अंबिकापुर/बैकुण्ठपुर@घटती-घटना की खबर का हुआ असर…सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा की गई पदोन्नति पदस्थापना में गड़बड़ी की कमिश्नर करेंगे जांच

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  • काउंसलिंग में उन पदों को छिपाया गया जिनको लेकर हो चुका था लेनदेन,सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय में हुआ कई करोड़ों का खेल\
  • घटती-घटना ने पदोन्नति पदस्थापना में गड़बड़ी की खबर को किया था लगतार प्रकाशित
  • पदोन्नति पदस्थापना में संशोधन के नाम पर सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय में हुआ है शिक्षकों से करोड़ों का लेनदेन
  • वरिष्ठ की जगह कनिष्ठ को मिली मनचाही पदस्थापना,वरिष्ठ ने भ्रष्टाचार की वजह से छोड़ी पदोन्नति


-रवि सिंह-
अंबिकापुर/बैकुण्ठपुर,16 जुलाई 2023 (घटती-घटना)। भ्रष्टाचार का बड़ा मामला जो शिक्षा विभाग से जुड़ा हुआ है और जिसको लेकर घटती-घटना ने लगतार प्रमुखता से खबर का प्रकाशन किया था की किस तरह शिक्षा की ज्योति जला रहे, शिक्षकों से ही करोड़ों रुपए लिए गए उन्हे मनचाही पदस्थापना देने के लिए और इसके लिए प्रथम पात्र शिक्षक ने भ्रष्टाचार की वजह से पदोन्नति लेना ही छोड़ दिया और लेनदेन कर अपात्र या कनिष्ठ ने दूसरे शिक्षक का हक ले लिया और इस तरह करोड़ों का खेल खेला गया और पूरे मामले को पारदर्शी बताकर भ्रष्टाचार को छिपाया गया। सरगुजा संयुक्त शिक्षा कार्यालय में जिन शिक्षकों ने भ्रष्टाचार की बात जाकर बतानी चाही उन्हे धमकाया गया और कुछ को निलंबित भी किया गया जिससे भय का वातावरण शिक्षकों के बीच बन सके और भ्रष्टाचार को अमली जामा पहनाने में संयुक्त संचालक शिक्षा को कई परेशानी का सामना न करना पड़े। अब भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले में जिसमे केवल सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय द्वारा करोड़ों का लेनदेन किया गया है शिक्षकों से उसकी जांच स्कूल शिक्षा विभाग कराने जा रहा है और जांच के बाद कार्यवाही की बात विभाग कर रहा है।
जांच प्रदेश के पांचों संभाग में होने जा रहें हैं और जांच की जिम्मेदारी कमिश्नर राजस्व समस्त संभाग छत्तीसगढ़ को सकूल शिक्षा विभाग ने दिया है और अब पांचों कमिश्नर अपने अपने संभाग में हुए शिक्षक पदोन्नति पदस्थापना मामले के भ्रष्टाचार की जांच करेंगे और वह यह भी देखेंगे की किस तरह पदस्थापना के बाद संशोधन किया गया और संशोधन के नाम पर पैसों का लेनदेन किया गया। संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा ने मामले में आपत्ति दर्ज करने वाले शिक्षकों को किस तरह धमकाया और कैसे उन्हे निलंबित कर उन्हे भयभीत किया जिससे वह शिकायत भ्रष्टाचार की वापस लें और जिससे भ्रष्टाचार का वह अपना खेल खेले सकें। सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय में भ्रष्टाचार का खेल जो खेला गया उसके मुख्य रूप से दो लोग प्रमुख रहे जैसा सूत्रों का कहना है और उनमें एक कार्यालय प्रमुख हैं और दूसरा कार्यालय के ही एक अन्य जो प्रमुख के सबसे खास हैं। अब देखना है की सरगुजा कमिश्नर राजस्व जांच में क्या करते हैं और किस तरह वह भ्रष्टाचार के इस पूरे मामले को उजागर कर शिक्षा विभाग को अवगत कराते हैं।
भ्रष्टाचार को उजागर करने आपत्ति दर्ज करने पहुंचे शिक्षकों को संयुक्त संचालक सरगुजा ने किया था निलंबित, भय बनाने की थी कार्यवाही
सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किया जा रहा है और दोषपूर्ण पदस्थापना की जा रही है इसकी जानकारी सबसे पहले पदोन्नति हेतु पात्र उन शिक्षकों को लगी जो वरिष्ठता सूची में वरिष्ठ थे साथ ही जिनका काउंसलिंग उन शिक्षकों से पहले होना था, जो वरिष्ठता सूची में कनिष्ठ थे और जिन्हे मनचाही पदस्थापना मिल चुकी थी और वरिष्ठ को काउंसलिंग में वे रिक्त पद नहीं दिखाए गए जो नियम से पहले वरिष्ठ को दिखाए जाने थे। शिकायत लेकर पहुंचे शिक्षकों को संयुक्त संचालक शिक्षा ने पहले तो काफी भयभीत किया भय दिखाकर कार्यवाही का उन्हे आतंकित किया और बाद में उनमें से कुछ को निलंबित किया और पूरी तरह शिखको के बीच एक भय का माहौल बनाया जिससे वह आगे शिकायत करने न पहुंचे और भ्रष्टाचार का मामला दब सके।
शिक्षकों की शिकायत अक्षरशः सही साबित हुई,संयुक्त संचालक ने जिन विद्यालयों में गलत पदस्थापना की बात से किया था इंकार वहीं हुई गलत पदस्थापना
शिक्षक पदोन्नति पदस्थापना मामले में सरगुजा में गलत हो रहा है और कनिष्ठ को मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है और वरिष्ठ को दूरस्थ भेजा जा रहा है जो शासन साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग के पदस्थापना हेतु काउंसलिंग नियम के विपरीत है ऐसी शिकायत जब कुछ शिक्षक करने पहुंचे तब संयुक्त संचालक ने शिक्षकों की शिकायत को यह कहकर खारिज कर दिया की वह गलत बोल रहें हैं और वह साबित नहीं कर सकते जबकि संशोधन के नाम पर उन्हीं स्कूलों में उन कनिष्ठ शिक्षकों को पोस्टिंग मिली जिनकी शिकायत वरिष्ठ शिक्षकों ने की थी। शिक्षकों की संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा से मुलाकात और शिकायत के दौरान किसी ने पूरे वार्तालाप का विडियो भी बनाया था जिसमे संयुक्त संचालक शिक्षा स्वयं कुछ विद्यालयों का नाम लेकर यह कह रहें हैं की जिनकी पदस्थापना की बात शिक्षक शिकायत में कर रहें हैं यदि उनकी पदस्थापना उन्हीं स्कूलों में हुई जो शिकायत में बताई जा रही है तब शिकायत सही मानी जायेगी,वहीं संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा ने संशोधन के नाम पर उन्हीं स्कूलों में पोस्टिंग उन कनिष्ठ शिक्षकों की जिन्हे लेकर वरिष्ठ शिक्षकों ने लेनदेन कर पोस्टिंग की शिकायत की थी।
बिना आदेश वाट्सएप गु्रप में जारी बधाई संदेश हुआ था वायरल,बिना काउंसलिंग में उपस्थित हुए ही शिक्षकों ने डाली थी अपनी मनचाही पोस्टिंग की जानकारी
पूरा मामला तब सामने आया था जब कुछ कनिष्ठ शिक्षक जो तय दिवस जिस दिवस उनकी पोस्टिंग काउंसलिग थी वह काउंसलिंग कक्ष में उपस्थित ही नहीं थे और उनकी पोस्टिंग उन्हे मनचाही और घर के आसपास मिल गई है यह जानकारी उन्ही शिक्षकों द्वारा बिना आदेश जारी हुए वॉट्सएप समूह में डाली गई थी और जिसमे बधाई का सिलसिला जारी था,यह बधाई वरिष्ठ शिक्षकों ने भी देखा और तब उन्हे यह अंदाजा हुआ की जो शिक्षक काउंसलिंग में ही नहीं आए और जो कनिष्ठ भी हैं उन्हें कैसे वह विद्यालय पदस्थापना के लिए मिल गए जबकि वह वरिष्ठ होने के नाते उन्हें पहले दिखाए जाने थे और उन्हें नहीं दिखाए गए। यहीं से पूरा मामला उजागर हुआ था।
भ्रष्टाचार के लिए पहले अलग-अलग जिलों में दी गई कनिष्ठ शिक्षकों को पोस्टिंग,फिर आपसी सहमति बताकर खेला गया भ्रष्टाचार का खेल
संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा द्वारा भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल को अमली जामा पहनाने सबसे पहले कनिष्ठ शिक्षकों को साथ ही ऐसे रिक्त पदों के विद्यालयों में पोस्टिंग के लिए जो वरिष्ठ शिक्षकों को मिल सकते थे एक दूसरे जिले में ऐसे शिक्षकों को पोस्टिंग दी गई जिनसे पैसे लिए गए थे और उन्हें आश्वस्त किया गया की उनका संशोधन हो जाएगा। बाद में आपसी सहमति बताकर उन शिक्षकों को मनचाही पोस्टिंग दे दी गई जिनसे पैसा लिया गया था।कुल मिलाकर भ्रष्टाचार का पूरा खेल कई चरणों में पूरा किया गया।
जिनसे लिया पैसा उन्हे कार्यभार ग्रहण करने के समय सीमा में दी गई छूट,जिन्होंने नहीं दिया पैसा उन्हे समय सीमा में कार्यभार ग्रहण करने जारी हुआ था आदेश
भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल को पूरी तरह सफल बनाने संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा द्वारा उन शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण करने की समय सीमा में पूरा छूट दिया गया जिनसे भी पैसा लिया गया था,पैसा देने वालों को हिदायत थी की उनका संशोधन होना तय है और वह एक संशोधन आवेदन देकर निश्चिंत रहें बाद में उनका संशोधन कर भी दिया गया। जिन्होंने पैसा नहीं दिया था उन्हे समय सीमा में बांधा गया और जल्द से जल्द कार्यभार ग्रहण करने उन पर दबाव बनाया गया। कुल मिलाकर संशोधन की कई शिक्षकों की मंशा पर इसलिए पानी फिर गया क्योंकि उन्होंने पैसा नहीं दिया।
मेडिकल सर्टिफिकेट मामले में भी हुआ भ्रष्टाचार,अयोग्य ने भी लिया अस्वस्थ होने का पोस्टिंग में लाभ
मेडिकल सर्टिफिकेट मामले में भी भ्रष्टाचार हुआ,जिन लोगों को शारीरिक कोई समस्या नहीं है उन्हे भी अस्वस्थ बताकर लाभ दिया गया पोस्टिंग में जिसकी जांच होने पर खुलासा होने की संभावना है। शासन स्कूल शिक्षा विभाग ने कुछ मामलो में शारीरिक अस्वस्थता को आधार बनाकर शिक्षकों को पोस्टिंग में लाभ देने का आदेश जारी किया था जिसमे भी संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा ने लेनदेन कर उन्हे लाभ प्रदान किया जो स्वस्थ हैं और जिन्हे कोई शारीरिक समस्या नहीं है।मेडिकल रिपोर्ट से जिसका खुलासा संभव है।
एक एक पोस्टिंग के लिए लिए गए डेढ़ से दो लाख रुपए
सरगुजा में संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय द्वारा मनचाही पोस्टिंग के लिए एक एक शिक्षक से डेढ़ से दो लाख रुपए लिए गए। इस तरह यह प्रदेश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है। सैकड़ों की संख्या में संशोधन हुआ जहां पैसा लेकर वहीं फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर भी करोड़ों वसूले गए जिसकी जांच अब होने जा रही है।
ओपन काउंसलिंग नियम की संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा ने उड़ाई धज्जियां,शासन के नियम को बताया धता
सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा ने स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ के ओपन काउंसलिंग नियम को ही धता बता दिया,जो काउंसलिंग में नियम था की वरिष्ठता सूची के अनुसार रिक्त पद पहले वरिष्ठ को दिखाए जायेंगे और बाद में क्रमश कनिष्ठ को उस नियम का संयुक्त संचालक शिक्षा ने पालन ही नहीं किया और जिन शिक्षकों ने पैसे पोस्टिंग के लिए दिए उनके लिए पहले से ही पद आरक्षित कर दिए वहीं उन पदों को काउंसलिंग के दौरान हाइड किया गया जिससे वरिष्ठ शिक्षक उन पदों की जानकारी ही प्राप्त न कर सकें और भ्रष्टाचार का खेल खेला जा सके।। जांच होने पर बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा निश्चित है बात केवल निष्पक्ष जांच की है जो शासन की मंशा के खिलाफ की गई कार्यवाही की भी जांच है जिससे शासन की छवि धूमिल हुई है।


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