- बूथ स्तर के प्रशिक्षण में नहीं पहुंच पाए पदाधिकारी व बूथ के सच्चे सिपाही…प्रशिक्षण देने वाले भी हुए शर्मिंदा…कहा ऐसा विधानसभा कहीं नहीं देखा
- बैकुंठपुर विधानसभा में 228 बूथ पर कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में पहले सेशन में 35 दूसरे सेशन में सिर्फ 15 ही पहुंचे प्रशिक्षण लेने
- प्रशिक्षण शिविर में पहुंचने से विधायक ने लोगों को रोकाःसूत्र
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर, 09 जुलाई 2023 (घटती-घटना)। आगामी विधानसभा चुनाव में कुछ महीने ही बचे हुए हैं जिसे लेकर कांग्रेस हर जिले में और प्रत्येक विधानसभा में प्रशिक्षण शिविर आयोजन कर रही है, जिससे सरकार की योजनाएं लोगों तक पहुंच सके और बूथ मजबूत हो सके और चुनाव में पार्टी को फायदा मिल सके, लेकिन कोरिया जिले के बैकुंठपुर विधानसभा में जो हुआ वह प्रशिक्षण देने वाले लोग भी नहीं सोचकर आए थे,उन्हें भी यह कहना पड़ गया कि इस विधानसभा जैसा विधानसभा हमने कहीं नहीं देखा, 6 जुलाई को बैकुंठपुर के राजीव भवन में कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था, पर इस प्रशिक्षण शिविर में जहां कोरिया जिले में सेक्टर प्रभारी से लेकर ब्लॉक अध्यक्ष व बूथ स्तर के सिपाहियों को पहुंचना था पर पदाधिकारी भी पूरे नहीं पहुंचे और ना ही बूथ स्तर के सच्चे सिपाही पहुंचे कुर्सियां रह गई खाली, पहले सेशन में 35 लोग तो दूसरे सेशन में सिर्फ 15 लोग ही लिए प्रशिक्षण, अब ऐसे में सवाल यह उत्पन्न होता है क्या इतने लोगों के प्रशिक्षण लेने से कोरिया जिले के बैकुंठपुर विधानसभा में कांग्रेस जीत दर्ज कर पाएगी? जहां प्रशिक्षण में बूथ स्तर से भी एक एक आदमी को जोड़ा जाता तो 228 कांग्रेसी प्रशिक्षण में शामिल हो सकते थे, पर ऐसा हुआ नहीं, क्योंकि कोरिया जिले के बैकुंठपुर विधानसभा में 228 बूथ है जिसे मजबूत करना कांग्रेस के लिए अत्यंत जरूरी है जिसके लिए वह प्रशिक्षण भी करा रहे हैं पर कांग्रेसियों में प्रशिक्षण लेने की दिलचस्पी काफी कम दिख रही है यह भी एक बड़ा सवाल है? प्रशिक्षण शिविर हर वार्ड से 1 बुजुर्ग एक महिला एक युवा सेक्टर प्रभारी जोन प्रभारी और ब्लॉक अध्यक्ष 10-10 का कमेटी बनाना है और उन्हे चुनाव में बूथ की जिम्मेदारी देना है, लेकिन बैकुंठपुर विधानसभा में प्रशिक्षण कार्यक्रम में जो कुछ देखने को मिला उसको देखकर लगता नहीं बैकुठपुर में कांग्रेस पार्टी दुबारा वापसी के प्रयास में है। बैकुंठपुर में प्रशिक्षण के दौरान जितने कम लोग उपस्थित हुए, उन्हे देखकर यही साबित हुआ की प्रशिक्षण को औपचारिक रूप से निपटाया गया और किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया स्वयं विधायक ने भी नहीं।
क्या था पार्टी का निर्देश किस-किस को होना था प्रशिक्षण में शामिल?
प्रशिक्षण में पी सी सी मेंबर, जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, जिला जनपद पंचायत एवम नगरीय निकाय के अध्यक्ष उपाध्यक्ष, मंडी समिति के अध्यक्ष, सहकारी समिति के अध्यक्ष की उपस्थिति अनिवार्य की गई थी, वहीं इन सभी की उपस्थिति के लिए क्षेत्रीय विधायक, पूर्व प्रत्याशी, जिला प्रभारी पदाधिकारी सहित ब्लॉक अध्यक्षों को भी निर्देशित किया गया था की आपसी समन्वय स्थापित कर स्थान का चयन कर सभी की उपस्थिति अनिवार्य रूप से कराने की वह कार्यवाही करें। लेकिन बैकुंठपुर विधानसभा प्रशिक्षण में आपसी समन्वय कहीं नजर नहीं आया। जो आए वह प्रशिक्षण प्राप्त किए और जो अपेक्षित थे और नहीं आए उन्हे लाने कोई समन्वय आपसी स्थापित नहीं किया गया और प्रशिक्षण पूरी तरह औपचारिकता बनकर रह गई।
विधायक ने प्रशिक्षण में जाने से कुछ को रोकाःसूत्र
कांग्रेस पार्टी प्रदेश में दोबारा सत्ता वापसी के लिए प्रयासरत है और वह प्रत्येक विधानसभा में इसके लिए कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना चाहती है और बुथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करना चाहती है लेकिन वहीं कुछ विधायक पार्टी के इस प्रयास में पार्टी का ही साथ नहीं दे रहें हैं और अपनी ही धुन में वह अपने अनुसार पार्टी को चलाना चाहते हैं, यह भी खबरें सामने आ रही हैं, ऐसा ही मामला बैकुंठपुर विधानसभा में सामने आया है जहां कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में कार्यकर्ताओं को स्वयं विधायक ने आने से रोका ऐसा सूत्रों का कहना है। बताया जा रहा है की विधायक प्रशिक्षण में उसे ही शामिल होने देना चाहती थीं जो उनके खास समर्थक हैं, और इसी प्रयास में उन्होंने कुछ को प्रशिक्षण में शामिल होने नहीं दिया जो हैं तो पार्टी के कार्यकर्ता लेकिन वह विधायक से दूरी बनाकर चलते हैं।
बैकुंठपुर विधानसभा में कांग्रेस पार्टी में दिख रहा है आपसी सामंजस्य का अभाव
विधानसभा चुनाव अब बिलकुल नजदीक हैं और अब सभी दल चुनावी तैयारी में जुटे हुए हैं वहीं यदि सत्ताधारी दल कांग्रेस पार्टी की बात की जाए तो बैकुंठपुर विधानसभा में पार्टी में आपसी सामंजस्य का आभाव नजर आ रहा है। एक तरफ विधायक अकेले चलो की नीति के साथ आगे बढ़ रही हैं और पार्टी के वरिष्ठ और कर्मठ कार्यकर्ताओं को वह किनारे लगाने की कोशिश में लगी हुई हैं वहीं कुछ अन्य दावेदार टिकट के ऐसे भी हैं जो पार्टी के वरिष्ठ और कर्मठ कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में लगे हुए हैं। कुलमिलाकर आपसी दूरी लगातार नजर आ रही है।
बैकुंठपुर विधानसभा में पार्टी से नहीं विधायक से दुखी हैं कांग्रेस पार्टी के लोग
बैकुंठपुर विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के लोग पार्टी से नहीं बल्कि विधायक से दुखी हैं।लगातार विधायक से पार्टी के ही लोगों की दूरी बढ़ती जा रही है और चुनाव में ऐन वक्त यह पार्टी के लिए भी सही नहीं है और न ही विधायक के लिए लेकिन फिर भी लोग दूर होते चले जा रहें हैं और पार्टी लगातार विधानसभा में कमजोर होती जा रही है और आपसी गुटबाजी में नजर आ रही है। विधायक सभी को अपनी मंशानुरूप चलाने की कोशिश में पार्टी को कमजोर कर रही हैं यह भी कहा जा सकता है।
विधायक अपनी ही पार्टी के लोगों को कर रहीं हैं खुद से दूर, यह व्यवहार उन्हीं के लिए हो सकता है नुकसानदायक
विधायक अपनी ही पार्टी के लोगों को खुद से दूर करती जा रही हैं,विधायक जैसा पार्टी के ही लोगों के द्वारा बताया जाता है पार्टी में खुद की बातें और निर्णय को ही सर्वोपरि रखने की मंशा रखती हैं और किसी भी अन्य को अपने अनुसार कुछ भी निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं देना चाहती हैं और इसीलिए उनकी दूरी अपने ही दल के लोगों से बढ़ती जा रही है वहीं यदि यही व्यवहार विधायक का कायम रहा तो विधायक के लिए उनका यह व्यवहार नुकसानदायक साबित होगा जिसमे कोई संदेह नहीं है।
विधायक कार्यकर्ताओं पर तंज कसने से भी नहीं आतीं बाज,विधायक के साबित होगा नुकसानदायक
विधायक कार्यकर्ताओं पर तंज कसने से भी बाज नहीं आती हैं। किसी भी कार्यकर्ता को कुछ भी तंज कसने की उनकी आदत अब पार्टी के लोगों के लिए अप्रिय जैसा लगने लगा है। विधायक की मंशा रहती है की कार्यकर्ता केवल उनके अनुसार ही पार्टी के लिए काम करें और उनके निर्देश के विपरीत पार्टी हित में भी कोई काम न करें और यह कहीं न कहीं उनके लिए चुनाव में सही साबित नहीं होने जा रहा है।
निज सचिव व अपने प्रतिनिधि के अलावा किसी को नहीं है निर्णय लेने की छूट,लगता है वही दिलाएंगे उन्हें जीत
विधायक अपने निज सचिव और प्रतिनिधि के अलावा किसी को निर्णय लेने की छूट प्रदान नहीं करती हैं और अब कार्यकर्ता भी कहने लगे हैं की वही उन्हें जीत दिलाएंगे। पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी में ही काम करना मुस्किल है और विधायक से भी उनकी व्यक्तिगत मुलाकात बिना निज सचिव की उपस्थिति बगैर नहीं होती और निज सचिव के सामने ही उन्हें अपनी व्यथा रखनी होती है। अब चर्चा यह भी है की विधायक निज सचिव और प्रतिनिधि पर ही केवल भरोसा करती हैं और पार्टी के अन्य लोगों पर वह अविश्वास करती है।ं