों की चयन सूची तैयार कर चुका है, 90 के 90 विधानसभाओं में दावेदारों की सांस ऊपर नीचे हो रही है कि किसे मौका मिलेगा और किसे फिर से इंतजार करना पड़ेगा, पहली सूची में भले ही विरोध हो रहा है पर विरोध कितना दिन चलेगा यह पता नहीं, पर बीजेपी रुकेगी नहीं यह भी लोग जान रहे हैं, क्योंकि नाम की घोषणा हो चुकी है अब वापसी मुश्किल है यह हो सकता है कि बीजेपी उन्हें दूसरे तरीके से संतुष्ट करने का प्रयास करें, जो टिकट नहीं पाने पर नाराज होंगे पर इस समय जनता की मानें तो जनता बीजेपी के टिकट चुनने की प्रक्रिया को समर्थन कर रहा है पर वही कांग्रेस की टिकट चुनने की प्रक्रिया को एक प्रोपोगेंडा और विवाद को जन्म देने वाला माना जा रहा है।
एक एक विधानसभा से दर्जनों लोग ले रहे कांग्रेस से दावेदार बनने का फार्म
कांग्रेस में प्रत्याशी चयन के लिए पार्टी ने कुछ नियम बनाए हैं जिसके अनुसार जो भी जिस विधानसभा से दावेदारी करना चाहता है वह उस विधानसभा अंतर्गत आने वाले ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के समक्ष अपनी दावेदारी निश्चित प्रारूप में जमा करेगा वहीं ब्लॉक अध्यक्ष अपने पास आए दावेदारों के कुल आवेदनों में से पांच जिला अध्यक्ष को सौंपेगा,जिलाध्यक्ष सबसे पहले सामंजस्य बनाने का प्रयास करेंगे की एक ही नाम तय हो सके एक विधानसभा से लेकिन यदि आम सहमति नहीं बनी तो जिला अध्यक्ष 3 नाम का पैनल स्क्रीनिंग कमेटी के पास प्रस्तुत करेगा जिसमें से कमेटी एक नाम तय करेगी।वैसे एक एक विधानसभा से दर्जनों दावेदार अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहें हैं और वह खुद को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं जिससे ब्लॉक अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष के लिए भी असमंजस की स्थिति बन रही है क्योंकि वह किसका नाम आगे प्रेषित करेगा और किससे विरोध लेगा।
कांग्रेस में एक दूसरे के समर्थन में भी लोग कर रहे दावेदारी,अपने अपने नेता के नाम पर दावेदार लेंगे नाम वापस
कांग्रेस पार्टी में प्रत्याशी चयन की प्रकिया एक तरह से अपनी वर्चस्व आपसी प्रतिस्पर्धा भी प्रदर्शित करती नजर आ रही है बड़े नेताओं और दावेदारों के बीच,एक एक विधानसभा से कई कई दावेदार दावेदारी कर रहें हैं इनमें से कुछ वर्तमान विधायकों के समर्थक हैं और कुछ अन्य बड़े दावेदारों के समर्थक हैं और जो अंतिम निर्णय से पूर्व नाम वापस लेंगे और किसी न किसी के समर्थन में नाम वापस लेंगे। पूरी प्रक्रिया इस तरह आपसी प्रतिस्पर्धा नजर आ रही है। प्रत्येक बड़ा दावेदार या वर्तमान विधायक यह साबित करेगा अधिक से अधिक दावेदारों का नाम वापस कराकर की उसे ही अधिकतम समर्थन प्राप्त है और इस तरह आपसी विरोध भी पार्टी के अंदर पनपेगा।


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