एमसीबी@डॉक्टर तिवारी को बचाने के लिए पूरा विभाग लगा पर डॉक्टर तिवारी की वजह से जिस व्यक्ति की जान गई उसके लिए कोई क्यों नहीं आ रहा सामने?

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एक व्यक्तिकी दुर्घटना में हुई थी मौत,परिजन घंटो घायल के साथ करते रहे डॉक्टर का इंतजार,डॉक्टर उपल्ब्ध नहीं होने से हुई थी घायल की मौत परिजनों का था आरोप
डॉक्टर तिवारी को बचाने के लिए व्यापारी से लेकर नेता तक लगे,आम आदमी की गई जान के लिए कोई नहीं सामने
एमसीबी जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे,डॉक्टर से मारपीट की घटना का कर रहे विरोध
सीएमओ-बीएमओ दोनो पदों का प्रभार सम्हाल रहे डॉक्टर सुरेश तिवारी के साथ हुई थी विगत दिनों मारपीट,थाने में जाकर बच पाए थे डॉक्टर
बिना इलाज घायल की मौत से परिजन हुए थे अक्रोशित,डॉक्टर के विलंब से आने पर की थी मारपीट
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का था मामला,घायल को अस्पताल लेकर पहुंचे परिजनों ने डॉक्टर को किया था फोन,डॉक्टर पहुंचे थे एक घंटे बाद हुई थी घायल की मौत

-रवि सिंह-
एमसीबी 10 अगस्त 2023 (घटती-घटना)। डॉक्टर के इंतजार में गई युवक की जान के बाद डॉक्टर व उसके पद को बचने की कवायत जारी नेत से लेकर शहर के बड़े व्यवसायीक लगे हुए हैं, तरह-तरह के हाथकंडे अपनाए जा रहे हैं, पर वही जिस युवक की जान गई उसके लिए कोई भी सामने नहीं आ रहा, यह डॉक्टर का मायाजाल है जिसमें लोग प्रभावित हैं, उसकी गलती किसी को दिख नहीं रही, डॉक्टर को आजीवन एक ही जगह पर काम करने की अनुमति सिस्टम ने दे दिया है, सीएमओ से लेकर बीएमओ वही रहे और मनमानी भी उन्हीं की चलें क्या इसकी भी सिस्टम अनुमति दे रखी है? पूरे मामले में डॉक्टर को बचाने नवीन जिले एमसीबी में 10 अगस्त से स्वाथ्य कर्मचारियों और अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आरंभ हो चुकी है। हड़ताल सीएमओ बीएमओ का संयुक्त प्रभार देख रहे डॉक्टर सुरेश तिवारी के साथ विगत दिनों हुई मारपीट को लेकर हो रही है और हड़ताल के पीछे दोषियों पर कार्यवाही साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा मुख्य मुद्दा है।
बता दें की विगत दिनों एक सडक़ दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मौत समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हो गई थी, घायल व्यक्ति के साथ अस्पताल पहुंचे परिजन साथ ही उसको जानने वाले जो बड़ी संख्या में अस्पताल में उस दौरान मौजूद थे उन्होंने घायल व्यक्ति की मौत का जिम्मेदार डॉक्टर को ठहराया और जब डॉक्टर अस्पताल पहुंचे उनके साथ उन्होंने मारपीट कर दी, मारपीट भी दौड़ा दौड़ाकर की गई और डॉक्टर किसी तरह पुलिस थाने में घुसकर जान बचा सके जैसा की बताया जाता है। घायल व्यक्ति के साथ मौजूद परिजनों के अनुसार अस्पताल पहुंचने पर वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था वहीं सीएमओ बीएमओ का प्रभार देख रहे डॉक्टर सुरेश तिवारी को उन्होंने फोन किया तो उन्होंने यह कहकर उन्हे रुकने को कहा की वह अपने निजी क्लीनिक में मरीज देख रहे हैं और मरीज देखकर वह जल्द आ रहे हैं, डॉक्टर इस बीच घंटे भर बाद अस्पताल पहुंचे जहां घायल व्यक्ति की मौत हो चुकी थी इलाज के आभाव में और वहीं उपस्थित परिजन और मृतक के परिचित इससे अक्रोशित हो गए उन्होंने डॉक्टर सुरेश तिवारी के साथ मारपीट कर दी और उनका आरोप था की यदि डॉक्टर समय पर आते घायल की जान बच सकती थी और डॉक्टर निंजी क्लीनिक में मरीज होने के कारण विलंब से पहुंचे और जिसके कारण घायल की मौत हुई। अब पूरी घटना के बाद स्वास्थ्य कर्मी साथ ही अधिकारी विभाग के मामले में कार्यवाही की मांग कर रहें हैं और वह सुरक्षा की भी मांग कर रहे हैं जिसके लिए वह अनिश्चितकालीन आंदोलन में है।
डॉक्टर के साथ मारपीट हुई जो गलत है डॉक्टर की वजह से किसी की जान गई क्या है सही है?
मनेंद्रगढ़ में स्वास्थ्यकर्मी सहित डॉक्टर हड़ताल पर हैं सभी डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना का विरोध कर रहे हैं और जो जायज भी है लेकिन इस मामले का दूसरा पहलू भी है वह यह है की जिस डॉक्टर के साथ मारपीट हुई वह जिले सहित खंड चिकित्सालय का प्रमुख है वहीं वह किस तरह निजी क्लीनिक में ही ज्यादा समय देते हैं यह सर्वविदित है, वहीं उसी डॉक्टर की देरी से आने की वजह से घायल की जान चली गई जो परिजनों का आरोप है। अब मामले में क्या डॉक्टर को सही कहा जा सकता है,क्या डॉक्टर को क्लीन चिट दी जा सकती है जबकि वह समय पर यदि अस्पताल पहुंच गए होते शायद घायल की जान बच गई होती,जबकि वह निजी क्लीनिक में ही एक मरीज का इलाज करने की बात कहकर एक घंटे की देरी से पहुंचे जो लोगों का कहना हैं वहीं यदि वह चाहते दूसरा कोई डॉक्टर पहुंचकर घायल का इलाज कर सकता था जो भी मामले में नहीं हुआ,कुल मिलाकर डॉक्टर की गलती थी और जो प्रथम दृष्टया साबित हुई जिसका आक्रोश डॉक्टर पर फूटा और लोगों ने उनकी पिटाई की,अब किसी की जान डॉक्टर की लापरवाही से गई क्या यह सही है यह भी सवाल है। वैसे अपनी सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों डॉक्टरों की हड़ताल जायज है इसमें कोई संदेह या सवाल उठाया जाए वह गलत है।
डॉक्टर और डॉक्टर के पद दोनों को बचाने का प्रयास जारी
मामले में जो बातें सामने आ रही हैं उसके अनुसार यह हड़ताल सीएमओ और बीएमओ दोनो के पद को बचाने के लिए किया जा रहा है जिन दोनो पदों पर एक ही डॉक्टर काम कर रहें हैं। डॉक्टर का पद बच जाए और वह दोषमुक्त माने जाएं यह पूरा हड़ताल इसी उद्देश्य से आयोजित है। कुल मिलाकर यह प्रायोजित आंदोलन है अपनी गलतियों को छिपाने का।
क्या मामला ठंडा होने के लिए डॉक्टर को भेजा गया था अवकाश पर?
मनेंद्रगढ़ में डॉक्टर के साथ मारपीट होने के बाद डॉक्टर छुट्टी पर चले गए थे अब डॉक्टर छुट्टी से लौट आए हैं और इधर हड़ताल भी शुरू हो गई है,इस मामले में सवाल यह उठता है की क्या डॉक्टर घायल युवक मामले में दोषी ठहराए जा सकते थे क्या इसलिए उन्हें अवकाश पर भेज दिया गया था जिससे मामला ठंडा हो जाए फिर वह वापस आकर अपनी दो दो जिम्मेदारी निभा सकें। सवाल बड़ा है क्योंकि मामले में भाजपा नेता ने भी एक डॉक्टर के पास दो दो प्रभार का विरोध किया था,अब सच्चाई जो हो लेकिन मामले में लगता यही है की डॉक्टर को अवकाश पर भेजने का मतलब ही यही था की मामला ठंडा हो जाए और उनका दोष छिपाया जा सके।
डॉक्टर सुरेश तिवारी निजी क्लीनिक में देते हैं ज्यादा समय,शासकीय सहित शहर ने निजी अन्य अस्पतालों में भी करते हैं सर्जरी शुल्क लेकर यह है सर्वविदित
डॉक्टर सुरेश तिवारी जिनको लेकर यह पूरा मामला सामने है वह शासकीय सेवा में होकर किस तरह निजी लाभ के लिए काम करते हैं यह किसी से छिपा नहीं है, वह अपने निजी क्लीनिक में व्यस्त रहते हैं शुल्क लेकर वह शासकीय अस्पताल में भी इलाज करते हैं सर्जरी करते हैं वहीं वह मरीज को अपने पद का महत्व समझाने शहर के किसी भी निजी चिकित्सालय में खुद सर्जरी करने की सलाह देकर भेजते हैं और वहां भी वह अपना शुल्क लेकर मरीज का इलाज करते हैं। कुल मिलाकर वह शासकीय स्वास्थ्य विभाग प्रमुख होने का पूरा दबदबा अन्य अस्पतालों पर भी बनाए हुए हैं और अपने पास आने वाले मरीज को विल्कप के तौर पर किसी भी जगह जाने की छूट देते हैं और वहां जाकर वह सर्जरी खुद करते हैं शुल्क लेते हैं। गरीबों के लिए शासकीय अस्पताल उनके रहते किसी निजी अस्पताल से कम नहीं है,उनकी अस्पताल में भी ऐसी धमक है की उनका विरोध करने किसी की हिम्मत नही है


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