बैकुण्ठपुर@क्या कोरिया व एमसीबी के बीच फंसा पोंड़ी बचरा क्षेत्र?

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  • क्या विकासखंड खड़गवां का विभाजन दो जिलों में होना मूर्खतापूर्ण निर्णय तो नहीं है?
  • भारत की भूमि पर छाीसगढ़ के यह दो जिले कोरिया व एमसीबी अपने आप में नायाब है
  • पोंड़ी बचरा क्षेत्र वालों के लिए शैक्षणिक एवं न्यायिक,पुलिस जिला एमसीबी बनाया गया और राजस्व जिला कोरिया कर दिया गया
  • बैकुंठपुर विधानसभा का महत्वपूर्ण क्षेत्र दो जिलों के बीच फंसा दिख रहा है
  • कोरिया के विभाजन में कई अनियमितता पर इस अनियमितता को दूर करने की पहल क्यों नहीं?

रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 16 जून 2023 (घटती-घटना)। नौजवान कोरिया का जब विभाजन हुआ तब से लेकर आज तक विभाजन से लोग संतुष्ट नहीं हो पाए हैं, सिर्फ संतुष्ट कोई हुआ तो मनेंद्रगढ़ चिरमिरी, पर जो संतुष्ट नहीं हुए उसमें कोरिया का सरहदी क्षेत्र पोंड़ी बचरा और एमसीबी जिले के सरहदी क्षेत्र जनकपुर भरतपुर के लोग है जिन्हें बहुत ज्यादा लाभ नहीं है उसमें से पोंड़ी बचरा तो पेंडुलम की तरह हो गया है, कोरिया और एमसीबी दोनों पर उसे आश्रित रहना पड़ेगा, 22 साल वाले छाीसगढ़ में कोरिया जिला ही एक मात्र जिला है जिसके विभाजन मात्र से कई सारी समस्याएं खड़ी हो गई हैं, जबकि छाीसगढ़ राज्य बना उस समय इनके पास 16 जिले थे, उसके बाद भाजपा ने भी कई नए जिले बनाए और कांग्रेस ने भी नए जिले बनाए पर अब जिलों की संख्या 33 हो चुकी है, पर उसमें से कोरिया जिले का टूटना ही और उसका गलत तरीके से विभाजन होना ही बड़े विवाद की स्थिति को खड़ा करता है, यह एक ऐसा जिला है जिसका विभाजन असंतोषजनक रहा है और आगे भी रहेगा बस इस जिले के विभाजन से राजनीतिक फायदा नुकसान ही माना जा सकता है। यदि इस विभाजन की कमियों पर प्रकाश डाला जाए तो कई कमियां आज सामने आपको दिख जाएंगी।

विकासखंड खड़गवां अन्तर्गत तीन तहसील क्रमशः चिरमिरी, खड़गवां और पोंड़ी बचरा बनाया गया और जिला विभाजन में पोंड़ी बचरा तहसील क्षेत्र (विकास खण्ड़ खड़गवां का आधा हिस्सा) के ग्रामों को राजस्व जिला कोरिया में शामिल करने का निर्णय लिया गया और राजस्व के अतिरिक्त शेष कर्यालयीन कार्य एमसीबी जिला से संचालित किया जाने लगा। शैक्षणिक एवं न्यायिक, पुलिस, जिला एम.सी.बी. बनाया गया और राजस्व जिला कोरिया में रखा गया। पोंड़ी बचरा तहसील राजस्व जिला कोरिया में आता हैं। राजस्व मे आने के कारण बचरा पोंड़ी बचरा तहसील क्षेत्र के समस्त भूमि कोरिया जिले की हुई किन्तु उसमे बने समस्त कार्यायलीन भवन या जनता का निवास गृह और व्यापार केन्द्र कैसे एमसीबी के हो सकते हैं? पोंड़ी बचरा के आम जनता की पहचान क्या होगी? चिरमिरी नगर पालिक निगम अन्तर्गत 05 वार्ड जो बैकुण्ठपुर ब्लॉक अंतर्गत है उन पर भी लागु होता है। वहा भी इस पर विचार न कर विभाजन की कार्यवाही की गई, वर्तमान जिला विभाजन विवाद होने के कारण पोंड़ी बचरा तहसील क्षेत्र में विभाजन उपरान्त न कोरिया के न ही एमसीबी के कलेक्टर भ्रमण/निरीक्षण करते हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग अन्तर्गत कुछ दिन पूर्व आंगन बाड़ी केन्द्रों में समाग्री वितरण किया गया। पोंड़ी बचरा अन्तर्गत्त आने वाले क्षेत्रों में वितरण कोरिया से किया गया, जबकी इसे एमसीबी जिल में रखा गया है। अधिकारियों जनप्रतिनिधि अपने हिसाब से इसकी व्याख्या कर रहे हैं। भारत के भूमि का यह दो जिला अपने आप में नायाब है जहा कलेक्टर का क्षेत्राधिकार और उनके मातहत अधिकारियों का क्षेत्राधिकार अलग अलग है। पुलिस अधीक्षक के क्षेत्र का निर्धारण और कलेक्टर के क्षेत्र का निर्धारण् अलग अलग कैसे किया जा सकता है? कलेक्टर के अधीनस्थ समस्त विभाग जिसका कार्यलय पोंड़ी बचरा में आता है उस पर कलेक्टर का अधिकार नही हे किन्तु मातहत अधिकारी का होगा। आगामि विधासभा निर्वाचन में पोंड़ी बचरा के स्कूल में होने वाले मतदान केन्द्र किसके अधीन होगे। अगर एमसीबी शैक्षणिक जिला है तो कोरिया कैसे शासित करेगा और कोरिया राजस्व जिला है जिसके भूमि पर वह भवन बना है तो एमसीबी उस पर कैसे शासित करेगा। तहसील पोंड़ी बचरा वालो की अपनी पहचान क्या होगी। राजस्व क्षेत्र (तहसील)पोंड़ी बचरा तो हमारा जनपद क्षेत्र क्या होगा। जनपद/ग्राम पंचायत के मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की भूमिका महत्वर्पूण होता है। अगर जनपद पंचायत खड़गवां एमसीबी मे तो अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैकुण्ठपुर जिला कोरिया का पोंड़ी बचरा मे भुमिका क्या होगी।
विकास खण्ड़ खड़गवां का विभाजन दो जिले में होना मुर्खतापूर्ण निर्णय तो नही?
कोरिया जिले के विभाजन में खड़गवां विकासखंड को दो भागों में बांटा गया है फिलहाल। यह निर्णय मूर्खतापूर्ण नजर आता है। कुछ मामलों में यह विकासखंड कोरिया जिले पर आश्रित होगा कुछ मामले में नवीन जिले एमसीबी पर। कुल मिलाकर यह पूरी तरह किस जिले में शामिल होगा यह अभी तय नहीं है। वैसे पोंड़ी बचरा के लोग जो खड़गवां विकासखंड में आता है कोरिया जिले में ही रहना चाहते हैं क्योंकि दूरी के हिसाब से और सुविधा के हिसाब से उनके लिए कोरिया जिला ही उपयुक्त है।
जिला विभाजन क्या विधानसभा चुनावों में मुद्दा बनेगा?
कोरिया जिले का विभाजन किया गया और जिले के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया गया जिले से अलग होकर बने नवीन जिले को कोरिया जिले से ज्यादा कुछ दिया गया यहां तक ही जो मेडिकल कॉलेज कोरिया जिले के लिए स्वीकृत होना था उसे भी नवीन जिले के खाते में डाल दिया गया। कोरिया जिले के साथ बिल्कुल ही अन्याय किया गया यहां तक की विभाजन में कोरिया जिले को जो क्षेत्र मिले भी वह भी आने वाले समय में किस जिले में शामिल होंगे यह बड़ा सवाल है जिसमे पोंडी बचरा क्षेत्र उदाहरण है। कोरिया जिले में जीएसटी सेल्टेक्स के कार्यालय भी शायद ही स्थापित हों यह भी सुनने को मिल रहा है ऐसे में क्या इस तरह का त्रुटिपूर्ण जिला विभाजन विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनेगा यह बड़ा सवाल है। विधानसभा चुनाव में कोरिया जिला जिसमे एक ही विधानसभा है के लोग किसे अपना जनप्रतिनिधि चुनेंगे क्या वह विभाजन का कारण मानकर सत्ताधारी दल का समर्थन नहीं करेंगे यह देखने वाली बात होगी।
किस दल को मिलेगा जिला विभाजन का लाभ किसे हो सकता है नुकसान
कोरिया जिले का विभाजन पूरी तरह असंतुलित विभाजन रहा,प्रदेश में यह ऐसा विभाजन रहा जिसको लेकर आज भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और सबकुछ आश्वासन पर ही टिका हुआ है। अब विधानसभा चुनाव समाने हैं और उस समय देखने को मिलेगा की किस दल को जिले की जनता अपना समर्थन देती है। जिला विभाजन का असंतुलित आधार तैयार करने वाले दल के प्रतिनिधि को समर्थन मिलता है यह अन्य किसी को यह चुनाव परिणाम के बाद ही सामने आ सकेगा।
पुलिस चौकी पोंड़ी बचरा लेकिन थाना खड़गवां
विशेष संयोग कहें या फिर ऊपर बैठे नेताओं और प्रशासन की लापरवाही लोगों को मुसीबत में डाल कर खुद राजनीतिक रोटी सेक रहे हैं सभी को मालूम है कि जो राजस्व जिला होता है वही पुलिस जिला भी होता है पर यहां तो उल्टी ही गंगा बह रही है, पुलिस चौकी पोंड़ी बचरा पुलिस थाना खड़गवां एस.पी. एमसीबी, तो कलेक्टर कौन होगा जिसे भूमि विवाद से संबंधित मामले बताया जावे।
बंटवारे के बाद स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य सुविधा में भी समस्या हैं
पोंड़ी बचरा से 30 कि. बैकुण्ठपुर जबकी मनेन्द्रगढ़ 70 कि. बिमारी के मामले में तहसील वाले रेफर होने पर कहा जायेगे, एम.सी.बी. या कोरिया, जिला चिकित्सालय कौन होगा।


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