- क्या शराब में मिलावट अधिकारियों के सह पर हो रहा,अधिकारी अपनी जेब भरने के लिए शासन को भी पहुंचा रहे नुकसान?
- समय रहते शराब घोटाला की नहीं हुई जांच तो पानी मिलाकर हो जाएगा वारा-न्यारा
- आखिर आबकारी विभाग क्यों नहीं कराना चाह रहा मामले की जांच?
- सर्किल इंस्पेक्टर ने 80 लाख की शराब की कमी बता कर सभी शराब दुकानों से वसूले लाखों:सूत्र
- शराब दुकान की बिक्री देखने वाले को कहा शराब में पानी मिलाकर पैसे को ऑडिट से पहले करो मेकअप
- शराब में जो मिलाना मिलाओ पदाधिकारी विभाग के अधिकारियों को महीने लाखों दो,ऐसा है विभाग का मौखिक आदेश?
- प्रतिदिन की बिक्री में से आधी बिक्री होती है पानी की,आधी शराब की,इस तरह सरकारी राजस्व को भी लगाया जा रहा चुना
- शराब पीने वालों के स्वास्थ्य से भी हो रहा खिलवाड़,मिलावटी शराब से हो सकती है कभी भी कोई दुर्घटना

-रवि सिंह-
एमसीबी/कोरिया 21 जुलाई 2023 (घटती-घटना)। अविभाजित कोरिया जिले में एक बड़े शराब घोटाले की बात पिछले दिनों सामने आई थी और जिसकी खबर भी प्रकाशित की गई थी जिसके अनुसार और प्राप्त जानकारी के अनुसार अविभाजित जिले के एक शराब दुकान से लाखों का शराब घोटाला हुआ है ऐसी सूचना मिली थी और यह घोटाला 80 से 86 लाख का था जैसा कि सूत्रों का कहना था, लाखों का घोटाला एक ही शराब दुकान से किया गया है और अब उस घोटाले को छिपाने का प्रयास आबकारी विभाग और उसके अधिकारी कर रहें हैं, यह भी बात सामने आई थी।
जानकारी के अनुसार एक दुकान से लाखों का शराब घोटाला हुआ उस दुकान पर कार्यवाही करने की बजाए आबकारी विभाग घोटाले को छिपाने के प्रयास में लगा हुआ है और इसकी जिम्मेदारी उसने सभी दुकानों को जिलेभर के को दे रखी है जिनसे उगाही कर एक दुकान के घोटाले को छिपाया जा रहा है और इस तरह एक बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है। मिली सूचना के अनुसार अभी भी कोरिया जिले और एमसीबी नवीन जिले का आबकारी विभाग एक ही जिले से संचालित है और जिसका मुख्यालय बैकुंठपुर में ही स्थित है वहीं इसी विभाग और कार्यालय के अंतर्गत चिरमिरी की एक शराब दुकान में लाखों का शराब घोटाला हुआ है और अब उस घोटाले को आबकारी विभाग ही छिपाने में लगा हुआ है और वह अब अविभाजित जिले की सभी शराब दुकानों से वसूली कर उस घोटाले को छिपाने में लगा हुआ है जिससे विभाग की छवि धूमिल होने से बचाई जा सके।
मामले को रफा-दफा करने का प्रयास जोरो पर
प्राप्त सूचना अनुसार अविभाजित जिले की सभी शराब दुकानों को यह निर्देश मौखिक दिया गया है की वह निश्चित राशि अविलंब आबकारी विभाग के सर्किल इंस्पेक्टर के पास जमा करें जिससे यह घोटाला और घोटाले जी राशि जमा की जा सके और जल्द से जल्द इस मामले को रफा दफा किया जा सके। सूचना अनुसार यह वसूली प्रत्येक दुकानों से कर भी ली गई है और अब सभी शराब दुकान संचालकों को यह भी निर्देशित कर दिया गया है की जितनी राशि उन्होंने घोटाला छिपाने के लिए सर्किल इंस्पेक्टर के पास जमा की है उतनी राशि की भरपाई के लिए वह शराब में पानी मिलाएं या अन्य जो कुछ भी मिलाएं सभी अगली ऑडिट तक इस राशि की भरपाई मिलावट कर जरूर कर लें जिससे पोल न खुले। पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है की जब इतना बड़ा भ्रष्टाचार और घोटाला हुआ है और शराब में मिलावट का खेल पहले से ही जारी है ऐसे में विभाग मामले में जांच कर कार्यवाही करने की बजाए मामले को दबाना क्यों चाहता है और क्यों वह सभी शराब दुकानों से राशि वसूल कर एक दुकान के घोटाले को भरने का प्रयास कर रहा है और दुकानों को आगे मिलावट कर अपनी भरपाई का मौखिक आदेश जारी किया हुआ है।
एक दुकान के घोटाले को भरेंगे सभी शराब दुकान संचालक,आगे होगी शराब में और अधिक मिलावट
जिले में एक शराब दुकान में हुए घोटाले को अब सभी दुकान मिलकर भरने वाले हैं और इस तरह वह घोटाले को छिपाने का प्रयास करेंगे वहीं इस भरपाई के बदले सभी शराब दुकानों को शराब में मिलावट की छूट मिलेगी और इस तरह वह भरपाई की रकम की वसूली करेंगे। कुल मिलाकर आबकारी विभाग मामले में शराब प्रेमियों की जान का दुश्मन बनने भी तैयार है वहीं वह जांच कर दोषी पर कार्यवाही नहीं करना चाहता। मामले में आबकारी विभाग किसी तरह घोटाले की राशि की वसूली चाहता है और इसके लिए भले ही शराब प्रेमियों की जान पर ही क्यों न बात आ जाए वह इससे भी पीछे हटने तैयार नहीं है और वह सभी शराब दुकानों को मिलावट का आदेश जारी कर चुका है जो सूत्रों का ही कहना है।
सर्किल इंस्पेक्टर के पास जमा हुई जिलेभर के शराब दुकानों से वसूली की गई राशि
बताया जा रहा है की घोटाले को दबाने और छिपाने विभाग एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है और वह सभी शराब दुकानों से राशि वसूलने में लगा हुआ है, बताया यह भी जा रहा है की सभी दुकानों से राशि इकट्ठी भी हो चुकी है जो सर्किल इंस्पेक्टर के पास जमा हुई है,वहीं वसूली राशि से एक दुकान के घोटाले की राशि की भरपाई हुई की नहीं यह सूचना अभी मिलना शेष है। सर्किल इंस्पेक्टर सहित मामले में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी संलिप्त हैं और सभी की स्वीकृति से यह वसूली हो रही है ऐसी सूचना है। सर्किल इंस्पेक्टर राशि वसूली कर एक दुकान के घोटाले को भरने वाले हैं।
समय रहते नहीं हुई जांच तो सफल हो जायेगा भ्रष्टाचार का यह बड़ा खेल,शराब में बड़े स्तर पर मिलावट को भी मिलेगी हरी झंडी
पूरे मामले में यदि समय रहते जांच नहीं हुई थी घोटाले का और भ्रष्टाचार का यह बड़ा खेल पूरी तरह सफलता प्राप्त कर लेगा वहीं जिलेभर की शराब दुकानों को आगे आने वाले समय में बड़े स्तर पर शराब में मिलावट का एक तरह से ग्रीन सिग्नल मिल जायेगा जो आबकारी विभाग की तरफ से मिलेगा जो शराब प्रेमियों के लिए अच्छी खबर नहीं है। एक तरफ शराब में मिलावट होगी वहीं शराब प्रेमियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ होगा। अब देखना है की मामले में वरिष्ठ अधिकारी ध्यान देते हैं की नहीं वही जिले के मुखिया खासकर दोनो जिले के जिलाधीश मामले में संज्ञान लेते हैं की नहीं यह भी देखने वाली बात है क्योंकि मामला दोनो जिले के शराब दुकानों से जुड़ा हुआ है।
रिकॉर्ड में सफेदा चलाकर होता रहा ऑडिट,इसलिए नही आया घोटाला का मामला पहले सामने,सूत्र
सूत्रों की माने तो प्रतिमाह होने वाला ऑडिट रिकॉर्ड में सफेदा चलाकर होता रहा और इसलिए मामला पहले सामने नहीं आया और बड़ा घोटाला संभव हो गया,पूरे मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है जिन्होंने ऑडिट में सफेदा का प्रयोग वर्जित नहीं होने दिया और कुछ पैसों के लालच में उन्होंने इस घोटाले की कहानी लिखने में दुकानदार की मदद की। कुलमिलाकर घोटाला जो सामने आया है जो छिपाया जा रहा है वह लगातार जारी था और यदि जांच हो तो अन्य दुकानों से भी ऐसे मामले सामने आएंगे जो घोटाले की सीमा को बढ़ाते हुए नजर आएंगे।
मिलावट के लिए भी होती है दुकानों से प्रतिदिन के हिसाब से आबकारी विभाग की तरफ से वसूली
बताया जाता है की शराब में मिलावट के लिए आबकारी विभाग की ही सहमति है,आबकारी विभाग प्रतिदिन के हिसाब से प्रति दुकान वसूली करता है और इस आधार पर दुकानों को मिलावट का अधिकार होता है। मिलावट की खबरें वैसे भी सामने आती रहती हैं और प्रायः सुना और देखा जाता है की शराब दुकान पर शराब नहीं चढ़ने के नाम पर शराब दुकान संचालक और मदिरा प्रेमियों के बीच हुज्जत होती रहती है,लेकिन इसको लेकर विभाग मौन इसलिए बना रहता है क्योंकि मामला अर्थलाभ और अतिरिक्त आय से जुड़ा हुआ है।
सरकार को भी राजस्व में लगा रहे शराब दुकान संचालक और आबकारी विभाग मिलकर चुना
शराब दुकान संचालक और आबकारी विभाग की मिलीभगत से शराब में मिलावट की बात नई नहीं है यह अब सर्व स्वीकार्य बात हो चुकी है और इस ओर किसी का ध्यान भी नहीं जिसकी जिम्मेदारी है क्योंकि मामला अर्थलाभ से जुड़ा हुआ है,शराब में मिलावट कर एक तरफ जहां शराब दुकान संचालक मदिरा प्रेमियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहें हैं तो वहीं वह सरकार को भी राजस्व में चुना लगा रहें हैं,एक दिन में एक दुकान की कुल बिक्री में से आधी बिक्री मिलावट और पानी की बिक्री हो रही है इस तरह देखा जाए तो कुल बिक्री जो सरकार को राजस्व के तौर पर मिलनी चाहिए उसमे से आधी बिक्री पानी और मिलावट की बिक्री होने के कारण वह आबकारी विभाग के अधिकारियों के और दुकान संचालकों की जेबों में जा रहा है और इस तरह सरकार को भी प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है।