- आज अधिकारियों की पैरवी और उनका तबादला रुकवाने जनप्रतिनिधि नजर आ रहे हैं सक्रिय
- जिन अधिकारियों से जनता है त्रस्त उन्हीं का तबादला आखिर क्यों रुकवाना चाहते हैं जनप्रतिनिधि
–रवि सिंह-
कोरिया 31 मई 2023 (घटती-घटना)। निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता के चुने हुए होते हैं ताकि जनता का प्रतिनिधित्व कर सकें और जनता को मिलने वाली सुविधा और जनता के लिए बैठे प्रशासनिक तंत्र उनके लिए अच्छे से काम करें, इसलिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का होना हमारे लोकतंत्र की परंपरा है पर इस लोकतंत्र की परंपरा पर एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा होता जा रहा है और वह सवाल यह है कि जहां पर जनप्रतिनिधियों को जनता कि व जनता के हितों की बात करनी चाहिए वहां पर वह प्रशासनिक तंत्र पर बैठे लोगों की पैरवी करते नजर आते हैं, अब इस पैरवी की वजह क्या है यह हमें बताने की जरूरत नहीं है पर इनकी पैरवी की वजह से इन्हें चुनने वाली जनता ही परेशान हो जाती है अब ऐसे में सवाल यह उत्पन्न होता है कि इन्हें प्रशासनिक तंत्र पर बैठे लोग चुनकर वापस कुर्सी पर लायेंगे या फिर लोकतंत्र के अनुसार जो जनता है वह इन्हें चुनकर लाएगी पर चुनने के बाद जनता ठगा हुआ महसूस करती है पर इससे जनप्रतिनिधियों को फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उन्हें तो जनता से सिर्फ वोट मिल सकते हैं पर प्रशासनिक तंत्रों पर बैठे जिम्मेदारों से उन्हें नोट मिलते हैं, क्या यही वजह है कि उनकी पैरवी में निर्वाचित जनप्रतिनिधि ज्यादा मशगूल रहते हैं? अंतिम के 4 महीने में जनता को बेवकूफ बनाने के लिए फिर से लुभावने वादे व जनता का हितैसी बताते हुए जनता के पास उतनी ही बेशर्मी से फिर पहुंच जाते हैं कि उन्हें फिर से चुनकर दुबारा मौका दे दिया जाए। इस समय यह कोरिया जिले के लिए चलन का विषय बन चुका है पर ऐसे दौर में दो नेताओं का नाम इस समय लोगों की जुबां पर लिया जा रहा है वह नेता है पूर्व वित्त मंत्री स्व. डॉक्टर रामचंद्र सिंह सिंहदेव व पूर्व कैबिनेट मंत्री भईयालाल राजवाड़े इनके लिए लोगों का कहना है कि यह तो ऐसे नेता थे जिन्होंने सिर्फ लोगों के लिए काम किया और प्रशासनिक तरफदारी इनकी जिम्मेदारी नहीं थी, इनकी जिम्मेदारी खुद को चुनने वालों लोगों के प्रति काम कराने की हुआ करती थी यही वजह थी कि इन दोनों नेता में एक चीज सामान्य थी और वह था अपने जनता को महत्व देना ना कि प्रशासनिक तंत्रों में बैठे लोगों की पैरवी करना, यही इनके अंदर की खूबियां हैं जो इन्हें लोकप्रिय बनाती है और आज यही वजह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर आज के जनप्रतिनिधियों की तुलना में यह दोनों बेहतर माने जाते हैं।
अधिकारियों कर्मचारियों की पैरवी ज्यादा नजर आई वर्तमान सरकार के कार्यकाल में
अविभजित कोरिया के विधानसभा में यदि वर्तमान सरकार के कार्यकाल की बात की जाए तो अधिकारियों और कर्मचारियों की पैरवी ज्यादा नजर आई,जनप्रतिनिधि जनता का हित त्याग कर अधिकारियों कर्मचारियों के हितों का ज्यादा ध्यान देते नजर आए और यह देखा गया की अधिकारियों की मनमानी चाहे जितनी भी अधिक रही हो जनता जितना भी परेशान रही हो अधिकारियों के प्रति जनप्रतिनिधियों का रुख जनता के विपरीत रहा और उन्हे बचाने जनप्रतिनिधि सक्रिय नजर आए।
पूर्व वित्त मंत्री स्व.डॉ रामचंद्र सिंहदेव पूर्व कैबिनेट मंत्री भईयालाल राजवाड़े के लिए रहे आदर्श
पूर्व कैबिनेट मंत्री भईयालाल राजवाड़े पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय डॉक्टर रामचंद्र सिंहदेव को अपना राजनीतिक आदर्श मानते हैं उन्होंने कहा कि शुरू से मैं उन्हीं की राजनीति से प्रेरित रहा और उन्हीं को देखकर ही आज तक इस मुकाम पर पहुंचा हूं, बीच-बीच में उनसे मुझे काफी मार्गदर्शन भी मिले और काफी कुछ सीखने को मिला, उनके जैसा नेता शायद मैं बन नहीं सका पर बनने का प्रयास जरूर किया, उनकी ईमानदारी इस क्षेत्र के लिए हमेशा ही सर्वोपरि रही है उनकी जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है, वह इस जिले या इस विधानसभा के ही नहीं पूरे प्रदेश व देश में एक अच्छे नेता में शुमार थे, जिन से मैं अपनी बराबरी तो नहीं कर सकता और ना कभी मैं उनकी बराबरी करूंगा हां यह बात सही है की अपने राजनीतिक सफर में उनके किए गए कामों पर हमेशा ही चर्चा करता हूं और प्रयास करता हूं कि उनकी तरह ही जनता की सेवा करता रहूं जैसा वह किया करते थे।
मनमानी करने वाले अधिकारियों का तबादला रोकने जनप्रतिनिधियों ने लगाया एड़ी चोटी का जोर
जिले में यह भी देखा गया की जनता जिन अधिकारियों से लगातार त्रस्त रही जिनसे लोग परेशान रहे उनका तबादला रुकवाने जनप्रतिनिधि एड़ी चोटी का जोर लगाते नजर आए, एक तहसीलदार, एक जनपद सीईओ, थान प्रभारी और एक मुख्य नगर पालिका अधिकारी जिनसे जनता बराबर परेशान हुई और जिनको लेकर कई बार शिकायत भी सामने आई उनके तबादले को रुकवाने जनप्रतिनिधि जिस कदर अपनी पूरी ताकत लगाते नजर आए उससे साबित हुआ की वह जनता के लिए चुनकर आने की बजाए उन अधिकारियों के लिए चुनकर आए हैं जिन्हे वह बचाना चाह रहे हैं।
स्व डॉक्टर रामचंद्र सिंहदेव और पूर्व मंत्री भईयालाल राजवाड़े जनसरोकारों से वास्ता रखने वाले जनप्रतिनिधि साबित हुए
कोरिया जिले की राजनीति में यदि जनसरोकारो से जुड़े जनप्रतिनिधियों की बात की जाए तो स्व डॉक्टर रामचंद्र सिंहदेव और पूर्व मंत्री भईयालाल राजवाड़े का नाम सभी के जुबान पर जरूर आ जाता है। यह दोनो ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए जिन्होंने जनसरोकार को पहले महत्व दिया बाद में इन्होंने अन्य किसी को महत्व दिया। अपने पास पहुंचे फरियादियों से यह दोनों यदि किसी की शिकायत सुन भर पाते थे यह बिना किसी परवाह शिकायत जिसकी होती थी उसको फटकार लगाते थे और जरूरी होने पर ऐसे लोगों का तबादला भी कराते थे यह जनता से ऊपर किसी को नहीं मानते थे यही दोनो की खासियत थी।
आज का समय व्यवस्था में बैठे उच्च पदस्थ लोगों का समय
वर्तमान में यदि राजनीति की बात की जाए तो यह बात समाने आयेगी की आज व्यवस्था में बैठे ऊंचे पदों पर आसीन लोगों का समय है और जनप्रतिनिधि भी केवल उन्हीं की सुनते हैं। आम जनता से जनसरोकार से जनप्रतिनिधियों का कोई वास्ता नहीं है और लाभ प्रदान करने वाले ही उनके लिए खास हैं यह लगातार देखा जा रहा है। अधिकारी कर्मचारी कितनी भी मनमानी क्यों न कर लें उन्हे रोकने टोकने में जनप्रतिनिधियों का कोई रुचि नहीं है और एक तरह से नौकरशाही हावी है।
चुनाव नजदीक आते ही जनसरोकार की याद आने लगी,लोगों की समस्या नजर आने लगी
अब जब चुनाव नजदीक आ चुका है तो अब जनता की याद आने लगी है और जनसरोकार भी याद आने लगा है। पूरे कार्यकाल में अधिकारियों के साथ जुगलबंदी कर चलने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता के बीच जा रहें हैं और उनकी समस्याएं जान रहें हैं। समस्याएं हल हों या न हों लेकिन उन्हें आश्वासन मिल रहा है और जनता भी अब तुलना कर रही है की कौन बेहतर होगा आने वाले समय के लिए। हमेशा जनसरोकार के साथ जुड़कर चलने वाला या चुनाव के समय करीब आने वाला। वैसे आजकल भोज की भी परंपरा बनाई जा रही है और जनता पर नमक का कर्ज चढ़ाया जा रहा है जिससे जनता चाहकर भी नमक का कर्ज न चुकाने की जुर्रत न करे और इसी तरह वह कर्ज तले दबे रहे।