एमसीबी/खड़गवां@फिर फूटा पटाखा…कलेक्टर,जिला शिक्षा अधिकारी के बाद अब संयुक्त कलेक्टर नयनतारा सिंह के जाने पर फूटे पटाखे…

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  • खड़गवां में प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसी मनेंद्रगढ़ विधायक के समर्थक, एसडीएम भरतपुर सोनहत विधायक की खास,मामले में विधायकों की आपसी तकरार भी प्रदर्शन की वजह सूत्र
  • एसडीएम का हुआ तबादला,कांग्रेसियों ने फोड़े पटाखे,गंगाजल से कार्यालय पवित्र करने का भी कांग्रेसियों ने किया प्रयास
  • संयुक्त कलेक्टर पर भ्रष्टाचार का लगाया कांग्रेसियों ने आरोप,इसीलिए कार्यालय शुद्ध करने गंगाजल लेकर पहुंचे थे कांग्रेसी
  • पहले कलेक्टर फिर जिला शिक्षा अधिकारी अब एसडीएम अविभाजित कोरिया जिले में अधिकारियों के तबादले पर कांग्रेसियों में बढ़ गया है पटाखा फोड़ने का चलन
  • पूर्व में कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी के तबादले पर भी फुट चुके हैं पटाखे
  • क्या अपनी ही सरकार में अधिकारियों से संतुष्ट नहीं हैं जिले के कांग्रेसी?
  • जब सत्ताधारी दल के नेता ही अधिकारियों पर लगा रहे भ्रष्टाचार का आरोप ऐसे में आम आदमी का क्या होगा हाल,समझने वाली बात
  • एसडीएम खड़गवां का पूर्व में भी जिले से बाहर हुआ था तबादला,तबादला तब रूकवाने में हुई थी सफल
  • एसडीएम खड़गवां को विधायक भरतपुर सोनहत का माना जाता है खास,इसलिए भी पूर्व में हुआ तबादला हुआ था निरस्त,सूत्र
  • पूर्व कलेक्टर के स्थानांतरण पर पटाखे फोड़ना और अब एसडीएम के स्थानांतरण पर गंगाजल से कार्यालय पवित्र करना क्या कांग्रेसियों के लिए उचित?

-रवि सिंह-
एमसीबी/खड़गवां,19 जुलाई 2023 (घटती-घटना)। कोरिया जिले से अलग होकर नवीन जिला एमसीबी अभी हाल में ही अस्तित्व में आया है और अभी भी कई विभाग ऐसे हैं जो संयुक्त रूप से अविभाजित कोरिया जिले के लिए काम कर रहें हैं और ऐसे में अभी पूर्ण विभाजन हुआ है ऐसा कहना जल्दबाजी होगा। अविभाजित कोरिया जिले में विगत साढ़े चार वर्षों से दौरान कांग्रेसियों की और शासकीय अधिकारियों की आपसी सामंजस्य में कभी तालमेल नहीं देखा गया है और सत्ता में होने के बाद भी कांग्रेसियों को ही शासकीय अधिकारियों का विरोध करते देखा गया है, जो अविभाजित जिले में आम सी बात के रूप में लगातार नजर आया और यह भी बात इस मामले में समझ में आई की अधिकारियों की मनमानी ऐसी रही की कांग्रेसियों को ही अपनी ही सरकार में विपक्ष की भूमिका का निर्वाहन करना पड़ा और अधिकारियों का विरोध करने उन्हें सामने आना पड़ा,अविभाजित कोरिया जिले के एक कलेक्टर के तबादले पर जिला मुख्यालय में कांग्रेसियों ने ही पटाखे फोड़े थे और कलेक्टर के तबादले पर जश्न मनाया था और ऐसा उन्होंने ने इसलिए किया था क्योंकि कलेक्टर कांग्रेसियों की सुनते नहीं थे और अपनी मनमानी करते थे, कलेक्टर के तबादले पर पटाखा फोड़ने पर तब कांग्रेसियों की काफी फजीहत भी हुई थी और कइयों को जिनका नाम इस मामले में सामने आया था उन्हें पुलिस थाने भी तलब किया गया था और पूछताछ भी हुई थी।
उस समय यह माना गया था की कांग्रेसी अपनी ही सरकार में अधिकारियों से परेशान हैं और उनकी अधिकारी नहीं सुनते इसलिए ऐसे पटाखे फोड़ने वाली घटना हो रही है, पटाखा फोड़ने की घटना ही केवल ऐसा उदाहरण नहीं था जो कांग्रेसियों और शासकीय अधिकारियों के बीच की दूरी बयान करने वाला उदाहरण था, ऐसे कई और मामले सामने आते रहे जो यह साबित करते रहे की अधिकारी किस तरह इस सरकार में निरंकुश हो चुके हैं जो सत्ताधारी दल के नेताओं के ही दबाव में नहीं हैं और ऐसे में आम लोगों का वही अधिकारी क्या हाल करते होंगे समझा जा सकता है, खनिज विभाग को लेकर और उसकी कारस्तानियो को लेकर कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओ ने कई बार उस समय आंदोलन की भी चेतावनी दी जब खनिज विभाग रेत ठेकेदार के साथ मिलकर आम लोगों को परेशान करने में जुटा हुआ था जिसे भी जिले के लोगों ने देखा और माना की सत्ता में रहकर भी कांग्रेसी आम लोगों की रक्षा उन अधिकारियों से नहीं कर पा रहें हैं जो मनमानी कर रहें हैं और निरंकुश हो चुके हैं।
कांग्रेसी ही अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं और पटाखे फोड़ रहे
अब ताजा मामला नवीन गठित जिले एमसीबी का भी सामने है और सरकार के कार्यकाल का आखिरी समय चल रहा है और कांग्रेसी ही अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं और पटाखे फोड़ रहे हैं और साथ ही वह कार्यालय को गंगाजल से शुद्ध करने की बात कर रहें हैं जिस कार्यालय में उक्त अधिकारी एसडीएम बैठा करती थीं। अब सोचने वाली बात यह है की क्या अविभाजित कोरिया जिले में अधिकारियों की मनमानी पूरे कांग्रेस सत्ता के कार्यकाल के दौरान जारी रही,कांग्रेसियों का पूरे कार्यकाल के दौरान जारी विरोध प्रदर्शन तो यही साबित करता है की सत्ता में पंद्रह साल बाद वापसी करने वाली कांग्रेस अधिकारियों की निरंकुशता पर लगाम लगा पाने में असफल रही और यह खुद कांग्रेसी ही साबित कर रहें हैं। पिछले साढ़े चार सालों के कार्यकाल में कांग्रेस के भ्रष्टाचार की बातें वैसे तो हर कार्यालय शासकीय से सामने आई,अवैध कारोबार में पुलिस विभाग की भी संलिप्तता सामने आई लेकिन राजस्व विभाग भ्रष्टाचार में अव्वल बना रहा यह जरूर देखने को मिला जिसमे कई अधिकारियों पर कार्यवाही भी हुई कई कर्मचारियों पर भी गाज गिरी लेकिन भ्रष्टाचार रुका नहीं बल्कि बढ़कर सामने आया और लोग परेशान ही रहे। अब कांग्रेसी जब गंगाजल से भ्रष्टाचार दूर करने और उसकी सफाई करने निकले हैं देखना है की गंगाजल क्या असर दिखाता है और क्या भ्रष्टाचार मुक्त जिला वह बना पाते हैं।
गंगाजल लेकर एसडीएम कार्यालय शुद्ध करने पहुंचे कांग्रेसियों में से एक के पिता पर ही भ्रष्टाचार का आरोप,मामला फिलहाल जांच में
खड़गवां एसडीएम कार्यालय में गंगाजल लेकर कार्यालय को शुद्ध करने पहुंचे कांग्रेस नेताओं में से एक नेता ऐसा भी उसमे शामिल था जिसके पिता के ऊपर ही भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगा हुआ है, मामला भी छोटा मोटा नहीं है आदिवासी छात्र छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं में सेंध लगाकर अपनी जेब भरने का मामला है,मामला फिलहाल जांच में है। बता दें की खड़गवां में विकासखंड शिक्षा अधिकारी रहते हुए उक्त कांग्रेसी नेता के पिता ने एकलव्य आदिवासी विद्यालय के प्राचार्य का भी पदभार सम्हाला और आदिवासी छात्र छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं को अपने लाभ के लिए उनसे दूर रखा और जमकर भ्रष्टाचार किया। कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान जब विद्यालय बंद थे तब भी खरीदी की गई और भ्रष्टाचार किया गया और समझा जा सकता है की किस तरह छात्र छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं को खुद की जेब भरने में उपयोग किया गया। अब उनके ही पुत्र गंगाजल लेकर भ्रष्टाचार मिटाने की बात करने निकले हैं जबकि उन्हीं के पिता पर भ्रष्टाचार की जांच जारी है और को प्रथम दृष्टया साथ ही प्रारंभिक जांच में सही भी साबित हो चुकी है। कांग्रेसी नेता जिनके पिता पर भ्रष्टाचार का आरोप है क्या वह अपने पिता के भ्रष्टाचार मामले में भी गंगाजल लेकर शुद्धिकरण की बात करेंगे क्या वह अपने पिता पर कार्यवाही चाहेंगे यह भी बड़ा सवाल है।
राजस्व सहित पुलिस एवं आबकारी विभाग के भ्रष्टाचार को कब उजागर करेंगे कांग्रेसी?
जिले के कांग्रेसी भ्रष्टाचार की बात कर रहें हैं और भ्रष्टाचार की बात भी वह केवल राजस्व विभाग की ही कर रहें हैं जबकि प्रत्येक शासकीय कार्यालय में भ्रष्टाचार जारी है, कांग्रेसियों को पुलिस सहित आबकारी विभाग का भ्रष्टाचार क्यों नहीं दिखाई दे रहा यह भी सवाल है। जिले में अवैध कारोबार जमकर हो रहा है शराब में मिलावट का खेल जारी है चिरमिरी की एक शराब दुकान में करोड़ों का शराब घोटाला हुआ है लेकिन कांग्रेसियों को यह भी भ्रष्टाचार अभी तक नजर नहीं आया है। जिले के इन शासकीय विभागों का भी भ्रष्टाचार कांग्रेसियों को उजागर करना चाहिए। अब देखना है की क्या कांग्रेसी पुलिस और आबकारी विभाग को भी भ्रष्टाचार मामले में घेरते हैं क्या अवैध कारोबार और मिलावटी शराब मामले में वह आंदोलन करते हैं क्या यहां भी वह गंगाजल लेकर शुद्धता की बात करते हैं?
पटाखे फोड़कर एस डी एम के तबादले पर किया खुशी का इजहार,क्या कांग्रेसियों पर होगी कार्यवाही
एसडीएम के तबादले पर जिले के कांग्रेसियों ने पटाखे फोड़कर खुसी का इजहार किया है,क्या अब उन पर कानूनी कार्यवाही होगी,ऐसा ही जब कलेक्टर के तबादले पर किया गया था तब कांग्रेसियों की पुलिस थाने में परेड हुई थी।अब देखना है की क्या जिले के मुखिया मामले में यह मान लेते हैं की एस डी एम भ्रष्टाचार में लिप्त थीं और पटाखा फोड़ना सही था यह वह इस कृत्य के लिए कांग्रेसियों पर कार्यवाही की अनुशंसा करते हैं और विभाग की साख बचाने का प्रयास करते हैं।
क्या गंगाजल से कार्यालय होगा शुद्ध,क्या नहीं होगा आगे भ्रष्टाचार?
जिले के कांग्रेसियों ने खड़गवां एस डी एम कार्यालय को गंगाजल से शुद्ध करने का प्रयास किया है,कांग्रेसियों ने एस डी एम के तबादले के बाद यह निर्णय लिया है और एस डी एम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कार्यालय इसलिए शुद्ध करने की बात उन्होंने की है की कार्यालय में भ्रष्टाचार होता था,अब क्या गंगाजल से कार्यालय शुद्ध करने के बाद आगे से कार्यालय में भ्रष्टाचार नहीं होगा यह बड़ा सवाल है। क्या अब आने वाले नए अधिकारी इस बात को भी गंगाजल की शपथ लेकर निभायेंगे की आने वाले समय में कार्यालय में भ्रष्टाचार नहीं होगा यह देखने वाली बात होगी।
एसडीएम भरतपुर सोनहत विधायक की थीं करीबी,विरोध करने वाले कांग्रेसी मनेद्रगढ़ विधायक के करीबी,क्या विरोध विधायकों का आपसी टकराव?
जिस एस डी एम के तबादले पर कांग्रेसी नेताओं ने पटाखे फोड़े हैं वह भरतपुर सोनहत विधायक की करीबी थीं और उन्हें विधायक का खास माना जाता था वहीं जिन कांग्रेसियों ने एसडीएम के तबादले पटाखे फोड़े हैं और गंगाजल से कार्यालय शुद्ध करने का प्रयास किया है वह मनेंद्रगढ़ विधायक के समर्थक हैं और उनके खास हैं,पूरे मामले में यह भी सवाल उठ रहा है की क्या मामला दो विधायकों के आपसी टकराव का है।क्या दोनो विधायक एस डी एम के मामले में आमने सामने हैं। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है की जबतक एस डी एम मनेद्रगढ विधायक के क्षेत्र से दूर थीं और जिले में ही पदस्थ थीं उनका विरोध नहीं हुआ और जैसे ही मनेंद्रगढ़ विधायक के क्षेत्र में वह पहुंची उनका विरोध होने लगा।
एसडीएम का पहले भी हुआ था तबादला,उस समय तबादला हुआ था निरस्त
एस डी एम जिनके तबादले पर कांग्रेसी जश्न मना रहें हैं उनका पूर्व में भी तबादला हो चुका था और उस समय तबादला निरस्त हुआ था और माना जाता है की एक विधायक ने उस समय तबादला निरस्त कराने में अधिकारी की मदद की थी,उस समय अधिकारी का तबादला गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में हुआ था और जिसे निरस्त करते हुए उन्हें जिले में ही रखा गया था।


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